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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल बड़े-बड़े सेनानायकों, योद्धाओं और राजाओं के संघर्ष की गाथा नहीं है। इस इतिहास म...
03/09/2026

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल बड़े-बड़े सेनानायकों, योद्धाओं और राजाओं के संघर्ष की गाथा नहीं है। इस इतिहास में ऐसे अनेक बाल वीरों और वीरांगनाओं का भी योगदान रहा है, जिन्होंने अपनी छोटी उम्र के बावजूद विदेशी शासन के सामने अद्भुत साहस और स्वाभिमान का परिचय दिया। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की ऐसी ही प्रेरणादायक गाथा वीर बालिका मैना कुमारी से जुड़ी है, जिनके साहस और बलिदान की कहानी आज भी राष्ट्रभक्ति और आत्मसम्मान की मिसाल के रूप में स्मरण की जाती है।

कहा जाता है कि मैना कुमारी का संबंध बिठूर और 1857 के विद्रोह के प्रमुख नेता नाना साहब पेशवा से था। उस दौर में कानपुर और बिठूर अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष के महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके थे। भारतीय सैनिकों और क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सत्ता को कड़ी चुनौती दी थी। अंग्रेजी सेना की जवाबी कार्रवाई के दौरान बिठूर में भीषण दमन और तबाही का दौर शुरू हुआ। इसी उथल-पुथल के बीच मैना कुमारी की वीरता की कहानी सामने आती है।

बिठूर की धरती पर दिखा बाल शौर्य

1857 की क्रांति के दौरान नाना साहब पेशवा के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ व्यापक प्रतिरोध खड़ा हुआ। ब्रिटिश सेना ने विद्रोह को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाए। अंग्रेजी सेना के बिठूर पहुंचने के बाद वहां स्थित राजप्रासाद और क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़ी अन्य निशानियों को नष्ट करने की कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान एक नन्ही बालिका के साहस का प्रसंग सामने आता है। बताया जाता है कि जब अंग्रेजी सेना महल को नष्ट करने की तैयारी कर रही थी, तब मैना कुमारी निर्भीक होकर उसके सामने खड़ी हो गईं। इतनी कम उम्र की बालिका का इस प्रकार अंग्रेज अधिकारियों के सामने आकर अपनी बात रखना उस समय असाधारण घटना थी।

मैना ने महल को नष्ट नहीं करने का आग्रह किया। उनके तर्क का आधार यह था कि किसी भवन या निर्जीव संपत्ति का कोई अपराध नहीं होता। यदि किसी व्यक्ति ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया है, तो उसके लिए निर्दोष वस्तुओं को नष्ट करना उचित नहीं कहा जा सकता। एक बालिका की निर्भीकता और आत्मविश्वास ने वहां मौजूद अधिकारियों को भी प्रभावित किया, लेकिन ब्रिटिश शासन उस समय विद्रोह को किसी भी कीमत पर कुचलने की नीति पर आगे बढ़ रहा था।

पहचान सामने आते ही बदल गया अंग्रेजों का रवैया

कहानी के अनुसार, जब ब्रिटिश अधिकारियों को यह जानकारी मिली कि मैना कुमारी का संबंध नाना साहब से है, तो उनका रवैया और कठोर हो गया। अंग्रेजों को उम्मीद थी कि कम उम्र की इस बालिका पर दबाव बनाकर नाना साहब तथा अन्य क्रांतिकारियों के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है। मैना कुमारी को कथित तौर पर हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। उन्हें डराने, धमकाने और मानसिक दबाव में लेने का प्रयास किया गया। लेकिन मैना अपने संकल्प से पीछे नहीं हटीं।

उनसे नाना साहब के ठिकाने और क्रांतिकारियों से संबंधित जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई ऐसी जानकारी देने से इनकार कर दिया जिससे उनके सहयोगियों या परिवार को नुकसान पहुंच सकता था। यही वह प्रसंग है जो मैना कुमारी की गाथा को सामान्य ऐतिहासिक घटना से आगे बढ़ाकर बाल शौर्य और राष्ट्रनिष्ठा की प्रेरक कथा बनाता है।

