15/04/2026
कोलकाता की सड़कों पर जब लोग जल्दी-जल्दी अपने काम पर निकलते हैं,
तो शायद ही किसी की नजर उस मां पर जाती है…
जो चुपचाप अपने सपनों का बोझ खींच रही है।
ये कहानी है कोलकाता की मिठू पंडित की…
9 साल से…
धूप हो, बारिश हो या कड़ाके की ठंड—
वो रोज रिक्शा चलाती हैं।
लेकिन ये सिर्फ रिक्शा नहीं है…
ये उनके बच्चों के सपनों का पहिया है… 🚲
जब लोग थककर आराम करते हैं,
तब मिठू पंडित अपनी हिम्मत को और मजबूत करती हैं…
क्योंकि उन्हें पता है—
अगर आज वो रुक गईं…
तो उनके बच्चों का भविष्य भी रुक जाएगा।
कभी-कभी लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं…
कुछ लोग तो मजाक भी बना देते हैं…
पर एक मां के दिल में जो आग होती है…
वो किसी ताने से नहीं बुझती।
वो हर दिन खुद से कहती हैं—
"मेरे बच्चे पढ़ेंगे… आगे बढ़ेंगे… और एक दिन इस संघर्ष की कहानी बदल देंगे।"
सोचिए…
एक मां, जो खुद थक जाती है…
लेकिन अपने बच्चों के सपनों को कभी थकने नहीं देती…
क्या ऐसी मां सम्मान की हकदार नहीं है?
🙏 अगर आप भी इस जज्बे को सलाम करते हैं…
तो इस कहानी को शेयर जरूर करें…
ताकि हर कोई जान सके—
मां की ताकत क्या होती है।
ji