06/04/2026
हज़रत के आज के बयान के अंश। बहुत सलीके से उन्होंने ताजा मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। बहुत सूझबूझ के साथ अपने ख्यालात जाहिर किए
1. एक मुसलमान का गैर मुस्लिम की दुनिया की लालच,तम्मना करना। ऐसे समझो जैसे भैंश के कुट्टी खाना जैसा है। मुसलमान कहे के काश इसके जैसे मैं भी होता :- मौलाना हज़रत शाद साहब।
2. मुसलमान ने जो बेदीन इख्तियार की हुई है, वो दुनिया के डर से की हुई है:- मौलाना हज़रत शाद साहब।
3. जो दुनिया मे रहकर आखरत को चाहेंगे,हम उनको दुनिया भी देंगे आखरत भी देंगे:- मौलाना हज़रत शाद साहब।
4. आप दीन पर रहकर दीन की चाहत को पूरा करेंगे। तो हम आपकी चाहत को पूरा करेंगे:- मौलाना हज़रत शाद साहब।
5. हर नशा करने वाली चीज हराम है:- मौलाना हज़रत शाद साहब।
6. अजान अदालत का सम्मन है। अल्लाह ने आपको फौरन बुलाया है:- मौलाना हज़रत शाद साहब।
7. जो आदमी जानबूझकर असर की नमाज कजा करदे। उसके अमाल तबाह कर दिए जाते हैं। असर की नमाज कजा करने का मतलब है आपके अंदर नमाज की अहमियत नही है :- मौलाना हज़रत शाद साहब।
8. नमाज़ों में सबसे ज़्यादा असर की नमाज का एहतिमाम किया करो:- मौलाना हज़रत शाद साहब।
9. जो नबी के अम्र के खिलाफ जाएंगे। वो परेशानियों में मुब्तिला हो जाएंगे:- मौलाना हज़रत शाद साहब।
10. जो लोग सुन्नत से मोहब्बत नही करते। उनको सुन्नतों में तंगी लगती है:- मौलाना हज़रत शाद साहब।
11. जो लोग अपने माँ-बाप को छोड़ जाए,उनसे बड़ा जानवर कोई नही है:- मौलाना हज़रत शाद साहब।
12. ईमान लाने के बाद सबसे बड़ा फ़रीज़ा अपने वालिदैन की मानना है:- मौलाना हज़रत शाद साहब।
13. मुसलमान आजकल अपनी ख्वाईश के ज़रिए बातिल को कूवत पहुँचा रहे हैं। इधर जिहाद की बात करते हैं,उधर बातिल की मदद कर रहे हैं। जैसे यहूदी,इस्लाम के दुश्मनों की कंपिनयों की चीज खरीदते है। उनसे खरीदना मतलब आप इस्लाम के मुजरिम है:- मौलाना हज़रत शाद साहब।
14. सबसे बड़ा कमीना वो आदमी है, जो किसी की मजबूरी का नाजायज फायदा उठाए:- मौलाना हज़रत शाद साहब।
15. परेशान हाल आदमी को राहत पहुँचाने का नाम है वकालत और डाँक्टरी। उनसे नाजायज फायदा उठाने का नाम नही है:- मौलाना हज़रत शाद साहब।
16. इस ज़माने में ज़रा सा ख़ौफ़, ज़रा सी कोई झूठी धमकी दे द,तो मुसलमान सबसे पहले दीन को छोड़ेगा। कहेगा हालात ठीक नही है:- मौलाना हज़रत शाद साहब।
17. अल्लाह ने दावत में रॉब रखा है:- मौलाना हज़रत शाद साहब।
18. एक आदमी अपने माल की सही-सही पूरी और पाबंदी के साथ जकात अदा करता है, तो वो जन्नत में जायेगा:- मौलाना हज़रत शाद साहब।
हो सकता है कुछ शब्द इधर-उधर हो गए हो। जो हज़रत ने कहा समे-टू-समे नही लिख पाया हो। उसके लिए माजरत चाहूँगा। लेकिन मैंने जो समझा और सुना उसके ताल्लूक से लिखें है। क्योंकि हजरत के बयान को सुनने के लिए जेहन का खुला रहना बड़ा जरूरी और अहम है। तभी समझ आता है।