The Historic Journey of Jharkhand

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The Historic Journey of Jharkhand This page traces the evolution & transformation of the Jharkhandi identity over the last half century

हमारा एक मात्र उद्देश्य यह है की आने वाली पीढ़ी झारखण्ड के इतिहास को जाने और यह समझे की झारखण्ड का निर्माण एक लम्बे अथक समर का प्रतिफल है।

झारखंड क्षेत्र में सबसे लोकप्रिय जननेता के रूप मैं याद किए जाते हैं , यह लोकप्रियता होने यूं ही हासिल नहीं हो पाई गांव क...
23/09/2026

झारखंड क्षेत्र में सबसे लोकप्रिय जननेता के रूप मैं याद किए जाते हैं , यह लोकप्रियता होने यूं ही हासिल नहीं हो पाई गांव कस्बे में जाकर बेसहारों के सहारे के रूप में खड़े हुए उन्हें संगठित किया। क्रांतिकारी विचारों से थे लैस कभी नहीं किया सिद्धांतों से समझौता।
झारखण्ड के भीष्म पितामाह सह JMM के संस्थापक अध्यक्ष स्व:बिनोद बिहारी महतो जी को उनकी जन्म तिथि पर कोटि कोटि नमन:🙏
#बिनोद_बिहारी_महतो_अमर_रहे।

पद्मश्री डॉ राम दयाल मुंडा की 86 वी जयंती के मौके पर पूरा झारखंड उन्हें नमन कर रहा है🙏_____________________________झारखं...
23/08/2026

पद्मश्री डॉ राम दयाल मुंडा की 86 वी जयंती के मौके पर पूरा झारखंड उन्हें नमन कर रहा है🙏
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झारखंडी तेवर और सरलता के प्रतिनिधि रहे डॉ.राम दयाल मुंडा झारखंड के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के अधिष्ठाता, प्रणेता और नेता थे।वह सांस्कृतिक आंदोलन में सक्रिय रहते हुए राजनीतिक एजेंडा को भी अहमियत देते रहे।उनका यह विश्वास था कि सांस्कृतिक नीवं पक्की हो तो राजनीतिक भवन बनाएं और संवर्धित किया जा सकता है. राजनीतिक आंदोलन में तत्कालिकता प्रधान होती है, जबकि संस्कृतिक पूर्णजागरण अनंत काल तक उस समाज और जाति को जीवित,संवर्धित, उत्तरोतर प्रगति पथ पर अग्रसर करता रहता है।डॉ रामदयाल मुंडा ने झारखंड के सांस्कृतिक एवं बौद्धिक जागरण को मेरुदंड और केंद्रीय भित्ति बनाकर एक शाश्वत सनातन आंदोलन का सूत्रपात किया।हर झारखंडी अपनी भाषा गर्व से बोले अपनी पारंपरिक वेशभूषा में गौरव का अनुभव करें अपनी ऐतिहासिक धरोहर से महिमान्वित हो, अपने पर्व - त्योहार को सोल्लास मनाने में स्वाभिमान का अनुभव करें और विश्व मानचित्र पर अपने को अपमानित,अवहेलित न महसूस करे और अपनी विलक्षण सांस्कृतिक उपस्थिति,अस्तित्व और अस्मिता का परिचय दे। झारखंड के राजनीतिक आंदोलन को सांस्कृतिक संजीवनी प्रदान करने में