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आप सभी का Kisan Udgar परिवार पर आभार प्रकट करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
30/05/2020

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सेंसेक्स में 4,000 अंक की गिरावट : बाजार में मंदी के पीछे क्या हैकिसान उदगार23, March 2020, 04:08 PM ISTनई दिल्ली: भारत ...
23/03/2020

सेंसेक्स में 4,000 अंक की गिरावट : बाजार में मंदी के पीछे क्या है

किसान उदगार
23, March 2020, 04:08 PM IST

नई दिल्ली: भारत वास्तव में लॉकडाउन के तहत है, निर्माण कंपनियां बंद की घोषणा कर रही हैं और घरेलू स्टॉक कार्ड के डेक की तरह गिर रहे हैं।
बीएसई प्रमुख सेंसेक्स 4,000 अंकों की गिरावट के साथ 26,000 के स्तर के नीचे फिसल गया, जबकि एनएसई के बेंचमार्क निफ्टी ने लगभग 1150 अंकों की गिरावट के साथ 7,600 पर पहुंच गया। सभी व्यापक बाजार सूचकांक 11-14 प्रतिशत की कटौती के साथ कारोबार कर रहे थे।

विश्लेषकों का कहना है कि भारत एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है जहां वह चीन या इटली के रास्ते जा सकता है। पहले से ही यूरोप और अमेरिका में वायरस टोल में उछाल के कारण वॉल स्ट्रीट से लेकर दलाल स्ट्रीट तक के बाजारों में हड़कंप मच गया है। बाजार के नकद और एफ एंड ओ खंडों में लगाए गए कर्ब सेबी अस्थिरता को कम करने के लिए अपर्याप्त साबित हो सकते हैं। विश्लेषकों ने कहा कि कोरोनोवायरस के मामलों में गिरावट से दलाल स्ट्रीट को और अधिक नुकसान से बचाया जा सकता है।

MP का ताज: शिवराज सिंह चौहान आज रात 9 बजे ले सकते हैं CM पद की शपथ।23 March, 2020  3:57 PM ISTभोपाल. मध्य प्रदेश में पिछ...
23/03/2020

MP का ताज: शिवराज सिंह चौहान आज रात 9 बजे ले सकते हैं CM पद की शपथ।

23 March, 2020 3:57 PM IST

भोपाल. मध्य प्रदेश में पिछले तीन हफ्ते से ज़्यादा समय से जारी राजनीतिक उठापटक के खत्‍म होने की संभावना बढ़ गई है. खबर यह है कि शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) एक बार फिर से मध्‍य प्रदेश की कमानउ संभाल सकते हैं. सोमवार शाम को विधायक दल की बैठक होनी है, जिसमें नेता के नाम पर औपचारिक मुहर लग जाएगी. सूत्रों की मानें तो शिवराज का विधायक दल का नेता चुना जाना तय है. वह सोमवार शाम को राजभवन में एक सादे समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. राजभवन को इसकी सूचना भी दे दी गई है.

सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि बीजेपी आलाकमान ने मध्‍य प्रदेश के सीएम का नाम तय कर दिया है. शिवराज के नाम पर आलाकमान की मुहर लग गई है. सोमवार शाम तकरीबन 6 बजे भोपाल में विधायक दल की बैठक होने वाली है, जिसमें शिवराज का नेता चुना जाना तय माना जा रहा है. विधायक दल की मुहर के बाद शाम को ही शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. इसको लेकर राजभवन में एक सादा समारोह आयोजित किया जाएगा.
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राजनीतिक घटनाक्रम का होगा पटाक्षेप
मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार अल्पमत में आने के बाद बीजेपी सरकार बनाने जा रही है. ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जाने के बाद उनके समर्थक 6 मंत्री और 16 विधायकों ने कांग्रेस पार्टी से बगावत कर दी थी. सभी ने बेंगलुरू में डेरा डाल दिया था. कमलनाथ सरकार गिरने के बाद सभी 22 सिंधिया समर्थक विधायकों ने भी बीजेपी का दामन थाम लिया था. तीन हफ्ते तक भोपाल, दिल्ली, बेंगलुरू, मानेसर और जयपुर के बीच चले राजनीतिक घटनाक्रम के बाद 20 मार्च को फ्लोर टेस्ट से पहले ही कमलनाथ सरकार ने इस्तीफा दे दिया था. उसके बाद बीजेपी की सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया था. मध्‍य प्रदेश का मुख्‍यमंत्री बनने को लेकर पीएम मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय और नरोत्तम मिश्रा के नामों की भी चर्चा थी. लेकिन, माना जा रहा है कि शिवराज के नाम पर आलाकमान ने अपनी मुहर लगा दी. शिवराज के शपथ लेते ही मध्‍य प्रदेश में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम का भी पटाक्षेप हो जाएगा.

