27/01/2026
इस Republic Day कुछ अलग किया।
Na parade, na speeches — इस बार सुबह बिताई Sanatan Dharam Sanskrit Mahavidyalaya, हल्द्वानी में। एक ऐसी जगह, जिसकी नींव मेरे पूर्वजों ने रखी थी। लेकिन समय के साथ, और modern life की दौड़ में, कहीं न कहीं वो जुड़ाव खो गया था।
पर जड़ें कभी भूलती नहीं…!
इस साल सोचा, चलो फिर से जुड़ा जाए। और जो देखा, वो दिल को छू गया। दूर-दराज़ के गाँवों से आए छात्र Sanatana Dharma और संस्कृत की पढ़ाई में रमे हुए। ये सिर्फ छात्र नहीं हैं… ये हमारे सभ्यता के वो प्रहरी हैं, जो सदियों पुराना ज्ञान संजो कर आगे बढ़ा रहे हैं।
इन जैसे schools शायद headlines में नहीं आते लेकिन ये हमारी cultural continuity के असली स्तंभ हैं। एक श्लोक, एक गुरु, एक कक्षा के ज़रिए पूरी सभ्यता को जीवित रखे हुए हैं।
एक बात बहुत गहराई से महसूस हुई.. अगर हम, जो सक्षम हैं, पढ़े-लिखे हैं, और थोड़ी बहुत पहुँच रखते हैं… अगर हम हाथ नहीं बढ़ाएँगे, तो कौन बढ़ाएगा?
Modern India को सिर्फ technology या economy नहीं बनाएगी, उसे अपनी spiritual और cultural roots भी चाहिए। ज़रूरत है progress के साथ-साथ preservation की।
आप सभी से विनम्र अनुरोध है ऐसे संस्थानों को support करें। समय दें, resources दें, या बस जुड़ें। Sanatana ke social fibre को फिर से मजबूत करना हम सबकी ज़िम्मेदारी है।
दिल से आभार उन शिक्षकों और विद्यार्थियों का, जिन्होंने मुझे इतने खुले दिल से अपनाया।
जय हिन्द 🇮🇳