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14/04/2026

जब समाज किसी को मुजरिम मान चुका हो, तब उसे बेगुनाह साबित करना एक वकील का सबसे बड़ा धर्म होता है। ⚖️
सिहोरा न्यायालय से एक ऐसा फैसला आया है, जिसने न्याय व्यवस्था पर भरोसे को और मजबूत कर दिया है। एक 23 वर्षीय युवक को जमीनी रंजिश के चलते POCSO और बलात्कार के प्रयास जैसे गंभीर और घिनौने आरोपों में फंसाया गया था।
कल्पना कीजिए उस परिवार के दर्द की, जिस पर समाज ने झूठे कलंक लगा दिए हों। बचाव पक्ष के अधिवक्ता के रूप में, यह मेरी जिम्मेदारी थी कि अदालत के सामने अभियोजन की मनगढ़ंत कहानी को तोड़ा जाए। गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास थे, और मजबूत जिरह (Cross-examination) के सामने झूठ टिक नहीं सका। माननीय न्यायालय ने सबूतों की बारीकी से जांच की और आरोपी को सभी आरोपों से दोषमुक्त (Acquitted) कर दिया।
एक वकील के तौर पर मेरी सबसे बड़ी फीस उस परिवार की आँखों में खुशी के आंसू और यह अहसास है कि— इंसाफ हुआ है। सत्यमेव जयते! 🇮🇳

04/04/2026

🚨 पारिवारिक मामलों (Matrimonial Cases) से जुड़ा एक बहुत बड़ा क़ानूनी अपडेट! ⚖️
अगर आपका केस फैमिली कोर्ट में चल रहा है, तो राजस्थान हाईकोर्ट का यह ताज़ा फैसला आपको ज़रूर जानना चाहिए!
📌 हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला:
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि फैमिली कोर्ट अपने स्तर पर किसी भी केस को दूसरी फैमिली कोर्ट में ट्रांसफर नहीं कर सकती, भले ही वह उसी जिले में क्यों न हो। CPC की धारा 24 के तहत किसी भी केस को ट्रांसफर करने की शक्ति केवल हाईकोर्ट या ज़िला न्यायालय (District Court) के पास होती है।
📢 जनहित में जारी: क़ानून की सही प्रक्रिया जानना हर वादी और अधिवक्ता के लिए ज़रूरी है।
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04/04/2026

🚨 पतियों के लिए बड़ी कानूनी राहत! भरण-पोषण (Maintenance) के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला। ⚖️
अक्सर पारिवारिक विवादों में भरण-पोषण न दे पाने पर पतियों को लंबे समय तक जेल भेज दिया जाता है। लेकिन क्या यह कानूनी रूप से सही है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में (क्रिमिनल रिवीजन सं. 1508/2026) एक बहुत ही महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।
📌 मामला: झाँसी पारिवारिक न्यायालय ने एक पति को 22 महीने का मेंटेनेंस न देने पर 22 महीने जेल की सजा सुना दी थी।
📌 हाईकोर्ट का फैसला: हाईकोर्ट ने साफ किया कि Cr.P.C. की धारा 125(3) के अनुसार, डिफ़ॉल्ट होने पर एक बार में अधिकतम 1 महीने की ही जेल हो सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इसके बाद वसूली के लिए संपत्ति कुर्क की जानी चाहिए।
📌 नतीजा: हाईकोर्ट ने उस पति को, जो पहले से ही जेल में था, तुरंत बिना किसी बेल बांड के रिहा करने का आदेश दिया।
📢 जनहित में जारी: कानून की सही जानकारी ही आपका बचाव है। इस महत्वपूर्ण फैसले को अपने तक सीमित न रखें!
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03/04/2026

FIR दर्ज न हो तो क्या करें? जानें कानूनी उपाय
🚨 क्या पुलिस ने आपकी FIR लिखने से मना कर दिया है? परेशान न हों, कानून आपके साथ है! ⚖️
अक्सर आम नागरिक थाने में FIR दर्ज न होने पर निराश होकर लौट आते हैं। लेकिन नए BNSS, 2023 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के तहत आपके पास ऐसे मजबूत कानूनी अधिकार हैं, जिनकी मदद से आप अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
👉 ये 5 असरदार कानूनी कदम हर नागरिक को पता होने चाहिए:
1️⃣ पुलिस के इनकार करने का रिकॉर्ड या कारण मांगें।
2️⃣ SP/SSP/CP जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजें (BNSS धारा 173(4))।
3️⃣ अपनी शिकायत पंजीकृत डाक (Registered Post) से भेजें और रसीद हमेशा संभाल कर रखें।
4️⃣ अगर फिर भी कार्रवाई न हो, तो सीधे अपने अधिवक्ता के माध्यम से मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करें (BNSS धारा 175(3))।
5️⃣ स्थिति के अनुसार मानवाधिकार (Human Rights) या सतर्कता आयोग (Vigilance) से संपर्क करें।
📢 जनहित में जारी: कानूनी जानकारी ही आपका सबसे बड़ा हथियार है। इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने तक सीमित न रखें!
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POCSO और छेड़छाड़ के गंभीर आरोपों से चारों आरोपियों को मैंने दोषमुक्त कराया।मैंने, सिहोरा न्यायालय मेंPOCSO अधिनियम (धार...
08/11/2025

POCSO और छेड़छाड़ के गंभीर आरोपों से चारों आरोपियों को मैंने दोषमुक्त कराया।

मैंने, सिहोरा न्यायालय में
POCSO अधिनियम (धारा 7/8) सहित IPC की गंभीर धाराओं में आरोपित
चारों मुवक्किलों को सभी आरोपों से दोषमुक्त (Acquitted) कराया।

प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश श्री श्याम सुंदर झा के न्यायालय ने दिनांक 09 अक्टूबर 2025 को यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
यह फैसला केवल एक कानूनी जीत नहीं है, बल्कि उन चार निर्दोष परिवारों पर लगे कलंक को धोकर उनकी खोई हुई प्रतिष्ठा और सम्मान की बहाली है, जिन पर निराधार आरोप लगाए गए थे।
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जहां तर्क सशक्त हों और नीयत निष्पक्ष, वहां सत्य की जीत निश्चित होती है।” 🇮🇳 ⚖️



Not everyone will understand your side — but a lawyer will be your voice."Facing legal trouble? Bail, FIR, court matters...
13/05/2025

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07/05/2024

कोर्ट ने जोर देकर कहा कि न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों को गरिमा बनाए रखनी चाहिए और ऐसे आचरण से बचना चाहिए जो न्यायपा...
04/05/2024

कोर्ट ने जोर देकर कहा कि न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों को गरिमा बनाए रखनी चाहिए और ऐसे आचरण से बचना चाहिए जो न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को धूमिल कर सके। उन्होंने उल्लेख किया कि जब न्यायिक अधिकारी का व्यवहार न्यायपालिका की छवि को कमजोर करता है तो रिट अदालतों द्वारा हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती।

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10/04/2024

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08/04/2024

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