Adv. Sourabh Koundal

Adv. Sourabh Koundal Raising awareness on social and political issues (Sahi ko sahi aur galat ko galat bolne ki himmat)

यह जो इस होल्डिंग में हाथ जोड़कर खड़े हैं, यह हिमाचल प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री हैं, और यह होल्डिंग टांडा अस्पताल परिस...
30/09/2026

यह जो इस होल्डिंग में हाथ जोड़कर खड़े हैं, यह हिमाचल प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री हैं, और यह होल्डिंग टांडा अस्पताल परिसर में लगी हुई है। हमारी हिमाचल प्रदेश की सरकार के पास होल्डिंग में प्रचार करने के लिए पैसे हैं, लेकिन अस्पताल में Gloves, सिरिंज, दवाइयाँ, NS, मुफ़्त में पर्ची इत्यादि जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए पैसे नहीं हैं। इस होल्डिंग में मुख्यमंत्री साहब जनता को TB संक्रमण के बारे में जागरूक कर रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री साहब ने कभी टांडा अस्पताल में TB की OPD और भवन का निरीक्षण नहीं किया होगा। अगर उन्होंने कभी TB फैकल्टी में जाकर निरीक्षण किया होता, तो उन्हें मालूम होता कि TB भवन तो जर्जर हो चुका है, जिसमें बरसात में पानी भी घुस जाता है और यह भवन कभी भी ढह सकता है।
और इसी के साथ TB का उपचार करने के लिए इस अस्पताल में TB के डॉक्टरों की संख्या कितनी है? अगर किसी को टांडा में TB के डॉक्टरों की संख्या पता हो, तो मुख्यमंत्री साहब को ज़रूर बताना, ताकि वो होल्डिंग के प्रचार से बाहर निकलकर TB के मरीजों पर ध्यान दे सकें।टांडा अस्पताल का निर्माण मुख्यतः सिर्फ TB जैसी बीमारी के लिए हुआ था। यह प्रदेश का दूसरा TB सेनिटोरियम था, लेकिन आज इस TB सेनिटोरियम के हालात खराब हैं।
काश, टांडा का TB सेनिटोरियम भी इस होल्डिंग की तरह चमचमाता।
#हॉस्पिटल

सभी पत्रकारों का धन्यवाद, सेराथाना स्कूल में केमिस्ट्री का अध्यापक न होना सिर्फ बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं बल्...
29/09/2026

सभी पत्रकारों का धन्यवाद, सेराथाना स्कूल में केमिस्ट्री का अध्यापक न होना सिर्फ बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं बल्कि रोजगार को खत्म करना भी है, हिमाचल प्रदेश की सरकारों की वर्तमान समय में यह कोशिशें हैं कि सरकारी स्कूलों को जल्द से जल्द बंद करके निजी स्कूलों को बढ़ावा दिया जाए, जिससे कि शिक्षा आम लोगों से दूर हो जाए।

हार्दिक शुभकामनाएँ नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत गुगलाहड़ की मुस्कान चौधरी को रेडियोग्राफर की परीक्षा उत्तीर्...
29/09/2026

हार्दिक शुभकामनाएँ
नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत गुगलाहड़ की मुस्कान चौधरी को रेडियोग्राफर की परीक्षा उत्तीर्ण करने पर हार्दिक बधाई एवं बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। मुस्कान की इस उपलब्धि में उनके माता-पिता की अच्छी परवरिश, मेहनत और लगन का भी महत्वपूर्ण योगदान है। उन्हें भी हार्दिक शुभकामनाएँ। मुस्कान चौधरी की यह सफलता उनके परिवार के साथ-साथ पूरे गांव के लिए गर्व और खुशी का विषय है। उन्होंने अपनी मेहनत से पूरे गांव का नाम रोशन किया है।
मुस्कान को उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएँ।

28/09/2026

सेराथाना स्कूल में केमिस्ट्री का अध्यापक न होना सिर्फ बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं बल्कि रोजगार को खत्म करना भी है, हिमाचल प्रदेश की सरकारों की वर्तमान समय में यह कोशिशें हैं कि सरकारी स्कूलों को जल्द से जल्द बंद करके निजी स्कूलों को बढ़ावा दिया जाए, जिससे कि शिक्षा आम लोगों से दूर हो जाए।

"बम और पिस्तौल क्रांति नहीं करते, बल्कि क्रांति की तलवार विचारों की शान पर तेज होती है"। एक ऐसा क्रांतिकारी युवक शहीद आज...
28/09/2026

