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26/08/2026

नर्सिंग छात्रों का कलेक्ट्रेट पर हंगामा: छात्रा की बिगड़ी तबीयत तो फूटा गुस्सा, NSUI जिला अध्यक्ष कार से ले गए अस्पताल

26/08/2026

बिजली कनेक्शन को लेकर कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचा परिवार,

24/08/2026

सबसे बड़ा सवाल—क्या पूरा सिस्टम ही सवालों के घेरे में है?

22/08/2026

ग्वालियर से करीब 39 महीने पहले मृत हो चुकी एक महिला की 10 बीघा जमीन की रजिस्ट्री उसके स्थान पर कथित तौर पर दूसरी महिला को खड़ा कर कर दी गई।
मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संबंधित महिला की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी, तो उसकी पहचान और दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ और कथित फर्जी महिला के माध्यम से रजिस्ट्री कैसे संपादित हो गई?
रजिस्ट्रार कार्यालय को लेकर पहले भी कई तरह की अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते रहे हैं। इसी बीच संबंधित सब-रजिस्ट्रार के खिलाफ विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में चार FIR दर्ज होने की बात भी सामने आ रही है। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी अब तक पद पर बने हुए हैं, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आरोप यह भी है कि शिकायतों के बाद जब प्रशासनिक स्तर पर जांच या निरीक्षण किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ तत्काल कोई कठोर कार्रवाई नहीं होती। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि आरोप गंभीर हैं और लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, तो जिम्मेदारी तय करने में देरी क्यों हो रही है?
12 अगस्त की घटना के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
पत्रकारों द्वारा रजिस्ट्रार कार्यालय की कथित अनियमितताओं को लगातार सामने लाने के दौरान 12 अगस्त को पत्रकारों के साथ विवाद और कथित मारपीट/दुर्व्यवहार की घटना भी सामने आई थी। घटना के बाद पत्रकारों की ओर से शिकायतें और कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन अब तक FIR और आरोपियों पर गंभीर धाराओं में कार्रवाई को लेकर सवाल बने हुए हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर अधिकारियों और कथित आरोपियों पर कार्रवाई कब होगी? क्या मृत महिला की जमीन की कथित फर्जी रजिस्ट्री की निष्पक्ष जांच होगी? दस्तावेजों और रजिस्ट्री प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच कब होगी? और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं अन्य आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई कब की जाएगी?
यह पूरा मामला निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग कर रहा है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष और जांच में सामने आने वाले तथ्य इस मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करेंगे।

19/08/2026

पत्रकारों के समर्थन में उतरे अधिवक्ता रायसिंह बौद्ध, बोले— सड़क से कोर्ट तक लड़ेंगे लड़ाई

ग्वालियर। पत्रकार विकास रावत एवं प्रशांत शर्मा के साथ हुई कथित घटना को लेकर अधिवक्ता एवं आजाद समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव रायसिंह बौद्ध ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष मीडिया की आवाज को दबाने या पत्रकारों को धमकाने का प्रयास किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अधिवक्ता रायसिंह बौद्ध ने कहा कि “यह केवल विकास रावत और प्रशांत शर्मा की लड़ाई नहीं, बल्कि हम सभी की लड़ाई है। हम निष्पक्ष मीडिया के साथ सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ेंगे।”

उन्होंने कहा कि यदि किसी को यह गलतफहमी है कि पत्रकारों के खिलाफ गलत कार्रवाई कर उनकी आवाज को दबाया जा सकता है या उन्हें धमकाकर सच दिखाने से रोका जा सकता है, तो यह उनकी बड़ी भूल होगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “हम किसी भी स्तर पर पीछे हटने वाले नहीं हैं और पत्रकारों के साथ हुई घटना का कानूनी एवं लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा।”

राय सिंग बौद्ध ने कहा कि मीडिया देश का चौथा स्तंभ है और जो पत्रकार जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाकर जनता की आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं, उनके साथ खड़ा होना समाज की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कथित घटना की निंदा करते हुए कहा कि पत्रकारों के साथ हुई घटना गंभीर है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने दोहराया कि निष्पक्ष पत्रकारिता और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए वे दिन-रात पत्रकारों के साथ खड़े हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर सड़क से लेकर न्यायालय तक कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। Jyotiraditya M Scindia gwalior datia breaking Amit Shah Aam Aadmi Party Indore

19/08/2026

ग्वालियर रजिस्ट्रार कार्यालय में आखिर उस दिन हुआ क्या था?

लगातार सामने आ रही शिकायतों के बाद हमने इस पूरे मामले की पड़ताल शुरू की। लेकिन मामला सिर्फ शिकायतों तक सीमित नहीं रहा।

अब हम आपको एक-एक करके हर वीडियो दिखाएंगे, ताकि पूरा घटनाक्रम आपके सामने खुद तस्वीर की तरह साफ हो सके।

👉 यह है पहला वीडियो, जिसमें देखिए कि इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत किस तरह हुई।
इसके बाद हम आपको नेक्स्ट-नेक्स्ट वीडियो में पूरी कड़ी दिखाते जाएंगे—क्या हुआ, कब हुआ और घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा।

हमारे पास हर दिन की रिकॉर्डिंग और वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं। हम किसी निष्कर्ष को थोपना नहीं चाहते, बल्कि वीडियो के माध्यम से पूरा सच जनता के सामने रखना चाहते हैं।

देखते रहिए पूरी वीडियो सीरीज़…
क्योंकि आखिरी वीडियो तक पहुंचते-पहुंचते आपको खुद समझ आ जाएगा कि घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा और आखिर में क्या हुआ।

