30/08/2025
उज्जैन का महाकाल मंदिर, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, आस्था और श्रद्धा का केंद्र है। यहां हर दिन लाखों श्रद्धालु दूर-दराज़ से सिर्फ एक झलक पाने के लिए आते हैं।
लेकिन आज मंदिर परिसर में एक गंभीर मुद्दा खड़ा है – वीआईपी एंट्री।
जहां आम श्रद्धालु घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, कई बार धूप, बारिश और भीड़ में परेशान होते हैं, वहीं वीआईपी पास धारक सीधे अंदर प्रवेश कर जाते हैं।
भक्तों की भावनाओं में यह सवाल उठ रहा है –
क्या भगवान महाकाल केवल वीआईपी के हैं?
क्या साधारण भक्तों की आस्था और समय की कोई कीमत नहीं?
महाकाल का मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, यह आस्था और समानता का प्रतीक है। यहां आने वाला हर व्यक्ति – चाहे गरीब हो या अमीर – भगवान के सामने एक समान होता है।
इसलिए ज़रूरत है कि मंदिर प्रबंधन इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करे।
व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि हर भक्त को सम्मान के साथ दर्शन का अवसर मिले, और महाकाल के दरबार में सबको बराबरी का हक़ मिले।
आख़िरकार, महाकाल का आशीर्वाद सबके लिए है – न कि केवल कुछ चुनिंदा लोगों के लिए।”