19/05/2026
बूढ़े पिता का फोन
एक लड़का शहर में बड़ी नौकरी करता था।
उसके बूढ़े पिता गाँव में अकेले रहते थे।
पिता रोज़ शाम को बेटे को फोन करते।
“बेटा, खाना खा लिया?”
“हाँ, पापा।”
“ख़याल रखना।”
बस इतनी ही बात होती।
धीरे-धीरे बेटा परेशान होने लगा।
उसे लगा कि पापा बिना वजह रोज़ फोन करते हैं।
एक दिन उसने झुंझलाकर कहा,
“पापा, मैं बहुत व्यस्त रहता हूँ। रोज़-रोज़ फोन मत किया करो।”
उस दिन पिता ने सिर्फ इतना कहा,
“ठीक है बेटा।”
उसके बाद फोन आना बंद हो गया।
कुछ दिनों बाद बेटे को अचानक पिता की याद आई।
उसने गाँव फोन किया।
पड़ोसी ने बताया,
“बेटा, तुम्हारे पिताजी तीन दिन पहले गुजर गए।”
बेटे के हाथ काँपने लगे।
पड़ोसी ने आगे कहा,
“जाने से पहले उन्होंने कहा था—
‘अब मैं रोज़ फोन नहीं कर पाऊँगा… कहीं मेरा बेटा परेशान न हो।’”
यह सुनकर बेटा फूट-फूट कर रो पड़ा।
उस दिन उसे समझ आया—
कुछ लोग हमें परेशान नहीं करते,
वे सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि हम ठीक हैं। ❤️