16/01/2026
NEET-PG के cut-off को लेकर जो शोर मचाया जा रहा है,
वह असल में मेरिट की चिंता नहीं,
बल्कि SC/ST/OBC के ख़िलाफ़ बनाई गई एक सुविधाजनक कहानी है।
सच यह है कि cut-off सभी वर्गों के लिए गिराया गया है।
ना रैंक बदली है,ना ही मेरिट लिस्ट में कोई उलटफेर हुआ है।
फिर भी आरोप हमेशा की तरह आरक्षण पर ही डाला जा रहा है।
यह बहस मेरिट की नहीं है,
यह बहस पैसे की ताक़त और सिस्टम की साजिश की है।
Cut-off गिरते ही सरकारी सीटें नहीं बढ़ जातीं।
इसके बजाय
Private, Management और NRI quota के दरवाज़े खुलते हैं।
जहाँ योग्यता से ज़्यादा जेब का वज़न देखा जाता है।
Private medical colleges की फीस आज 1.5 से 3 करोड़ रुपये तक पहुँच चुकी है।
यह एक ऐसा सच है जिससे कोई इनकार नहीं कर सकता।
अब सवाल यह है कि
क्या SC/ST/OBC के ज़्यादातर छात्र इतना पैसा दे सकते हैं?
जवाब सबको पता है— नहीं।
SC/ST/OBC का छात्र आज भी यही सोचता है
कि फीस कैसे भरे, होस्टल कैसे ले, पढ़ाई जारी रख पाएगा या नहीं।
ऐसे में cut-off गिरने के बाद भी अगर उसे सीट मिल जाए तो वह कोई “फायदा” नहीं, बल्कि एक बड़ी जद्दोजहद का नतीजा होता है।
इसके उलट,
cut-off गिरते ही वे लोग सक्रिय हो जाते हैं
जिनकी academic performance कमजोर रही,
लेकिन जिनके पास सीट खरीदने की ताक़त है।
वे करोड़ों देकर प्राइवेट कॉलेज में दाख़िला लेते हैं और उसी को
मेरिट कहा जाता है।
यहीं पर यह पाखंड उजागर होता है।
जब सीट पैसे से मिलती है
तो मेरिट चुप रहता है।
लेकिन जब संविधान से मिलती है
तो मेरिट को ख़तरा नज़र आने लगता है।
अगर सच में मेरिट की इतनी ही चिंता होती,
तो सबसे पहले
• Management quota खत्म होता
• Private colleges की मनमानी रुकती
• शिक्षा को व्यापार बनने से रोका जाता
लेकिन ऐसा नहीं होता,
क्योंकि इस पूरी व्यवस्था से
जातिगत विशेषाधिकार और पूँजी को फ़ायदा होता है।
इसलिए आसान रास्ता चुना जाता है—
SC/ST/OBC को बदनाम करो,
आरक्षण को दोष दो,
और असली समस्या से ध्यान हटा दो।
मैं यह साफ़ कहना चाहता हूँ—
आरक्षण ने कभी मेरिट नहीं मारा।
मेरिट को मारा है
शिक्षा के निजीकरण ने,
पैसे की ताक़त ने
और उस सिस्टम ने
जो बराबरी से डरता है।
यह लड़ाई
योग्यता बनाम अयोग्यता की नहीं है।
यह लड़ाई है
पैसा बनाम संविधान की।
और मैं अपना पक्ष साफ़ रखता हूँ—
मैं संविधान के साथ खड़ा हूँ,
क्योंकि वही बराबरी की बात करता है,
बाज़ार नहीं।
Rahul Talwaria