अंग्रेजी दमन के सामने नहीं झुका सिर

1857 के विद्रोह को दबाने के लिए ब्रिटिश शासन ने अनेक स्थानों पर कठोर कार्रवाई की। विद्रोहियों और उनके सहयोगियों को पकड़ने तथा उनसे जानकारी हासिल करने के लिए दमन का सहारा लिया गया। मैना कुमारी से जुड़ी ऐतिहासिक गाथा में भी बताया जाता है कि लगातार पूछताछ और दबाव के बावजूद उन्होंने अपने पिता तथा क्रांतिकारियों से संबंधित कोई महत्वपूर्ण जानकारी अंग्रेजों को नहीं दी।

उनका यह कथित मौन उस दौर में प्रतिरोध का प्रतीक बन गया। एक ओर ब्रिटिश शासन के पास हथियार, सेना और सत्ता थी, वहीं दूसरी ओर एक किशोरी के पास केवल उसका साहस, आत्मविश्वास और अपने देश के प्रति निष्ठा थी। इसके बावजूद वह अंग्रेजी सत्ता के सामने झुकने को तैयार नहीं हुईं।

बलिदान की अमर गाथा

मैना कुमारी से जुड़ी सबसे मार्मिक कथा उनके अंतिम बलिदान की है। उपलब्ध लोकप्रिय ऐतिहासिक वर्णनों के अनुसार, जब अंग्रेजी अधिकारियों को उनसे अपेक्षित जानकारी नहीं मिली, तो उनके प्रति अत्यंत क्रूर व्यवहार किया गया और अंततः उन्हें जीवित जला दिए जाने का आदेश दिया गया। कहा जाता है कि मृत्यु के सामने भी मैना कुमारी के चेहरे पर भय नहीं था। उन्होंने अपने स्वाभिमान और राष्ट्रनिष्ठा से समझौता करने के बजाय बलिदान का मार्ग चुना।

उनकी यह गाथा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उस पक्ष को सामने लाती है, जिसमें उम्र कभी साहस की सीमा नहीं बनी। जिस उम्र में अधिकांश बच्चे जीवन के शुरुआती सपनों और खेल-कूद में व्यस्त होते हैं, उस उम्र में मैना कुमारी ने कथित रूप से विदेशी सत्ता के सामने अपने आत्मसम्मान की रक्षा को सर्वोच्च माना।

आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा

मैना कुमारी की कहानी केवल अतीत की एक घटना नहीं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी के लिए भी कई महत्वपूर्ण संदेश देती है। उनका जीवन यह बताता है कि साहस केवल शारीरिक शक्ति का नाम नहीं है। वास्तविक साहस विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर कायम रहने से पैदा होता है।

1857 का संग्राम भारतीय इतिहास में स्वतंत्रता की चेतना का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इस संघर्ष में शामिल हजारों ज्ञात-अज्ञात लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी। मैना कुमारी जैसी बाल वीरांगनाओं की कथाएं इस बात की याद दिलाती हैं कि स्वतंत्रता का मूल्य केवल युद्धभूमि में लड़ने वाले सैनिकों ने नहीं चुकाया, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों और आयु समूहों के लोगों ने अपने-अपने स्तर पर संघर्ष किया। आज स्वतंत्र भारत में नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता का महत्व समझते हुए ऐसे बलिदानों को याद करना आवश्यक है। इतिहास की इन गाथाओं से नई पीढ़ी को देश के प्रति जिम्मेदारी, सत्य के प्रति निष्ठा और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने की प्रेरणा मिलती है।

मैना कुमारी की वीरगाथा इस संदेश के साथ अमर है कि राष्ट्रप्रेम उम्र का मोहताज नहीं होता। साहस यदि हृदय में हो, तो एक बालिका भी साम्राज्यवादी सत्ता के सामने अपने स्वाभिमान की ऐसी मिसाल कायम कर सकती है, जिसे पीढ़ियां याद रखती हैं।