कोरोना वायरस से एक ही दिन में तीन मौत, संक्रमितों की संख्या 396 तक पहुंची, कई राज्यों को किया लॉकडाउन।किसान उदगार23 Mar ...
23/03/2020

कोरोना वायरस से एक ही दिन में तीन मौत, संक्रमितों की संख्या 396 तक पहुंची, कई राज्यों को किया लॉकडाउन।

किसान उदगार
23 Mar 2020 10:00 AM (IST)

नई दिल्ली
एजेंसियां। देश में कोरोना वायरस से संक्रमण की स्थिति बिगड़ती जा रही है। हालांकि, सरकारी स्तर से लेकर सामाजिक स्तर पर इसके प्रसार को रोकने की भरसक कोशिशें की जा रही हैं। शहरों को लॉकडाउन किया जा रहा है, धारा 144 लगाई जा रही है और लोगों से ज्यादा से ज्यादा समय तक घरों में रहने को कहा जा रहा है। इसके बावजूद कोरोना के मामले बढ़ रहे है। रविवार को देश में एक दिन में इस घातक वायरस के चलते तीन लोगों की जान चली गई। महाराष्ट्र, गुजरात और बिहार में एक-एक व्यक्ति ने दम तोड़ दिया और मृतकों का आंकड़ा सात पर पहुंच गया है। जबकि, 45 से ज्यादा नए मामले सामने आए और भारतीय आर्येवेदि‍क अनुसंधान परिषद ( ICMR) के अनुसार संक्रमितों की संख्या 396 पर पहुंच गई। अब तक 18,127 सैंपल लिए गए हैं।

रविवार को कोरोना वायरस से संक्रमित तीन लोगों की मौत हो गई। इसी के साथ मौत का आंकड़ा सात तक पहुंच गया है। ...

संक्रमित लोगों में 41 विदेशी नागरिक

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य स्वास्थ्य विभागों के मुताबिक संक्रमित लोगों में 41 विदेशी नागरिक हैं। 24 लोग अब तक ठीक हो चुके हैं। जबकि, सात लोगों की जान जा चुकी है। कोरोना वायरस से महाराष्ट्र में दूसरी मौत हुई है। जबकि, बिहार और गुजरात में पहली मौत हुई है। बिहार में पटना के एम्स मे 38 साल के व्यक्ति की मौत हुई है, वह हाल ही में कतर से लौटा था और उसे किडनी की बीमारी थी। लेकिन गुजरात के सूरत में 67 साल के जिस बुजुर्ग की मौत हुई है, वो न तो विदेश गए थे और न ही विदेश से लौटे किसी व्यक्ति के ही सीधे संपर्क में आए थे। वो हाल ही में दिल्ली और जयपुर लौटे थे। हालांकि, उनकी किडनी खराब थी और अस्थमा की बीमारी थी। इसके अलावा दिल्ली, कर्नाटक और पंजाब में एक-एक व्यक्ति की जान जा चुकी है।

महाराष्ट्र में 10 नए मामले

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग राजेश टोपे ने बताया कि राज्य में एक दिन में 10 नए केस सामने आए हैं और पीड़ि‍तों की सख्या 74 हो गई है जो देश में सबसे ज्यादा है। इनमें तीन विदेशी हैं। केरल की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने रविवार को तिरुअनंतपुरम में कहा कि राज्य में कोरोना पॉजिटिव के 15 नए मामले सामने आए। इनको मिलाकर राज्य में संक्रमितों की संख्या 67 हो गई है, जिसमें सात विदेशी हैं। दिल्ली में एक विदेशी समेत 27 और उत्तर प्रदेश में रविवार को एक नया मामला सामने आया। राज्य में एक विदेशी समेत 29 लोग अभी तक संक्रमित पाए गए हैं। बिहार में एक महिला को भी संक्रमित पाया गया है।

अन्‍य राज्‍यों में भी मामले बढ़े

राजस्थान में 24 लोग पॉजिटिव मिले हैं, जिनमें दो विदेशी भी हैं। तेलंगाना में 11 विदेशियों समेत 21 लोग पीड़ित पाए गए हैं। हरियाणा में 14 विदेशियों समेत संक्रमितों की संख्या 17 है। कर्नाटक में रविवार को छह नए मामले दर्ज किए गए और इनकी संख्या 26 हो गई है। पंजाब में सात नए मामले मिले हैं और संक्रमितों की संख्या 21 हो गई है। लद्दाख में 13, गुजरात में 18, तमिलनाडु में दो विदेशियों समेत छह केस अभी तक मिले हैं। चंडीगढ़ में रविवार को एक नया केस सामने आया और संक्रमितों की संख्या छह हो गई।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक महिला की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है और राज्य में संक्रमितों की संख्या पांच हो गई है। बंगाल में रविवार की तीन नए मामले मिले और यहां आंकड़ा सात पर पर पहुंच गया, जबकि, जम्मू-कश्मीर में अभी तक चार केस पाए गए हैं। जबकि, आंध्र प्रदेश व उत्तराखंड में तीन-तीन, ओडिशा व हिमाचल प्रदेश में दो-दो और पुडुचेरी, असम व छत्तीसगढ़ में अभी तक एक-एक मामला सामने आया है।