सतत उद्यमशील और प्रयासरत डॉ. मुंडा समर्पण भाव से झारखंड हित में संलग्न हो गए। वे रांची विश्वविद्यालय के जनजाति एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग मैं अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे थे। झारखंड मुक्ति मोर्चा का तीन दिवसीय द्वितीय महाधिवेशन स्थल पर आकर भेट की । महाधिवेशन के अंतिम दिन झामुमो के नवनिर्वाचित अध्यक्ष निर्मल महतो ने एक प्रेस बयान में कहा कि डॉ मुंडा जैसी शख्सियत को रांची विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया जाना चाहिए, नहीं तो झामुमो आंदोलन का रास्ता अख्तियार करेगा। इस बयान को बिहार के मुख्यमंत्री बिंदेशवरी दुबे ने अहमियत दी और उनकी अनुशंसा पर अक्टूबर 1986 में डॉ मुंडा को कुलपति तो नहीं, प्रतिकुलपति नियुक्त किया गया।झारखंड के बौद्धिक एवं संस्कृतिक सिपाही को यह मान्यता उनके उद्यम को प्रोत्साहित करने का एक छोटा सा उपक्रम था। प्रतिकुलपति के पद पर रह कर उन्होंने सांस्कृतिक और बौद्धिक पुनर्जागरण का काम जारी रखा। 28 जनवरी 1987 को उन्हें कुलपति बनाया गया। झामुमो अध्यक्ष निर्मल महतो की शहादत के बाद झारखंड आंदोलन काफी उफान पर था। इसी बीच केंद्रीय गृहमंत्री बूटा सिंह कांग्रेस के जाने-माने नेता स्वर्गीय कार्तिक उरांव के जयंती समारोह में भाग लेने के लिए 3 नवंबर 1987 को रांची आए हुए थे। गृहमंत्री ने डॉ मुंडा को रात्रि में राजभवन बुलाकर झारखंड आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्भूमि पर बातचीत की। बातचीत पर गृहमंत्री संतुष्ट हुए और उन्होंने डॉ मुंडा को झारखंड आंदोलन की पृष्ठभूमि पर एक नोट(रिपोर्ट)तैयार करने को कहा। डॉ मुंडा ने दिल्ली जाकर 20 मार्च 1988 को गृह मंत्री से मिलकर लिखा गया नोट सौंप दिया।इसमें उन्होंने सुझाव के रूप में चार विकल्प दिया था-
(a) Sixth Scheduled Area
(b) Autonomus Area Council
(c) Union Territory
(d) Statehood
डॉ मुंडा का झारखंड राज्य के प्रति प्रेम, समर्पण और प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष रूप से झारखंड आंदोलन में जुड़े रहने के कारण उन्हें 9 अगस्त 1988 को बिहार सरकार के इशारे पर राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री गोविंद नारायण सिंह ने रांची विश्वविद्यालय के कुलपति पद से बर्खास्त कर दिया। डॉ मुंडा को कुलपति पद से हटाया जाने पर बिहार सरकार का झारखंड के प्रति सौतेला भाव उजगार हुआ। बिहार सरकार के इस व्यवहार से झारखंड आंदोलन को और बल मिला। डाॅ मुंडा पूर्ण रूप से झारखंड आंदोलन में शामिल हो गए।



