10/07/2026
समय और सफलता
फलता के लिए अथवा किसी कार्य के संपन्न होने के लिए पांच बातों स की आवश्यकता होती है. सबसे पहले उस व्यक्ति का आशय जो उसे कर रहा है, फिर उन साधनों और चीजों की उपलब्धता जिससे वह कार्य होना है, तीसरी बात उस कार्य को करने का मनोभाव और उसे करने की इच्छा. फिर उसे करने का समय, क्योंकि प्रत्येक कार्य को करने का एक निर्धारित समय होता है, और यदि उसे सही समय पर नहीं किया जाये तो वह व्यर्थ हो जाता है. यदि आप फरवरी में बीज बोयेंगे, तो उसका कोई अर्थ नहीं है. फिर आप यह नहीं कह सकते कि मैंने बीज को बोया, परंतु कुछ उगा नहीं. आप को बारिश के बाद अप्रैल तक का इंतजार करना होगा और फिर यदि बीज को बोयेंगे, तो सकारात्मक परिणाम सामने आयेंगे. इसलिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है. इस बात को समझना होगा कि समय कैसे महत्वपूर्ण है और उसके बाद दैविक कृपा जरूरी है. दैविक कृपा के बिना सफलता संभव नहीं है, इसलिए आप सेवा, साधना और सत्संग करें. प्रयासों का सफल परिणाम समय पर मिलेगा. आपके द्वारा किये गये प्रयासों के परिणाम कभी भी व्यर्थ नहीं जायेंगे. यदि अभी नहीं तो निश्चित ही उसके परिणाम बाद में मिल ही जायेंगे. संपत्ति होने का अर्थ सिर्फ धन या पैसा होना नहीं है. आपके पास धन का भंडार, काफी जमीन-जायदाद भी हो सकता है, परंतु यदि आपका चेहरा तनावग्रस्त और दुखी लगे, तो कोई भी आपको समृद्ध और सुखी नहीं कह सकता. समृद्धि का अर्थ बैंकों में बड़ी पूंजी जमा होना नहीं होता है. समृद्धि का तात्पर्य होता है जीवन की विशालता को समझकर उसका सम्मान करना. किसी व्यक्ति का आत्मविश्वास उसकी समृद्धि को दर्शाता है. संपत्ति आपके आत्मविश्वास को बढ़ाती है, पर यदि संपत्ति ने आपको कमजोर एवं बीमार कर दिया है तथा आपके जीवन में द्वंद्व को उत्पन्न किया है, तो फिर वह संपत्ति व्यर्थ है ! समय, ज्ञान, विवेक, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और वीरता भी संपत्ति हैं. यदि आपमें आत्मविश्वास है, तो आप किसी भी परिस्थिति को संभाल सकते हैं और यह भी एक प्रकार की संपत्ति है.