21/10/2025
🌟 बुंदेलखंड में दिवाली के बाद “मोनी बाबा” की परंपरा:
दीवाली के दूसरे दिन, लोग मानते हैं कि मोनी बाबा अपने “तप” से बाहर आते हैं और गाँव-गाँव घूमकर आशीर्वाद देते हैं।
ये बाबा अनोखे वस्त्र, भस्म, झोला, और कभी-कभी मुँह पर कपड़ा बाँधकर आते हैं — क्योंकि ये मौन व्रती होते हैं।
उनके साथ कुछ भक्त या साथी भी होते हैं जो उनके भावों को समझाते हैं।
💃 “डांस” या नृत्य का अर्थ:
गाँवों में कहा जाता है कि मोनी बाबा नाचते नहीं, बल्कि ईश्वरीय शक्ति के प्रभाव से उनके शरीर में झूमना या नाचना आता है।
यह नाचना भक्ति, ऊर्जा और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।
लोग उनके इस नृत्य को देखकर श्रद्धा से झुकते हैं, और इसे शुभ संकेत मानते हैं — कि साल भर सुख-समृद्धि बनी रहे।
🌾 लोक मान्यता:
कहा जाता है कि जहाँ मोनी बाबा जाते हैं वहाँ सुख, शांति और बारिश का वरदान मिलता है।
बच्चे, महिलाएँ, और बुजुर्ग सब इन्हें दूध, फल, अनाज या पैसे देकर आशीर्वाद लेते हैं।
कई जगह यह आयोजन ढोल-नगाड़ों और नाच-गाने के साथ मेले जैसा माहौल बन जाता है।