Madhya Pradesh Hindi Express

Madhya Pradesh Hindi Express Madhya Pradesh Hindi Express is an Evening Hindi Daily News Paper published from JABALPUR (M.P) INDIA. Established on 9.11.1989. Edited By Mr. Ravindra Bajpai.

25/08/2026

ब्रिक्स सम्मेलन के पहले कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन खतरे का संकेत

कॉकरोच जनता पार्टी ने धमकी दी है कि वह आगामी 5 सितंबर को दिल्ली के इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालेगी। इसका नेतृत्व नीट पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के अलावा उन प्रदर्शनकारियों के परिजन करेंगे जिन पर जंतर मंतर आंदोलन के दौरान अपराधिक मामले दर्ज हुए हैं। पार्टी का कहना है कि आंदोलन जिन शर्तों पर समझौता हुआ था उनमें आत्महत्या पीड़ित परिवारों को मुआवजा और संसद भवन मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दर्ज अपराधिक प्रकरण वापस लिया जाना भी था। लेकिन उक्त दोनों पूरी नहीं हुईं । उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि वह देख रही है कि मुआवजा किस प्रावधान के अंतर्गत दिया जा सकता है क्योंकि देश में हर साल अनेक छात्र विभिन्न कारणों से आत्महत्या करते हैं। इसलिए ये मुआवजा नजीर न बन जाए इसका ध्यान रखना भी जरूरी है। वैसे भी ऐसे मामलों में नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है जिनमें समय लगता है। और फिर आत्महत्या के मामले अलग - अलग राज्यों में होने के कारण स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट भी जरूरी होती है। इसी तरह अपराधिक प्रकरण रद्द करने संबंधी आश्वासन के समय कॉकरोच जनता पार्टी ने खुद कहा था कि पुलिस पर हुए हमले और सरकारी वाहनों में तोड़फ़ोड़ उन अपराधी तत्वों द्वारा की गई जो छात्र बनकर आंदोलन में घुस आये थे। अतः उन पर कार्रवाई की जा सकती है। दिल्ली पुलिस ने भी अपनी प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट में कहा कि हिंसक उपद्रव करने वाले सैकड़ों प्रदर्शनकारियों का अपराधिक रिकार्ड है, जो छात्र नहीं हैं। सर्वोच्च न्यायालय भी कह चुका है पुलिस पर हमला करने वालों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किये जा सकते हैं। ऐसा लगता है कॉकरोच जनता पार्टी बहुत जल्दबाजी में है क्योंकि जंतर मंतर आंदोलन में हुए गाली - गलौच और अश्लीलता के प्रदर्शन की वजह से उसकी काफी आलोचना हुई। वहीं रांची आंदोलन अपने अनुशासन और शालीनता के लिए प्रशंसित हुआ। इसके अलावा कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं को अनेक स्थानों पर विरोध का सामना करना पड़ा। राजस्थान में तो उनकी पिटाई तक हो गई। उनकी उम्मीद के मुताबिक देश भर में युवा आंदोलन भी नहीं खड़ा हो रहा। धर्मेंद्र प्रधान के हटने के बाद छात्रों में पैदा किया गुस्सा भी ठंडा पड़ गया। ये देखते हुए पार्टी ने 5 सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की जो धमकी दी उसका समय जान बूझकर ऐसा रखा गया जिससेे केंद्र सरकार दबाव में आ जाए। इसका कारण 12 - 13 सितंबर को दिल्ली में होने जा रहा ब्रिक्स सम्मेलन है जिसमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति पुतिन सहित 20 देशों के शीर्ष नेताओं का आगमन संभावित है। भारत इसकी मेजबानी कर रहा है। इसलिए सरकार किसी भी सूरत में दिल्ली की शांति - व्यवस्था भंग नहीं होने देना चाहेगी। जंतर मंतर आंदोलन के कड़वे अनुभव के बाद कॉकरोच जनता पार्टी पर भरोसा करना भी भूल होगी। किसी भी अंतर्राष्ट्रीय आयोजन के पहले माहौल तनावपूर्ण होने पर विदेशी मेहमान अपना आगमन टाल सकते हैं । इसीलिए दिल्ली पुलिस सहित अन्य एजेंसियां भी अभी से सुरक्षा प्रबंधों में जुट चुकी हैं। कॉकरोच जनता पार्टी इस बात से अनभिज्ञ हो ऐसा नहीं है। लेकिन उसके नेताओं का सार्वजनिक व्यवहार बेहद गैर जिम्मेदाराना है। ये कहना भी गलत नहीं होगा कि उनमें वैसा ही अहंकार आ गया है जैसा कुछ साल पहले तक अरविंद केजरीवाल में देखा जाता था जो प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहते थे कि इस जन्म में तो वे आम आदमी पार्टी को नहीं हरा पाएंगे। और फिर अभी तक अभिजीत दिपके और उनकी टीम यही तय नहीं कर सकी कि उनकी दिशा क्या है? यदि वे 5 सितंबर के प्रदर्शन के लिए अड़ते हैं तब ये संदेह और पक्का हो जाएगा कि उनकी पीठ पर उन विदेशी शक्तियों का हाथ है जो भारत में अराजकता फैलाकर आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डालना चाहती हैं। वरना ब्रिक्स जैसे बेहद महत्वपूर्ण वैश्विक सम्मेलन के एक सप्ताह पूर्व दिल्ली में ऐसा कुछ करने की क्या जरूरत आ गई जिससे कि कानून व्यवस्था बनाये रखने की समस्या उत्पन्न हो। ऐसे आयोजनों की सफलता देश की प्रतिष्ठा बढ़ाती है। लेकिन ऐसा लगता है कॉकरोच जनता पार्टी को उसकी लेश मात्र चिंता नहीं है।

