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29/03/2026

भूलना कोई दोष नहीं,
ये यादों की छंटनी है,
मन के पुराने बक्से से,
फालतू यादें हटनी हैं।
चाबी खो जाए या चश्मा,
ये भूल नहीं एक बहाना है,
अपने मन की दुनिया में,
बस थोड़ा खो जाना है।

हर विस्मृति अल्जाइमर नहीं,
ये मस्तिष्क का विश्राम है,
बेकार की बातों को तजकर,
जरूरी को सहेजने का काम है।
सक्रिय रहें, बातें करें, और
कोरे पन्नों पर दिल की बात लिखें,
उम्र के ढलते इन रंगों में भी,
नए हुनर और नई बात सीखें।

थकना कोई रोग नहीं,
बस थोड़ी सी ये सुस्ती है,
डगमगाते हुए ये कदम,
कमजोरी नहीं बस रुस्ती है।
दवाओं से ज्यादा जरूरी है,
थोड़ा व्यायाम और धूप का साथ,
नींद न आना बीमारी नहीं,
बस वक्त का बदलता हुआ हाथ।

सैर करें, सीढ़ियां चढ़ें,
अपनी मांसपेशियों को जान दें,
नींद को 'जबरदस्ती' नहीं,
थोड़ा सुकून और सम्मान दें।
सम्मान का ये दौर है प्यारे,
इसे न कोई बोझ समझो,
अपनों का साथ और पुरानी यादें,
इसे ही अपनी खोज समझो।

फैसले अपने खुद ही करें,
ताकि आत्मनिर्भरता की शान रहे,
कमियां छोड़ खूबियां ढूंढें,
ताकि हर चेहरे पर मुस्कान रहे।
वृद्ध होना कोई रोग नहीं,
ये जीवन का गरिमामय पड़ाव है,
रुकना ही असल मौत है,
चलते रहना ही असली बहाव है।

जीवन की इस मधुर सांझ को,
उत्सव की तरह मनाना है,
अनुभवों के इस खजाने को,
दुनिया को देकर जाना है

रचना -प्रेम फर्रुखाबादी

21/03/2026

Krishan Bihari Noor | कृष्ण बिहारी नूर | Ghazal | जिंदगी से बड़ी सज़ा ही नही #

With Sheelendra Kumar Vashisth – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
17/03/2026

With Sheelendra Kumar Vashisth – I just got recognized as one of their top fans! 🎉

16/03/2026

(मुखड़ा)
जो प्रेम न करना जान सके, वो प्रीत की रीत क्या समझेंगे
इंसान से जो मुख मोड़ लिया, ईश्वर को कहाँ फिर पाओगे
जो हृदय दया से खाली है, वहाँ भक्ति का वास कहाँ होगा
जो अपनों का दुःख पढ़ न सके, वो वेद-पुराण क्या समझेंगे
जो प्रेम न करना जान सके...
​(अंतरा 1)
जीवन की जलती राहों को, तुम धूप समझ कर डरते हो
छाया की तलाश में भटकोगे, तो प्यासे ही रह जाओगे
संघर्षों की तपिश ही तो, कुंदन सा तुझे बनाएगी
जो काँटों से घबरा गए, वो फूलों का सुख क्या पाएंगे
जो प्रेम न करना जान सके...
​(अंतरा 2)
आँखों पर पट्टी बाँध के तुम, सच देखने की कोशिश करते हो
जब भीतर ही उजियारा नहीं, बाहर क्या जोत जलाओगे
मंदिर और मस्जिद ढूँढ लिया, पर खुद को न पहचान सके
जो मन का दर्पण मैला है, तो छवि प्रभु की क्या देखोगे
जो प्रेम न करना जान सके...
​(अंतरा 3)
ये जग सारा इक सपना है, यहाँ स्वार्थ के सब बंधन हैं
जो निस्वार्थ होकर जी न सके, वो मोक्ष का मार्ग क्या समझेंगे
इंसानियत ही सच्चा धर्म यहाँ, सेवा ही सच्ची पूजा है
जो गिरते को थाम न सके, वो मंदिर की सीढ़ी क्या चढ़ेंगे
​(समापन)
इंसान से जो मुख मोड़ लिया, ईश्वर को कहाँ फिर पाओगे
जो प्रेम न करना जान सके, वो प्रीत की रीत क्या समझेंगे।
-प्रेम फर्रुखाबादी

20/10/2025

*श्री नरेंद्र मोदी-*
*व्यक्ति एक रूप अनेक*

​​एक ही पुरुष में बसे हुए हैं
इतने सारे लोग।
​समय-समय पर हो रहे,
इनके दिव्य प्रयोग॥
​किस-किस का है वास,
स्वयं देख लें आप।
​लिखे हुए हैं नीचे सभी,
मन में करिए जाप॥
​यूँ ही नहीं बनें हुए हैं
भारत देश के प्रधान।
​इन की शक्ति से पा रहे
सारे जगत में मान॥

सभी महान विभूतियाँ,
समाई हुई हैं मोदी में।
​चतुर चाणक्य भी उनमें,
शांत बुद्ध भी मोदी में॥
​युवा विवेकानंद भी हैं,
साबरमती के गांधी भी।
​आज़ाद बोस व भगत,
क्रांति के हैं आंधी भी॥

​लौहपुरुष पटेल भी हैं,
भीम अम्बेडकर ज्ञान भी।
​अटल की वाणी भी है,
कलाम का विज्ञान भी॥
​शक्तिशाली शासक भी हैं,
कुशल जन-प्रशासक भी।
​कर्मठ साधक भी हैं,
दूरदर्शी सुधारक भी॥

तीव्र देशप्रेमी भी हैं,
सच्चे जनप्रेमी भी हैं।
​दिव्य चैतन्य भी उनमें,
करुणा सर्वहितैषी भी हैं॥
​राष्ट्र की आन-वान उनमें,
सम्मान का भाव भी है।
​प्रखर स्वाभिमान भी उनमें,
शामिल सारा जगत भी है॥

​उत्तम मानवता भी है,
समरस समानता भी है।
​विराट महासन्त की छाया,
ब्रह्मांड अनंतता भी है॥
​जन-जन का साथ भी पाया,
हर पथ पर विकास भी लाए।
​कठिन प्रयास भी उनमें,
अटल जन-विश्वास समाए।

*प्रेम फर्रुखाबादी*

19/10/2025

जीवन की जटिलता: तलाश, संबंध और सत्य

​यह एक अजीब विरोधाभास है: जब हम दिल से बात करते हैं, तो लोग उसे दिमाग से सुनते हैं; और जब हम दिमाग से तर्क करते हैं, तो लोग उसे दिल की गहराई से महसूस करते हैं। हम स्वर मिलाना चाहते हैं, पर हमारे स्वर नहीं मिलते। हम किसी को अपना बनाने की कोशिश करते हैं, पर वे अपने नहीं बनते। और यदि वे बन भी जाते हैं, तो आगे चलकर अक्सर मुसीबत या जटिलता का कारण बन जाते हैं।
​यह संसार एक विशाल 'तलाश घर' है। जब तक हमारी खोज पूरी न हो जाए, हमें तलाशते रहना पड़ता है। यही अथक तलाश ही जीवन है। इस खोज में कभी-कभी मनुष्य जीतता है, लेकिन हारता अधिक है। जीत के अपने-अपने मायने और तरीके हैं; किसी का तरीका किसी दूसरे को रास नहीं आता।
​एक अजीब-सी उलझन में, न चाहते हुए भी, आदमी उलझता चला जाता है। इस जीवन में शायद ही कोई प्राणी इस मनोदशा से अछूता हो। जीवन जीने का कोई एक निश्चित पैमाना या सूत्र नहीं है। शायद इसी अनिश्चितता और विरोधाभास का नाम जिंदगी है।
​मेरा मानना है कि इस दुनिया में हज़ारों, लाखों नहीं, बल्कि अनगिनत स्वभाव के लोग हैं। कभी-कभी अपने मन के लोग, जिनसे हमारी आत्मा का तार जुड़े, हमें सारी उम्र नहीं मिलते। समझ में नहीं आता कि कहाँ से शुरुआत करूँ और कहाँ इसका अंत करूँ। कभी-कभी पूरी दुनिया को समझने के चक्कर में हम इतने उलझ जाते हैं कि यह दुनिया ही हमें बेगानी लगने लगती है। मनुष्य कभी स्वयं थक जाता है, तो कभी परिस्थितियों द्वारा थका दिया जाता है।
​एक कहावत है, जिससे मैं बहुत प्रभावित हूँ: "जिंदगी में 'खुश' रहना बहुत सरल है, पर 'सरल' बने रहना बहुत कठिन है।" शायद जीवन का रहस्य इसी छोटे से वाक्य में छिपा नज़र आता है।
​जीवन, समझने मात्र से कभी समझ में नहीं आता, क्योंकि हम ज्ञान के अथाह समुंदर में इतने गहरे गोते लगाते हैं कि जीवन के वास्तविक सत्य से काफी दूर चले जाते हैं। अंत में, यही दूरी हमारी निराशा का कारण बन जाती है। फिर भी, हम इस कारण को जानकर भी समझना नहीं चाहते। शायद हमारी यही 'ज़िद' या अड़ियल स्वभाव हमारे हर दुःख का मूल कारण बन जाता है।

