28/08/2026
आज का दिन मेरी ज़िंदगी का सबसे काला दिन है…🥀
आज ही के दिन मेरी माँ मुझे इस दुनिया में अकेला छोड़कर चली गई थी।आज पूरे एक साल हो गया माँ… लेकिन सच कहूँ तो मेरे लिए ये एक साल बीता ही नहीं। ऐसा लगता है जैसे वक्त उसी दिन रुक गया था, जिस दिन तू मुझसे हमेशा के लिए दूर चली गई। माँ, तेरे जाने के बाद समझ आया कि माँ सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं होती, माँ तो इंसान की पूरी दुनिया होती है।तेरे बिना घर वही है, कमरे वही हैं, दीवारें वही हैं, आँगन वही है… लेकिन उस घर में अब वो रौनक नहीं है, वो हँसी नहीं है, वो अपनापन नहीं है।तेरे बिना घर घर नहीं लगता माँ… बस एक मकान लगता है।आज हम जो भी हैं, तेरी वजह से हैं माँ।हमारी हर खुशी में तेरी खुशी थी, हमारी हर कामयाबी में तेरी दुआ थी और हमारी हर परेशानी में तू हमसे पहले परेशान होती थी।मुझे आज भी वो दिन याद आते हैं माँ, जब मैं घर आने में देर कर देता था।तू दरवाज़े की तरफ़ आँखें लगाए मेरा इंतज़ार करती रहती थी।
जब तक मैं घर नहीं आता, तू चैन से सोती भी नहीं थी।और जैसे ही मैं घर आता था, तेरी आँखों से आँसू निकल आते थे और तू कहती थी—“इतनी देर क्यों कर दी बेटा?”फिर डाँटते हुए कहती थी—“पहले खाना खा ले।”
माँ, उस वक्त शायद मैं तेरी इन बातों की कीमत नहीं समझ पाया…आज उन्हीं बातों को सुनने के लिए मेरा दिल तरसता है।आज घर देर से आऊँ तो कोई इंतज़ार नहीं करता।कोई दरवाज़े पर खड़ा होकर नहीं पूछता—“मेरा बेटा आ गया?”
आज कोई नहीं पूछता माँ कि मैंने खाना खाया या नहीं…कोई नहीं पूछता कि मैं कहाँ था…कोई नहीं पूछता कि मैं ठीक हूँ या नहीं।सबसे ज्यादा दर्द इसी बात का है माँ—जिस इंसान को मेरी सबसे ज्यादा फिक्र थी, आज वही मेरे पास नहीं है।
एक तू ही तो थी माँ जो मुझे समझती थी।दुनिया के लिए मैं चाहे तेज़ हूँ, चालाक हूँ, कठोर हूँ या मेरी गलतियाँ ही क्यों ना दिखाई दें…लेकिन तेरी नजरों में मैं हमेशा तेरा भोला-सा बच्चा था।मेरी कितनी भी गलती क्यों ना हो, तू मुझे छोड़ती नहीं थी।डाँटती थी, समझाती थी और आखिर में अपने सीने से लगाकर सुला देती थी।दुनिया मुझे मेरे कर्मों से पहचानती रही माँ,तू मुझे सिर्फ़ अपने बेटे के रूप में पहचानती थी।मेरी छोटी-सी खुशी देखकर तू ऐसे खुश हो जाती थी जैसे मैंने तेरे लिए पूरी दुनिया जीत ली हो।मेरी छोटी-सी कामयाबी पर तेरी आँखों में जो गर्व होता था, वो अब कहीं नहीं मिलता माँ।आज भी कभी दिल बहुत भारी हो जाता है तो तेरी तस्वीर के सामने बैठ जाता हूँ।तुझसे बातें करता हूँ… अपनी परेशानी बताता हूँ…और फिर कुछ देर बाद याद आता है कि जिसे अपनी हर बात बताया करता था, वो अब....