19/08/2026
ग्वालियर रजिस्ट्रार कार्यालय में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले पत्रकारों के साथ अभद्रता और धमकी का आरोप
ग्वालियर। ग्वालियर के रजिस्ट्रार कार्यालय में कथित अनियमितताओं, निजी व्यक्तियों की भूमिका और रजिस्ट्री प्रक्रिया में अवैध वसूली के आरोपों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आने के बाद कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों के साथ कथित अभद्रता, धमकी और मारपीट का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
शिकायत के अनुसार, रजिस्ट्रार कार्यालय में कुछ ऐसे निजी युवक कथित रूप से काम करते हैं जो स्वयं को सर्विस प्रोवाइडर से जुड़ा बताते हैं। आरोप है कि ये लोग कंप्यूटर संचालन, दस्तावेजों की प्रक्रिया, फोटो एवं वेरिफिकेशन जैसे कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इसी दौरान आम लोगों से अतिरिक्त राशि लिए जाने और रजिस्ट्री प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए।
पत्रकारों का दावा है कि एक ही सर्वे नंबर से संबंधित एक से अधिक रजिस्ट्री तथा न्यायालयीन रोक के बावजूद रजिस्ट्री किए जाने जैसी शिकायतें भी उनके संज्ञान में आईं। इन आरोपों की वास्तविकता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है, लेकिन इन्हीं शिकायतों को लेकर पत्रकारों ने मौके पर जाकर संबंधित अधिकारियों से सवाल किए।
पत्रकार विकास रावत और उनके साथी पत्रकार प्रशांत शर्मा के अनुसार, उन्होंने रजिस्ट्रार अशोक शर्मा से मामले में जवाब मांगने और उपलब्ध वीडियो साक्ष्य दिखाने का प्रयास किया। पत्रकारों का आरोप है कि अधिकारियों की ओर से शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई के बजाय उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि वे अपने स्तर पर देखेंगे।
पत्रकारों का दावा है कि कार्यालय में कुछ निजी युवकों से पैसे के संबंध में सवाल किए जाने पर उन्होंने किसी भी प्रकार की राशि लिए जाने से इनकार किया। पत्रकारों के अनुसार, इस पूरी बातचीत के वीडियो भी उनके पास मौजूद हैं।
इसके बाद पत्रकारों ने संबंधित अधिकारियों को वीडियो और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराकर कार्रवाई की मांग की। पत्रकारों का आरोप है कि इसके बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब पत्रकार विकास रावत के अनुसार, उन्हें एक व्यक्ति द्वारा फोन पर धमकी दी गई। उक्त व्यक्ति ने स्वयं को एसडीओपी परमाल सिंह मेहरा बताया। पत्रकार का आरोप है कि फोन पर उन्हें बार-बार रजिस्ट्रार कार्यालय में कवरेज करने को लेकर आपत्ति जताई गई और कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
विकास रावत के अनुसार, उन्होंने इस संबंध में पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दी और शिकायत की रिसीविंग भी उनके पास है।
इसके बाद जब विकास रावत और प्रशांत शर्मा लिखित शिकायत देने के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे तो उनका आरोप है कि वहां कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया, उनके साथ बहस और अभद्रता की तथा कथित रूप से उन्हें धमकाया गया। पत्रकारों का आरोप है कि इस दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट हुई तथा उनका माइक भी क्षतिग्रस्त हो गया।
पत्रकारों के अनुसार, घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से पुलिस में शिकायतें दी गईं। पत्रकारों ने अपने पक्ष में वीडियो फुटेज एवं अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराने की बात कही है।
मामले में पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग की है। पत्रकारों के अनुसार, डीआईजी स्तर के अधिकारी ने भी उनका पक्ष सुनकर जांच का भरोसा दिया है।
उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि रजिस्ट्रार कार्यालय में निजी व्यक्तियों द्वारा सरकारी प्रक्रिया से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं तो उनकी अधिकृत भूमिका क्या है?
यदि आम लोगों से किसी प्रकार की अतिरिक्त राशि ली जा रही है तो उसका रिकॉर्ड और रसीद कहां है?
यदि रजिस्ट्री प्रक्रिया में न्यायालयीन आदेशों अथवा नियमों की अनदेखी के आरोप हैं तो उनकी जांच कौन करेगा?
और सबसे महत्वपूर्ण सवाल—यदि कोई पत्रकार इन आरोपों की जांच और कवरेज करने पहुंचता है तो उसके साथ अभद्रता अथवा धमकी के आरोप क्यों सामने आ रहे हैं?
इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।
पत्रकार विकास रावत का कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पारदर्शिता, आम नागरिक के अधिकार और पत्रकारिता की स्वतंत्रता के लिए है। उनका कहना है कि यदि कहीं गलत हो रहा है तो पत्रकार का काम सवाल पूछना और उसे जनता के सामने लाना है।
अब देखना होगा कि प्रशासन और पुलिस इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर क्या कार्रवाई करते हैं और रजिस्ट्रार कार्यालय में कथित अनियमितताओं की शिकायतों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
सवाल सिर्फ एक पत्रकार का नहीं है—सवाल यह है कि क्या सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी और क्या सच सामने लाने वाले पत्रकारों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा?