22/08/2026
आमंत्रण पत्र में विधायक का नाम गायब, भाजपा नेताओं की मौजूदगी पर सवाल? डीईओ, अव्यवस्था और खर्च को लेकर प्रेस वार्ता में नहीं दे पाए संतोषजनक जवाब
जांजगीर-चांपा । 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के शुभारंभ के साथ ही खेल से ज्यादा राजनीति की चर्चा शुरू हो गई है। जांजगीर के शासकीय हाई स्कूल मैदान में शनिवार को शुरू हुई चार दिवसीय प्रतियोगिता को लेकर कांग्रेस नेताओं ने जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि शिक्षा विभाग का यह राज्य स्तरीय आयोजन कम भाजपा संगठन कार्यक्रम ज्यादा नजर आ रहा है, यही वजह रही कि स्थानीय कांग्रेस विधायक सहित जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा की गई। प्रतियोगिता का शुभारंभ सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े ने किया। कार्यक्रम में पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष गगन जयपुरिया, इंजी. रवि पाण्डेय सहित भाजपा नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे। वहीं कांग्रेस के विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों अनुपस्थिति रहे।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि आमंत्रण पत्र से स्थानीय विधायक ब्यास कश्यप सहित विधायक बालेश्वर साहू का नाम काट दिया गया, जबकि भाजपा के पूर्व विधायक व संगठन पदाधिकारियों का नाम प्रमुखता से शामिल किया गया। कांग्रेस का कहना है कि डीईओ की इसी राजनीतिक कार्यप्रणाली के कारण राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के शुभारंभ से कांग्रेस के विधायक और जनप्रतिनिधि दूर रहे। शिक्षा विभाग के मंच पर पक्षपात के इस आरोप ने आयोजन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों ने भी कांग्रेस विधायकों के नाम हटाने, और आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर डीईओ अशोक सिन्हा से तीखे सवाल किए। बजट, खिलाड़ियों की सुरक्षा, भोजन, आवास और परिवहन व्यवस्था पर भी जवाब मांगे गए। इस दौरान डीईओ सफाई देते नजर आए। उन्होंने बताया कि पांच संभाग से खिलाड़ी और शिक्षक पहुंचे हैं, जिनके ठहरने की व्यवस्था की गई है, जबकि भोजन की व्यवस्था खिलाड़ियों के साथ आए शिक्षकों को स्वयं करनी है।
वहीं खिलाड़ियों के खेल मैदान तक पहुंचने के लिए वाहन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। डीईओ का तर्क रहा कि ठहरने की जगह से मैदान की दूरी कम है, इसलिए खिलाड़ी पैदल भी पहुंच सकते हैं। बरसात के मौसम में पर्याप्त शेड की व्यवस्था नहीं होने पर भी अधिकारी घिरते नजर आए। मैदान में महज दो शेड की व्यवस्था किए जाने से बारिश की स्थिति में खिलाड़ियों के भीगने की आशंका बनी हुई है।
प्रतियोगिता के लिए 4 लाख 44 हजार रुपए की राशि स्वीकृत होने के बावजूद मूलभूत व्यवस्थाओं की कमी ने खर्च पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक मेहमानों को तरजीह और खिलाड़ियों की सुविधाओं में कमी के आरोपों के बीच शिक्षा विभाग का यह राज्य स्तरीय आयोजन अब खेल से ज्यादा राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। जिले के छोटे-बड़े सरकारी कार्यक्रमों में भाजपा के पूर्व विधायक और संगठन पदाधिकारियों को खुश करने के आरोप भी पहले से लगते रहे हैं। इस बार राज्य स्तरीय क्रीड़ा प्रतियोगिता में स्थानीय कांग्रेस विधायक की उपेक्षा ने विवाद को और हवा दे दी है।