11/10/2024
अमिताभ बच्चन 82 साल के हुए: संघर्ष और सफलता की दास्तां
आज हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन का 82वां जन्मदिन है। उनके जीवन की यात्रा उतार-चढ़ाव से भरी रही है, लेकिन उन्होंने हर कठिनाई का सामना किया और आज वो जहां हैं, वह हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
अमिताभ का प्रोफेशनल करियर की शुरुआत आसान नहीं थी। उन्हें ऑल इंडिया रेडियो के ऑडिशन से रिजेक्ट किया गया। लगातार कई फ्लॉप फिल्मों के बाद जंजीर की सफलता ने सुपरस्टार बनाया। कुली (1982) फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें जानलेवा चोट भी आई थी। उनकी कंपनी एबीसीएल भी फ्लॉप हो गई थी और कई लोग उनसे कर्ज़ के पैसे मांगने उनके दरवाजे तक जा पहुंचे थे। इसके बावजूद, उन्होंने कौन बनेगा करोड़पति और फिल्म मोहब्बतें के जरिए शानदार वापसी की और फिर से सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचे।
उनके 82वें जन्मदिन पर हम कुछ खास बातें आपके साथ साझा कर रहे हैं
- उनके पिता, प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन, शुरू में उनका नाम "इन्कलाब" रखना चाहते थे। यह नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के मशहूर नारे "इन्कलाब जिंदाबाद" से प्रेरित था।
- अमिताभ ने 1962 में किरोरीमल कॉलेज से विज्ञान में स्नातक (http://B.Sc.) की डिग्री हासिल की थी।
- उनका फिल्मी करियर 1969 में शुरू हुआ, जब उन्होंने मृणाल सेन की फिल्म भुवन शोमे में वॉयस ओवर दिया था। इसके बाद, शतरंज के खिलाड़ी (1977) में भी उनकी आवाज़ का इस्तेमाल किया गया।
- अमिताभ पहले इंजीनियर बनना चाहते थे और भारतीय वायु सेना में भी शामिल होने का विचार किया था।
- उनकी पहली फिल्म सात हिंदुस्तानी थी, लेकिन उनका पहला हिट फिल्म जंजीर था, जिसके बाद लगातार 12 फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं।
- अमिताभ का पारिवारिक श्रीवास्तव था, लेकिन उनके पिता ने साहित्यिक नाम "बच्चन" अपनाया था।
- अमिताभ को फिल्म रेशमा और शेरा में मूक पात्र के रूप में लिया गया था। कहा यह जाता है कि यह भूमिका उन्हें इंदिरा गांधी द्वारा नरगिस को भेजे गए एक पत्र की वजह से मिली थी। खास बात कि आज जिस जादुई आवाज के लिए अमिताभ जाने जाते हैं, उसका उपयोग इस फिल्म में हुआ ही नहीं क्योंकि किरदार एक गूंगे का था।
- उन्हें अपना पहला फिल्मफेयर अवार्ड 1971 में फिल्म आनंद के लिए मिला था। उन्हें तीन बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिला है
बेस्ट एक्टर- पीकू (2015), पा (2009), ब्लैक (2005), अग्निपथ (1990)
- जब 1968 में सोनिया गांधी भारत आईं थी, तो अमिताभ ने उन्हें एयरपोर्ट पर रिसीव किया था। वे 48 दिन उनके घर पर रहे थे।
- अमिताभ की कई फिल्मों में वास्तविक जीवन के घटनाओं और व्यक्तियों से प्रेरणा ली गई है। जैसे कि सात हिंदुस्तानी और पुकार फिल्मों में गोवा की मुक्ति की कहानी थी, और काला पत्थर 1975 की चासनाला खनन त्रासदी पर आधारित थी, जिसमें 572 खनिकों की मौत हो गई थी।
- उन्होंने डॉन, कसमे वादे, सत्ते पे सत्ता, बड़े मियां छोटे मियां, सूर्यवंशम, बेमिसाल, और आखिरी रास्ता जैसी फिल्मों में दोहरी भूमिकाएं निभाई हैं, और महान में उन्होंने तिहरी भूमिकाएं निभाईं।
- याराना के गाने सारा जमाना के लिए कोलकाता के नेताजी स्टेडियम में 12,000 से अधिक लोग शूटिंग में शामिल हुए थे। इस शूटिंग के दौरान बाहर भी तीन गुना लोग इंतजार कर रहे थे।
अमिताभ के बारे में इस तरह की और भी दिलचस्प कहानियां हैं जो उनके संघर्ष, सफलता, और समर्पण को दर्शाती हैं। वे ना केवल एक महान अभिनेता हैं, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत भी हैं, जिन्होंने हर मुश्किल के बावजूद खुद को साबित किया।