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"मस्जिद कार्रवाई पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान: बोले- 'मुसलमान धैर्य रखें, अधिकार छीनने वालों को संविधान सजा देगा'"लखनऊ/उज...
01/10/2026

"मस्जिद कार्रवाई पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान: बोले- 'मुसलमान धैर्य रखें, अधिकार छीनने वालों को संविधान सजा देगा'"

लखनऊ/उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के तहत ऐतिहासिक शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सियासत पूरी तरह गरमा गई है। इस पूरे मामले पर समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने बेहद बड़ा और तीखा बयान दिया है। अखिलेश यादव ने मुस्लिम समाज से शांति और सब्र बनाए रखने की अपील करते हुए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है।

धैर्य रखने की अपील और बीजेपी पर निशाना— अखिलेश यादव के बयान की बड़ी बातें:
सपा प्रमुख द्वारा दिए गए इस बयान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

मुसलमानों से धैर्य रखने की अपील: उज्जैन में मचे बवाल और तनाव के बीच अखिलेश यादव ने कहा, "हमारे मुसलमान भाई धैर्य रखें। किसी के बहकावे में न आएं, उनके अधिकार छीनने वालों को संविधान और कानून सजा देगा।"

संविधान पर भरोसा रखने की बात: उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा न्यायपालिका और संविधान के जरिए ही संभव है, इसलिए कानूनी दायरे में रहकर ही बात रखी जानी चाहिए।

बीजेपी पर अवैध कब्जों का आरोप: इस कार्रवाई के बहाने बीजेपी को घेरते हुए अखिलेश यादव ने कड़ा प्रहार किया और आरोप लगाया कि "देश में सबसे ज्यादा अवैध इमारतें और निर्माण भारतीय जनता पार्टी के पास हैं।" उन्होंने सवाल उठाया कि बुलडोजर और प्रशासनिक कार्रवाई में चुनिंदा रवैया क्यों अपनाया जा रहा है?

उज्जैन में क्यों मचा है बवाल?:
गौरतलब है कि उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियों और सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत शाही मस्जिद का वह हिस्सा हटाया जा रहा है, जो सड़क के दायरे में आ रहा था। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद प्रशासन की निगरानी में मस्जिद कमेटी द्वारा ही प्रभावित हिस्से को हटाने का कार्य किया जा रहा है।

अखिलेश यादव के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में एक बार फिर धार्मिक स्थलों, प्रशासनिक कार्रवाइयों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है।

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NEET विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा इस्तीफा; PM मोदी को भेजी चिट्ठी, बोले- 'छात्रों का भवि...
25/07/2026

NEET विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा इस्तीफा; PM मोदी को भेजी चिट्ठी, बोले- 'छात्रों का भविष्य राजनीति से ऊपर'

नई दिल्ली: देश में NEET-UG परीक्षा को लेकर मचे भारी बवाल, जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों और विपक्ष के तीखे हमलों के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को भेज दिया है। सोशल मीडिया पर अपनी चिट्ठी साझा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने साफ किया कि उनके लिए देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक टकराव या विवाद से कहीं ऊपर है।

इस्तीफे की वजह और चिट्ठी की बड़ी बातें:
प्रधानमंत्री को भेजी अपनी चिट्ठी में धर्मेंद्र प्रधान ने निम्नलिखित प्रमुख बातें लिखी हैं:

छात्रों का भविष्य सर्वोपरि: उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि देश के युवाओं का भविष्य कानूनी विवादों और राजनीतिक टकराव की वजह से अधर में लटके या उनका ध्यान पढ़ाई से भटके। इसी भावना के साथ उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया।

सरकार द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई: धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायतें मिलते ही सरकार ने तुरंत एक्शन लिया। मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई, दोबारा परीक्षा कराई गई और अगले साल से NEET को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया।