पहला वीडियो देखिए… और जुड़े रहिए अगली कड़ी के लिए।

Dr Mohan Yadav Jyotiraditya M Scindia Narendra Modi Amit Shah Kailash Vijayvargiya Madhya Pradesh Police Academy, Bhauri , Bhopal Jansampark Madhya Pradesh

19/08/2026

ग्वालियर रजिस्ट्रार कार्यालय में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले पत्रकारों के साथ अभद्रता और धमकी का आरोप

ग्वालियर। ग्वालियर के रजिस्ट्रार कार्यालय में कथित अनियमितताओं, निजी व्यक्तियों की भूमिका और रजिस्ट्री प्रक्रिया में अवैध वसूली के आरोपों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आने के बाद कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों के साथ कथित अभद्रता, धमकी और मारपीट का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

शिकायत के अनुसार, रजिस्ट्रार कार्यालय में कुछ ऐसे निजी युवक कथित रूप से काम करते हैं जो स्वयं को सर्विस प्रोवाइडर से जुड़ा बताते हैं। आरोप है कि ये लोग कंप्यूटर संचालन, दस्तावेजों की प्रक्रिया, फोटो एवं वेरिफिकेशन जैसे कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इसी दौरान आम लोगों से अतिरिक्त राशि लिए जाने और रजिस्ट्री प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए।

पत्रकारों का दावा है कि एक ही सर्वे नंबर से संबंधित एक से अधिक रजिस्ट्री तथा न्यायालयीन रोक के बावजूद रजिस्ट्री किए जाने जैसी शिकायतें भी उनके संज्ञान में आईं। इन आरोपों की वास्तविकता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है, लेकिन इन्हीं शिकायतों को लेकर पत्रकारों ने मौके पर जाकर संबंधित अधिकारियों से सवाल किए।

पत्रकार विकास रावत और उनके साथी पत्रकार प्रशांत शर्मा के अनुसार, उन्होंने रजिस्ट्रार अशोक शर्मा से मामले में जवाब मांगने और उपलब्ध वीडियो साक्ष्य दिखाने का प्रयास किया। पत्रकारों का आरोप है कि अधिकारियों की ओर से शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई के बजाय उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि वे अपने स्तर पर देखेंगे।

पत्रकारों का दावा है कि कार्यालय में कुछ निजी युवकों से पैसे के संबंध में सवाल किए जाने पर उन्होंने किसी भी प्रकार की राशि लिए जाने से इनकार किया। पत्रकारों के अनुसार, इस पूरी बातचीत के वीडियो भी उनके पास मौजूद हैं।

इसके बाद पत्रकारों ने संबंधित अधिकारियों को वीडियो और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराकर कार्रवाई की मांग की। पत्रकारों का आरोप है कि इसके बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।

मामला उस समय और गंभीर हो गया जब पत्रकार विकास रावत के अनुसार, उन्हें एक व्यक्ति द्वारा फोन पर धमकी दी गई। उक्त व्यक्ति ने स्वयं को एसडीओपी परमाल सिंह मेहरा बताया। पत्रकार का आरोप है कि फोन पर उन्हें बार-बार रजिस्ट्रार कार्यालय में कवरेज करने को लेकर आपत्ति जताई गई और कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।

विकास रावत के अनुसार, उन्होंने इस संबंध में पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दी और शिकायत की रिसीविंग भी उनके पास है।

इसके बाद जब विकास रावत और प्रशांत शर्मा लिखित शिकायत देने के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे तो उनका आरोप है कि वहां कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया, उनके साथ बहस और अभद्रता की तथा कथित रूप से उन्हें धमकाया गया। पत्रकारों का आरोप है कि इस दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट हुई तथा उनका माइक भी क्षतिग्रस्त हो गया।

पत्रकारों के अनुसार, घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से पुलिस में शिकायतें दी गईं। पत्रकारों ने अपने पक्ष में वीडियो फुटेज एवं अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराने की बात कही है।

मामले में पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग की है। पत्रकारों के अनुसार, डीआईजी स्तर के अधिकारी ने भी उनका पक्ष सुनकर जांच का भरोसा दिया है।

उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि रजिस्ट्रार कार्यालय में निजी व्यक्तियों द्वारा सरकारी प्रक्रिया से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं तो उनकी अधिकृत भूमिका क्या है?

यदि आम लोगों से किसी प्रकार की अतिरिक्त राशि ली जा रही है तो उसका रिकॉर्ड और रसीद कहां है?

यदि रजिस्ट्री प्रक्रिया में न्यायालयीन आदेशों अथवा नियमों की अनदेखी के आरोप हैं तो उनकी जांच कौन करेगा?

और सबसे महत्वपूर्ण सवाल—यदि कोई पत्रकार इन आरोपों की जांच और कवरेज करने पहुंचता है तो उसके साथ अभद्रता अथवा धमकी के आरोप क्यों सामने आ रहे हैं?

इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।

पत्रकार विकास रावत का कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पारदर्शिता, आम नागरिक के अधिकार और पत्रकारिता की स्वतंत्रता के लिए है। उनका कहना है कि यदि कहीं गलत हो रहा है तो पत्रकार का काम सवाल पूछना और उसे जनता के सामने लाना है।

अब देखना होगा कि प्रशासन और पुलिस इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर क्या कार्रवाई करते हैं और रजिस्ट्रार कार्यालय में कथित अनियमितताओं की शिकायतों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

सवाल सिर्फ एक पत्रकार का नहीं है—सवाल यह है कि क्या सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी और क्या सच सामने लाने वाले पत्रकारों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा?

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