08/01/2026
यीशु मसीह द्वारा लाज़र को जीवित करने की कहानी
यह घटना बाइबल के अनुसार एक बहुत ही चमत्कारी और विश्वास को मजबूत करने वाली कहानी है। यह कहानी बैतनियाह नामक गाँव की है, जहाँ लाज़र नाम का एक व्यक्ति अपनी दो बहनों, मरथा और मरियम, के साथ रहता था। ये तीनों यीशु मसीह से बहुत प्रेम करते थे और यीशु भी उनसे गहरा स्नेह रखते थे।
एक दिन लाज़र गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। उसकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती चली गई। मरथा और मरियम को जब लगा कि अब हालात बहुत खराब हैं, तो उन्होंने तुरंत यीशु मसीह के पास संदेश भिजवाया कि,
“हे प्रभु, जिसे आप प्रेम करते हैं, वह बहुत बीमार है।”
जब यीशु मसीह ने यह संदेश सुना, तो उन्होंने कहा,
“यह बीमारी मृत्यु के लिए नहीं, बल्कि परमेश्वर की महिमा के लिए है, ताकि इसके द्वारा परमेश्वर के पुत्र की महिमा प्रकट हो।”
यीशु वहाँ से तुरंत नहीं गए। उन्होंने दो दिन और उसी स्थान पर रुकना उचित समझा। इस बीच लाज़र की मृत्यु हो गई। उसे कब्र में दफना दिया गया और चार दिन बीत चुके थे।
चार दिन बाद यीशु मसीह बैतनियाह पहुँचे। गाँव में शोक का माहौल था। बहुत से लोग मरथा और मरियम को सांत्वना देने आए हुए थे। जैसे ही मरथा को पता चला कि यीशु आ रहे हैं, वह दौड़कर उनके पास गई और बोली,
“हे प्रभु, यदि आप यहाँ होते तो मेरा भाई न मरता। लेकिन अब भी मैं जानती हूँ कि आप जो कुछ परमेश्वर से माँगेंगे, वह आपको देगा।”
यीशु ने उससे कहा,
“तेरा भाई फिर से जी उठेगा।”
मरथा ने उत्तर दिया,
“हाँ प्रभु, मैं जानती हूँ कि अंतिम दिन पुनरुत्थान में वह जी उठेगा।”
तब यीशु मसीह ने कहा,
“पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूँ। जो मुझ पर विश्वास करता है, वह मरकर भी जीवित रहेगा।”
इसके बाद मरियम भी आई। वह यीशु के चरणों में गिरकर रोने लगी और वही बात दोहराई,
“प्रभु, यदि आप यहाँ होते, तो मेरा भाई न मरता।”
मरियम और वहाँ मौजूद लोगों का दुःख देखकर यीशु मसीह का हृदय भर आया। बाइबल में लिखा है कि यीशु रो पड़े। यह दिखाता है कि वे केवल परमेश्वर के पुत्र ही नहीं, बल्कि हमारे दुःख को समझने वाले करुणामय प्रभु भी हैं।
यीशु ने पूछा,
“तुमने उसे कहाँ रखा है?”
लोग उन्हें कब्र के पास ले गए। वह एक गुफा थी, जिसके मुँह पर पत्थर रखा हुआ था। यीशु ने कहा,
“पत्थर हटा दो।”
मरथा ने कहा,
“प्रभु, उसे मरे चार दिन हो गए हैं, अब तो दुर्गंध आने लगी होगी।”
यीशु ने उत्तर दिया,
“क्या मैंने तुझसे नहीं कहा था कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्वर की महिमा देखेगी?”
तब पत्थर हटा दिया गया। यीशु ने स्वर्ग की ओर आँखें उठाकर प्रार्थना की और फिर ऊँचे स्वर में कहा,
“लाज़र, बाहर निकल आ!”
और यह एक महान चमत्कार था!
जो लाज़र चार दिन से मरा हुआ था, वह जीवित होकर बाहर निकल आया। उसके हाथ-पाँव कपड़ों से बँधे हुए थे। यीशु ने लोगों से कहा,
“इसे खोल दो और जाने दो।”
यह देखकर वहाँ मौजूद बहुत से लोगों ने यीशु मसीह पर विश्वास किया। यह चमत्कार इस बात का प्रमाण था कि यीशु को मृत्यु पर भी अधिकार है और वे सच्चे जीवनदाता हैं।
संदेश (शिक्षा):
यह कहानी हमें सिखाती है कि चाहे परिस्थिति कितनी ही कठिन क्यों न हो, यीशु मसीह के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। जहाँ मनुष्य की आशा समाप्त हो जाती है, वहीं से परमेश्वर का कार्य आरंभ होता है।