"बम और पिस्तौल क्रांति नहीं करते, बल्कि क्रांति की तलवार विचारों की शान पर तेज होती है"। एक ऐसा क्रांतिकारी युवक शहीद आज़म भगत सिंह जिन्होंने गोरों से अपने देश को आज़ाद करवाने के लिए मात्र 23 वर्ष की उम्र में अपनी जान दे दी लेकिन हमारा देश आज उन्हें भूल चुका है।

सेराथाना स्कूल में कैमिस्ट्री अध्यापक के अभाव से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित।नगरोटा बगवां: सरकारी शिक्षा व्यवस्था को...
27/09/2026

सेराथाना स्कूल में कैमिस्ट्री अध्यापक के अभाव से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित।
नगरोटा बगवां: सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के दावे लगातार किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सरकारी स्कूलों की स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
नगरोटा बगवां ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सेराथाना में जमा एक और जमा दो में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को कैमिस्ट्री पढ़ाने के लिए अध्यापक उपलब्ध नहीं है। विद्यार्थियों के अनुसार, कक्षाएं शुरू होने के बाद से ही वे कैमिस्ट्री के अध्यापक का इंतजार कर रहे हैं और करीब नौ महीने बीत जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है। जमा दो कक्षा के एक विद्यार्थी के अनुसार उनकी कक्षा में करीब 32 विद्यार्थी हैं, लेकिन साइंस के महत्वपूर्ण विषय कैमिस्ट्री को पढ़ाने के लिए कोई अध्यापक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना अध्यापक के ये विद्यार्थी अपनी पढ़ाई कैसे पूरी करेंगे और अपनी परीक्षाओं की तैयारी कैसे करेंगे?
अधिकांश विद्यार्थी ऐसे परिवारों से आते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वे अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में पढ़ा सकें। गरीब तथा सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े परिवारों का भरोसा सरकारी स्कूलों पर होता है। उनकी उम्मीद होती है कि सरकारी स्कूल में उनके बच्चों को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी।
लेकिन यदि सरकारी स्कूल में ही कैमिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण विषय का अध्यापक उपलब्ध नहीं होगा तो इन विद्यार्थियों के पास क्या विकल्प बचेगा? क्या वे मजबूरी में निजी स्कूलों की ओर जाएंगे? आखिर इन बच्चों की क्या गलती है? एक बच्चे को मुझसे उम्मीद है कि मैं उनके लिए कैमिस्ट्री का अध्यापक नियुक्त करवा सकता हूं। लेकिन आखिर मैं कैसे करवाऊं? अगर अध्यापक की नियुक्ति करवाना मेरे हाथ में होता तो प्रदेश का कोई भी सरकारी स्कूल अध्यापकों के बिना नहीं चल रहा होता। मैं इन बच्चों की परेशानी समझ सकता हूं। जमा एक और जमा दो में पढ़ने वाले इन विद्यार्थियों के भविष्य के बारे में सोचकर दुख होता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिन बच्चों के पास निजी शिक्षा का विकल्प नहीं है, उनके भविष्य के साथ इस तरह समझौता क्यों किया जा रहा है? एक तरफ सरकार कुछ सरकारी स्कूलों को PM SHRI स्कूलों में बदल रही है और कुछ स्कूलों को CBSE से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाई जा सके।
लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल स्कूल का दर्जा बदलने से शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ जाएगी? जब किसी स्कूल में विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण विषय का अध्यापक ही नौ महीने तक उपलब्ध न हो, तो शिक्षा की गुणवत्ता कैसे बढ़ेगी?
शिक्षा की गुणवत्ता स्कूल का नाम बदलने से नहीं, बल्कि स्कूल में पर्याप्त संख्या में योग्य अध्यापक उपलब्ध करवाने से बढ़ेगी।
अगर एक तरफ हम स्कूलों को PM SHRI और CBSE बनाने की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ विद्यार्थियों को महीनों तक बिना अध्यापक के पढ़ना पड़ रहा है, तो हमें अपनी प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाना होगा। आज सवाल केवल सेराथाना स्कूल का नहीं है। सवाल पूरे सरकारी शिक्षा तंत्र का है। क्या गरीब परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने का अधिकार नहीं है? क्या सरकारी स्कूल में पढ़ने का फैसला करने वाले बच्चों की कोई गलती है? क्या इन बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी सरकार और हमारे जनप्रतिनिधियों की नहीं है? जब विधायक हमारे गांव में आता है तो जनता को उससे सवाल पूछना चाहिए— क्या हमने अपना कीमती वोट आपको अपने बच्चों के भविष्य को प्रभावित करने के लिए दिया था? हम अपना कीमती वोट देकर उस विधायक से सवाल पूछने से क्यों डरते हैं, जो हमारे वोट के बिना विधायक नहीं बन सकता? अगर हम अपने बच्चों के भविष्य के लिए सरकार और जनप्रतिनिधियों से सवाल नहीं करेंगे तो फिर कौन करेगा? क्या हम अपने बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती देखकर भी चुप रहेंगे? क्या हम अपने बच्चों की अच्छी सरकारी शिक्षा के लिए सरकार से सवाल नहीं कर सकते? क्या हम इतने डरपोक बन चुके हैं कि अपने बच्चों के भविष्य के लिए भी आवाज नहीं उठा सकते? आज हम सरकारी शिक्षक बनने की लड़ाई तो लड़ रहे हैं, लेकिन जहां हम शिक्षक बनेंगे, उन सरकारी स्कूलों को बचाने की लड़ाई नहीं लड़ रहे।
बात फिर वही है—सरकारी स्कूल ही नहीं रहेंगे तो सरकारी शिक्षक कैसे बनेंगे? शिक्षा विभाग ने हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से युवाओं को बड़े स्तर पर सरकारी रोजगार उपलब्ध करवाया है। लेकिन अगर सरकारी स्कूल कमजोर होते चले गए और भविष्य में इसी रफ़्तार से स्कूल बंद होते रहे तो इसका असर केवल सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर नहीं पड़ेगा, बल्कि सरकारी रोजगार पर भी पड़ेगा। आज हो सकता है कि कुछ परिवार अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने की आर्थिक क्षमता रखते हों। लेकिन आने वाले समय में यदि परिवारों की आर्थिक स्थिति निजी शिक्षा का खर्च उठाने लायक नहीं रही और सरकारी शिक्षा व्यवस्था कमजोर होती गई, तो वे अपने बच्चों को कहां पढ़ाएंगे?
इसलिए सरकार से सीधा सवाल है— सेराथाना स्कूल में जमा एक और जमा दो के विद्यार्थियों को कैमिस्ट्री पढ़ाने के लिए अध्यापक कब उपलब्ध करवाया जाएगा?
32 विद्यार्थियों सहित अन्य विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? गरीब तथा सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े परिवारों से आने वाले इन बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा? और तमाम जनता से भी सवाल है—आखिर हम सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर होते हुए क्यों देख रहे हैं? अपने बच्चों के भविष्य के लिए हम सरकार और अपने जनप्रतिनिधियों से सवाल क्यों नहीं कर रहे हैं? सरकारी स्कूल बचेंगे, तभी सरकारी शिक्षा बचेगी और तभी हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।

