Satyaveer Singh Satyarthi

Satyaveer Singh Satyarthi मानवता सर्वोपरी,जीओ और जीने दो। Constituency Uklana Teh Barwala Distt. Hisar (Haryana) - 125121

23/11/2025

भारत का चिकित्सीय क्षेत्र (Medical Sector) बहुत जल्द पतन की कगार पर है। भारतीय संसदीय समिति ने इसे स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है।

ज़ी न्यूज़ (Zee News) में हाल ही में प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 44% मानव सर्जरी नकली (Bogus), गलत (Fake) या अनावश्यक होती हैं।
इसका मतलब है कि अस्पतालों में होने वाली लगभग आधी सर्जरियाँ सिर्फ़ मरीजों या सरकार से पैसे लूटने के लिए की जाती हैं।

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि भारत में होने वाली

55% हृदय सर्जरी नकली या बनावटी,

48% गर्भाशय हटाने की सर्जरी (Hysterectomy),

47% कैंसर सर्जरी,

48% घुटने का प्रत्यारोपण (Knee Replacement),

45% सीज़ेरियन डिलीवरी,

कंधे का प्रत्यारोपण (Shoulder Replacement),

रीढ़ की हड्डी की सर्जरी (Spine Surgery) आदि भी नकली पाई गई हैं।

महाराष्ट्र की कई प्रसिद्ध अस्पतालों के सर्वे में यह पाया गया है कि बड़े अस्पतालों में वरिष्ठ डॉक्टरों की मासिक तनख्वाह एक करोड़ रुपये तक होती है।
इसका कारण यह है कि जो डॉक्टर अधिक से अधिक अनावश्यक जांच, इलाज, भर्ती और सर्जरी कराते हैं — उन्हें अधिक वेतन दिया जाता है। (स्रोत: BMJ Global Health)

टाइम्स ऑफ़ इंडिया (Times of India) ने एक रिपोर्ट में बताया कि मृत मरीजों को जीवित बताकर इलाज करने के कई मामले सामने आए हैं — जो बहुत ही घृणित अपराध है।

एक प्रसिद्ध अस्पताल में 14 वर्षीय मृत युवक को जीवित बताकर लगभग एक महीने तक वेंटिलेटर पर रखा गया, इलाज के नाम पर पैसे लिए गए, और बाद में उसे मृत घोषित कर दिया गया। शिकायत के बाद अस्पताल दोषी पाया गया। परिवार को ₹5 लाख का मुआवज़ा दिया गया, लेकिन एक महीने की मानसिक प्रताड़ना का क्या?

कई बार मृत मरीजों पर भी तत्काल सर्जरी करने का नाटक किया जाता है — परिवार से तुरंत पैसे भरने को कहा जाता है, और फिर कहा जाता है कि “सर्जरी के दौरान मौत हो गई।”

(स्रोत: Dissenting Diagnosis – Dr. Gadre & Shukla)

बीमा (Mediclaim Insurance) का घोटाला भी उतना ही भयावह है।
भारत में लगभग 68% लोगों ने मेडिक्लेम बीमा लिया है, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर कंपनियाँ तरह-तरह के बहाने बनाकर क्लेम को अस्वीकार कर देती हैं या आंशिक राशि ही देती हैं।
बाकी खर्च परिवार को खुद उठाना पड़ता है।

करीब 3000 से अधिक अस्पतालों को बीमा कंपनियों ने ब्लैकलिस्ट किया है क्योंकि वे झूठे क्लेम कर रही थीं।
कोरोना काल में कई अस्पतालों ने नकली कोविड मरीज दिखाकर बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपये वसूले।

मानव अंगों की तस्करी (Organ Trafficking) का गंदा धंधा भी बड़े पैमाने पर चलता है।
इंडियन एक्सप्रेस (Indian Express) ने 2019 में एक हृदयविदारक घटना उजागर की थी —

कानपुर की एक महिला, संगीता कश्यप, को दिल्ली में नौकरी का लालच देकर बुलाया गया और फोर्टिस अस्पताल (Fortis Hospital) में स्वास्थ्य जांच के लिए भेजा गया।
वहां भर्ती करने के बाद उसे ‘डोनर’ शब्द सुनकर शक हुआ और वह भाग निकली।
बाद में पुलिस जांच में एक अंतरराष्ट्रीय गैंग का पर्दाफाश हुआ — जिसमें पुलिस, डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ सभी शामिल थे।

‘हॉस्पिटल रेफरल स्कैम’ (Hospital Referral Scam) तो आम बात हो गई है।
कई डॉक्टर मरीज को गंभीर बीमारी बताकर बड़े अस्पतालों — जैसे अपोलो (Apollo), फोर्टिस (Fortis), एपेक्स (Apex) — में भेजते हैं।
इन अस्पतालों के पास रेफरल प्रोग्राम होते हैं, जिनमें डॉक्टरों को मरीज भेजने पर कमीशन मिलता है।
उदाहरण के लिए, मुंबई की कोकिलाबेन अस्पताल (Kokilaben Hospital) ने लिखा था —

40 मरीज भेजने पर ₹1 लाख,

50 मरीजों पर ₹1.5 लाख,

75 मरीजों पर ₹2.5 लाख दिए जाएंगे।

‘डायग्नोसिस स्कैम’ (Diagnosis Scam) भी करोड़ों की लूट का तरीका है।
बेंगलुरु की कुछ प्रसिद्ध पैथोलॉजी लैब्स पर आयकर विभाग के छापों में ₹100 करोड़ नकद और 3.5 किलो सोना मिला।
यह रकम डॉक्टरों को कमीशन देने के लिए रखी गई थी।

डॉक्टर मरीजों को अनावश्यक जांच के लिए भेजते हैं और 40–50% तक कमीशन लेते हैं।
अधिकांश रिपोर्टें फर्जी होती हैं — केवल 1–2 टेस्ट असली होते हैं।
देश में लगभग 2 लाख से अधिक लैब्स हैं, लेकिन सिर्फ़ 1000 से थोड़ी अधिक ही प्रमाणित (Certified) हैं।

फार्मा कंपनियाँ (Pharma Companies) भी बड़े घोटाले करती हैं।
भारत की 20–25 बड़ी दवा कंपनियाँ हर साल डॉक्टरों पर लगभग 1000 करोड़ रुपये खर्च करती हैं ताकि वे उनकी दवाएँ लिखें।
कोविड काल में Dolo गोली बेचने वाली कंपनी ने डॉक्टरों को ₹1000 करोड़ देने का मामला उजागर हुआ था।
डॉक्टरों को नकद, विदेश यात्रा, 5-Star होटल में ठहरने की सुविधाएँ दी जाती हैं।
जैसे USV Ltd. कंपनी हर डॉक्टर को ₹3 लाख नकद और ऑस्ट्रेलिया/अमेरिका यात्रा देती है।

कुछ फार्मा कंपनियाँ अस्पतालों को दवाएँ बहुत कम दाम पर देती हैं लेकिन MRP कई गुना ज़्यादा रखती हैं।
इंडिया टुडे (India Today) की रिपोर्ट के अनुसार, EMCURE कंपनी अपनी कैंसर दवा Temikure अस्पताल को ₹1950 में देती है,
जबकि अस्पताल मरीज से ₹18,645 वसूलता है।

मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया (MCI) — जो डॉक्टरों और अस्पतालों की सर्वोच्च नियामक संस्था है — उस पर भी लापरवाही के आरोप हैं।
2016 में केंद्र सरकार की जांच समिति ने पाया कि MCI नई मेडिकल कॉलेजों को मंज़ूरी देने में तो सक्रिय है, लेकिन डॉक्टरों व अस्पतालों पर नियंत्रण में जानबूझकर ढिलाई बरतती है।

MCI के कुछ मुख्य नियम जो रोज़ तोड़े जाते हैं:

1. डॉक्टर को किसी कंपनी की ब्रांडेड दवा नहीं, बल्कि उसका Generic Name लिखना चाहिए।

2. इलाज से पहले डॉक्टर को पूरी फीस बतानी चाहिए।

3. जांच/इलाज से पहले मरीज की लिखित सहमति लेनी चाहिए।

4. हर मरीज का मेडिकल रिकॉर्ड 3 साल तक सुरक्षित रखना चाहिए।

5. भ्रष्ट या अनैतिक डॉक्टरों को बिना डर समाज के सामने लाना चाहिए।

सरकारी योजनाओं में भी घोटाले हो रहे हैं।
उदाहरण के लिए, कोई पूर्व सैनिक मामूली सर्दी लेकर सरकारी अस्पताल जाता है — उसे भर्ती कर लिया जाता है।
उसके कार्ड पर उसकी जानकारी के बिना सरकारी योजना में फर्जी बिलिंग की जाती है।
7–8 दिन बाद छुट्टी दे दी जाती है, लेकिन तब तक डॉक्टरों और भ्रष्ट अधिकारियों के खातों में लाखों रुपये जमा हो जाते हैं।