गुजरात में संक्रमितों के नाम घोषित किए जाएंगे

गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा है कि राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के नाम सार्वजनिक करने का फैसला किया गया है, ताकि इन लोगों के संपर्क में आए दूसरे लोग सतर्क हो जाएं और उसके हिसाब से आगे की कार्रवाई करें। राज्य सरकार ने लोगों से अपने स्तर से ही एहतियाती कदम उठाने को कहा है। सरकारी स्तर पर राज्य के चार शहरों अहमदाबाद, सूरत, राजकोट और वडोदरा को पहले ही लॉकडाउन करने की घोषणा कर दी गई थी।

कोरोना की दहशत

- गोवा ने जनता कर्फ्यू को 25 मार्च तक बढ़ाया

- नगालैंड में रविवार मध्यरात्रि से अनिश्चित काल के लिए लॉकडाउन

- मेघालय में दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों के प्रवेश पर पाबंदी

- कार निर्माता कंपनी मारुति ने गुरुग्राम व मानेसर प्लांट में उत्पादन रोका

- कोलकाता समेत बंगाल के कई हिस्से सोमवार शाम से 27 मार्च तक लॉकडाउन

- मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों से 31 मार्च तक घर से काम करने को कहा गया

- अर्धसैनिक बलों ने जवानों के मूवमेंट पर पांच अप्रैल तक रोक लगाई

- भारतीय बैंक संगठन ने लोगों से नोट छूने के बाद हाथ धोने को कहा है

- भारतीय खेल प्राधिकरण के परिसर क्वारंटाइन सेंटर बनाए जाएंगे

कोरोना का कहर

महाराष्ट्र -74 (तीन विदेशी)

केरल - 67 (सात विदेशी)

उत्तर प्रदेश - 29 (तीन विदेशी)

दिल्ली - 27 (एक विदेशी)

कर्नाटक - 26

राजस्थान - 24 (दो विदेशी)

तेलंगाना - 21 (11 विदेशी)

पंजाब - 21

गुजरात - 18

हरियाणा - 17 (14 विदेशी)

लद्दाख - 13

बंगाल - 7

तमिलनाडु - 6

चंडीगढ़ - 6

मध्य प्रदेश - 5

जम्मू-कश्मीर - 4

आंध्र प्रदेश - 3

उत्तराखंड - 3

ओडिशा - 2

हिमाचल प्रदेश- 2

बिहार -2

पुडुचेरी - 1

छत्तीसगढ़ -1

असम - 1

यूपी सरकार उर्वरक केंद्रों को देगी सैनिटाइजर की सुविधा।किसान उदगार22 March, 2020 15:16  IST इस वक्त पूरी दुनिया कोरोना व...
22/03/2020

यूपी सरकार उर्वरक केंद्रों को देगी सैनिटाइजर की सुविधा।

किसान उदगार
22 March, 2020 15:16 IST

इस वक्त पूरी दुनिया कोरोना वायरस के कहर को झेल रही है. देशभर में वायरस से बचने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं. इसके फैलाव को कम करने के लिए सरकार प्रतिदिन नया और ठोस कदम उठा रही है. इसके संक्रमण को रोकने के लिए सरकारें कड़ी सावधानियां बरत रही हैं. इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम फैसला लिया है.

दरअसल, आज के दौर में आधुनिक तकनीक का अधिक उपयोग किया जा रहा है. कृषि क्षेत्र में भी किसानों को सराकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए आधार कार्ड द्वारा उंगलियों के निशान लिए जाते हैं. इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाती है. इस समय कोरोना वायरस का संक्रमण अधिक फैल रहा है. ऐसे में डर बना हुआ है कि कहीं किसानों की उंगलियों के निशान लेने से इसका खतरा और बढ़ न जाए. इसके चलते ही किसानों के उंगलियों के निशान लेने वाली प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. इतना ही नहीं, जहां किसानों की उंगलियों के निशान लेना बेहद जरूरी है, वहां सरकार सैनिटाइजर की व्यवस्था उपलब्ध करा रही है.

पी.ओ.एस. मशीन को किया जाएगा सैनिटाइज
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही का कहना है कि सभी उर्वरक बिक्री केन्द्र को सैनिटाइज जरूर किया जाए और सेनेटाइजर भी रखे . इसके साथ ही किसानों को भी ध्यान रखना है कि जब वह उर्वरक खरीद रहे हों, तो उस समय अपने हाथों और उर्वरक को सैनिटाइज जरूर करें. जानकारी के लिए बता दें कि किसानों को उर्वरक खरीदने के लिए पी.ओ.एस. मशीन पर अंगूठा लगाने की आवश्यकता पड़ती है. ऐसे में कोरोना वायरस फैलने की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए जरूरी है कि सभी उर्वरक बिक्री केन्द्र पर सैनिटाइजर किया जाए.

