Nitu Diary

Nitu Diary � शब्दों की दुनिया में आपका स्वागत है �
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कितनी अजीब और डरावनी बात है कि आज के दौर में भी एक महिला की खुशी और उसकी आजादी की कीमत उसकी जान देकर चुकानी पड़ रही है। ...
22/04/2026

कितनी अजीब और डरावनी बात है कि आज के दौर में भी एक महिला की खुशी और उसकी आजादी की कीमत उसकी जान देकर चुकानी पड़ रही है। इस बहन का कसूर सिर्फ इतना था कि वह शादी की खुशी में शामिल हुई और डांस किया? किसी को यह हक किसने दिया कि वह किसी की जिंदगी का फैसला चाकू से करे?
लेकिन इस घटना से एक बहुत बड़ा सबक हम सबको मिलता है— मियां-बीवी के रिश्ते में अगर कोई तीसरा दखलअंदाजी करने लगे और अपनी मनमानी चलाने लगे, तो वह घर कभी नहीं बच सकता। एक घर तभी तक खुशहाल रहता है जब पति और पत्नी के बीच का फैसला उनका अपना हो। जब घर के दूसरे लोग (चाहे वो जेठ हो या कोई और) मर्यादा भूलकर जुल्म पर उतर आएं, तो ऐसे 'राक्षसों' की जगह घर में नहीं, बल्कि जेल की सलाखों के पीछे होनी चाहिए।
इस बहन को न्याय मिलना चाहिए और ऐसे अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई दूसरा ऐसा कदम उठाने की हिम्मत न कर सके। समाज को अब जागना होगा और अपनी बेटियों-बहनों के हक में खड़ा होना होगा।
आपकी क्या राय है? क्या ऐसे लोगों को समाज में रहने का हक है? अपनी बात कमेंट्स में जरूर लिखें और इस पोस्ट को शेयर करें ताकि यह आवाज दबने न पाए। 💯🙏🏽😭

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अगर कोई शख्स परिवार का खर्चा नहीं उठा सकता है तो उसे शादी का ख्य...
22/04/2026

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अगर कोई शख्स परिवार का खर्चा नहीं उठा सकता है तो उसे शादी का ख्याल छोड़ देना चाहिए। अगर किसी पुरूष शादी की है तो उसे परिवार का खर्च उठाना ही पड़ेगा, वह पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचने के लिए अपनी खराब आर्थिक हालत का बहाना नहीं बना सकता।👇⚖️💯💯💯✍️

 #बिजली कटने पर  #दूल्हा बैंड बाजे के साथ  #बारात लेकर पहुंचा गया    #दफ्तर
22/04/2026

#बिजली कटने पर #दूल्हा बैंड बाजे के साथ #बारात लेकर पहुंचा गया #दफ्तर

Congratulations बेटा❤️❤️❤️
21/04/2026

Congratulations बेटा❤️❤️❤️

इस प्यार को क्या नाम दोगे आप लोग...???
21/04/2026

इस प्यार को क्या नाम दोगे आप लोग...???

कहते हैं कि प्यार और साथ की कोई उम्र नहीं होती। इस बात को सच कर दिखाया भीलवाड़ा के नागौरी गार्डन स्थित माहेश्वरी भवन में...
21/04/2026

कहते हैं कि प्यार और साथ की कोई उम्र नहीं होती। इस बात को सच कर दिखाया भीलवाड़ा के नागौरी गार्डन स्थित माहेश्वरी भवन में आयोजित एक अनूठे 'जीवनसाथी परिचय सम्मेलन' ने। यहां 50 साल की उम्र पार कर चुके 115 बुजुर्ग इस उम्मीद में जुटे थे कि ढलती उम्र की दहलीज पर उन्हें कोई ऐसा कंधा मिल जाए, जिस पर सिर रखकर वे सुकून की दो बातें कर सकें। अकेलेपन के अंधेरे को दूर करने के लिए आयोजित इस सम्मेलन में कई चेहरों पर मुस्कान लौटती दिखी।