23/08/2026
17/08/2026

दिमागी नक्सली: निशाना सही जगह लगा

स्वाधीनता दिवस पर लालकिले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनेक मुद्दों पर सरकार की कार्य योजना देश के सामने रखी। इनमें विद्यार्थियों पर केंद्रित ऑन लाइन कोचिंग और 1 करोड़ युवाओं को ए.आई.(आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस) प्रशिक्षण संबंधी घोषणा के अलावा समुद्र से तेल निकालकर आत्मनिर्भरता हासिल करना और परमाणु ऊर्जा के उत्पादन के लक्ष्य पूरे करना भी है। श्री मोदी ने देश के विकास के लिए शक्ति की सप्तधारा का आह्वान किया, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, गतिशक्ति, और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जैसे प्रमुख कार्य शामिल हैं। ऊर्जा सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने देश में सेमीकंडक्टर संयंत्र और महत्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन को बढ़ाने की जरूरत के साथ ही युवाओं से डिजिटल जनगणना अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने और सटीक डेटा ऑनलाइन अपलोड करने का आह्वान किया। राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का विशेष उल्लेख भी उनके भाषण में विशेष रूप से हुआ। और लालकिले से पहली बार राष्ट्रागान जन, गण , मन के अलावा वंदे मातरम के सभी छंदों को प्रस्तुत किया गया। लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने दिमागी नक्सलियों से सतर्क रहने का जो आह्वान किया उसे लेकर विवाद पैदा हो गया। उन्होंने हाल ही में सशस्त्र नक्सलवादियों के सफ़ाये का उल्लेख करते हुए आगाह किया कि उसके बाद भी देश में इस मानसिकता वाले लोगों को भड़काकर समाज को बांटना चाहते हैं जिनसे बचना चाहिए। हालांकि शहरी नक्सली शब्द का उपयोग पहले भी किया जाता रहा है। लेकिन दिमागी नक्सली शब्द पहली बार उपयोग में आया। संभवतः उनका अभिप्राय ये था कि हिंसा फैलाकर देश में साम्यवादी शासन व्यवस्था स्थापित करने के षडयंत्र में जुटे हथियारबंद नक्सलवादियों के खात्मे के उपरांत भी उनके मानस पुत्र दूसरे रूप में सामाजिक जीवन में घुसे हुए हैं और व्यवस्था के विरुद्ध लोगों को उकसाकर आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। इन दिमागी नक्सलियों के बीच सोशल मीडिया के जरिये संवाद और संपर्क कायम रहने से कुछ विशिष्ट समूह बन गए हैं जिनका एकमात्र काम देश को अराजकता में धकेलना है। प्रधानमंत्री द्वारा इनसे सतर्क रहने की अपील किये जाने के बाद से ही इस तबके की घबराहट सामने आ गई। चूंकि नक्सली हिंसा को कभी भी जनसमर्थन नहीं मिला इसलिए उसके अदृश्य प्रवक्ता पत्रकार, साहित्यकार , अध्यापक और एनजीओ चलाने वाले कथित सामाजिक कार्यकर्ता अप्रत्यक्ष तौर पर साम्यवादी विचारधारा के प्रसार का प्रयास करते रहते हैं। इस मुहिम में इन्होंने कांग्रेस सहित हर उस राजनीतिक पार्टी में घुसपैठ की जो रास्वसंघ और भाजपा की विरोधी हो। शिक्षा, साहित्य,कला संस्कृति, इतिहास, समाचार जगत, सिनेमा जैसी विधाओं में इन्होंने अपनी जगह बनाई। लेकिन बीते एक दशक से ये वर्ग परेशान है क्योंकि इनके षडयंत्र बेनकाब होने लगे। इन दिमागी नक्सलियों में हताशा इसलिए भी बढ़ रही हैं क्योंकि प. बंगाल और त्रिपुरा के बाद केरल की सत्ता भी इनके हाथ से निकल गई। ऐसे में केवल दिमागी नक्सलियों के जरिये ही साम्यवादी अपना अस्तित्व बचाने का ताना - बाना बुन रहे हैं। जब प्रधानमंत्री ने इनके इरादों पर सीधे चोट की तो सहानुभूति हासिल करने के लिए ये प्रचार करने लगे कि सरकार से सवाल पूछने और व्यवस्था में व्याप्त विसंगतियों का विरोध करने वालों को नक्सली कहकर भयभीत किया जा रहा है। पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम भी खुद को दिमागी नक्सली बताने लगे। स्मरणीय है इनके कार्यकाल में नक्सलियों द्वारा कई बड़े नरसंहार किये गए थे किंतु इनकी सरकार उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकी । अब जबकि वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह ने हथियारबंद नक्सलियों का खात्मा करने में सफलता हासिल कर ली तब नक्सली मानसिकता के पैरोकारों में घबराहट फैलना लाजमी है। प्रधानमंत्री द्वारा इनके विरुद्ध लोगों को सावधान रहने की अपील किये जाने के बाद ये तबका नक्सली विचारधारा को अभिव्यक्ति की आजादी और सरकार के विरोध से जोड़कर खुद को पाक साफ साबित करने में जुट गया है। लेकिन भारत के युवाओं सहित समाज का बड़ा वर्ग इनके जाल में नहीं फंसने वाला। चंद ढपलीबाजों के झुंड यदि युवाओं को प्रभावित करने में सक्षम होते तो इस देश में माओवादी सत्ता आ चुकी होती। मौजूदा परिदृश्य को देखते हुए प्रधानमंत्री द्वारा दिमागी नक्सलियों पर जो निशाना लगाया वह सही जगह जाकर लगा है।