कंडक्टर को किराया देने के लिए मै जैसे ही जेब में हाथ डालने लगा तो साथ बैठे अजनबी ने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा "नहीं भाई सा...
04/11/2025

कंडक्टर को किराया देने के लिए मै जैसे ही जेब में हाथ डालने लगा तो साथ बैठे अजनबी ने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा "नहीं भाई साहब आपका किराया मैं देता " मैने कहा कि मै अपना किराया खुद ही देता हूं लेकिन अजनबी मेहरबान हो रहा था और मेरा किराया दे दिया।

अगले स्टाप पर अजनबी बस से उतरा और मै अपनी जेब से कुछ निकालने लगा तो सर थाम कर बैठ गया क्योंकि उस अजनबी ने मेरी जेब काट ली थी।

दूसरे दिन जब मैने उस अजनबी को बाजार में पकड़ा तो वह चोर मुझे गले लगाकर रोने लगा "साहब जी मुझे माफ कर दीजिए आपसे चोरी करने के बाद मेरी बेटी मर गई" मैने दिल बड़ा करते हुए चोर को माफ करदिया।

चोर चला गया लेकिन उसने गले मिलते समय फिर से मेरी जेब साफ कर गया था।कुछ दिनों बाद मै अपनी मोटरसाइकिल से कहीं जा रहा था कि रास्ते में फिर उसी चोर ने रोक लिया।

चोर ने रोते हुए माफी मांगी और चोरी किये हुए सारे पैसे भी लौटा दिये चोर पास के रेस्टोरेंट में ले जाकर चाय नाश्ता कराने के बाद चला गया और जब मै अपनी मोटरसाइकिल के पास आया तो देखा चोर इस बार मेरी मोटरसाइकिल ही ले गया था।

बिल्कुल यही हाल अपने देश की जनता और नेताओं का है। भोली भाली सयानी जनता इन पर विश्वास करती हैं और ये नेता हर बार जनता को नये नये तरीकों से कच्छे पहना कर निकल लेते है।

Satyaveer Singh Satyarthi

 #रामसेतु का सच [ #नासा  #रिसर्च ]रामसेतू 18 लाख वर्ष पूर्व "Tectonic plates" के घर्षण द्वारा उत्पन्न हुआ, जो समुद्र तल ...
27/10/2025

#रामसेतु का सच [ #नासा #रिसर्च ]
रामसेतू 18 लाख वर्ष पूर्व "Tectonic plates" के घर्षण द्वारा उत्पन्न हुआ, जो समुद्र तल तक गड़ा हुआ है। जबकि मानव जाति के जन्म हुए अभी 1 लाख वर्ष भी नहीं हुए। करोङो वर्षो पूर्व के डायनासौर्स (Dianasaurs) के अवशेष भी मिल गये मगर वानर सेना का कोई अता पता नहीं। इस प्रकार के सेतू जापान-कोरिया के बीच में भी हैं और इससे कई गुना बड़ा सेतु तुर्की द्वीप मे भी है।

राम सेतु (Adams bridge) इसे अधिक पुराना होने के कारन आदम पुल भी कहाँ जाता है। राम सेतु (Adams bridge) पर नासा ने रिसर्च कर बताया कि यह पुल प्रकृति निर्मित है, मानव निर्मित नहीं।

यह समुद्र में पाये जाने वाले मूँगा (CORAL) में पाये जाने वाले केल्शियम कार्बोनेट के छोड़े जाने से निर्मित श्रंखला है। जिसकी लंबाई 30 किमी है। नासा ने इसके सैम्पल लेकर रेडियो कार्बन परिक्षण से बताया कि यह सेतु 17.5 लाख वर्ष पुराना है । मूंगा (Coral) समुद्र के कम गहरे पानी में जमा होकर श्रंखला बनाते है । विश्व में मूँगा से निर्मित ऐसी 10 श्रृंखलाएँ है इनमे से सबसे बड़ी ऑस्ट्रेलिया के समुद्र तट पर है। इसकी लंबाई रामसेतु से भी कई गुणा अधिक 2500 Km है। विश्व की इन सभी देशों की मूँगा श्रंखलाओं को सेटेलाईट के द्वारा देखा जा चुका है।

नासा के रिसर्च अनुसार रामसेतु जब 17.5 लाख वर्ष पुराना है, तो इसे राम निर्मित कैसे कहाँ जा सकता है। जबकि मानव ने खेती करना/कपडे पहनना 8000 हजार वर्ष ईसा पूर्व सीखा है। मानव ने लोहा (Iron) की खोज 1500 ईसा पूर्व की है।

मानव ने लिखना 1300 ईसा पूर्व सीखा है। फिर राम नाम लिखकर दुनिया के तत्कालीन पशु सीविल इंजनियर भालू नल-नील ने इसे कैसे बना डाला..?