गुजरात के अहमदाबाद की 'अनुबंध फाउंडेशन' की ओर से आयोजित इस 95वें सम्मेलन की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी सादगी और खुले विचार थे। यहां न तो जाति का कोई बंधन था और न ही धर्म की कोई दीवार। 50 से लेकर 80 साल तक के अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा पुरुष-महिलाओं ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अहमदाबाद, दिल्ली, जयपुर, कोटा और बीकानेर जैसे शहरों से करीब 80 से अधिक पुरुषों और 30 साहसी महिलाओं ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया।

संस्था के अध्यक्ष नट्टू भाई पटेल ने इस पहल के पीछे की भावुक कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि साल 2001 में आए गुजरात भूकंप ने कई परिवारों को उजाड़ दिया था। तब उन्होंने महसूस किया कि बच्चे तो अपनी दुनिया में व्यस्त हो जाते हैं, लेकिन जो बुजुर्ग अपना जीवनसाथी खो देते हैं, उनका अकेलापन किसी सजा से कम नहीं होता। इसी सोच के साथ उन्होंने अब तक देशभर में 94 सफल आयोजन किए हैं और 225 से अधिक जोड़ों की शादियां करवा चुके हैं।

कार्यक्रम में संस्था की सचिव किन्नरी लखाणी ने समाज की रूढ़ियों पर प्रहार करते हुए कहा कि आज भी महिलाएं सामाजिक दबाव के कारण अपनी इच्छाएं दबा लेती हैं। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अकेलेपन से घबराने के बजाय आगे आएं और अपनी खुशियों के लिए निर्णय लें। दिल्ली से आईं सुमन चौधरी और पंजाब के डॉ. दिलबाग राय भाटिया ने भी इस बात पर जोर दिया कि संसाधन भले ही कितने भी हों, लेकिन भावनात्मक सहारा केवल एक जीवनसाथी ही दे सकता है।

आयोजन में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के लिए रहने और खाने की नि:शुल्क व्यवस्था की गई थी। इस सम्मेलन के अंत तक करीब 5 से 7 नए जोड़े बनने की संभावना जताई गई है। यहां बनने वाले जोड़ों का आगे चलकर संस्था की ओर से विधिवत विवाह भी संपन्न कराया जाएगा।

नशे से बहुत से लोगों की जिंदगी खराब..हिसार के जुगलान गाँव की नर्सिंग अफसर प्रीति बेनीवाल की, पंचकुला के सिविल हॉस्पिटल क...
21/04/2026

नशे से बहुत से लोगों की जिंदगी खराब..हिसार के जुगलान गाँव की नर्सिंग अफसर प्रीति बेनीवाल की, पंचकुला के सिविल हॉस्पिटल के ICU में मृ_त मिलने से रहस्य गहराया... 👇👇

यह फैसला सही किया है बहुत सी महिलाएं तो कहते हैं बहला फुसलाकर दस साल तक योन शोषण किया। क्या आप लोग खुश हो इस बात से...??
21/04/2026

यह फैसला सही किया है बहुत सी महिलाएं तो कहते हैं बहला फुसलाकर दस साल तक योन शोषण किया। क्या आप लोग खुश हो इस बात से...??

रविवार तड़के कानपुर के नौबस्ता में जो हुआ उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव पिता शशि रंजन ने...
20/04/2026

रविवार तड़के कानपुर के नौबस्ता में जो हुआ उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव पिता शशि रंजन ने अपनी ही 11 साल की जुड़वा बेटियों, रिद्धि और सिद्धि की बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपी ने पहले बेटियों का गला दबाया और फिर चापड़ व हथौड़े से वार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। हैरान करने वाली बात यह है कि हत्या करने के बाद वह तीन घंटे तक शवों के पास बैठा रहा और सुबह खुद ही पुलिस को फोन कर अपना जुर्म कबूल कर लिया।
यह घटना साबित करती है कि जब शक का कीड़ा इंसान के दिमाग में घर कर जाता है तो वह अपनों का ही खून बहाने से नहीं कतराता। एक पढ़ा-लिखा पिता जो अपनी ही मासूम बेटियों का रक्षक होना चाहिए था, वही अपनी सनक और नफरत की वजह से उनका काल बन गया। घर में छह सीसीटीवी कैमरे लगवाना और हर वक्त पत्नी की निगरानी करना यह साफ दिखाता है कि वह आदमी मानसिक रूप से बीमार हो चुका था और कंट्रोल करने की चाहत में अंधा हो गया था। आरोपी ने वारदात के लिए पूरे परिवार को नींद की गोलियां खिला दी थीं ताकि वह बिना किसी रुकावट के इस दरिंदगी को अंजाम दे सके।
उसने न सिर्फ दो मासूम जानें लीं, बल्कि अपनी पत्नी और बेटे की हंसती-खेलती दुनिया को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। शक एक ऐसी आग है जो पहले इंसान के विवेक को जलाती है और फिर पूरे परिवार को राख कर देती है। ऐसी खौफनाक मानसिकता समाज के लिए एक बड़ा कलंक है और ऐसे अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। 💔⚖️🚫

