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संकट मोचन भजन - Hanuman ji Bhajanहनुमानजी का का शक्तिशाली भजन...                      Bhagwanam
15/05/2026

संकट मोचन भजन - Hanuman ji Bhajan
हनुमानजी का का शक्तिशाली भजन...

Bhagwanam

🚩 जय बजरंगबली 🙏यह शक्तिशाली हनुमान भजन भगवान हनुमान जी की भक्ति, शक्ति और कृपा को समर्पित है। इस भजन को सुनकर मन मे....

14/05/2026

रामा रामा रटते रटते भजन | Rama Rama Ratate Ratate beete re umariya Bhajan Bhagwanam

ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं, वन्दे जगत्कारणम् ।वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं, वन्दे पशूनां पतिम् ॥वन्दे सूर्य शशांक वह्नि नयन...
03/05/2026

ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं, वन्दे जगत्कारणम् ।
वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं, वन्दे पशूनां पतिम् ॥
वन्दे सूर्य शशांक वह्नि नयनं, वन्दे मुकुन्दप्रियम् ।
वन्दे भक्त जनाश्रयं च वरदं, वन्दे शिवं शंकरम् ॥

हिंदी अर्थ:
मैं उमा (पार्वती) के पति, देवताओं के गुरु और सम्पूर्ण जगत के कारण भगवान शिव को प्रणाम करता हूँ। जो सर्प को आभूषण रूप में धारण करते हैं, हाथ में मृग रखते हैं और समस्त प्राणियों के स्वामी हैं।
जिनके नेत्र सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि के समान हैं, जो भगवान विष्णु (मुकुन्द) के भी प्रिय हैं। जो भक्तों को आश्रय देने वाले, वरदान प्रदान करने वाले और कल्याणकारी शंकर हैं।
ऐसे भगवान शिव को मैं बार-बार प्रणाम करता हूँ
#शिव

मानसिक उपासना क्या है?शास्त्रों में पूजा को हजार गुना फलदाई बनाने के लिए एक उपाय बताया गया है, वह उपाय है मानस पूजा...  ...
02/05/2026

मानसिक उपासना क्या है?

शास्त्रों में पूजा को हजार गुना फलदाई बनाने के लिए एक उपाय बताया गया है, वह उपाय है मानस पूजा...

"कृत्वादो मानसी पूजाम ततः पूजां समाचरेत"

वस्तुतः भगवान को किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं, वे तो भाव के भूखे हैं, पुराणों में मानस पूजा का विशेष महत्व माना गया है। मानस पूजा में भक्त अपने इष्टदेव को मुक्ता- मणियों से मंडित कर स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान कर सकता है...स्वर्गलोक की गंगा से स्नान करा सकता है, कामधेनु गौ के दूध से पंचामृत बना सकता है , भावना से वायु रुपी धूप, अग्नि रुपी दीपक, तथा अमृतरूपी नैवेध्य भगवान को अर्पित कर सकता है, त्रिलोक की सम्पूर्ण वस्तु , सभी उपचार अपने आराध्य के चरणों में भावना से भक्त अर्पण करता हुआ है, अपने इष्ट की पवित्र व समर्पित भाव से सेवा कर सकता है, यही मानस पूजा का स्वरुप है!

मानसपूजा का महत्व-:
मानस पूजा में आराधक का जितना समय लगता है उतना भगवान के संपर्क में बीतता है, और तब तक संसार उससे दूर हटा रहता है। अपने आराध्य के लिए बढ़िया से बढ़िया दिव्य आसन, फूल सुगंध, आभूषण, की कल्पना करता है और इन्हें जुटाने को बिभिन्न लोकों में मन की दौड़ लगाता है। जिससे उसके आराध्य के लिए उत्तम साधन जुट जायें और भगवान की अद्भुत सेवा हो जाये. इससे उसे अपार संतोष और प्रसन्नता मिलती है।

इस तरह भगवद सेवा में साधक जितना भी समय लगाता है. उतना समय वह अपने अंतर्जगत में बिताता है। इस तरह मानस पूजा साधक को समाधि की ओर ले जाती है और समाधि का अनुभव भी कराती है। जैसे कोई प्रेमी साधक कान्ताभाव से अपने इष्ट देव की मानसी सेवा कर रहा है। बाहरी पूजा में इसके लिए बहुत दौडधूप करनी पड़ती है, आर्थिक परेशानी अलग खड़ी रहती है, जिससे आराध्य से मधुर सम्बन्ध गाढ़ा नहीं हो पाता, मानस पूजा में ये अड़चन नहीं आती. जीवन के सारे तनाव छू हो जाते हैं, तन-मन की व्याधियां दूर होकर साधक के अन्दर एक नयी सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. ईश्वर से उसका तादाम्य स्थापित होने लगता है, और साधक को समरस कर देती है। अलोकिक अनुभूतिया होने लगती हैं. साधक और आराध्य एकाकार हो जाते हैं।

दिव्य स्तुति संग्रह | प्रभु के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण
03/03/2026

दिव्य स्तुति संग्रह | प्रभु के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण

यह प्रार्थना साधक के हृदय में भक्ति का संचार करने वाली और प्रभु के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण कराने वाली है।

होली के लोकप्रिय भजन | Holi Bhajan Lyrics
26/02/2026

होली के लोकप्रिय भजन | Holi Bhajan Lyrics

सुंदरकांड प्रारंभ करने से पहले श्री रामचरितमानस की कुछ सिद्ध चौपाइयां इस प्रकार है:१. मंगल भवन अमंगल हारी।द्रवहु सो दशरथ...
25/01/2026

सुंदरकांड प्रारंभ करने से पहले श्री रामचरितमानस की कुछ सिद्ध चौपाइयां इस प्रकार है:

१. मंगल भवन अमंगल हारी।

द्रवहु सो दशरथ अज रबि हारी।।

२. रामकथा के तेही अधिकारी।

जिनके सतसंगत अधिकारी।।

३.प्रबिसि नगर कीजे सब काजा।

हृदय राखी कौशलपुर राजा ।।

४. सीताराम चरण रति मोरी ।

अनदिन बढ़ऊं अनुग्रह तोरी ।।

५. सियाराम मय सब जग जानी।

करऊं प्रणाम जोरि जुग पानी ।।

६. जेहि बिधि नाथ होईहित मोरा।

करऊं सो बेगी, दास में तोरा।।

७. उमा कहूं मैं अनुभव अपना।

सत हरिभजन जगतसब सपना।।

८. जासु नाम सुमिरत एक बारा।

उत्तरही नर भव सिंधु अपारा ।।

९. हनुमान सम नहीं बड़भागी।

नहीं कोई राम चरण अनुरागी।।

१०. कलयुग केवल नाम अधारा।

सुमिर सुमिर नर उतरीं पारा।।

श्री गुरु कवचम् । Shri Guru Kavach Stotra
22/01/2026

श्री गुरु कवचम् । Shri Guru Kavach Stotra

श्रीचामुण्डेश्वरी अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् | Chamundeshwari Astotar Shatnam Stotra
22/01/2026

श्रीचामुण्डेश्वरी अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् | Chamundeshwari Astotar Shatnam Stotra

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