Dhaneta Diaries

Dhaneta Diaries जिंदगी की पिच में जरा ध्यान से खेलना,
सबसे करीब खड़े लोग ही स्टंपिंग करते है! DM for paid promotion

DD - 304पीपलू मेला, हिमाचल प्रदेश के पीपलू  (बंगाणा उपमंडल) में आयोजित होने वाला एक प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक सांस्कृतिक मेल...
07/06/2026

DD - 304
पीपलू मेला, हिमाचल प्रदेश के पीपलू (बंगाणा उपमंडल) में आयोजित होने वाला एक प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक सांस्कृतिक मेला है। यह मेला प्रतिवर्ष निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर बड़े हर्षोल्लास, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
इस मेले में क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक आस्थाओं की अनूठी झलक देखने को मिलती है। दूर-दूर से श्रद्धालु एवं पर्यटक यहां पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं तथा लोक संगीत, लोक नृत्य, खेलकूद प्रतियोगिताओं और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद उठाते हैं।
पीपलू मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह स्थानीय कला, संस्कृति और सामाजिक एकता को भी बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यह मेला क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को संजोए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
इस बर्ष तीन दिवसीय ऐतिहासिक पीपलू मेले का आयोजन 24, 25 एवं 26 जून 2026 को किया जा रहा है, जिसमें आप सभी सादर आमंत्रित हैं। 🙏🎉
#धनेटा

💔❤️ क्या आरव और काव्या की कहानी अब एक नए मोड़ पर पहुँचने वाली है? ❤️💔एक ट्रेन में हुई अनोखी मुलाकात... 🚂फिर हमीरपुर के ह...
06/06/2026

💔❤️ क्या आरव और काव्या की कहानी अब एक नए मोड़ पर पहुँचने वाली है? ❤️💔

एक ट्रेन में हुई अनोखी मुलाकात... 🚂

फिर हमीरपुर के होली मेले में किस्मत ने उन्हें दोबारा मिला दिया... 🎨😍

लेकिन अब कहानी में आने वाला है ऐसा मोड़ जो उनके रिश्ते को हमेशा के लिए बदल सकता है!

😲 काव्या के घर अचानक एक रिश्ता क्यों आया?

😔 आरव के पिता उससे कौन सी गंभीर बात करने वाले हैं?

❤️ क्या दोस्ती अब प्यार में बदलने वाली है?

या फिर...

💔 किस्मत फिर से उन्हें एक-दूसरे से दूर कर देगी?

अगर आपने अभी तक Episode 1 - "ट्रेन वाली मुलाकात" और Episode 2 - "होली मेले में दोबारा सामना" नहीं पढ़े हैं, तो पहले उन्हें जरूर पढ़ें। Link in comment

क्योंकि Episode 3 में शुरू होगी आरव और काव्या की कहानी का सबसे खूबसूरत और सबसे भावुक सफर... ❤️

📖 Episode 3 Coming Soon...

🔥 कमेंट में बताइए —

क्या आपको लगता है कि आरव और काव्या एक-दूसरे से प्यार करने लगे हैं?

👇 अपनी राय जरूर दें और पोस्ट को शेयर करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस खूबसूरत हिमाचली प्रेम कहानी का हिस्सा बन सकें।

❤️

06/06/2026

DD - 303
गज़ब मौसम हो रखा है एक साइड धूप दूसरी साइड बादल बारिश होगी या फिर मिस कॉल ही है ये उपर वाले की 🤣🤣 कमेन्ट कर के बताएँ
#धनेटा

धनेटा की अपनी कहानियांऐसी ही कहानियों के लिए page को like, share and follow करना ना भूलें।Episode 1 का link comment में ...
05/06/2026

धनेटा की अपनी कहानियां
ऐसी ही कहानियों के लिए page को like, share and follow करना ना भूलें।
Episode 1 का link comment में है