लेखक एवं कवि — वरुण कुमार

कोल्हान नितिर तुरतुंग के चक्रधरपुर केंद्र में आज एक विशेष प्रेरणादायक सत्र का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मे...
03/09/2026

कोल्हान नितिर तुरतुंग के चक्रधरपुर केंद्र में आज एक विशेष प्रेरणादायक सत्र का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में संस्थान के संरक्षक माझी राम जामुदा ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों का आत्मीय परिचय कराया और पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया।

कार्यक्रम के दौरान माउंट आबू (राजस्थान) से आए बीके हितेश, बेगूसराय से बीके रंजीत, जमशेदपुर से बीके पूनम और बीके पायल ने छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। ब्रह्माकुमारीज के पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों को "खुद से खुद को मिलाने" के लिए मेडिटेशन (ध्यान) का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि ध्यान से एकाग्रता और आत्मविश्वास को कैसे बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही, उन्होंने कठिन और विषम परिस्थितियों में भी मानसिक शांति बनाए रखने के व्यावहारिक गुर सिखाए।

सत्र के दौरान नशा मुक्ति पर विशेष जोर दिया गया। बीके प्रतिनिधियों ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नशा केवल शराब या ड्रग्स तक सीमित नहीं है, बल्कि आज के दौर में मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल, किसी वस्तु का आदी होना या किसी के प्रति अत्यधिक भावनात्मक लगाव भी एक प्रकार का नशा है। उन्होंने विद्यार्थियों को इन डिजिटल और व्यावहारिक व्यसनों से खुद को संभालने व सुरक्षित रखने की सीख दी।

कार्यक्रम के अंत में सभी छात्र-छात्राओं और उपस्थित लोगों को 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत नशा मुक्ति की शपथ दिलाई गई। ब्रह्माकुमारीज की ओर से सामाजिक जागरूकता में उत्कृष्ट योगदान के लिए कोल्हान नितिर तुरतुंग संस्थान को "नेशनल पब्लिक अवेयरनेस मूवमेंट" का प्रमाण पत्र (Certificate) भी प्रदान किया गया।

इस विशेष सत्र में संस्थान के संरक्षक माझी राम जामुदा, संयुक्त सचिव हेमंत सामड, मीडिया प्रभारी रबिन्द्र गिलुवा, संस्थापक सदस्य सत्यजीत हेमब्रोम, शिक्षक गौतम गागराई, सिकंदर गागराई, सिनी गागराई, जीतू बोदरा, मलंती सोय, गुरुवारी सामड सहित लगभग 165 छात्र-छात्राएं मुख्य रूप से मौजूद रहे।

दलमा वन्यप्राणी अभयारण्य में Eco-Tourism के नाम पर बनाए गए कॉटेज को लेकर विवाद अब गंभीर कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। सुप...
03/09/2026

दलमा वन्यप्राणी अभयारण्य में Eco-Tourism के नाम पर बनाए गए कॉटेज को लेकर विवाद अब गंभीर कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (CEC) ने मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए झारखंड सरकार से जवाब मांगा है कि आवश्यक वैधानिक अनुमति के बिना बनाए गए इन ढांचों को क्यों न हटाया जाए। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को निर्धारित है।

मामला उस समय चर्चा में आया जब जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने 11 अगस्त 2026 को विधानसभा में दलमा वन्यप्राणी अभयारण्य के महुआडांगा क्षेत्र में बनाए गए ईको-कॉटेज के निर्माण और उनकी वैधानिक अनुमति को लेकर सवाल उठाए। विधानसभा में दिए गए जवाब में झारखंड सरकार ने बताया कि महुआडांगा में 15 Eco-cottages बनाए गए हैं। हालांकि, विधायक के सवाल में 35 कॉटेज के निर्माण का उल्लेख किया गया था। सरकार ने अपने जवाब में इन निर्माणों को दलमा के अनुमोदित मैनेजमेंट प्लान तथा अधिसूचित ईको-टूरिज्म जोन के तहत बताया है।