24/10/2025

लगता है गोवर्धन महाराज ने अंदर कोई गंभीर हलचल मचा दी 😂😅😂

World Record!! दीये जलाने में ! अच्छा लगा सुबह सुबह जान कर के के देश और सरकार ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया!काबिल तो हैं हम...
20/10/2025

World Record!! दीये जलाने में !

अच्छा लगा सुबह सुबह जान कर के के देश और सरकार ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया!

काबिल तो हैं हम! जो सरकार और लोगों की इच्छा होती है हासिल कर लेते हैं!

एक दिन हम ये इच्छा भी कर ही लेंगे कि
सब से ज़्यादा और अच्छे स्कूल,कॉलेज , विश्विद्यालय, हस्पताल में भी हम विश्व रिकॉर्ड बनायें!!
बस अभी हमने और हमारी सरकारों ने ऐसा चाह नहीं , अभी हमारी प्राथमिकताएं ज़्यादा महत्वपूर्ण विषयों पर हैं!!

तमसो मा ज्योतिर्गमय।असतो मा सद्गमय।मृत्योर्मा अमृतं गमय॥ #दीपावली के पावन पर्व की सहृदय हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आपक...
20/10/2025

तमसो मा ज्योतिर्गमय।
असतो मा सद्गमय।
मृत्योर्मा अमृतं गमय॥

#दीपावली के पावन पर्व की सहृदय हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आपका जीवन खुशियों, समृद्धि, स्वास्थ्य और अपार सफलता से परिपूर्ण हो। दीपों की यह रौशनी आपके जीवन को हमेशा आलोकित करती रहे...🪔🎊

Satyaveer Singh Satyarthi

17/10/2025

ये वीडियो हरियाणा के ADGP वाई पूरन कुमार पर आरोप लगाकर आत्महत्या करने वाले ASI संदीप लाठर की बताकर वायरल की जा रही है। उनकी है या नहीं मैं इस बात की पुष्टि नहीं करता।

मैं डीजीपी शत्रुजीत कपूर का चेला हूं।

एक पुलिस कर्मी का वीडियो वायरल

"एससी-एसटी आरक्षण का आधार सामाजिक छुआछूत, भेदभाव, अन्याय एवं अत्याचार है,न कि आर्थिक आधार।"न्यायमूर्ति बी.आर.गवई ने एससी...
17/10/2025

"एससी-एसटी आरक्षण का आधार सामाजिक छुआछूत, भेदभाव, अन्याय एवं अत्याचार है,न कि आर्थिक आधार।"

न्यायमूर्ति बी.आर.गवई ने एससी-एसटी आरक्षण में उप-वर्गीकरण एवं क्रीमी लेयर का फैसला लिखा।

न्यायमूर्ति बी. आर. गवई के इस फैसले ने एससी-एसटी वर्गों के 40 करोड़ से अधिक लोगों का अहित किया और उनमें वैमनस्यता पैदा की। इस निर्णय ने अप्रत्यक्ष तौर पर आरक्षण को ख़त्म करने की शुरुआत ही कर दी।

न्यायमूर्ति बी.आर.गवई को लगता था कि एससी-एसटी वर्गों के व्यक्तियों की आर्थिक स्थिति ठीक होने के बाद उनके साथ जाति आधारित भेदभाव एवं छुआछूत नहीं होती।

पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट के परिसर में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.आर.गवई के ऊपर जूता फेंकने का प्रयास किया गया। यह किस आधार पर था आर्थिक या जातिगत?

