12/06/2026
विदेशी धरती पर एक बार फिर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर का धाकड़ अंदाज देखने को मिला है। रूस से तेल खरीदने को लेकर उंगली उठाने वाले यूरोपीय देशों को उन्होंने आईना दिखाते हुए साफ कह दिया- "जब हमारी सुरक्षा पर खतरा था, तब यूरोप ने कभी नहीं सोचा, और आज हमें तेल पर ज्ञान दे रहे हैं!"
जयशंकर ने साफ किया कि यूरोप की यह मानसिकता अब नहीं चलेगी कि 'उनकी समस्या पूरी दुनिया की समस्या है, लेकिन दुनिया की समस्या उनकी समस्या नहीं है।' भारत अपने नागरिकों और अपने देश के हितों को सर्वोपरि रखकर ही फैसले लेगा।
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क्या आपको भी लगता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का यह निडर और बेबाक अंदाज बिल्कुल सही है? क्या पश्चिमी देशों को भारत के आंतरिक मामलों और फैसलों में दखल देना बंद कर देना चाहिए?
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