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12/07/2026

:जब इंसान की रगों में दौड़ा भेड़ का खून! पहली ब्लड ट्रांसफ्यूजन की कहानी

स्वर की एक महान यात्रा का अंत… भावपूर्ण श्रद्धांजलि भारतीय संगीत जगत की महान पार्श्व गायिका एस. जानकी (S. Janaki) अब हमा...
12/07/2026

स्वर की एक महान यात्रा का अंत… भावपूर्ण श्रद्धांजलि
भारतीय संगीत जगत की महान पार्श्व गायिका एस. जानकी (S. Janaki) अब हमारे बीच नहीं रहीं। ‘साउथ की नाइटिंगेल’ और ‘जानकी अम्मा’ के नाम से मशहूर इस महान कलाकार ने 88 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया।
23 अप्रैल 1938 को आंध्र प्रदेश में जन्मीं सिस्टला श्रीराममूर्ति जानकी ने अपनी मधुर आवाज़ से भारतीय सिनेमा को एक अनमोल विरासत दी। महज 9 साल की उम्र से मंच पर प्रस्तुति देने वाली जानकी अम्मा ने 1957 में अपने गायन करियर की शुरुआत की और करीब छह दशकों तक संगीत की दुनिया पर राज किया।
उन्होंने तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, हिंदी समेत कई भारतीय भाषाओं में हजारों यादगार गीतों को अपनी आवाज़ दी। उनकी आवाज़ में भावनाओं की गहराई और सुरों की मिठास ने उन्हें भारतीय संगीत की सबसे बहुमुखी गायिकाओं में शामिल किया।
अपने शानदार योगदान के लिए उन्हें 4 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और कई प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय सम्मान मिले। एस. जानकी और एस. पी. बालासुब्रह्मण्यम की जोड़ी भारतीय फिल्म संगीत की सबसे लोकप्रिय जोड़ियों में से एक रही।
‘यार बिना चैन कहाँ रे’, ‘दिल में हो तुम’ जैसे कई यादगार गीतों के जरिए उनकी आवाज़ हमेशा संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेगी।
एक युग की आवाज़ खामोश हो गई…लेकिन एस. जानकी जी के सुर हमेशा अमर रहेंगे।
हमारी ओर से महान गायिका एस. जानकी जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
ॐ शांति
#श्रद्धांजलि

07/07/2026

05/07/2026

28/06/2026

6.88 मीटर की छलांग से इतिहास रचने वाली Ancy Sojan बनीं भारत की नई लॉन्ग जंप क्वीन | टूटा 22 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड

केरल के त्रिशूर के एक छोटे से तटीय गांव से निकलकर Ancy Sojan ने भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में नया अध्याय लिख दिया है। भुवनेश्वर में आयोजित नेशनल इंटर-स्टेट चैंपियनशिप में उन्होंने 6.88 मीटर की रिकॉर्ड छलांग लगाकर Anju Bobby George का 22 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया।

दिलचस्प बात यह है कि प्रतियोगिता के दौरान वह स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं, लेकिन कोच के हौसले और अपनी जिद के दम पर उन्होंने पांचवें प्रयास में यह ऐतिहासिक छलांग लगाई।

भारतीय नौसेना में पेटी ऑफिसर के रूप में कार्यरत Ancy अब एशिया की टॉप रैंक्ड लॉन्ग जंपर बन चुकी हैं और आने वाले एशियन गेम्स के लिए सीधे क्वालिफाई भी कर चुकी हैं।

यह जीत सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और सपनों की उड़ान की कहानी है जिसने भारत को फिर से गर्व से भर दिया है।

28/06/2026

: Ancy Sojan ने 6.88m छलांग से तोड़ा 22 साल पुराना रिकॉर्ड

27/06/2026

: Five morning Habbits that can change your life

डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय: भारत में टेस्ट-ट्यूब बेबी तकनीक की नींव रखने वाले एक महान वैज्ञानिक की प्रेरक कहानीडॉ. सुभाष मुखो...
18/06/2026

डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय: भारत में टेस्ट-ट्यूब बेबी तकनीक की नींव रखने वाले एक महान वैज्ञानिक की प्रेरक कहानी

डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय भारत के ऐसे वैज्ञानिक थे, जिन्होंने देश में टेस्ट-ट्यूब बेबी तकनीक की नींव रखी। उनका जन्म 16 जनवरी 1931 को झारखंड के हजारीबाग में हुआ था। उन्होंने चिकित्सा विज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त की और प्रजनन विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध किए।

25 जुलाई 1978 को दुनिया की पहली टेस्ट-ट्यूब बेबी के जन्म के सिर्फ 67 दिन बाद, डॉ. मुखोपाध्याय और उनकी टीम ने कोलकाता में 3 अक्टूबर 1978 को भारत की पहली और दुनिया की दूसरी टेस्ट-ट्यूब बेबी कनुप्रिया अग्रवाल उर्फ दुर्गा का का जन्म हुआ। यह उपलब्धि अपने समय से काफी आगे थी।

दुर्भाग्य से उनके इस शोध पर तत्कालीन वैज्ञानिक संस्थानों और सरकार ने विश्वास नहीं किया। उन्हें अपने शोध को प्रस्तुत करने तक की अनुमति नहीं मिली और लगातार उपेक्षा व अपमान का सामना करना पड़ा। मानसिक तनाव से टूटकर उन्होंने 18 जून 1981 को आत्महत्या कर ली।