Source: झारखंड की समरगाथा
(झारखंड आंदोलनकारी सह पूर्व सांसद श्री शैलेंद्र महतो)

1981 में गुआ फायरिंग के बाद जमशेदपुर में हुई बैठक में शिबू सोरेन, निर्मल महतो, शैलेन्द्र महतो, कृष्णा मार्डी, सूरज मंडल ...
22/08/2026

1981 में गुआ फायरिंग के बाद जमशेदपुर में हुई बैठक में शिबू सोरेन, निर्मल महतो, शैलेन्द्र महतो, कृष्णा मार्डी, सूरज मंडल व अन्य |||
Picture Credits : झारखंड की समरगाथा

डॉ. बिशेश्वर प्रसाद केशरी (1 जुलाई 1933 – 14 अगस्त 2016)शिक्षाविद्, साहित्यकार, चिंतक, झारखंड आंदोलनकारी, झारखंड के इतिह...
14/08/2026

डॉ. बिशेश्वर प्रसाद केशरी (1 जुलाई 1933 – 14 अगस्त 2016)
शिक्षाविद्, साहित्यकार, चिंतक, झारखंड आंदोलनकारी, झारखंड के इतिहास, भाषा, साहित्य, संस्कृति और अस्मिता को समझने के लिए जिन व्यक्तित्वों का स्मरण अनिवार्य है, उनमें डॉ. बी. पी. केशरी का नाम अग्रणी है।
उन्होंने झारखंड को केवल एक भौगोलिक क्षेत्र के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे एक विशिष्ट ऐतिहासिक चेतना, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक अस्तित्व के रूप में समझा। अपने अध्यापन, लेखन और वैचारिक संघर्ष के माध्यम से उन्होंने झारखंड की भाषा, लोक-संस्कृति, इतिहास और पहचान को बौद्धिक आधार देने का महत्वपूर्ण कार्य किया। अलग झारखंड राज्य की मांग के आंदोलन में भी उनका योगदान केवल नारों और आंदोलनों तक सीमित नहीं था। उन्होंने कलम और विचार को आंदोलन का माध्यम बनाया। यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी, उन्होंने झारखंड के प्रश्न को भावनाओं के साथ-साथ इतिहास, संस्कृति और तर्क की कसौटी पर भी रखा। आज जब हम झारखंड की पहचान और उसके इतिहास की बात करते हैं, तो यह समझना आवश्यक है कि यह पहचान अचानक निर्मित नहीं हुई। इसके पीछे अनेक लोगों का दीर्घ वैचारिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संघर्ष रहा है। डॉ. बी. पी. केशरी उसी संघर्ष की एक महत्वपूर्ण आवाज थे।
पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना केवल श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उनके विचारों और बौद्धिक विरासत को समझना भी है।
14 अगस्त 2016 को उनका देहावसान हुआ, लेकिन झारखंड को समझने की उनकी दृष्टि आज भी जीवित है।
महान चिंतक, साहित्यकार एवं झारखंड आंदोलन के वैचारिक पुरोधा डॉ. बी. पी. केशरी जी को उनकी पुण्यतिथि पर शत्-शत् नमन।🙏

#बीपीकेशरी #झारखंड #झारखंडआंदोलन #झारखंडीअस्मिता #पुण्यतिथि

"मुझे गर्व है कि मैं आदिवासी हूं क्योंकि मैं इस धरती का मूलवासी हूं, मेरी अपनी संस्कृति है, मेरी अपनी भाषा है, हम किसी प...
09/08/2026

"मुझे गर्व है कि मैं आदिवासी हूं क्योंकि मैं इस धरती का मूलवासी हूं, मेरी अपनी संस्कृति है, मेरी अपनी भाषा है, हम किसी पर आश्रित नहीं है , हमारा अपना वजूद है, आदिवासी ना तो आस्तिक है, न तो नास्तिक, आदिवासी वास्तविक है"
#विश्व_आदिवासी_दिवस
#जोहार

झारखंड आंदोलन के महानायक शहीद निर्मल महतो को नमन ।💚   #झारखंड_आंदोलन  #शहीद_निर्मल_महतो
08/08/2026

झारखंड आंदोलन के महानायक शहीद निर्मल महतो को नमन ।💚

#झारखंड_आंदोलन
#शहीद_निर्मल_महतो

06/08/2026

सत परीक्षत सत ।।
हमारी पहचान बिरसा मुंडा, सिधू कान्हू, निर्मल महतो ,जयपाल मुंडा, बिनोद बिहारी महतो, शिबू सोरेन से है।।
जोहार , जय झारखण्ड।।

झारखंड के नेल्सन मंडेला थे शिबू सोरेन :- शैलेंद्र महतो( झारखंड निर्माता सह पूर्व सांसद) #दिशोम_गुरु_शिबू_सोरेन_अमर_रहे  ...
05/08/2026

झारखंड के नेल्सन मंडेला थे शिबू सोरेन :- शैलेंद्र महतो( झारखंड निर्माता सह पूर्व सांसद)

#दिशोम_गुरु_शिबू_सोरेन_अमर_रहे

झारखंड आंदोलन के महान योद्धा स्वर्गीय शिबू सोरेन जी के प्रथम पुण्यतिथि पर शत शत नमन 🙏 #शिबू_सोरेन
04/08/2026

झारखंड आंदोलन के महान योद्धा स्वर्गीय शिबू सोरेन जी के प्रथम पुण्यतिथि पर शत शत नमन 🙏
#शिबू_सोरेन

कोयलांचल को माफिया और सूदखोरों के बीच अपने लड़ाई करते हुए शहीद हो गए थे अथवा कोयलांचल का हीरा कहे जाने वाले क्रांति दूत ...
02/08/2026

कोयलांचल को माफिया और सूदखोरों के बीच अपने लड़ाई करते हुए शहीद हो गए थे अथवा कोयलांचल का हीरा कहे जाने वाले क्रांति दूत अमर शहीद शक्तिनाथ महतो की जयंती है।
आइये हम सब मिलकर इस महान दिवस पर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देते हैं शत शत नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करें।*💐🙏
#झारखंड_आंदोलन
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