-प्रेम फर्रुखाबादी

18/10/2025

बड़े शौक से ताक रही थी
दुनियाँ उन्हें फेसबुक पर,
​हाय! वो ऐसे रुख़्सत हुए कि
प्रोफाइल ही लॉक कर गए।

प्रेम फर्रुखाबादी

15/10/2025

मेरे गीतों से तुम कहाँ हो गयी हो ओझल।
बिना तेरे मैं बन के रह गया
मौन ग़ज़ल ॥
-प्रेम फर्रुखाबादी

15/10/2025

जीवन दर्शन (Jeevan Darshan), जिसे अंग्रेजी में 'Philosophy of Life' कहा जाता है, एक व्यापक विचारधारा है जो जीवन के मूल प्रश्नों को समझने का प्रयास करती है।
​यह मुख्य रूप से निम्नलिखित पहलुओं पर केंद्रित है:
​जीवन का उद्देश्य और अर्थ (Purpose and Meaning of Life): यह इस बात पर विचार करता है कि मनुष्य के जीवन का अंतिम लक्ष्य क्या है, और हम अपने अस्तित्व को कैसे सार्थक बना सकते हैं।
​मूल्य और नैतिकता (Values and Ethics): यह उन सिद्धांतों, मूल्यों और आदर्शों को निर्धारित करता है जिनके आधार पर किसी व्यक्ति को अपना जीवन जीना चाहिए। इसमें सही और गलत, अच्छा और बुरा क्या है, इस पर विचार किया जाता है।
​यथार्थ और अस्तित्व (Reality and Existence): यह मनुष्य के अस्तित्व, सुख-दुःख, कर्म, आत्मा और दुनिया की वास्तविक प्रकृति जैसे विषयों पर चिंतन करता है।
​जीवन जीने की शैली (Way of Living): यह एक व्यक्तिगत मार्गदर्शिका की तरह है जो यह तय करती है कि व्यक्ति परिस्थितियों का सामना कैसे करेगा, निर्णय कैसे लेगा और अपने दैनिक कार्यों में किन सिद्धांतों का पालन करेगा।
​संक्षेप में, जीवन दर्शन वह व्यक्तिगत या सार्वभौमिक दृष्टिकोण है जो यह बताता है कि जीवन क्या है, इसका महत्व क्या है, और इसे कैसे जीना चाहिए ताकि यह संतुष्टिदायक, नैतिक और सार्थक बन सके। यह हर व्यक्ति के लिए भिन्न हो सकता है।

