Dhirendra

Dhirendra शब्द किसी के भी जीवन में बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं और सकारात्मक शब्द हमेशा मार्गदर्शन करते हैं। https://www.instagram.com/dhirvision/

01/04/2026

कभी देखा है शेर को शिकार करते
कभी महसूस की है तूफान से पहले कि शांति
एक ही चीज सामान है इन दोनों बातों में
"धैर्य"
अगर आप में धैर्य है तो आप से खतरनाक कोई नहीं, क्योंकि आप कुछ भी पा सकते हो अपने सामर्थ्य और धैर्य से ।

जीवन में धैर्य रखें और अपने लक्ष्य के लिए काम करते रहें, स्थिति आपके पक्ष में हो या नहीं।

(धीरेन्द्र सिंह)

21/03/2026

सपने - Dream
लक्ष्य - Goel

जब आपको इन दो शब्दों की clearity हो जाएगी तब आपकी जिंदगी अपने आप पूर्ण हो जाएगी ।

अपने आप से सवाल करो, जो काम आप कर रहे हो, क्यों कर रहे हो? क्या आपने अपना लक्ष्य पा लिया है? अगर हां तो अब आगे क्या और अगर नहीं, तो उसको पाने के लिए आप कुछ कर भी रहे हो या नहीं ।

अपने सपने और वास्तविकता का आकलन जरूर करें ।
इस जिंदगी में कुछ भी नामुमकिन नहीं, आप सब पा सकते हो, बस आपको सही समय में, सही जगह होने की जरूरत है और एक चीज और चाहिए - बच्चे जैसी ज़िद।

(धीरेन्द्र सिंह)

15/03/2026

रातों में जागो दिन में देर तक सो
बदलते वक्त की तस्वीर है
आज के जमाने में
इंसान बनने में नहीं
उल्लू बनने में वहा वहायि है
मानता हूं यह दौर दौड़ का है
दौड़ में डर पीछे छूटने का है
अगर दौड़ सच्ची है
तो मंजिल भी आपकी है
नहीं तो इंसान रूप हम उल्लू ही हैं।

(धीरेन्द्र सिंह)

04/03/2026

अगर मैं तुम्हारे ज़हन में हूं
तो हमेशा मुझको याद मेरी कोशिश और मेहनत के लिए करना
सफलता या असफलता का मज़ा मंजिल का नहीं
उसकी यात्रा का होता है ।

(धीरेन्द्र सिंह)

28/02/2026

जीने की चाहत में जिंदगी की उठापटक में
उलझे इस कदर जिंदगी की पशोपेश में, कि मशगूल हो गए ।

सोचने वाले सोचते हैं कि हम मशहूर हो गए
अभिमान में भर कर सबसे दूर हो गए ।

किसका जोर चलता है सोचने में
सोचते हो अगर मेरे बारे में यही भी मेरी ही सफलता है ।

मैं तो अभिनेता हूं अपनी कहानी का
इस किरदार को और खूबसूरत बनाने में लगा हूं।

उलझे इस कदर जिंदगी की पशोपेश में, कि मशगूल हो गए ।

(धीरेन्द्र सिंह)

14/02/2026

हम खुद से ज्यादा जमाने के परवाह करते हैं और जमाना हमें जानता भी नहीं है । हम चाहते हैं होश में होना पर चाहते ही नहीं हैं । जागने की कोशिश करते हैं तो जमाने के असली चेहरे से डर जाते हैं । लोग सोचते हैं कितना सीधा है अपना भला ही नहीं जानता और हम समझ कर भी उनकी मक्कारी को ढाक लेते हैं ।

यह तो फितरत है साहब, कब बदली है
और जो बदल जाए तो फिर शख्सियत ही क्या है ।

(धीरेन्द्र सिंह)

01/02/2026

हर बात से ही नई बात बन जाती है
बनाने में आओ तो हर बात बन जाती है
न भी बने तो भी बात से बात बन जाती है ।

जो बात करी तो बात की बात हो गई
न कर के भी बात की बात रहे गई
बातों में उलझे कुछ ऐसे की बात से बात बन गई ।

(धीरेन्द्र सिंह)

जिंदगी में बात करते रहिए, नए किस्से कहानी बनाते रहिए ।

27/01/2026

Well Said......

जब ज़िंदगी stable होती है लेकिन मन बेचैन रहता है — स्थिरता, जुनून और अधूरे सपने |  #हिंदीलेखन  #हिंदीब्लॉग #जीवनविचार #ज...
13/12/2025

जब ज़िंदगी stable होती है लेकिन मन बेचैन रहता है — स्थिरता, जुनून और अधूरे सपने |

#हिंदीलेखन
#हिंदीब्लॉग
#जीवनविचार
#जुनून
#संघर्ष







Stability vs Passion Career Confusion Life Transition Midlife Questions Dreams vs Responsibilities Emotional Burnout Inner Conflict Self Reflection

एकांत वो जगह है जहाँ हम दुनिया से नहीं, खुद से मिलते हैं। #अकेलापन #तन्हाई
06/12/2025

एकांत वो जगह है जहाँ हम दुनिया से नहीं, खुद से मिलते हैं।

#अकेलापन
#तन्हाई








अकेलापन और तन्हाई में क्या फर्क है? क्या अकेले रहना सही है या हानिकारक? इस लेख में जानें solitude के फायदे और loneliness का खतरा।

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