कुछ दिन पहले अनुसूचित जाति वर्ग के आईपीएस वाई पूरन सिंह ने जातिगत भेदभाव, जातिवाद,मानसिक प्रताड़ना एवं सामाजिक अपमान के कारण आत्महत्या कर ली।

भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की आर्थिक स्थिति मजबूत है। यह खुद भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं। इनके पिता क़ई बार राज्यपाल एवं सांसद रहे। इसके बावजूद इनके ऊपर जूता फेंकने का प्रयास किया गया।

वाई पूरन सिंह आईपीएस थे,इनकी पत्नी आईएएस हैं। इनके परिवार के कुछ सदस्य विधायक हैं। इनके एक रिश्तेदार 8 बार विधायक थे। इसके बाबजूद इनके ऊपर जातिगत शोषण हुआ और भेदभाव हुआ। सामाजिक अपमान हुआ। अन्त में जातिवाद के कारण इन्होंने आत्महत्या कर ली।

जातिवाद का एससी-एसटी वर्गों की आर्थिक स्थिति से कोई सम्बन्ध नहीं है। जातिवाद होने लिए व्यक्ति की जाति ही महत्वपूर्ण है।

एससी-एसटी वर्गों के व्यक्ति भले ही आर्थिक तौर पर मजबूत हों,मगर उनके साथ जाति के आधार पर जातिवाद की घटना बन्द नहीं होतीं। उनके साथ जाति के आधार पर भेदभाव,छुआछूत,शोषण,मानसिक प्रताड़ना एवं सामाजिक अपमान बन्द नहीं होते।

वास्तव में भारत की सबसे बड़ी समस्या जाति और जातिवाद है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता।

Satyaveer Singh Satyarthi

वाई पूरण कुमार ADGP के सुसाइड नोट में ASI संदीप जाति जाट का भी नाम था, मामला ADGP पूरण कुमार के गनमैन द्वारा 15 हजार की ...
15/10/2025

वाई पूरण कुमार ADGP के सुसाइड नोट में ASI संदीप
जाति जाट का भी नाम था, मामला ADGP पूरण कुमार के गनमैन द्वारा 15 हजार की घूस लेने का था। इसी मामले की जांच ASI संदीप सिंह के पास थी, इस मामले में ADGP वाई पूरण कुमार का कहना था कि इस मामले से उसका कोई लेना देना नहीं, फिर उसको जांच के दायरे में क्यों लाया जा रहा है, मामले में वाई पूरण कुमार को संबद्ध करने की बात इसलिए भी अंतर्किक लगती है कि कोई एडीजीपी रैंक का आदमी मात्र ₹15000 के रिश्वत क्यों लेगा।
शायद यही बात हमे भी लॉजिकल नहीं लगे। लेकिन DGP बनने की रेस से बाहर करने के लिए, उसे जानबूझ कर न्यायालय के समक्ष विचाराधीन मामले में लाया गया। क्योंकि भ्रष्टाचार के विचाराधीन मामलों में संबद्ध व्यक्ति को डीजीपी नहीं बनाया जा सकता है।
इसी से परेशान होकर वाई पूरण कुमार DGP से मिला, संबंधित SP से मिला, लेकिन SP के इशारे पर एक ASI ने उसकी बात सुनने से इनकार कर दिया। और अंततः उसने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

सबसे पहले तो वाई पूरण कुमार वाले मामले में, इस गनमैन के भ्रष्टाचार की CBI द्वारा जांच हो, क्यों की जेल जाने की डर से ASI संदीप ने अपनी जान देने से जाट समाज के लोग बेहद गुस्से में आ गए है। हरियाणा के जाट भाइयों के विडियोज की तो मानो बाढ़ ही आ गई है। जो अभी तक जैसे तैसे चुप ही थे।

अब ये बेहद जरूरी हो गया है कि पूरे मामले में CBI जांच हो। जिससे कि नफरत उगल रहे ये वीडियो वालो को पता चल सके कि सिस्टम कैसे कार्य करता है। हरियाणा में लंबे समय से न्याय और कानून व्यवस्था को कुछ लोगों ने अपने घर की रखैल बना रखा है।

कानून और न्याय व्यवस्था के कुछ लोगों के हाथों कठपुतली बना लिए जाने के चलते ही हरियाणा में गुंडा कल्चर इतना सम्मान पा रहा है। गुंडागर्दी को महिमा मंडित करते हुए हजारों लाखों गाने और उन गानों में घमंड के साथ एक जाति विशेष का नाम आना हरियाणा की सही पिक्चर प्रस्तुत करता है।

हरियाणा के ही एक अन्य मामले में पुलिस कांस्टेबलों द्वारा अपने ही पुलिस IG के साथ मारपीट करने की घटना ज्यादा पुरानी नहीं है, IG महोदय इसलिए पिट कर चुप बैठ गए क्योंकि सत्ता उनके पक्ष की नहीं थी, और उस समय वो दारू पिया हुआ था। उस घटना में पुलिस IG दलित वर्ग से था, और कांस्टेबल की जाति का आप खुद अंदाजा लगा सकते है।

Dharmendra Kr Jatav

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