10/12/2025
मंच पर एक युवा आता है। कपड़े साधारण हैं, चेहरे पर गंभीरता और आँखों में आग है। वह दर्शकों/कैमरे की ओर सीधे देखता है।)
युवा (थोड़ी धीमी आवाज़ में):
"अक्सर हम कहते हैं... देश खतरे में है।"
(थोड़ा रुककर)
"पर कभी आईने (Mirror) में देखकर पूछा है कि देश किससे खतरे में है?"
(आवाज़ थोड़ी तेज़ होती है)
"दुश्मन सरहद पर है, मैं मानता हूँ। हमारी सेना उनसे निपट लेगी। उनका लोहा पूरी दुनिया मानती है।
लेकिन उस दुश्मन का क्या, जो हमारे अंदर बैठा है?"
(मंच पर टहलता हुआ, दर्शकों से सवाल करता है)
"हम देश को बचाना चाहते हैं ना? तो सुनो... देश को बचाना मतलब सिर्फ़ बंदूक उठाना नहीं होता।
जिस दिन तुम सड़क पर 'चिप्स' का पैकेट फेंकने से पहले अपनी जेब में रख लोगे... उस दिन तुमने देश को गंदगी से बचा लिया।
जिस दिन तुम रेड लाइट पर खड़े होकर, पुलिस वाले को 100 रुपये घूस देने के बजाय चालान कटवाना मंज़ूर कर लोगे... उस दिन तुमने देश को भ्रष्टाचार से बचा लिया।
जिस दिन तुम सोशल मीडिया पर किसी दूसरे धर्म को गाली देने के बजाय, किसी गरीब बच्चे को एक पेंसिल थमा दोगे... उस दिन तुमने देश को दंगों से बचा लिया।"
(भावुक होकर)
"दोस्तों, हम युवा हैं! हमारी रगों में खून नहीं, 'लावा' दौड़ना चाहिए। लेकिन हम क्या कर रहे हैं?
हम रील स्क्रॉल कर रहे हैं, सिस्टम को कोस रहे हैं, और इंतज़ार कर रहे हैं कि कोई 'नायक' आएगा और सब ठीक कर देगा।
अरे, वो नायक तुम हो!
देश को बचाना है? तो 'नौकरी मांगने' वाली भीड़ का हिस्सा मत बनो, 'नौकरी देने' वाला दिमाग पैदा करो। इनोवेशन लाओ, स्टार्टअप बनाओ, खेती में तकनीक लाओ।
जब भारत का युवा अपने दम पर खड़ा होगा, तो दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं पाएगी।"
(जोश और ऊँची आवाज़ में)
"आज कसम खाओ...
कि अगर सरहद पर जवान जाग रहा है, तो देश के अंदर मैं नहीं सोऊँगा।
मैं अपने काम में ईमानदारी रखूँगा।
मैं किसी लड़की को बुरी नज़र से नहीं देखूँगा।
मैं जाति और धर्म के नाम पर नहीं लड़ूँगा।
क्योंकि भारत सिर्फ़ नक्शे पर बना हुआ कोई चित्र नहीं है... भारत 'हम' हैं।
अगर हम सुधर गए, तो देश अपने आप बच जाएगा।"
(मुट्ठी भींचकर, सीने पर हाथ रखकर)
"बदलाव की शुरुआत आज से होगी, अभी से होगी, और मुझसे होगी!"
(तेज़ आवाज़ में नारा)
"जय हिन्द! जय भारत! जय जवान! जय किसान!🇮🇳
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