कृषि मंत्री के इन निर्देशों को ध्यान में रखते हुए, लखनऊ जिला अधिकारी ने जनपद के सभी थोक और फूटकर उर्वरक विक्रेताओं को निर्देशित किया है कि वे अपने उर्वरक केंद्र को सैनिटाइज जरूर करें. इसके साथ ही उर्वरक खरीदने आए किसानों को सबसे पहले सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने को कहें. इसके बाद ही पी.ओ.एस. मशीन में अंगूठा लगवाएं. इसके साथ ही यह निर्देश भी दिया गया है कि इन आदेशों का सख्ती से पालन किया जाए. अगर इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बरती गई, तो उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी.

अकेले ही इस राज्य में किसानों के लिए जारी हुआ 12,478 करोड़ोंकिसान उदगार21 March, 2020 23:38  IST  किसानों की सहायता के ल...
21/03/2020

अकेले ही इस राज्य में किसानों के लिए जारी हुआ 12,478 करोड़ों

किसान उदगार
21 March, 2020 23:38 IST

किसानों की सहायता के लिए सीधे उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर के माध्यम से भेजी जाने वाली पीएम-किसान सम्मान निधि योजना की राशि का इस बार सबसे ज्यादा लाभ उत्तर प्रदेश को मिला है. अबतक उत्तर प्रदेश सरकार 1.89 करोड़ किसानों को इस योजना का लाभ दिलवा चुकी है.

बता दें कि यह रकम देश के किसानों को मिली कुल रकम का चौथा हिस्सा है जो उत्तर प्रदेश को मिला है. केंद्र सरकार के द्वारा जारी 11 मार्च के आकड़ों के अनुसार देश में पीएम किसान सम्मान निधि योजना के लिए 52,659 करोड़ रुपये दिए गए हैं जिसमें 12,478 करोड़ अकेले उत्तर प्रदेश के लिए हैं. केरल को 2088 करोड़ रुपये और पंजाब को 1478 करोड़ रुपये योजना के तहत दिए गए हैं. पीएम किसान सम्मान निधि योजना की अनौपचारिक रूप से शुरुआत तो 1 दिसंबर 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने की. इस योजना की औपचारिक शुरुआत 24 फरवरी 2019 को उत्तर प्रदेश गोरखपुर से हुई. अब तक उत्तर प्रदेश इस योजना का सबसे ज्यादा लाभ लेने वाला प्रदेश बन गया है. अकेले गोरखपुर जिले के 4,10,321 किसान इस योजना का लाभ उठा चुके हैं. इस योजना के तहत 2-2 हजार रुपये की सहायता राशि किसानों को दी जाती है.

कैसे करें आवेदन
यदि आप इस पीएम किसान योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो बैंक खाते की पासबुक, आधार कार्ड और पैन कार्ड की एक छायाप्रति लेकर कमान सर्विस सेंटर पर जाए. कमान सर्विस सेंटर पर बैठे कर्मचारी को इस योजना के लिए आवेदन करने को कहें. यदि आप कमान सर्विस सेंटर नहीं जाना चाहते तो आप अपने मोबाइल और सिस्टम से https://www.pmkisan.gov.in/ लिंक पर विजिट कर आवेदन कर सकते हैं. जब आप आवेदन कर रहे हों तो जरूरी दस्तावेज़ जैसे बैंक खाते की पासबुक, आधार कार्ड और पैनकार्ड अपने पास रखें.

कोरोना से मिल रहा है भारत के किसानों को मुनाफा।किसान उदगार21 March, 2020 23:05  IST कोरोना वायरस ने भले ही देश में  तबाह...
21/03/2020

कोरोना से मिल रहा है भारत के किसानों को मुनाफा।

किसान उदगार
21 March, 2020 23:05 IST

कोरोना वायरस ने भले ही देश में तबाही मचा रखी हो लेकिन देश के किसानों मैं वायरस को लेकर चिंता कम तथा अपने फसलों को मंडियों में ऊंचे दामों पर बेचने की होड़ लगी हुई है ऐसी परिस्थिति में देश के सब्जी वह फलों के किसान को अधिक मुनाफा मिल रहा है लोगों के अंदर सामान वह सब्जी तथा फल ज्यादा मात्रा में खरीद कर स्टॉक करने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हो गई जिससे उत्पादन के साथ-साथ मूल्य वृद्धि वह मांग अधिक होने से किसानों को अधिक लाभ मिल रहा है इसका जीता जागता उदाहरण महाराष्ट्र के अमरावती के संतरा के मूल्यों में उछाल देखने को मिल रहा है. यह उछाल 30 से 40 प्रतिशत है इस वायरस से दुनिया भर के शेयर मार्केट ठप पड़े हैं. लेकिन विदर्भ के किसान संतरों के बढ़े भाव को लेकर बेहद खुश हैं.