15/10/2025

योग: नव ऊर्जा और नव रंग का सूत्र
​भारतीय संस्कृति का अमूल्य उपहार योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा को जोड़ने वाली एक सम्पूर्ण जीवन शैली है। जैसा कि आपके सूत्र में कहा गया है, योग को अपनाने से जीवन को एक नई दिशा मिलती है और व्यक्ति तनाव मुक्त होकर जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो पाता है।
​योग के मुख्य लाभ
​योग से होने वाले लाभों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:
​1. शारीरिक लाभ (शारीरिक स्वास्थ्य)
​लचीलापन और मजबूती: योग आसन (आसन) मांसपेशियों को खींचते हैं, जिससे शरीर का लचीलापन बढ़ता है और हड्डियों तथा जोड़ों की मजबूती बनी रहती है।
​रोग प्रतिरोधक क्षमता: नियमित अभ्यास से पाचन तंत्र और रक्त संचार में सुधार होता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है।
​बेहतर मुद्रा: यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है और शरीर की मुद्रा (Posture) में सुधार लाता है, जिससे पीठ दर्द जैसी समस्याएँ कम होती हैं।
​2. मानसिक लाभ (मानसिक शांति)
​तनाव और चिंता में कमी: प्राणायाम (श्वास नियंत्रण) और ध्यान (Meditation) मन को शांत करते हैं, जिससे तनाव, चिंता और अवसाद (Depression) में उल्लेखनीय कमी आती है।
​एकाग्रता में वृद्धि: ध्यान के अभ्यास से मस्तिष्क की एकाग्रता शक्ति (Concentration Power) बढ़ती है, जो विद्यार्थियों और पेशेवरों दोनों के लिए अत्यंत लाभदायक है।
​3. आध्यात्मिक लाभ (आत्मिक विकास)
​आत्म-जागरूकता: योग व्यक्ति को अपने आंतरिक स्व से जुड़ने में मदद करता है, जिससे आत्म-जागरूकता (Self-awareness) और आत्म-स्वीकृति का भाव पैदा होता है।
​सकारात्मक दृष्टिकोण: योग जीवन के प्रति एक सकारात्मक और शांत दृष्टिकोण विकसित करने में सहायता करता है।
​योग से न होना कभी विमुख
​योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाना ही इसका वास्तविक सार है। यह कोई गंतव्य नहीं, बल्कि एक सतत यात्रा है। अपने जीवन में केवल 15 मिनट का समय भी योग को देने से आप अपनी ऊर्जा में अद्भुत परिवर्तन महसूस कर सकते हैं। यह सूत्र याद रखें: योग ही जीवन है, जीवन ही योग है।

15/10/2025

जीवन में ध्वनि, शब्द और भाव का बड़ा महत्व है !इन तीनों का आनंद कोई कोई ही ले पाता! -प्रेम फर्रुखाबादी 🎵💫🌈

14/10/2025

शीर्षक
योग-पथ पर
१.
आओ, योग की राह चलें संग,
जीवन पाए नव ऊर्जा, नव रंग।
मान लो यह सूत्र, मेरे प्यारे,
योग से न होना कभी विमुख।
​२.
तन हो जाए तेरा वज्र-कठोर,
मन में गहरे अनुपम शांति का शोर।
रोग-द्वेष सब जड़ से मिटाओ,
जीवन की हर भ्रांति हो विभोर।
​३.
प्रातः नित्य साधन में रम जाओ,
श्वासों की माला पर ध्यान टिकाओ।
स्वयं से मिलन का यह दिव्य द्वार है,
अंतरंग जीवन को अपने संवारो।
​४.
यह अग्नि-साधन, यह दीप-तपस्या,
जो जीवन को अविचल नव ऊर्जा दे।
हर पल जीयो निर्बाध प्रेम-आनंद में,
खुल जाता अमरत्व का सत्य द्वार है।
​५.
योग नहीं केवल श्रम, शारीरिक गति,
यह सृष्टि के जीवन का गहनतम सार है।
यह जीवात्मा का परम-सत्ता से,
अद्भुत संयोग, प्रेम का विस्तार है।
​६.
जो मनुज अपनाता यह शांत पथ,
वह देहमुक्त अमरत्व को है पाता।
जीवन उसका बनता है तब तो,
सरिता-सी निर्मल, मधुर धार है।
​७.
दिव्य योग की महिमा असीम,
जीवन बने सुगंधित कुसुम-हार।
हर पल में संतोष से खुशियाँ भरो,
तज दो मन की हर चिंता का भार।
​८.
आओ, ज्ञान का दीपक हम प्रज्वलित करें,
अंतरंग योग के रंग में रंग जाएँ।
निरोगी देह, समाहित चित्त हो अपना,
विश्व को शांति का महान संदेश सुनाएँ।

​~ प्रेम फर्रुखाबादी

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