राजनीति और दुष्प्रचार से दुख: उन्होंने लिखा कि 21 जून को दोबारा सफलतापूर्वक परीक्षा कराई गई और 16 जुलाई को नतीजे भी आ गए, जिसमें गरीब और वंचित परिवारों के कई बच्चों ने सफलता पाई। लेकिन कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने राजनीति चमकाने के लिए छात्रों को गुमराह किया, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा है।

व्यथित करने वाली घटनाएं: धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने उन्हें अंदर से बेहद व्यथित किया है। यह उनके व्यक्तिगत सम्मान का नहीं, बल्कि देश के 20 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य का सवाल है।

चिट्ठी के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और अपने मंत्रालय के सहयोगियों का आभार जताया और कहा कि वे आगे भी सार्वजनिक जीवन में देश के युवाओं और भारत माता की सेवा में निष्ठा से लगे रहेंगे।

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16/07/2026

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13/07/2026

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वैश्विक राजनीति और मिडिल ईस्ट (West Asia) से इस वक्त की सबसे बड़ी, भयानक और दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। होर्मुज स...
08/07/2026

वैश्विक राजनीति और मिडिल ईस्ट (West Asia) से इस वक्त की सबसे बड़ी, भयानक और दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के बाद, अमेरिका ने बीती रात ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और शक्तिशाली सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के भीतर 80 से अधिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ बमबारी की है। इस भारी सैन्य हमले के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने नाटो (NATO) समिट के दौरान ईरान के खिलाफ आर-पार की जंग का बिगुल फूंकते हुए 'सीजफायर खत्म' होने की घोषणा कर दी है।

डोनाल्ड ट्रम्प का सबसे आक्रामक बयान— मुख्य बातें:
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के रवैये पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए निम्नलिखित बातें कहीं:

'सीजफायर पूरी तरह खत्म': राष्ट्रपति ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा, "जहां तक मेरा सवाल है, ईरान के साथ समझौता और सीजफायर अब पूरी तरह खत्म (Over) हो चुका है। अब उनके साथ बातचीत में समय बर्बाद करने का कोई फायदा नहीं है।"

बीमार मानसिकता का आरोप: ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा प्रहार करते हुए ट्रम्प ने कहा, "ईरान को बीमार मानसिकता वाले, क्रूर और हिंसक लोग चला रहे हैं। मैं ऐसे लोगों से अब कोई डील नहीं करना चाहता।"

जनाजे के बीच रॉकेट दागने पर भड़के: ट्रम्प ने तंज कसते हुए गुस्सा जाहिर किया और कहा, "हमने उनसे कहा था कि जाकर अपने पूर्व नेता (अयातुल्ला खामेनेई) का अंतिम संस्कार शांति से करो, लेकिन वो अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों में जहाजों पर रॉकेट दागने लगे। यह कतई बर्दाश्त नहीं होगा।"

क्यों भड़का अमेरिका और रातभर में क्या हुआ?:

कमर्शियल जहाजों पर हमला: दरअसल, पिछले 24 घंटों में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तीन कमर्शियल तेल और गैस टैंकरों को निशाना बनाया था, जिसे अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय नियमों और सीजफायर का खुला उल्लंघन माना।

80 से ज्यादा ठिकाने तबाह: अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी विमानों और ड्रोनों ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च पैड्स और तटीय रडार केंद्रों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया है।

देश में बाल विवाह (Child Marriage) और नाबालिगों के अधिकारों के संरक्षण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ...
08/07/2026

देश में बाल विवाह (Child Marriage) और नाबालिगों के अधिकारों के संरक्षण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) से एक बेहद बड़ा, कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि बाल विवाह पर रोक लगाने वाले कानून देश के सभी नागरिकों और धर्मों पर समान रूप से लागू होते हैं। अदालत ने दोटूक शब्दों में कहा कि कोई भी पर्सनल लॉ, पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) से ऊपर नहीं हो सकता।