मरणोपरांत डॉ. मुखोपाध्याय के नाम पर कई स्मृति व्याख्यान, अनुसंधान केंद्र और पुरस्कार स्थापित किए गए। 1982 में "डॉ. सुभाष मुखर्जी मेमोरियल ओरेशन" की शुरुआत हुई। 2007 में उन्हें प्रतिष्ठित डिक्शनरी ऑफ मेडिकल बायोग्राफी में स्थान मिला। 2012 में आईसीएमआर ने उनके नाम पर पुरस्कार की घोषणा की। 2020 में आईसीएमआर-राष्ट्रीय प्रजनन स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान ने उनके जीवन और उपलब्धियों पर एक विशेष पुस्तक प्रकाशित की।

डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय की कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची प्रतिभा और वैज्ञानिक सोच को भले ही देर से पहचान मिले, लेकिन इतिहास अंततः उसका सम्मान अवश्य करता है।

मुकेश खन्ना: महाभारत के भीष्म पितामह से लेकर भारत के पहले सुपरहीरो 'शक्तिमान' तक का सफरमुकेश खन्ना भारतीय टेलीविजन और फि...
18/06/2026

मुकेश खन्ना: महाभारत के भीष्म पितामह से लेकर भारत के पहले सुपरहीरो 'शक्तिमान' तक का सफर

मुकेश खन्ना भारतीय टेलीविजन और फिल्म जगत का एक ऐसा नाम हैं, जिन्हें आज भी करोड़ों लोग "शक्तिमान" और "भीष्म पितामह" के रूप में याद करते हैं। उनका जीवन संघर्ष, मेहनत और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने की प्रेरणादायक कहानी है।

जन्म और शुरुआती जीवन

मुकेश खन्ना का जन्म 23 जून 1958 को मुंबई में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से पंजाब से संबंध रखता था। बचपन से ही उन्हें अभिनय में रुचि थी, लेकिन अभिनेता बनने का सफर आसान नहीं था। उन्होंने प्रतिष्ठित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), पुणे से अभिनय की पढ़ाई की और अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

अभिनय करियर की शुरुआत

मुकेश खन्ना ने 1980 के दशक में फिल्मों और टीवी धारावाहिकों में छोटे-छोटे किरदारों से अपने करियर की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उन्हें ज्यादा पहचान नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे।

महाभारत से मिली बड़ी पहचान

साल 1988 में बी.आर. चोपड़ा के प्रसिद्ध धारावाहिक 'महाभारत' में उन्हें भीष्म पितामह का किरदार निभाने का मौका मिला। उनकी दमदार आवाज, प्रभावशाली व्यक्तित्व और शानदार अभिनय ने इस किरदार को अमर बना दिया। आज भी लोग उन्हें भीष्म पितामह के रूप में याद करते हैं।

शक्तिमान बनकर बने बच्चों के सुपरहीरो

साल 1997 में मुकेश खन्ना ने भारतीय टेलीविजन के पहले सुपरहीरो 'शक्तिमान' का किरदार निभाया। यह शो देखते ही देखते देशभर में लोकप्रिय हो गया। शक्तिमान केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं था, बल्कि बच्चों को नैतिक शिक्षा और अच्छे संस्कार देने का भी प्रयास करता था।

उस दौर में शक्तिमान की लोकप्रियता इतनी थी कि बच्चे उन्हें अपना आदर्श मानने लगे थे। यह किरदार आज भी भारतीय टीवी इतिहास के सबसे लोकप्रिय किरदारों में गिना जाता है।

निर्माता और समाजसेवी के रूप में योगदान

मुकेश खन्ना ने केवल अभिनय ही नहीं किया, बल्कि निर्माता के रूप में भी काम किया। उन्होंने 'शक्तिमान' और 'आर्यमान' जैसे शो का निर्माण किया। इसके अलावा वे समय-समय पर सामाजिक मुद्दों और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर अपनी राय खुलकर रखते रहे हैं।

आज भी कायम है लोकप्रियता

दशकों बाद भी मुकेश खन्ना की लोकप्रियता बरकरार है। सोशल मीडिया और यूट्यूब के जरिए वे अपने विचार लाखों लोगों तक पहुंचाते हैं। उनके प्रशंसक उन्हें भारतीय टेलीविजन के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में से एक मानते हैं।

मुकेश खन्ना की कहानी हमें सिखाती है कि अगर आत्मविश्वास, मेहनत और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो साधारण शुरुआत भी असाधारण सफलता में बदल सकती है।

जन्मदिन विशेष | मिथुन चक्रवर्तीसंघर्ष से सुपरस्टार बनने तक का सफर... यही कहानी है मिथुन चक्रवर्ती की।1976 में फिल्म 'मृग...
16/06/2026

जन्मदिन विशेष | मिथुन चक्रवर्ती

संघर्ष से सुपरस्टार बनने तक का सफर... यही कहानी है मिथुन चक्रवर्ती की।

1976 में फिल्म 'मृगया' से करियर की शुरुआत करने वाले मिथुन दा ने अपने पहले ही अभिनय के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया। इसके बाद 'डिस्को डांसर' ने उन्हें दुनियाभर में पहचान दिलाई और वे करोड़ों दिलों के "डिस्को किंग" बन गए।

करीब 350 फिल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेर चुके मिथुन दा आज भी अपनी ऊर्जा, स्टाइल और दमदार व्यक्तित्व से लोगों को प्रेरित करते हैं।

जन्मदिन पर मिथुन चक्रवर्ती को ढेरों शुभकामनाएं। स्वस्थ रहें, दीर्घायु हों और यूं ही अपने चाहने वालों का मनोरंजन करते रहें।

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