जैसलमेर के मोहनगढ़ में एक पोते ने सिर्फ जल्दी अमीर बनने के लालच में अपने ही सगे दादा-दादी (लाखाराम जी और रेशमा देवी) की ...
20/04/2026

जैसलमेर के मोहनगढ़ में एक पोते ने सिर्फ जल्दी अमीर बनने के लालच में अपने ही सगे दादा-दादी (लाखाराम जी और रेशमा देवी) की बेरहमी से हत्या कर दी।
क्या हुआ था?
आरोपी सुरेश ने अपने साथी के साथ मिलकर पहले शराब पी और फिर लूट के इरादे से घर में घुसकर सो रहे बुजुर्गों का गला दबा दिया। जिस उम्र में पोते को अपने दादा-दादी का सहारा बनना चाहिए था, वहां उसने चंद रुपयों और गहनों के लिए उनका खून बहा दिया। पुलिस ने अपनी सूझबूझ से मात्र 6 घंटे में दोनों आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
न्याय की मांग और हमारा सवाल:
ऐसे 'कसाई' के लिए उम्रकैद भी कम है। जिसने उन हाथों को ही काट दिया जिन्होंने उसे चलना सिखाया और पाल-पोसकर बड़ा किया, उसे समाज में रहने का कोई हक नहीं है। जब अपना ही खून, खून का प्यासा हो जाए, तो न्याय की मांग और भी बढ़ जाती है।
कानून को ऐसी मिसाल कायम करनी चाहिए कि दोबारा कोई भी अपराधी ऐसी हिमाकत न कर सके।
आपकी क्या राय है?
क्या फांसी की सजा ऐसे दरिंदों के लिए काफी है? या इन्हें ऐसी सजा मिलनी चाहिए कि ये हर पल तिल-तिल कर अपनी गलती पर पछताएं?
अपनी राय नीचे कमेंट में जरूर बताएं और इस पोस्ट को शेयर करें ताकि समाज के इन भेड़ियों का चेहरा सबको दिख सके। 👇

यही जीवन की कड़वी सच्चाई है। जब तक सीएम थे दरवाजे पर चमचों का रेला लगा रहता था, कुर्सी से हटने के बाद कोई झांकने नहीं गय...
20/04/2026

यही जीवन की कड़वी सच्चाई है। जब तक सीएम थे दरवाजे पर चमचों का रेला लगा रहता था, कुर्सी से हटने के बाद कोई झांकने नहीं गया।
इसीलिए कहते हैं, आप समय को नहीं बांध पाएंगे। समय अपनी गति से ही चलेगा। समय रहते, शिखर पर रहते कुछ अपने बना लीजिए जो हमेंशा आप का साथ दें।

महाराष्ट्र के सीरियल बलात्कारी अशोक खरात को जेल पहुंचाने वाले बिजनेसमैन डॉ जितेंद्र शेलके और उनकी पत्नी की सड़क दुर्घटना...
20/04/2026

महाराष्ट्र के सीरियल बलात्कारी अशोक खरात को जेल पहुंचाने वाले बिजनेसमैन डॉ जितेंद्र शेलके और उनकी पत्नी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई।

इसी दंपति की वजह से इस बाबा अशोक खरात को जेल जाना पड़ा था।

दंपति की दुर्घटना में मौत होना बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रही है

उम्मीद है ये बलात्कारी जल्द ही जेल से बाहर भी आ आ जायेगा और फिर इनके भक्त इनकी सेवा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगे क्योंकि भक्त इन्हें दिल से प्यार करते है।

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