सरकार ने यह भी कहा कि कॉटेज गैर-स्थायी संरचनाएं हैं और इनके निर्माण में सिविल कार्य न्यूनतम रखा गया है। लेकिन सरकार के जवाब में सामने आया एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इन कॉटेज के निर्माण के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की अनुमति नहीं ली गई थी। यही बिंदु अब मामले में सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधायक सरयू राय ने कहा कि विधानसभा में सरकार की ओर से दिया गया जवाब उनके सवालों को संतुष्ट नहीं करता है। उन्होंने कॉटेज निर्माण से संबंधित वैधानिक प्रक्रिया और आवश्यक अनुमतियों को लेकर सवाल उठाए हैं।

अधिवक्ता ने CEC में दर्ज कराई आपत्ति

इसी मामले में जमशेदपुर के युवा अधिवक्ता प्रतीक शर्मा ने सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने मांग की है कि यदि कॉटेज और अन्य ढांचे आवश्यक वैधानिक अनुमति के बिना बनाए गए हैं, तो उन्हें हटाने की कार्रवाई की जाए।

CEC ने मामले को संज्ञान में लेते हुए झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया है। कमेटी ने राज्य सरकार से अपना पक्ष रखने को कहा है और यह भी पूछा है कि कथित रूप से बिना आवश्यक अनुमति बनाए गए ढांचों को क्यों न हटाया जाए। अब 9 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। सुनवाई में राज्य सरकार अपने पक्ष में क्या जवाब देती है और कॉटेज निर्माण से जुड़ी अनुमतियों तथा पर्यावरणीय एवं वन्यजीव कानूनों के अनुपालन को लेकर क्या स्थिति स्पष्ट होती है, यह महत्वपूर्ण होगा।

दलमा वन्यप्राणी अभयारण्य में ईको-टूरिज्म और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का यह मामला अब विधानसभा से निकलकर न्यायिक निगरानी वाली प्रक्रिया तक पहुंच चुका है।

ऑल इंडिया ओपन कराटे चैंपियनशिप में हिस्सा लेने जमशेदपुर से कोलकाता जाएगा 30 सदस्यीय दल जमशेदपुर । सनशाइन मार्शल आर्ट अका...
03/09/2026

ऑल इंडिया ओपन कराटे चैंपियनशिप में हिस्सा लेने जमशेदपुर से कोलकाता जाएगा 30 सदस्यीय दल

जमशेदपुर । सनशाइन मार्शल आर्ट अकादमी के तत्वावधान में 30 बच्चों का एक दल द्वितीय ऑल इंडिया ओपन कराटे चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए कोलकाता जाएगा। प्रतियोगिता का आयोजन 5 और 6 सितंबर को किया जाएगा। जमशेदपुर से जाने वाले दल में 12 लड़कियां और 18 लड़के शामिल हैं।

सनशाइन मार्शल आर्ट अकादमी के गणेश सिंह, अमित सोनकर और महिला प्रशिक्षक लीना सिंह ने बताया कि सभी बच्चे प्रतियोगिता के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दल का प्रयास रहेगा कि अधिक से अधिक पदक जीतकर जमशेदपुर लौटे। प्रतियोगिता में शामिल होने से पहले गुरुवार को दल के सदस्यों ने जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। सरयू राय ने बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें ‘विजयी भव’ का आशीर्वाद दिया और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया।

02/09/2026

शिक्षक दिवस पर दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन, निजी शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों पर होगा मंथन - डॉ. परमानन्द मोदी

उद्योग–संस्थान साझेदारी को सुदृढ़ करने के लिए NIT जमशेदपुर ने मिनी इंडस्ट्री–अकादमिया कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन कियाजमशेदप...
02/09/2026