08/08/2026

दलित सिखों में बढ़ते ईसाईकरण से पंजाब की राजनीति में नये समीकरण बनेंगे

पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इसके दो संकेत बीते दिनों दिल्ली में देखने मिले। पहला किसानों द्वारा पाँच साल पहले दिल्ली में दिये धरने की पुनरावृत्ति और दूसरा जंतर मंतर पर हुआ आंदोलन। पहली मुहिम को तो सरकार ने समझा - बुझाकर ठण्डा कर दिया लेकिन जंतर मंतर आंदोलन लम्बा खिंचा जिसकी राष्ट्रव्यापी चर्चा भी हुई। ये सवाल उठना लाजमी है कि उक्त दोनों का पंजाब चुनाव से क्या संबंध है तो इसका जवाब है किसानों के दिल्ली में जमावड़े के पीछे भी पंजाब लॉबी थी और इसी तरह जंतर मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के धरने में आम आदमी पार्टी द्वारा सामने आकर सक्रियता दिखाने के पीछे भी पंजाब चुनाव ही है । असल में दिल्ली की सत्ता गँवाने के बाद अरविंद केजरीवाल भी एक बार सुर्खियों में आने के लिए प्रयासरत थे। शुरू में कॉकरोच जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी की जुगलबंदी लोगों को अटपटी लगी परंतु जल्दी ही ये सच्चाई उजागर हो गई कि दोनों का डी. एन.एक ही है। कॉकरोच जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं द्वारा आम आदमी पार्टी से पुराने जुड़ाव को भी स्वीकार किया गया । जिस तरह से केजरीवाल, मनीष सिसौदिया, संजय सिंह और आतिशी ने जंतर मंतर पर नियमित उपस्थिति दर्ज करवाई उसके बाद रहा - सहा संदेह भी मिट गया। और जब आंदोलन समाप्त होने पर कॉकरोच जनता पार्टी के एक प्रमुख नेता से पूछा गया कि पेपर तो पंजाब में भी लीक हुआ तो क्या जंतर मंतर जैसा आंदोलन भगवंत सिंह मान सरकार के विरुद्ध भी किया जाएगा, तब वे उसका जबाब देने से बचे जिससे जाहिर हो गया कि इस पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच रणनीतिक भागीदारी है। इसी ने राहुल गाँधी को जंतर मंतर पर आने से रोका और जिससे हुए राजनीतिक नुकसान की भरपाई के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री निवास पर धरने का आयोजन किया। गत दिवस कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी ये स्वीकार किया कि छात्रों की समस्या को कांग्रेस और राहुल ने पहले ही उठाया था किंतु उसे अपेक्षित जनसमर्थन क्यों नहीं मिला इसके लिए पार्टी को जनता की नब्ज समझने की जरूरत है। कांग्रेस भी पंजाब के आगामी चुनाव के लिए कमर कस रही है लेकिन कुछ साल पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू की लड़ाई ने जिस प्रकार उसका