25/09/2025
बीकानेर कार्यक्रम के दौरान एक मां अपने दुख के साथ एक बेटे के पास आईं, क्योंकि उम्मीदें जहां होती हैं, गुहार वहीं लगाई जाती है।
मंच पर सबके सामने संबंधित अधिकारी से बात कर इस मुद्दे पर गंभीर कार्रवाई के निर्देश दिए और मां को पूर्ण रुप से आश्वस्त किया।
नेता और जननेता में बस यही फर्क
हर पीड़ा स्वयं की पीड़ाबीकानेर कार्यक्रम के दौरान एक मां अपने दुख के साथ एक बेटे के पास आईं, क्योंकि उम्मीदें जहां होती हैं, गुहार वहीं लगाई जाती है।
मंच पर सबके सामने संबंधित अधिकारी से बात कर इस मुद्दे पर गंभीर कार्रवाई के निर्देश दिए और मां को पूर्ण रुप से आश्वस्त किया।
नेता और जननेता में बस यही फर्क
हर पीड़ा स्वयं की पीड़ा