विदर्भ के नागपुर और अमरावती के संतरों के मूल्यों 40 प्रतिशत तक उछाल देखा गया है. संतरा उत्पादन करने वाले किसानों का मानना है कि 8 से 10 दिनों पहले संतरों के दाम 1500 रुपये प्रति क्विंटल थे. वहीं अब मूल्य 2500 से 2800 रुपये प्रति क्विंटल है. विदर्भ का संतरा देश के चारों हिस्सों के अलावा बांग्लादेश और दुनिया के दूसरे देशों में भी भेजा जा रहा है.

बता दें आमतौर पर सूखे की मार झेलने वाले विदर्भ के किसानों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. लेकिन दुनिया के लिए एक बड़ी मुसीबत बन चुका कोरोना वायरस संतरा किसानों के लिए राहत लाया है. आज बड़े पैमाने पर व्यापारी किसनों का संतरा अच्छे दामों पर खरीद रहे हैं. इससे किसानों को काफी फायदा हो रहा है.

कोरोना के कारण दुनिया भर की आर्थिक हालात बिगड़ती जा रही है. फलों का राजा आम, केले और कपास दूसरे देशों में भेजा जाता है. इन फ़लों के आयात और निर्यात पर असर देखने को मिल रहा है. लेकिन विदर्भ के अमरावती का संतरा दूसरे देशों में बढ़े दामों में भी खरीदा जा रहा है और इसकी डिमांड बढ़ती जा रही है.

संतरे पर खोज करने वाले कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का मानना कि संतरे में विटामिन C पाया जाता है. जो शरीर की इम्युनिटी बढ़ाता है. इससे कोरोना खतरनाक जानलेवा बीमारी से लड़ने में मदद मिल सकती है. इसलिए संतरे की डिमांड बढ़ती नजर आ रही है.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना : 25 मार्च तक किसानों को मिलेगा ब्याज समेत फसल बीमा क्लेम का भुगतान।किसान उदगार21 March, 202...
21/03/2020

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना : 25 मार्च तक किसानों को मिलेगा ब्याज समेत फसल बीमा क्लेम का भुगतान।

किसान उदगार
21 March, 2020 10:25 IST

उत्तर भारत के कई राज्यों में किसानों के खेतों में खड़ी फसल को बारिश और ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ है. इन फसलों में गेहूं, दलहनी, तिलहनी समेत सब्जियों की कई फसलें शामिल हैं. ये सभी फसलें कटाई के समय बर्बाद हुई हैं. अब किसानों को चिंता और बढ़ गई है कि उन्हें मौसम की वजह से जो हानि हुई है, उससे फसल में लगने वाली लागत भी नहीं निकल पाएगी. ऐसे में किसानों का साथ देने के लिए यूपी सरकार (UP Government) का प्रयास लगातार जारी है. जिन किसानों के पास फसल बीमा है, उन्हें जल्द ही बीमा राशि देने का प्रयास किया जा रहा है.

यूपी सरकार का निर्देश
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही (Agriculture Minister Surya Pratap Shahi) ने बीमा कंपनियों को निर्देश दिया है कि बीमा कंपनी केवल 15 दिनों में सर्वे का काम पूरा करके फसल नुकसानी का भुगतान करे. इसकी समीक्षा में कृषि विभाग के अधिकारी, बीमा कंपनियां जुटी हैं. इसी दैरान बीमा कंपनियों को निर्देशित किया गया है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Prime Minister Fasal Bima Yojana) के तहत 15 दिन के अंदर सर्वे का काम खत्म करके किसानों को भुगतान कर दिया जाए.

ब्याज के साथ मिलेगा भुगतान

कृषि मंत्री ने बीमा कंपनियों को निर्देश दिया है कि आने वाली 25 मार्च तक किसानों को ब्याज समेत किसानों को बर्बाद हुई फसल का भुगतान किया जाए. अगर बीमा कंपनी ऐसा नहीं करती हैं, तो उन पर सख्त करवाई की जाएगी.

World Sparrow Day: जानें! गौरैया से जुड़ी कुछ अनोखी और दिलचस्प बातें...किसान उदगार20 March, 2020 21:39  ISTगौरैया का नाम ...
21/03/2020

World Sparrow Day: जानें! गौरैया से जुड़ी कुछ अनोखी और दिलचस्प बातें...

किसान उदगार
20 March, 2020 21:39 IST

गौरैया का नाम तो आपने सुना ही होगा. कुछ लोग तो ऐसे भी होंगे, जिन्होंने केवल नाम ही सुना होगा. जी हां, आपने सही सुना, क्योंकि अब जगह-जगह अपनी मीठी आवाज़ से लोगों का दिल जीतने वाली यह नन्हीं चंचल चिड़िया विलुप्त होती जा रही है. वहीं कुछ लोग इन्हें बचाने के लिए मुहिम भी चला रहे हैं. ऐसे ही कुछ लोगों और संस्थाओं की वजह से आज आपको शायद कहीं यह गौरैया देखने को मिल जाए. इन्हीं को बचाने के लिए 20 मार्च गैरैया संरक्षण दिवस के रूप में मनाया जाता है. आइए आपको इनसे जुड़ी कुछ अनोखी और दिलचस्प बातें बताते हैं-

sparrow
गौरैया पर्यावरण संरक्षण और हम मनुष्यों की सच्ची साथी है जिसकी अलग ही भूमिका है. प्रसिद्ध पर्यावरणविद मो. ई दिलावर की कोशिश और पहल की वजह से ही इस दिन को दुनियाभर में मनाया जाने लगा.

