30/12/2025
उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजल चकमा की सिर्फ इसलिए निर्मम हत्या कर दी गई क्योंकि उन्होंने नस्लीय टिप्पणियों का विरोध किया था। यह घटना न केवल हृदयविदारक है बल्कि देश के सामाजिक ताने-बाने पर एक गहरा घाव की तरह है। आज धर्म, प्रांत और पहचान के नाम पर लोगों के बीच आक्रोश बढ़ाया जा रहा है। यह घटना साबित करती है कि देश में नफरत और असहिष्णुता का माहौल किस कदर हावी हो चुका है। 'अनेकता में एकता' हमारी पहचान और ताकत रही है, लेकिन ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण वारदातें हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि आखिर देश किस दिशा में जा रहा है? हम 'वसुधैव कुटुम्बकम' की बात करते हैं, लेकिन अपने ही देश के पूर्वोत्तर के भाई-बहनों के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं हो सकता। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और इस मुश्किल घड़ी में चकमा परिवार को संबल दें। मैं उत्तराखंड सरकार से मांग करता हूं कि दोषियों को ऐसी सख्त सजा मिले जो एक नजीर बने। हम पूर्वोत्तर के हर नागरिक के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं।