25/07/2026
दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च कर रहे विद्यार्थियों पर किया लाठीचार्ज
विक्रांत टांक, पत्रकार/AMBEDKAR BLUEPRINT NEWS
दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च कर रहे विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज किया जाना बहुत ही शर्मनाक घटना है। पुलिस बिना किसी ऑडर के ऐसा नहीं कर सकती। देशभर की पुलिस गृह मंत्री अमित शाह के अधीन है। दिल्ली पुलिस ने जिस प्रकार से विद्यार्थियों का दमन किया है, वह ठीक नहीं है। शायद भारतीय पुलिस ने अंग्रेजों से कुछ भी नहीं सीखा। जब अंग्रेजों ने भारतीय क्रांतिकारियों का दमन किया था, तब आंदोलन भारत के अन्य हिस्सों में भी फैल गया था। जैसे अंग्रेजों ने अपनी फूट डालो राज करो की नीति के तहत राज किया था। उसी तरह आज भी सरकार को लगता है कि यही नीति है राज करने की। जबकि लोकतंत्र में सभी की आवाज मायने रखती है। सभी को आजादी से अपनी बात रखने का अधिकार है। सरकार किसी की आवाज को दबा नहीं सकती। यदि जन आंदोलन का दमन करने का प्रयास किया जाएगा तो वह और अधिक ताकत के साथ ऊपर आएगा। यह आंदोलन देशभर में फैल सकता है। इसलिए सरकार को विद्यार्थियों की बात सुननी चाहिए। शाह को बताना चाहिए कि किसके आदेश पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। विद्यार्थियों के साथ हार्डकोर क्रिमिनल जैसा व्यवहार किया। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि उनको करंट लगाया गया। उन पर लाठियां बरसाई गई, उनके सिर फोड दिए गए। यहां तक लड़कियों के कपड़े तक फट गए। कई विद्यार्थियों को गंभीर चोटें आई। आंसू गैस के गोले छोड़े गए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि छोटे बच्चों और 12 साल की बच्चियों को थप्पड़ मारने और विद्यार्थियों को बड़ी ही बेरहमी से पीटा गया। पुलिस की ओर से कहा गया है कि 118 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। जंतर मंतर पर सरकार की ओर से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। सरकार उन सभी कैमरों की रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक करे ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर यह छात्र आंदोलन शुरू हुआ था। लाठीचार्ज के बाद से देशभर के विद्यार्थियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। अब यह आंदोलन भाजपा के खिलाफ एक बहुत बडा जनआंदोलन बन चुका है। वहीं दूसरी ओर संसद के मानसून सत्र में विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर संसद में विद्यार्थियों की आवाज को बुलंद किया। कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि करीब पिछले एक माह से आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था। जैसे जैसे देशभर में संघी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन बढ रहा है। सरकार आंदोलन को दबाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रही है और हर तरह से दमन कर रही है। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विद्यार्थियों से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरा देश जानता है कि देश का एजुकेशन सिस्टम लगभग खत्म हो चुका है। छात्रों की जो भी मांगे हैं, वह सभी जायज हैं। गांधी ने कहा कि युवाओं के लिए सारे रास्ते बंद हो चुके हैं। उनके लिए सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं का एक मात्र दरवाजा खुला था, लेकिन उसे भी पूरी तरह से बर्बाद कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस ने शिक्षा व्यवस्था पर कब्जा कर लिया है और उनके प्रचारकों को विश्वविद्यालयों का वाइस चांसलर बनाया जा रहा है। बेरोजगार युवाओं के पास इतना पैसा भी नहीं है कि वह कोई व्यवसाय ही शुरू कर सकें। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन, सुप्रीम कोर्ट के वकीलों और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल सहित 650 से अधिक वकीलों ने बयान जारी कर पुलिस कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। युवाओं ने भाजपा सरकार और शिक्षा व्यवस्था की खस्ता हालत को देखते हुए विरोध जताना शुरू कर दिया। 20 जुलाई को पुलिस ने शांतिपूर्ण ढंग से मार्च कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज किया। लाठीचार्ज की बर्बरता के वीडियो सामने आने के बाद भाजपा सरकार के खिलाफ विरोध देशभर में फैल गया। अलग अलग राज्यों के विरोध प्रदर्शन की खबरें आने लगी। मीडिया के द्वारा लोगों के दुख दर्द और उन पर हो रहे अत्याचार की खबरें दिखाना कुछ लोगों को गलत लग सकता है। क्योंकि वह सरकार के अंधभक्त हो सकते हैं। यदि देश में किसी पर कोई अत्याचार हो रहा है तो उसे दिखाने की जिम्मेवारी मीडिया की है। क्योंकि मीडिया समाज का आईना होता है। सरकार से यदि कोई सवाल करता है तो उसे गोदी मीडिया टीम बी कहती है। उसे कांग्रेस, सपा, चीन या अमेरिका की बी टीम कह दिया जाता है। देश में कुछ गलत हो रहा है और उसके खिलाफ यदि आरटीआई कार्यकर्ता आवाज उठाते हैं तो गलत क्या है। शायद कुछ लोगों को यह बात पसंद नहीं आती कि आरटीआई कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ जनता की आवाज को बुलंद करते हैं। आरटीआई कार्यकर्ताओं और वकीलों के द्वारा लगाई जाने वाली याचिकाओं से सरकार असहज हो जाती है। इसलिए संघी सरकार और उसकी विचारधारा के लोगों को यह बात कतई पसंद नहीं आती कि कोई सवाल पूछे। यदि युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है तो इसमें दोष किसका है। देश का युवा बेरोजगारी की मार झेल रहा है। पेपर लीक हो रहे हैं। चाटुकार पत्रकार और गोदी मीडिया के लोग भाजपा का झूठा गुणगान कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई के मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से वीडियो देखने और स्वत संज्ञान लेने का अनुरोध किया। लेकिन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत के पास वीडियो देखने का समय नहीं है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने साफ कह दिया कि वह कोर्ट का समय बर्बाद न करें।