16/10/2024
भटक गए हम राहों में
मंजिल का ठिकाना नहीं था...
ले गई जिंदगी उन राहों में
जहां हमें जाना नही था...
कुछ क़िस्मत की मेहरबानी
कुछ हमारा कसूर था...
हमने खो दिया सबकुछ वहां
जहां हमे पाना नहीं था.