उद्योग–संस्थान साझेदारी को सुदृढ़ करने के लिए NIT जमशेदपुर ने मिनी इंडस्ट्री–अकादमिया कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन किया

जमशेदपुर: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जमशेदपुर द्वारा होटल रेडिसन, जमशेदपुर में मिनी इंडस्ट्री–अकादमिया कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन किया गया। कॉन्क्लेव की थीम “अनुसंधान, नवाचार, परीक्षण एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से उद्योगों का सशक्तीकरण” थी। इसका उद्देश्य उद्योग–संस्थान सहयोग को मजबूत करना तथा संस्थान की अनुसंधान, नवाचार, परीक्षण एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण क्षमताओं को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना था।

कार्यक्रम में श्री शेखर डे, श्री लेदर्स मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि नवाचार वर्तमान समय की आवश्यकता है तथा व्यावहारिक, विस्तार योग्य और उद्योगोन्मुख समाधान विकसित करने के लिए उद्योग और अकादमिक जगत के बीच मजबूत सहयोग अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, निदेशक, NIT जमशेदपुर ने सभी गणमान्य अतिथियों, उद्योग प्रतिनिधियों, संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह कॉन्क्लेव अकादमिक जगत और उद्योग के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि NIT जमशेदपुर उद्योगों, विशेष रूप से MSMEs, के लाभ के लिए अनुसंधान, नवाचार, परीक्षण, परामर्श तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि संस्थान की अनुसंधान सुविधाएँ और तकनीकी विशेषज्ञता औद्योगिक चुनौतियों के समाधान तथा नए सहयोग के अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने सभी सहभागी उद्योगों, विशेषज्ञों एवं संस्थान के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आशा व्यक्त की कि यह कॉन्क्लेव सार्थक विचार-विमर्श, नए सहयोग और ठोस परिणामों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

प्रो. सतीश कुमार, डीन (रिसर्च एंड कंसल्टेंसी), NIT जमशेदपुर ने वास्तविक औद्योगिक चुनौतियों के समाधान के लिए संरचित उद्योग सहभागिता और सहयोगात्मक अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डाला।

डॉ. तुषार बनर्जी ने इंडस्ट्रियल प्रॉब्लम सबमिशन पोर्टल के बारे में जानकारी दी, जिसके माध्यम से उद्योग अपने तकनीकी एवं प्रौद्योगिकीय समस्याओं को संस्थान के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं तथा अनुसंधान एवं परामर्श के माध्यम से उनके संभावित समाधान प्राप्त कर सकते हैं। डॉ. दीपक कुमार ने संस्थान की अनुसंधान क्षमताओं, विशेषज्ञता एवं वर्तमान परीक्षण सुविधाओं के साथ-साथ विभिन्न वित्तपोषण एजेंसियों के सहयोग से विकसित की जा रही आगामी सुविधाओं की जानकारी दी।

कॉन्क्लेव में स्थानीय एवं बड़े उद्योगों के लगभग 55 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें टाटा स्टील, JSW, RSB Transmission और Vedanta सहित अन्य प्रमुख उद्योग शामिल रहे। उद्योग प्रतिनिधियों ने अपनी आवश्यकताओं, चुनौतियों एवं अपेक्षाओं को साझा किया तथा संस्थान से अपेक्षित सुविधाओं एवं सहयोग के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

इस दौरान उद्योगों की आवश्यकताओं और संस्थान की क्षमताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा अनुसंधान, नवाचार, परीक्षण, प्रौद्योगिकी विकास एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से स्थानीय एवं क्षेत्रीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत बनाने पर विशेष चर्चा हुई।

कार्यक्रम का समन्वय डॉ. (श्रीमती) दुलारी हांसदा एवं डॉ. तितास मुखोपाध्याय ने किया। कार्यक्रम का समापन डॉ. स्वागतो देव साहू, एसोसिएट डीन, R&C द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