इसका जीवनकाल लगभग दो साल का होता है और यह पक्षी ज्यादा तापमान में नहीं रह सकते.

यह होम स्पैरो (home sparrow) के नाम से जानी जाती है और लगभग छह अंडे देती है.

आपको बता दें कि आंध्र यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के मुताबिक गौरैया की आबादी में लगभग 60 फीसदी से अधिक की कमी पाई गई है.

ब्रिटेन की ‘रॉयल सोसाइटी ऑफ़ प्रोटेक्शन ऑफ़ बर्ड्स‘ ने इस चुलबुली और चंचल पक्षी को ‘रेड लिस्ट‘ में शामिल कर दिया है.

ये शहरी इलाकों से ज़्यादा यह गांव-देहात में पाई जाती हैं. ग्रामीण इलाकों में भी पेड़ काटे जा रहे हैं. इसके चलते अब वहां भी ये कम ही देखने को मिलती हैं.

गांव में कच्चे, यानी मिटटी के मकान गौरैया के लिए प्राकृतिक वातावरण हुआ करते थे. वहीं पेड़ों को काटकर बनी बड़ी-बड़ी इमारतों और मकानों ने इस चिड़िया के घर छीन लिए हैं.

गौरैया का मनपसंद भोजन घास के बीज हैं. इस समय गौरैया के लिए सबसे बड़ा खतरा कीटनाशक हैं. रसायन के उपयोग से फसलों और खेतों के कीट नष्ट हो जाते हैं, और इसी के चलते इनका भोजन भी इन्हें नहीं मिल पाता है. ऐसे में इनके लिए भोजन का भी संकट खड़ा हो गया है.

Kisan Panjikaran: अब उंगलियों की जगह मोबाइल ओटीपी से होगा किसान पंजीकरणकिसान उदगार19 March, 2020 10:12  IST Kisan Panjik...
20/03/2020

Kisan Panjikaran: अब उंगलियों की जगह मोबाइल ओटीपी से होगा किसान पंजीकरण

किसान उदगार
19 March, 2020 10:12 IST
Kisan Panjikaran


दुनियाभर में कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. इसके असर से लोगों को बचाने के लिए सरकार कई अहम कदम उठा रही है. हमारा देश भी इसकी चपेट में आ रहा है. कोरोना वायरसमें र इसकी चपेट में आ रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में न फैल पाए, इसके लिए राज्य की सरकारें कई कदम उठा रही हैं. इसी कड़ी में राजस्थान के किसानों के लिए एक अहम खबर सामने आई है. दरअसल, अब किसानों का पंजीकरण मोबाइल पर आने वाले ओटीपी द्वारा कराया जाएगा. सरकार ने निर्देश दिए हैं कि इस प्रक्रिया का सावधानी से उपयोग किया जाए.

राजस्थान सरकार ने लगाई रोक
रबी फसलों को खरीदने के लिए समर्थन मूल्य योजना के तहत पंजीकरण करवाए जा रहे हैं. हमेशा की तरह किसानों का पंजीकरण बायोमैट्रिक से किया जाना था, लेकिन देश में तेजी से फैल रहे करोना वायरस की वजह से इस प्रक्रिया पर रोक लगाई गई है. बता दें कि किसान के पंजीकरण में अंगूठे को स्कैन करना पड़ता है, लेकिन इससे कोरोना वारयस फैलने की संभावना हो सकती है. यही मुख्य कारण है कि राज्य सरकार ने इस पर रोक लगा दी है.राज्य में सरसों और चने की समर्थन मूल्य पर खरीद चल रही है. इसके लिए 18 मार्च से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं. इसी दौरान कोरोना वायरस के संक्रमण का फैलाव बढ़ता जा रहा है, इसलिए बायोमैट्रिक से होने वाले पंजीयन में परिवर्तन कर दिया गया है. अब किसानों के पंजीकरण मोबाइल पर आने वाली ओटीपी से होंगे.

Coronavirus
किसान किस तरह करवाएं पंजीकरण
किसान फसल का पंजीयन ई-मित्र से करवा सकते हैं. इसके लिए किसानों को उंगलियों के निशान की जगह मोबाइल नम्बर पर आने वाले एक कोड की जरूरत पड़ेगी. इस कोड के माध्यम से किसान समर्थन मूल्य पर चना और सरसों बेचने के लिए पंजीकरण कर सकते हैं.