Episode 2 : होली मेले में दोबारा सामना
चार महीने बीत चुके थे।
सर्दियों की वह ट्रेन यात्रा अब केवल एक याद बनकर रह गई थी।
आरव अपने सरकारी नौकरी के सपनों में व्यस्त था और काव्या अपने कॉलेज के अंतिम वर्ष की परीक्षाओं की तैयारी में।
लेकिन कुछ यादें ऐसी होती हैं जो समय के साथ धुंधली नहीं होतीं।
आरव जब भी किताबों से थक जाता, उसे ट्रेन की खिड़की के पास बैठी वह लड़की याद आ जाती।
और काव्या...
वह जब भी पठानकोट-जोगिंदरनगर ट्रेन की सीटी सुनती, उसके चेहरे पर अनजाने में मुस्कान आ जाती।
लेकिन दोनों ने कभी यह स्वीकार नहीं किया कि वे एक-दूसरे को याद करते हैं।
फिर आया मार्च का महीना।
होली का मौसम।
हमीरपुर का प्रसिद्ध होली मेला पूरे जिले में आकर्षण का केंद्र बना हुआ था।
ढोल-नगाड़ों की आवाजें दूर-दूर तक सुनाई दे रही थीं।
बाजार रंगों से सजे हुए थे।
गुजिया, मालपुए और कचौड़ियों की खुशबू हवा में घुली हुई थी।
हिमाचली लोकगीतों की धुनों पर लोग झूम रहे थे।
उसी मेले में काव्या अपनी तीन सहेलियों के साथ पहुंची।
गुलाबी सूट, खुले बाल और चेहरे पर वही चुलबुली मुस्कान।
"आज तो खूब मज़े करेंगे!"
उसकी सहेली रिद्धिमा बोली।
काव्या हँस दी।
"बस कोई मुझे रंग न लगाए।"
"होली के मेले में आई हो और रंग नहीं लगवाओगी?"
"बिल्कुल नहीं।"
उधर दूसरी तरफ...
आरव भी अपने दोस्तों विशाल और करण के साथ मेले में पहुंचा।
"आज तो पूरा हमीरपुर रंग देंगे।"
करण ने पिचकारी लहराते हुए कहा।
"तुम्हें कोई और काम नहीं है?"
आरव हँसा।
तभी भीड़ में धक्का-मुक्की हुई।
किसी की पिचकारी से रंग हवा में उड़ा।
और सीधा जाकर काव्या के चेहरे पर लगा।
"क्या यार!"
काव्या गुस्से में पलटी।
उधर आरव भी उसी दिशा में देखने लगा।
कुछ सेकंड के लिए भीड़ हटी।
और...
दोनों की आँखें मिल गईं।
समय जैसे रुक गया।
"आरव..."
काव्या के होंठों से धीरे से निकला।
"काव्या?"
आरव भी हैरान था।
चार महीने बाद।
बिना किसी उम्मीद के।
सामने वही चेहरा।
वही आँखें।
वही मुस्कान।
लेकिन अगले ही पल काव्या की नजर आरव के हाथ पर गई।
एक लड़की उसका हाथ पकड़े खड़ी थी।
काव्या का चेहरा उतर गया।
दिल में अचानक एक अजीब-सी टीस उठी।
"ओह..."
उसने नजरें फेर लीं।
आरव कुछ समझ नहीं पाया।
तभी वह लड़की हँसते हुए बोली—
"भैया, जल्दी चलो ना!"
काव्या एकदम चौंकी।
"भैया?"
आरव हँस पड़ा।
"मिलो... ये मेरी छोटी बहन अनुष्का है।"
काव्या का चेहरा लाल हो गया।
उसने मन ही मन खुद को डांटा।
"मैं भी ना..."
अनुष्का शरारती अंदाज में बोली—
"ओह्हो... तो यही हैं वो ट्रेन वाली लड़की?"
अब शर्माने की बारी आरव की थी।
"चुप कर पगली।"
काव्या हँसते-हँसते दोहरी हो गई।
"तो तुमने मेरे बारे में घर पर बताया था?"
"बस थोड़ा-सा।"
"थोड़ा-सा?"
अनुष्का बोली—
"भैया ने पूरे दो हफ्ते तक आपका जिक्र किया था।"
अब दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे।
ऐसा लग रहा था जैसे कोई अधूरी कहानी फिर से शुरू हो रही हो।
कुछ देर बाद सभी लोग मेले में घूमने लगे।
झूले।
खाने के स्टॉल।
हस्तशिल्प की दुकानें।
लोकनृत्य।
हर जगह उत्साह था।
आरव और काव्या अनजाने में भीड़ से थोड़ा दूर निकल आए।
"तो कैसी हो?"
आरव ने पूछा।
"अच्छी हूँ।"
"और मुझे भूल गई?"
"किसने कहा?"
आरव चौंका।
काव्या तुरंत बात बदल गई।
"मतलब... ट्रेन वाली घटना याद है।"
"मुझे भी याद है।"
दोनों हँस पड़े।
फिर वे एक दुकान पर रुक गए जहाँ हिमाचली टोपी बिक रही थीं।
दुकानदार बोला—
"भाई साहब, भाभी जी के लिए ले जाइए।"
दोनों एक साथ बोले—
"नहीं!"
दुकानदार मुस्कुराने लगा।
"अभी नहीं होंगी।"
अब दोनों के पास जवाब नहीं था।
शाम ढलने लगी।
मेला और भी खूबसूरत लगने लगा।
रंग-बिरंगी रोशनियाँ जल उठीं।
मंच पर लोकगायक कांगड़ी गीत गा रहे थे।
लोग तालियाँ बजा रहे थे।
काव्या ने धीरे से कहा—
"काश वो ट्रेन का सफर थोड़ा और लंबा होता।"
आरव उसकी तरफ देखने लगा।
"क्यों?"
"क्योंकि कुछ बातें अधूरी रह गई थीं।"
"तो आज पूरी कर लेते हैं।"
पहली बार दोनों की आँखों में एक अलग-सी चमक थी।
ऐसा लग रहा था जैसे दिल कुछ कहना चाहता है लेकिन शब्द अभी तैयार नहीं हैं।
तभी मंच पर उद्घोषणा हुई—
"अब शुरू होगी रंगोत्सव प्रतियोगिता।"
भीड़ उस तरफ दौड़ पड़ी।
अचानक धक्का लगा।
काव्या का संतुलन बिगड़ गया।
वह गिरने ही वाली थी कि आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।
दोनों कुछ सेकंड तक वैसे ही खड़े रहे।
चारों ओर शोर था।
लेकिन उन्हें सिर्फ अपनी धड़कनें सुनाई दे रही थीं।
"थैंक यू।"
काव्या ने धीरे से कहा।
"हमेशा।"
आरव के मुंह से अनजाने में निकल गया।
दोनों फिर चुप हो गए।
रात होने लगी।
अब घर लौटने का समय था।
लेकिन इस बार कोई भी बिना संपर्क के अलग नहीं होना चाहता था।
काव्या मुस्कुराई।
"वैसे इस बार नंबर मांगोगे नहीं?"
आरव हँस पड़ा।
"इस बार मना तो नहीं करोगी?"
"देखते हैं।"
कुछ सेकंड बाद दोनों ने एक-दूसरे के नंबर सेव कर लिए।
उस छोटे-से पल ने दोनों के दिलों में अनगिनत उम्मीदें जगा दीं।
लेकिन किस्मत अभी भी उनकी परीक्षा लेने वाली थी।
जब काव्या घर पहुंची तो उसने देखा कि उसके पिता के साथ एक प्रतिष्ठित परिवार बैठा हुआ है।
सभी लोग उसे गौर से देख रहे थे।
काव्या कुछ समझ नहीं पाई।
उधर आरव अपने कमरे में बैठा मुस्कुरा रहा था।
फोन पर काव्या का नाम देखकर।
उसी समय उसके पिता अंदर आए।
उनके चेहरे पर गंभीरता थी।
"आरव, हमें तुमसे जरूरी बात करनी है।"
आरव ने पहली बार पिता की आवाज में तनाव महसूस किया।
उसे नहीं पता था कि अगले कुछ दिनों में उसकी जिंदगी पूरी तरह बदलने वाली है।

रात को काव्या अपने कमरे में बैठी थी।
बाहर ड्राइंग रूम से कुछ आवाजें आ रही थीं।
"लड़का बहुत अच्छा है..."
"परिवार भी शानदार है..."
"शादी के लिए बिल्कुल सही रिश्ता है..."
काव्या के हाथ से पानी का गिलास छूट गया।
उसकी साँसें तेज हो गईं।
उसी समय उसके फोन पर एक संदेश आया।
भेजने वाला — आरव।
"आज की मुलाकात शायद मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत दिन था..."
काव्या स्क्रीन को देखती रह गई।
एक तरफ नया रिश्ता।
दूसरी तरफ दिल की पहली धड़कन।
और अब उसे फैसला करना था कि वह अपने दिल की सुनेगी...
या अपने परिवार की।
To Be Continued In Episode 3...

DD - 302📢 पंचायत प्रतिनिधियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट🗓️ 15 जून को जिला स्तर पर आयोजित समारोह में कैबिनेट मंत्री नव-निर्व...
05/06/2026

DD - 302
📢 पंचायत प्रतिनिधियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट
🗓️ 15 जून को जिला स्तर पर आयोजित समारोह में कैबिनेट मंत्री नव-निर्वाचित प्रधानों को शपथ दिलाएंगे।
✅ 27 जून को पंचायतों की पहली आधिकारिक बैठक आयोजित होगी।
✅ वार्ड सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह भी 27 जून को संपन्न कराया जाएगा।
🔥 पंचायती राज संस्थाओं के गठन की प्रक्रिया अब तेज़ी से आगे बढ़ रही है।

04/06/2026

DD - 301
लो जी हो गयी धनेटा में भी बारिश शुरू आपके यहां के क्या हाल है कमेन्ट में बताएँ
#धनेटा #गर्मी

04/06/2026

DD - 300
लो जी आ गया इक बार फिर अपना भाई लक्की डॉन सुबह सुबह ही ऑन ड्यूटी
#धनेटा

02/06/2026

DD - 299
काश वो बचपन फिर से लौट आए 😔😢 कौन कौन मिस करता है अपने बचपन को कमेन्ट करें
#धनेटा

02/06/2026

जनहित में जारी कल देवराज जी घलोल वाले रिटायर्ड लाइन मैन जी का पर्स धनेटा बाजार में कहीं गिर गया है उसमे उनके आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस बह अन्य जरूरी कागज भी थे किसी भी भाई को अगर मिले तो कृप्या पुलिस चौकी धनेटा में जमा करा दें धन्यवाद 🙏

DD - 298भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🌹अत्यंत दुःख के साथ सूचित किया जाता है कि रा.वा.मा. पाठशाला धनेटा में कार्यरत डी.पी.ई. श्री...
02/06/2026

DD - 298
भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🌹
अत्यंत दुःख के साथ सूचित किया जाता है कि रा.वा.मा. पाठशाला धनेटा में कार्यरत डी.पी.ई. श्री विनोद कुमार धीमान जी अब हमारे बीच नहीं रहे।
उनका निधन विद्यालय परिवार, विद्यार्थियों एवं समस्त क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका सरल स्वभाव, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन तथा विद्यार्थियों के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने अपने जीवन से अनेक विद्यार्थियों को प्रेरणा दी और शिक्षा तथा खेलों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
"व्यक्ति चला जाता है, लेकिन उसके सद्कर्म और यादें सदैव जीवित रहती हैं।"
ॐ शांति। भावपूर्ण श्रद्धांजलि। 🙏🌹🕯️
#धनेटा #ओमशान्ति

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