 # बड़ाजामदा में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़, आरोपी 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारचाईबासा/बड़ाजामदा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के बड...
01/09/2026

# बड़ाजामदा में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़, आरोपी 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार

चाईबासा/बड़ाजामदा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के बड़ाजामदा ओपी क्षेत्र में 16 वर्षीय नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नामजद आरोपी को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की इस कार्रवाई को मामले में तेजी से की गई कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, 27 अगस्त 2026 को हुई कथित घटना को लेकर पीड़िता के परिजनों ने 30 अगस्त को महिला थाना किरीबुरू (कैम्प-नोवामुंडी) में लिखित आवेदन दिया था। शिकायत के आधार पर महिला थाना किरीबुरू में कांड संख्या 04/26 दर्ज करते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79, 126(2), 351(2) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 8/12 के तहत कार्रवाई शुरू की गई।

एसपी के निर्देश पर बनी विशेष टीम

मामले में नाबालिग से जुड़ी संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक, चाईबासा के निर्देश पर किरीबुरू के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष छापामारी दल का गठन किया गया।

टीम ने संभावित ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए मामले के नामजद आरोपी मो. सफीक उर्फ मो. राजा (27 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी **एच रोड, मुस्लिम बस्ती, आदित्यपुर, सरायकेला-खरसावां** का रहने वाला है।

24 घंटे में पुलिस की कार्रवाई

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए तेजी से कार्रवाई की। विशेष टीम ने अभियान चलाकर आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

पुलिस ने आम लोगों से की अपील

चाईबासा पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के अपराध या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल नजदीकी थाना अथवा **डायल-112** पर सूचना दें। पुलिस ने कहा है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान **गोपनीय रखी जाएगी**।

**नोट:** नाबालिग पीड़िता की पहचान कानूनन संरक्षित है, इसलिए उसकी पहचान से संबंधित कोई विवरण प्रकाशित नहीं किया गया है।

01/09/2026

आधुनिक संसाधनों से लैस हुई पूर्वी सिंहभूम पुलिस: द्वितीय चरण में मिले 40 नए पेट्रोलिंग वाहन, एसएसपी ने दिखाई हरी झंडी

झारखंड सरकार द्वारा राज्य में पुलिस आधुनिकीकरण, प्रभावी पुलिसिंग और सुदृढ़ कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में पुलिस व्यवस्था को और अधिक सक्षम बनाने के लिए आधुनिक संसाधनों एवं आवश्यक वाहनों से लैस किया जा रहा है।

इसी क्रम के तहत आज दिनांक 01.09.2026 को पूर्वी सिंहभूम, जमशेदपुर स्थित पुलिस केन्द्र, गोलमुरी के परेड ग्राउंड में 40 नए पेट्रोलिंग वाहनों का औपचारिक शुभारंभ किया गया।

इस कार्यक्रम के दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP), पूर्वी सिंहभूम एवं पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) की गरिमामयी उपस्थिति रही। अधिकारियों ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर इन सभी 40 नए पेट्रोलिंग वाहनों को जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में प्रभावी गश्ती एवं पुलिसिंग कार्य हेतु रवाना किया।

नए वाहनों के मिलने से अब शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक पुलिस गश्त और अधिक तेज होगी, जिससे अपराधियों पर लगाम कसने और आम जनता को त्वरित सुरक्षा सहायता मिलने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर में हिंदी माह–2026 का शुभारंभजमशेदपुर, 01 सितंबर 2026: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी सं...
01/09/2026

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर में हिंदी माह–2026 का शुभारंभ

जमशेदपुर, 01 सितंबर 2026: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर में आज हिंदी माह–2026 का शुभारंभ किया गया। संस्थान द्वारा 01 से 30 सितंबर 2026 तक हिंदी माह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। हिंदी माह का उद्देश्य संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राजभाषा हिंदी में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करना तथा विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि एवं अभिरुचि विकसित करना है।

