22/12/2025
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एक तूफ़ानी रात... एक अनचाहा दर्द... और एक ऐसे बच्चे का जन्म जो अपने साथ कई सवाल लेकर आया है।
पढिए यह रोमांचक कहानी मेरे साथ। अगर आप तैयार हैं, तो कहानी को Like करें और चलिए पढ़ते हैं आज का एपिसोड!" -2
उन्हें मुस्कुराता देखकर अन्य ऋषि-मुनि आश्चर्यचकित रह गए। जिस तूफ़ान और बदलती हवाओं को देखकर वे भयभीत हो रहे थे, उसी दृश्य को देखकर उनके गुरुवर के चेहरे पर असीम शांति और मुस्कान थी।
उनमें से एक शिष्य ने साहस जुटाकर पूछा- "गुरुवर, क्षमा करें, पर हम समझ नहीं पा रहे हैं। चारों ओर प्रकृति का यह रौद्र रूप दिख रहा है, और आप मुस्कुरा रहे हैं? क्या यह किसी अनिष्ट का संकेत नहीं है?"
गुरुवर ने अपनी गहरी और तेजस्वी आँखों से आसमान की ओर देखा, जहाँ बादलों की गर्जना अब भी जारी थी। उन्होंने गंभीर स्वर में कहा- "वत्स, जिसे तुम अनिष्ट समझ रहे हो, वह दरअसल प्रकृति का 'स्वागत-गान' है। यह तूफ़ान विनाश लाने नहीं आया है, बल्कि यह बताने आया है कि धरती पर किसी विशेष शक्ति का आगमन हो चुका है। वर्षों की तपस्या और गणना आज सिद्ध हुई है। वह आ गया है..."
यह सुनकर सभी ऋषि-मुनि स्तब्ध रह गए। "कौन गुरुवर? किसका आगमन?"
गुरुवर ने पुनः अपनी आँखें बंद कर लीं और धीमे स्वर में बोले- "समय आने पर सब पता चल जाएगा। अभी बस इतना जान लो कि आज की यह रात साधारण नहीं है। आज मुम्बई की धरती पर एक ऐसे सूर्य ने जन्म लिया है, जिसकी चमक से आने वाला भविष्य रोशन होगा। लेकिन..." उनकी आवाज़ में अचानक एक भारीपन आ गया, "...शक्ति के साथ चुनौतियाँ भी जन्म लेती हैं।"
दृश्य: मुम्बई सिटी हॉस्पिटल
ओ.टी. के बाहर का माहौल अब पहले से थोड़ा अलग था। जो हवाएँ कुछ देर पहले तक डरा रही थीं, बच्चे के रोने की आवाज़ आते ही वे हवाएँ मानो लोरी गाने लगी थीं। तूफ़ान थम गया था और एक अजीब सी शांति छा गई थी।
जय राठौर की धड़कनें अभी भी तेज थीं। उनकी नज़रें ओ.टी. के दरवाज़े पर टिकी थीं। तभी दरवाज़ा खुला और डॉक्टर बाहर आए। इस बार उनके चेहरे पर वो घबराहट नहीं थी, जो पहले थी। उन्होंने मास्क हटाते हुए एक सुकून भरी सांस ली।
जय तुरंत उनकी ओर लपके, "डॉक्टर? मेरी वाइफ? और बच्चा...?"
डॉक्टर ने मुस्कुराते हुए जय के कंधे पर हाथ रखा, "Relax Mr. Rathore! सब ठीक है। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है कि इतनी कॉम्प्लीकेशन्स के बाद भी नॉर्मल डिलीवरी हो गई। बधाई हो, आपको बेटा हुआ है।"
यह सुनते ही जय के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। पास खड़ीं भाग्यश्री जी ने हाथ जोड़कर भगवान का शुक्रिया अदा किया, "हे ईश्वर! तेरा लाख-लाख शुक्र है। मेरा पोता हुआ है!"
जय ने बेताबी से पूछा, "डॉक्टर, क्या मैं सौम्या और अपने बेटे से मिल सकता हूँ? सौम्या ठीक तो है ना?"
"हाँ, मिसेस राठौर अभी बेहोश हैं, उन्हें बहुत कमजोरी आ गई है, लेकिन वो खतरे से बाहर हैं। हम बच्चे को साफ़ कर रहे हैं, आप कुछ देर में उनसे मिल सकते हैं," डॉक्टर ने कहा और नर्स को इशारा कर दिया।
कुछ मिनटों बाद, जय को कमरे के अंदर जाने की इजाज़त मिली। जय दबे पाँव अंदर दाखिल हुए। कमरे में हल्की नीली रोशनी थी। बेड पर सौम्या अचेत अवस्था में लेटी थीं, उनका चेहरा पीला पड़ा था लेकिन साँसें सामान्य चल रही थीं। और उनके ठीक बगल में, एक छोटे से पालने (crib) में वो नन्हा जान लेटा था।
जय धीरे-धीरे पालने के पास गए। उनका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। जैसे ही उन्होंने पालने में झाँका, उनकी नज़र उस बच्चे पर पड़ी।
वह बच्चा रो नहीं रहा था। उसकी बड़ी-बड़ी आँखें खुली थीं, जो एक नवजात शिशु के लिए असामान्य बात थी। वह एकटक छत की ओर देख रहा था। जय ने कांपते हाथों से अपने बेटे को छूने की कोशिश की। जैसे ही जय की उंगली ने बच्चे के नन्हे हाथ को छुआ, बच्चे ने अपनी नन्ही मुट्ठी में जय की उंगली को कसकर पकड़ लिया।
उस स्पर्श के साथ ही जय को अपने शरीर में एक अजीब सी बिजली दौड़ने का अहसास हुआ। एक ऐसा खिंचाव, जो उन्होंने पहले कभी महसूस नहीं किया था।
तभी, कमरे की खिड़की से चाँद की रोशनी सीधे उस बच्चे के चेहरे पर पड़ी। जय ने गौर से देखा, बच्चे के दाहिने कंधे के पीछे एक निशान था—एक गहरा लाल निशान, जो किसी त्रिशूल या मशाल जैसा दिखाई दे रहा था।
भाग्यश्री जी भी पीछे-पीछे कमरे में आ गई थीं। बच्चे को देखते ही वो भावुक हो गईं, "जय... देख तो, यह कितना शांत है। बिल्कुल तुझ पर गया है।"
लेकिन जय का ध्यान उस निशान और बच्चे की उन गहरी, काली आँखों पर था, जिनमें एक अजीब-सी गहराई थी। जय ने धीरे से कहा, "माँ, मुझे नहीं पता क्यों, पर इसे गोद में लेते ही मुझे लग रहा है कि... यह कोई आम बच्चा नहीं है।"
तभी अचानक, हॉस्पिटल की लाइटें एक सेकंड के लिए फ्लिकर (झिलमिलाने) करने लगीं और फिर वापस आ गईं। पालने में लेटे बच्चे के होंठों पर, नींद में ही सही, एक हल्की सी मुस्कान तैर गई।
बद्रीनाथ में गुरुवर ने अपनी आँखें खोलीं और बुदबुदाए- "उसने अपनी आँखें खोल ली हैं..."
क्रमशः (To be continued)...
"दोस्तों, आखिर क्या राज़ छिपा है उस निशान के पीछे? और क्यों उस बच्चे के जन्म लेते ही बादियों में बैठे गुरुवर मुस्कुरा उठे? क्या जय राठौर जान पाएगा कि उसका बेटा कोई साधारण बच्चा नहीं है? जानने के लिए सुनिए/पढ़िए अगला एपिसोड!"
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