17/05/2026
मई 2026 में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग ₹3 प्रति लीटर (और CNG में ₹2 प्रति किलोग्राम) की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक (Global) और आर्थिक कारण हैं।
1. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) का महंगा होना
भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता (इंपोर्ट करता) है। पश्चिम एशिया (West Asia / Middle East) में चल रहे युद्ध और तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। जो कच्चा तेल पहले कम कीमत पर मिल रहा था, वह अब $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। जब बाहर से तेल महंगा आएगा, तो देश में भी पेट्रोल के दाम बढ़ेंगे।
2. तेल सप्लाई के रास्तों में रुकावट
युद्ध की वजह से समुद्र के उन रास्तों में रुकावट आई है जहां से तेल के बड़े-बड़े जहाज गुजरते हैं (जैसे 'स्ट्रेट ऑफ हारमुज')। इस रास्ते से दुनिया का एक बड़ा तेल व्यापार होता है। रास्ता प्रभावित होने से तेल की सप्लाई में कमी आई है और जब किसी चीज की सप्लाई घटती है और मांग उतनी ही रहती है, तो उसकी कीमत बढ़ जाती है।
3. तेल कंपनियों का बढ़ता हुआ नुकसान
भारत की सरकारी तेल कंपनियां (जैसे IOCL, BPCL, HPCL) पिछले कई महीनों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने के बावजूद देश में कीमतें नहीं बढ़ा रही थीं। वे खुद नुकसान उठा रही थीं ताकि आम जनता पर सीधा असर न पड़े। लेकिन लगातार बढ़ते कच्चे तेल के दामों की वजह से इन कंपनियों को रोजाना भारी नुकसान हो रहा था। जब कंपनियों के लिए इस घाटे को और झेलना नामुमकिन हो गया, तब उन्होंने इस बढ़े हुए बोझ का कुछ हिस्सा कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में जनता पर डाला है।
4. डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की स्थिति
चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का लेनदेन अमेरिकी डॉलर ($) में होता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत भी असर डालती है। इस समय डॉलर मजबूत होने और भारतीय रुपये पर दबाव होने के कारण भारत का 'इंपोर्ट बिल' (बाहर से सामान खरीदने का खर्च) बढ़ गया है, जिससे तेल मंगाना और महंगा हो गया है।
संक्षेप में कहें तो: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध के कारण कच्चे तेल का महंगा होना और सप्लाई का रुकना ही इस समय पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की असली और सबसे बड़ी वजह है।