किसान पंजीकरण का समय
किसान पंजीकरण सुबह 9 बजे से शुरू होकर शाम 7 बजे तक होगा. किसान की कृषि भूमि जिस तहसील में आती है, उसी तहसील में आने वाले खरीद केन्द्र का चयन रजिस्ट्रेशन में करना है.

OTP
किसान पंजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेज़
आधार कार्ड

जनआधार कार्ड

फसल संबंधी दस्तावेज

खाते की पासबुक की फोटोकॉपी

गिरदावरी के पी-35 का क्रमांक और दिनांक

किसान पंजीकरण के लिए कितना पैसा दें
किसान पंजीकरण करवाने के लिए करीब 31 रुपये का भुगतान करना पड़ेगा.

अन्य जरूरी जानकारी
किसान को भामाशाह कार्ड से संबद्ध बैंक खाते का विवरण सही से जांच लेना चाहिए.

अगर कार्ड में बैंक खाते का विवरण गलत है, तो उसे पंजीकरण से पहले ठीक करा लें.

पंजीकरण के समय बैंक खाता संख्या जांच लें.

अपनी पंजीकरण सही ढंग से अपलोड करवाएं, जिससे भुगतान मिलने में कोई परेशानी न हो.

ये खबर भी पढ़ें: पशुपालकों के लिए दूध की चक्की मशीन की जानकारी, सरकार दे सकती है 50 प्रतिशत की सब्सिडी

जैव कीटनाशकों और उर्वरकों की उपयोग के प्रोत्साहन हेतु सरकार दे रही 50 हजार रुपये की सहायताकिसान उदगार15 March, 2020 12:5...
15/03/2020

जैव कीटनाशकों और उर्वरकों की उपयोग के प्रोत्साहन हेतु सरकार दे रही 50 हजार रुपये की सहायता

किसान उदगार
15 March, 2020 12:50 IST

Agriculture Minister Narendra Singh Tomar

कृषि क्षेत्र में जैविक कीटनाशक दवाइयों के उपयोग को प्रोत्साहन देने के लिए केन्द्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति ने रासायनिक कीटनाशकों की तुलना में जैव कीटनाशकों के पंजीकरण के लिए सरल दिशा-निर्देश जारी किए हैं. कीटनाशक अधिनियम, 1968 की धारा 9 (3 बी) के अंतर्गत अनंतिम पंजीकरण के दौरान आवेदक को रसायनिक कीटनाशकों के विपरीत जैविक कीटनाशकों की व्यावसायिक बिक्री की अनुमति होगी.

रसायन मुक्त कृषि उत्पादन को बढ़ावा (Chemical free agricultural production boosted)
भारत सरकार परम्परागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई), पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन (एमओवीसीडीएनईआर) और पूंजीगत निवेश सब्सिडी योजना (सीआईएसएस) की जैविक कृषि योजना के माध्यम से पर्यावरण अनुकूल प्रक्रियाओं के साथ टिकाऊ कृषि उत्पादन की दिशा में काम कर रही है. इनके माध्यम से जैविक बीज और खाद के इस्तेमाल तथा रसायन मुक्त कृषि उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है. इससे लोगों की सेहत में भी सुधार होगा.

Chemical free agricultural production boosted

परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की सहायता
परम्परागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत 3 साल की अवधि के लिए प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिसमें से डीबीटी के माध्यम से किसानों को 31 हजार रुपये (62 प्रतिशत) उपलब्ध कराए जा रहे हैं. यह सहायता जैव उर्वरकों, जैव कीटनाशकों, वर्मीकम्पोस्ट, वानस्पतिक अर्क, उत्पादन/खरीद, फसल बाद प्रबंधन आदि के लिए दी जा रही है.

पूर्वोत्तर क्षेत्र जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन के तहत 25 हजार रुपये की सहायता
एमओवीसीडीएनईआर के अंतर्गत जैविक सामग्रियों, बीज/पौध रोपण सामग्री के वास्ते 3 साल के लिए प्रति हेक्टेयर 25 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है.

Traditional agricultural development plan MOVCDNER

व्यक्तिगत/निजी एजेंसियों लागत की 25 प्रतिशत तक सहायता (Personal / private agencies assistance up to 25% of the cost)
पूंजीगत निवेश सब्सिडी योजना के अंतर्गत भारत सरकार सालाना 200 टन क्षमता वाली जैविक उर्वरक इकाई की स्थापना के लिए राज्य सरकार/सरकारी एजेंसियों को 160 लाख रुपये प्रति यूनिट की अधिकतम सीमा के आधार पर 100 प्रतिशत सहायता उपलब्ध कराकर जैविक उर्वरकों के उत्पादन को प्रोत्साहन दे रही है. इसी प्रकार व्यक्तिगत/निजी एजेंसियों को पूंजी निवेश के रूप में 40 लाख रुपये प्रति यूनिट की सीमा के साथ लागत की 25 प्रतिशत तक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. यह सहायता राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है.