भट्टा बिठाया वही इस बार पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के नेतृत्व को अस्वीकार करने की घोषणा से दोहराई जा रही है। आम आदमी पार्टी की प्रदेश सरकार वैसे तो काफी अलोकप्रिय हो चुकी है लेकिन सक्षम विकल्प सामने नहीं आने से उसे मैदान खाली नजर आने लगा। कांग्रेस की दुविधा ये है कि पंजाब में उसके भीतरी संग्राम के कारण बचा - खुचा जनाधार भी खिसकने का खतरा है। और फिर वह किसी अन्य पार्टी से गठजोड़ करने की स्थिति में भी नहीं है। संयोग से यही विडंबना भाजपा के साथ भी है। सिखों के बीच वह आज भी समुचित पैठ नहीं बना सकी। हालांकि राज्य में 39 फीसदी हिंदू भी हैं किंतु वे मुख्य रूप से शहरों में ही हैं और उनका एक हिस्सा कांग्रेस के साथ भी है। भाजपा ने पहले कोशिश की कि अन्य राज्यों जैसे ही पंजाब में भी हिंदुओं का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में कर ले। खालिस्तानी आंतक में वृद्धि से इसकी संभावना बढ़ी भी लेकिन पार्टी के पास ऐसा कोई दमदार नेता नहीं है जो हिंदुओं को गोलबंद कर सके। हालांकि आम आदमी पार्टी से आये आधा दर्जन सांसद उसके मददगार हैं किंतु वे प. बंगाल जैसा उलटफेर करने का माद्दा नहीं रखते। इसीलिये पार्टी ने अपने पुराने साथी शिरोमणि अकाली दल की तरफ हाथ बढ़ा दिया जिसका प्रमाण सुखबीर सिंह बादल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात से मिल गया। इन दोनों का गठबंधन अतीत में राज्य की सत्ता भी चला चुका है किंतु 3 कृषि कानूनों को लेकर दोनों दूर हुए और 2022 में अलग - अलग लड़कर नुकसान उठाया। शायद दोनों समझ चुके हैं कि एक बार फिर एक साथ आने से वे पंजाब की राजनीतिक मुख्यधारा में लौट सकेंगे। हालांकि प्रकाश सिंह बादल की मृत्यु के बाद अकाली दल की वह ताकत नहीं रही और सिख नेतृत्व भी खेमों में बंट चुका है। बढ़ती नशाखोरी और सीमावर्ती ग्रामीण जिलों में दलित सिखों के तेजी से हो रहा ईसाईकरण भी नये समीकरणों को जन्म दे रहा है। ऐसे में अकाली - भाजपा गठजोड यदि मजबूती से उतरा और दोनों के बीच पुराना भरोसा कायम हुआ तब वे आम आदमी पार्टी के लिए चुनौती बन सकते हैं। फ़िलहाल तो पंजाब के बारे में सियासी भविष्यवाणी करना जलादबाजी होगी।

Address

23, Sheetalpuri Colony, Ukhri Road, Cherital Ward
Jabalpur
482001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Madhya Pradesh Hindi Express posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Madhya Pradesh Hindi Express:

Shortcuts

Share