18/03/2025
Waqf Amendment Bill | वक्फ तरमीमी बिल पर मौलाना अबु तालिब रहमानी ने मोदी हुकूमत पर सख्त तन्क़ीद की
वक्फ बोर्ड तरमीमी बिल के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के नुमाइंदों ने मुल्क भर से आकर जंतर-मंतर पर पुरज़ोर एहतिजाज किया। मुज़ाहिरीन ने इस बिल को मुसलमानों की मज़हबी आज़ादी में हुकूमत की खुली मुदाख़िलत करार दिया। मुस्लिम क़ियादत का कहना है कि यह सिर्फ़ एक क़ानूनी तब्दीली नहीं बल्कि एक बड़ी साज़िश का हिस्सा है, जिसके ज़रिए मुसलमानों की मज़हबी और समाजी बुनियादों को कमज़ोर करने की कोशिश की जा रही है।
एहतिजाज करने वालों ने मुतालबा किया कि हुकूमत इस ज़ालिमाना बिल को फ़ौरन वापस ले, वरना पूरे मुल्क में CAA-NRC जैसा इंतिहाई एहतिजाज होगा। तो क्या शाहीन बाग़ जैसे मुज़ाहिरे फिर से देखने को मिलेंगे? मुज़ाहिरीन के तेवर साफ़ तौर पर इसी तरफ़ इशारा कर रहे हैं।
भाजपा का कहना है कि यह पार्लियामेंट की क़ानून साज़ी की दस्तूरी सलाहीयत को तादादी ताक़त के बुनियाद पर दी जा रही चुनौती है, जिसे किसी भी क़ीमत पर क़बूल नहीं किया जाएगा। मगर सवाल यह उठता है कि आख़िर हुकूमत बार-बार सिर्फ़ मुसलमानों के मज़हबी और समाजी मामलों में मुदाख़िलत क्यों कर रही है? क्या हुकूमत का यही असल एजेंडा है कि मुसलमानों के ख़िलाफ़ हर मुद्दे को क़ानूनी शक्ल देकर उनकी पहचान और हुक़ूक़ को कुचल दिया जाए?
मुज़ाहिरीन मोहम्मद इस्लाम ने कहा कि भाजपा की सरपरस्ती वाली हुकूमत मुसलमानों के हर मसले में मुदाख़िलत करने की कोशिश कर रही है। कभी तीन तलाक़ के बहाने, कभी निकाह की रस्मों पर, कभी मदरसों के क़वानीन पर, और अब वक्फ की जाइदादों पर ग़ैरक़ानूनी कंट्रोल हासिल करने की कोशिश की जा रही है। मगर अब इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पूरे मुल्क में इसका पुरज़ोर एहतिजाज होगा।
सलमान आलम ने कहा कि केंद्र हुकूमत अपने हर ज़ालिमाना क़दम को जदीदियत और तरक़्क़ी के साथ जोड़ने की नाकाम कोशिश करती है। तीन तलाक़, मदरसे और वक्फ के मौज़ू को भी जदीदियत का नाम देकर मुसलमानों के मज़हबी हुक़ूक़ पर हमला किया गया। मगर हुकूमत को समझना चाहिए कि मज़हबी उमूर को सियासी फायदे के लिए तब्दील नहीं किया जा सकता। यह हमारे मज़हबी जज़्बात से खेलने के बराबर है और इसे हरगिज़ क़बूल नहीं किया जाएगा।
वक्फ के मामले पर एक और अहम पहलू यह है कि हुकूमत के कई लोग वक्फ की जाइदादों पर कब्ज़ा करने के लिए इस क़ानून का सहारा ले रहे हैं। हाल ही में प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान एक मौलाना ने यह कहकर नया तनाज़ा खड़ा कर दिया था कि महाकुंभ जिस सरज़मीन पर हो रहा है, वह वक्फ की मिल्कियत है। इसी तरह जुनूबी हिंदुस्तान के कई पुराने गाँवों को अचानक वक्फ बोर्ड की मिल्कियत क़रार देने से संगीन तनाज़ा पैदा हुआ था। मगर सवाल यह भी उठता है कि क्या हुकूमत वाक़ई वक्फ की हिफ़ाज़त चाहती है, या फिर इसे अपने एजेंडे के लिए इस्तेमाल करके मुसलमानों को और कमजोर करने का मंसूबा बना रही है?