कानून की सर्वोच्चता और हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणियां— मुख्य बातें:
अदालत द्वारा दी गई इस व्यवस्था के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

पॉक्सो एक्ट है सर्वोपरि: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेखांकित किया कि बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) एक विशेष और धर्मनिरपेक्ष (Secular) कानून है। यह देश के बच्चों की सुरक्षा के लिए है, इसलिए यह किसी भी धार्मिक या पर्सनल लॉ से ऊपर माना जाएगा।

सभी धर्मों पर लागू होगी रोक: कोर्ट ने साफ किया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम का मुख्य उद्देश्य नाबालिग बच्चों के भविष्य और अधिकारों की रक्षा करना है। इसे किसी भी धर्म या पर्सनल लॉ के नाम पर नजरअंदाज या उल्लंघन नहीं किया जा सकता। यह रोक देश के हर नागरिक पर अनिवार्य रूप से लागू होती है।

पर्सनल लॉ की आड़ में बचाव नहीं: अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्सनल लॉ की आड़ लेकर नाबालिग बच्चों की शादी को कानूनी रूप से सही नहीं ठहराया जा सकता। बच्चों का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक संरक्षण किसी भी रीति-रिवाज से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

देश में छिड़ी नई कानूनी बहस:
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद देश में बाल विवाह के खिलाफ जारी कानूनी लड़ाई को एक अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी। इस फैसले ने एक बार फिर देश में पर्सनल लॉ की सीमाओं और बाल अधिकारों की सर्वोच्चता पर एक बड़ी राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।

अयोध्या (उत्तर प्रदेश): राम मंदिर में कथित चढ़ावा और चंदा चोरी (Donation Embezzlement) के आरोपों के बाद मचे देशव्यापी सि...
08/07/2026

अयोध्या (उत्तर प्रदेश): राम मंदिर में कथित चढ़ावा और चंदा चोरी (Donation Embezzlement) के आरोपों के बाद मचे देशव्यापी सियासी और धार्मिक घमासान के बीच अयोध्या से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) की एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक में बड़ा कदम उठाते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया गया है। वहीं, ट्रस्ट के कद्दावर सदस्य कृष्ण मोहन (Krishna Mohan) को ट्रस्ट का नया अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है।

इस्तीफे की वजह और बड़ा प्रशासनिक फेरबदल— मुख्य बातें:
ट्रस्ट की इस तीन घंटे तक चली मैराथन बैठक के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

आरोपों के बीच लिया गया फैसला: राम मंदिर चंदा चोरी प्रकरण सामने आने और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी (SIT) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के बाद, दोनों शीर्ष पदाधिकारियों ने नैतिक आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था, जिसे ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया है।

कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी का बयान: ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने बताया कि ट्रस्ट के संविधान के नियमों के तहत दिए गए इस्तीफों को स्वीकार करना अनिवार्य था। हालांकि, ट्रस्ट ने राम मंदिर निर्माण में चंपत राय के ऐतिहासिक और अमूल्य योगदान की सराहना भी की।

बैठक से बाहर रहे आरोपी पदाधिकारी: इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान तीनों आरोपी पदाधिकारी— चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव पूरी तरह से बैठक से बाहर रहे और उनकी अनुपस्थिति में ही यह बड़ा फैसला लिया गया।

कौन हैं नए महासचिव कृष्ण मोहन?: चंपत राय की जगह लेने वाले कृष्ण मोहन 1978 बैच के सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी हैं। खास बात यह है कि कृष्ण मोहन ने ही राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी को लेकर थाना रामजन्मभूमि में 8 नामजद लोगों के खिलाफ पहली एफआईआर (FIR) दर्ज कराई थी। फरवरी 2025 में कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद उन्हें ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था।

प्रशासनिक फेरबदल के साथ ही ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लाने के लिए एक व्यापक ओवरहॉल किया जाएगा। अब 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की अगली बैठक में कुछ और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

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