योजनाओं के अंतर्गत व्यय (Expenditure under schemes)
परम्परागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत पिछले 3 साल (2016-17, 2017-18, 2018-19) और वर्तमान वर्ष (2019-20) के दौरान क्रमशः 152.82 करोड़ रुपये, 203.46 करोड़ रुपये, 329.46 करोड़ रुपये और 226.42 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है. तो वहीं एमओवीसीडीएनईआर के अंतर्गत पिछले 3 साल (2016-17, 2017-18, 2018-19) और वर्तमान वर्ष (2019-20) के दौरान क्रमशः 47.63 करोड़ रुपये, 66.22 करोड़ रुपये, 174.78 करोड़ रुपये और 78.83 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है. इसके अलावा पूंजीगत निवेश सब्सिडी योजना के अंतर्गत 2016-17 और 2017-18 के दौरान नाबार्ड ने कोई धनराशि का वितरण नहीं किया. हालांकि 2018-19 के दौरान 276.168 लाख रुपये का वितरण किया गया.

Organic manure

जैव कीटनाशकों के उपयोग को प्रोत्साहन (Promotion of use of bio-pesticides)
जैव कीटनाशकों के उपयोग को प्रोत्साहन देने के लिए एकीकृत पेस्ट प्रबंधन योजना के अंतर्गत किसान क्षेत्र विद्यालय (फार्मर फील्ड स्कूल) और मानव संसाधन विकास कार्यक्रम (2 और 5 दिन) के माध्यम से किसानों को शिक्षित किया जा रहा है. केन्द्र और राज्य सरकारों की प्रयोगशालाओं में भी जैव कीटशानकों (ट्राइकोडर्मा, मेटाझिझियम, ब्यूवेरिया आदि) का विस्तार और उनका किसानों को वितरण किया जा रहा है. एकीकृत पेस्ट प्रबंधन के अंतर्गत बीते 5 साल (2015-16 से 2019-20) के दौरान 3472 फार्मर फील्ड स्कूल और 647 मानव संसाधन विकास कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है. इनके माध्यम से 1,04,160 किसानों और 25,880 कीटनाशक विक्रेता और राज्य सरकार के अधिकारी प्रशिक्षण हासिल कर चुके हैं.
उपरोक्त सभी जानकारी केन्द्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को राज्य सभा में एक लिखित जवाब के माध्यम दिया.

कपास निर्यात पर कोरोना वायरस का नहीं पड़ेगा असर, CAI की रिपोर्ट आयी सामनेकिसान उदगार14 March, 2020 10:15  ISTकपास की खेती...
14/03/2020

कपास निर्यात पर कोरोना वायरस का नहीं पड़ेगा असर, CAI की रिपोर्ट आयी सामने

किसान उदगार
14 March, 2020 10:15 IST

कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए एक अच्छी खबर सामने आयी है. भारतीय कपास संघ यानी सीएआई ने हाल ही में एक रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट से किसानों को राहत मिली है. जहां हर तरफ कोरोना वायरस के कहर से सभी क्षेत्र प्रभावित हुए हैं, वहीं कपास उद्योग पर इसका असर नहीं पड़ेगा.

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Cotton Association of India) की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस (coronavirus) के प्रकोप का कपास निर्यात (cotton export) पर ख़ास असर नहीं पड़ेगा. कॉटन एसोसिएशन की मानें तो उम्मीद लगाई जा रही है कि चालू सत्र में कपास का कुल निर्यात लगभग 42 लाख गांठ रहेगा. आपको बता दें कि कपास सत्र अक्टूबर से शुरू होता है. वहीं Cotton Association of India (CAI) के अध्यक्ष अतुल गणात्रा ने भी पीटीआई भाषा से हुई बातचीत के दौरान कहा है कि कोरोना वायरस के प्रकोप से कपास का निर्यात ज्यादा प्रभावित नहीं होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले साल यानी 2019 में कपास का ज्यादा निर्यात नहीं किया गया था. पिछले साल की बात करें तो चीन को केवल 8 लाख गांठ कपास ही निर्यात किया गया था.


फरवरी के अंत में पहले ही निर्यात किया जा चुका है कपास
वहीं साल 2020 की बात करें तो फरवरी 2020 के अंत तक संगठन ने लगभग 6 लाख गांठ का निर्यात किया हुआ है. अध्यक्ष का कहना है कि बांग्लादेश के साथ कई और बाज़ारों से भी कपास की मांग बढ़ी है. इसी तरह वियतनाम और इंडोनेशिया को भी 5-5 लाख गांठ कपास का निर्यात किया जा चुका है. चालू सत्र में संगठन के पास अभी 6 महीने का समय और है. ऐसे में संगठन का मानना है कि वह बड़ी ही आसानी से कपास निर्यात का अपना निर्धारित लक्ष्य पूरा कर सकेगा.

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