28/10/2025
।। जीवन धारा नदियां।।
नदियों की जो दशा करी है तूने मानव!
तू मनुष्यता रहित हो गया है खुद दानव।
तूने मानव मूल्यों का जो ह्रास किया है।
आनेवाली पीढ़ी का ही नाश किया है।।
जो नदियां थी प्रवहमान बन जीवनधारा।
उनमें कचरा डाल उन्हें दूषित कर डाला।
बांध बनाकर नदियों की अविरलता रोकी।
शहरों की अपशिष्ट गन्दगी उनमें झोंकी।
नदियों के गर्भस्थ लोभवश भवन बनाये।
प्यासे पशु पक्षी डोलें इत उत मुंह बाये।।
इतने से भी लोभी मन खुश हुआ न तेरा।
फैक्टरियों से नि:सृत दूषित जल भी गेरा।।
वर्षा, बाढ़,सुखाड़ तेरे कर्मों का फल है।
हो जा मालामाल न जीना रहा सरल है।।
लालच की ये भूख तुझे ना जीने देगी।
शुष्क प्रदूषित नदियां जल ना पीने देगी।।
तेरी यही चतुरता तुझ पर होगी भारी।
सोच समझ जल संरक्षण की करो तैयारी।।
पं शैलेश कुमार शास्त्री
जमशेदपुर