16/07/2026
"श्री लख्मीचंद का जिक्र करूं, जिसका जाटी गाम हरियाणा..." 🌾✨
आज हरियाणवी लोक कला के पुरोधा, सांग और रागनी के सरताज, 'सूर्य कवि' पंडित लख्मीचंद जी (1903-1945) की जयंती है। 'हरियाणा के शेक्सपियर' के रूप में विख्यात दादा लख्मीचंद जी ने अपनी अनमोल रचनाओं से हरियाणवी संस्कृति को जो पहचान और ऊंचाई दी है, वह हम सभी के लिए असीम गर्व का विषय है।
सूर्य कवि, संगीत शिरोमणी, शुकदेव स्वरूप
पं लखमीचन्द सांगी
स्मरणीय सरस्वती पुत्र
जन्म तिथि एवं स्थान : 15-7-1903, गांव जांटी कलां, जिला सोनीपत
स्वर्गवास एवं सांग अवधि : 17-10-1945 (1923 से 1945)
सांग भजन निर्माण : 23 सांग — 924 रागनी, 80 उपदेशक भजन तथा 45 से 50 तर्जे बनाई।
सदगुरू : पंडित मान सिंह सूरदास गावं बासौदी (सोनीपत)
शिष्य : 19 शिष्य (साजन्दों के अतिरिक्त)
श्री तुले राम कौशिक
सुपुत्र सूर्यकवि पंडित लखमीचन्द सांग कला में राष्ट्रपति पुरष्कार से विभूषित पंडित लखमीचन्द के बाद उनके सांगो के सर्वश्रेष्ठ सांगी (जिनकी सांग अवधि — 1957 से 2008 है)
संक्षिप्त विवरण
*पण्डित लख्मीचन्द : संक्षिप्त जानकारी
*जन्म तिथि : 15-07-1903
*स्वर्गवास : 17-10-1945
*पिता का नाम ---- पं०उद्मीराम
*माता का नाम -श्रीमति शिव देयी (गाव हीरापुर, बल्लबगढ़ हरियाणा)
*गांव --- जांटीकलां
*जिला:- सोनिपत
*भाई : - कंगण एवं दीपा,
*बहने ----
छोटो देवी( नांगल में विवाहित)
- रत्नो देवी (भूररी में विवाहित)
- धन्ता देवी ( जेठड़ी में विवाहित)
*पत्नि:- भरपाई देवी उर्फ बर्फी देवी,
*ससुर:- श्री बसती राम (गांव हसलापुर, गुरूग्राम)
*साला:- श्रीचन्द
*पं जी के सतगुरू:- पं मानसिंह सूरदास (गांव बसौदी)
*पं जी के शिष्यो की सूची:-
(जो रागनी भजन गाने या बनाने में निपुण थे)
पं राम चन्द्र गांव खटकड़
पं रतीराम गांव हीरापुर
पं माईचन्द गांव बबैल
पं सुलतान गांव रोहद
पं चन्दन लाल गांव बजाणा
पं मांगेराम गांव पांची
महेर सिंह फौजी गांव ब्रोहणा
पं राम स्वरूप गांव स्टावली
पं ब्रह्मा गांव शाहपूर बड़ौली
श्री धारा सिंह गांव बड़ौत
श्री धर्मे जोगी गांव डिकाणा
श्री जहूर मीर गांव बाकनेर
श्री सरूप गांव बहादूरगढ़
श्री तुगंल गांव बहदूगढ़
श्री हरबंश गाव पथरपुर (यु. पी.)
श्री लखी गांव धनौरा (यु. पी.)
श्री मित्रसैन गांव लुहारी (यु. पी.)
श्री चन्दगीराम गांव अटेरणा
श्री मुन्शी मिरासी खेवड़ा (बाद मे पाकिस्तान चले गये)
श्री गुलाब रसूल गांव पिपली खेड़ा (बाद मे पाकिस्तान चले गये)
श्री हैदर गांव नया बांस (बाद मे पाकिस्तान चले गये)
पं लख्मीचन्द के सगे भाई दीपा एवं शिष्य तथा सगे मामा के लड़के पं रतिराम सांगी एक ही घर में सुराणा, यू.पी. में सगी बहनों से विवाहित थे। पंडित लख्मीचन्द के स्वर्ग्वास के बाद (1945-1960)पंडित रतिराम ने सांग के बेडे व लख्मीचन्द पाठशाला का संचालन किया तथा पंडित लख्मीचन्द के सुपुत्र पंडित तुलेराम को अपना शिष्य मान सान्ग परम्परा में शिक्षित किया !