हिंदी माह के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए हिंदी में टिप्पण एवं आलेखन, टंकण प्रतियोगिता सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। वहीं, विद्यार्थियों में राजभाषा हिंदी के प्रति रुचि उत्पन्न करने और उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से भी विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

हिंदी माह के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. (श्रीमती) लता मानकर, कवयित्री की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधर तथा पूर्व निदेशक प्रो. आर. वी. शर्मा सहित संस्थान के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का आयोजन हिंदी प्रकोष्ठ, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर द्वारा किया गया। उद्घाटन समारोह कक्ष संख्या 112 में शाम 05:00 बजे से 06:00 बजे तक आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत एवं मंचासीन होने के साथ हुई। इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना का आयोजन किया गया तथा अतिथियों को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रो. निरंजन कुमार ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।

हिंदी हमारी आत्मा और संस्कृति की पहचान : प्रो. गौतम सूत्रधर

समारोह को संबोधित करते हुए निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधर ने भारत की भाषाई विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में अनेक भाषाएं और उपभाषाएं प्रचलित हैं। ऐसी भाषाई विविधता के बीच हिंदी को एक संपर्क भाषा के रूप में बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि “हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि आत्मा है, जो देश को जोड़ती है।”

उन्होंने हिंदी को भारतीय संस्कृति की पहचान बताते हुए सभी से हिंदी के सम्मान का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हिंदी को तकनीक की भाषा के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। हिंदी और तकनीक के संबंध पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीकी संसाधनों का अधिकाधिक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।

निदेशक महोदय ने विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में हिंदी के प्रयोग पर जोर देते हुए विद्यार्थियों से इसका उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी साहित्य और तकनीक के समन्वय का लाभ उठाएं और हिंदी के विकास में तकनीकी माध्यमों के माध्यम से योगदान दें।

हिंदी केवल अभिव्यक्ति नहीं, संवाद है : डॉ. लता मानकर

मुख्य अतिथि डॉ. (श्रीमती) लता मानकर ने अपने संबोधन में कहा कि “हिंदी केवल अभिव्यक्ति नहीं, संवाद है।” उन्होंने हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी साहित्य का विकास आदिकाल से होता आया है। उन्होंने हिंदी को एक वैज्ञानिक एवं समृद्ध भाषा बताते हुए कहा कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने वाला सेतु भी है।

उन्होंने कहा कि हिंदी की प्रतिष्ठा केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी हिंदी प्रतिष्ठित है। वर्तमान समय की आवश्यकताओं को देखते हुए हिंदी को तकनीक से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने हिंदी को तकनीकी भाषा के रूप में विकसित करने पर जोर दिया तथा हिंदी और तकनीक के परस्पर संबंध को रेखांकित किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. (श्रीमती) लता मानकर द्वारा काव्यपाठ भी किया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा। उन्होंने विद्यार्थियों से AI एवं अन्य तकनीकी साधनों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी साहित्य एवं तकनीक के समन्वय का रचनात्मक उपयोग करें और आधुनिक तकनीक के माध्यम से हिंदी के विकास में अपनी भूमिका निभाएं।

समारोह के दौरान पूरे हिंदी माह की कार्यक्रम-श्रृंखला की जानकारी प्रो. रजत त्रिपाठी द्वारा दी गई। हिंदी माह के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

उद्घाटन समारोह का समापन राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत एवं समापन के साथ हुआ।

इस अवसर पर हिंदी समिति के अध्यक्ष प्रो. निरंजन कुमार ने कहा कि हिंदी माह का आयोजन संस्थान में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों से हिंदी माह के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने तथा अपने नियमित कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के लिए प्रेरित किया।

हिंदी माह–2026 के माध्यम से राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर में राजभाषा हिंदी के प्रति जागरूकता, प्रयोग एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने के साथ-साथ हिंदी, साहित्य और आधुनिक तकनीक के समन्वय को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।

— राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर

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Anil Kumar Maurya
Jamshedpur
832110

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