03/08/2026
झारखंड और छत्तीसगढ़, दोनों एक ही दिन बने थे। दोनों राज्यों में भाजपा और कांग्रेस—दोनों की सरकारें रहीं।
फिर आज इतना बड़ा फर्क क्यों?
मैंने ऐसे कई लोगों को देखा है जो UPSC, BPSC और दूसरे राज्यों के PSC में सफल हुए, लेकिन JPSC में अच्छे एग्जाम के बावजूद बाहर हो गए। इसलिए सवाल उम्मीदवारों की मेहनत पर नहीं, JPSC की परीक्षा प्रणाली की गुणवत्ता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर उठते हैं।
आखिर JPSC PT के बाद हर बार विवाद क्यों खड़े हो जाते हैं? Answer Key पर इतने सवाल क्यों? हर भर्ती सालों तक क्यों लटकती है? हर परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों को कोर्ट, धरना और सोशल मीडिया का सहारा क्यों लेना पड़ता है?
उधर छत्तीसगढ़ में CGPSC समय पर परीक्षाएँ कराता रहा, जबकि झारखंड में युवाओं का भरोसा बार-बार परीक्षा प्रक्रिया पर ही डगमगा जाता है।
25 साल बाद भी अगर एक राज्य की सबसे बड़ी भर्ती संस्था अपनी विश्वसनीयता पर लगातार उठ रहे सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रही है, तो आत्ममंथन की ज़रूरत उम्मीदवारों को नहीं, व्यवस्था को है।
झारखंड के युवाओं को किसी पर एहसान नहीं चाहिए। उन्हें सिर्फ़ एक ऐसी परीक्षा प्रणाली चाहिए जिस पर वे बिना किसी संदेह के भरोसा कर सकें।