25/09/2026

सेराथाना स्कूल के बच्चे केमिस्ट्री के बिना साइंस पढ़ने के लिए मजबूर। किसी बच्चे को मुझसे उम्मीद है कि मैं सौरभ कौंडल उनके लिए कैमिस्ट्री के अध्यापक की नियुक्ति करवा सकता हूं लेकिन आखिर मैं कैसे करवाऊं, अगर मेरे हाथ में होता तो कोई भी सरकारी स्कूल बिना अध्यापकों के नहीं चल रहा होता। इस स्कूल में जमा एक और दो में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य के बारे में सोचकर बहुत दुख होता है तरस आता है लेकिन नेताओं, विधायकों और सरकारों को आम जनता और बच्चों पर कोई तरस नहीं आता, आखिर इन बच्चों की क्या गलती है?

23/09/2026

टांडा अस्पताल में अमूमन बहुत सी जगह की स्ट्रीट लाइटें रात को बंद थी। अब यह लाइटें खराब होने की वजह से बंद थी या बिजली बचाई जा रही थी यह तो सरकार और अस्पताल प्रशासन ही जानता होगा, लेकिन कोई यह तर्क ना दे कि सड़क तो दिख ही रही है यह व्यवस्था पर सवाल है और प्रिंसिपल ब्लॉक/एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक के बाहर तो बिल्कुल अंधेरा था।

22/09/2026

टांडा अस्पताल के हालात बहुत ही ज्यादा खराब होते जा रहे हैं अब यहाँ कुछ लाइटें भी बंद हैं या हो सकता है खराब हो गई हों, लेकिन सवाल है जहां आम जनता पूरी रात चली रहती है वहां की लाईटों की मरम्मत नहीं हो सकती?

22/09/2026

OBC सामाजिक न्याय यात्रा-2.0 में बढ़चढ़कर भाग लेने के लिए तमाम OBC वर्ग की जनता का बहुत-बहुत धन्यवाद एवं शुभकामनाएं कि हम सब मिलकर इतना बड़ा आंदोलन करने में कामयाब हुए।
OBC संघर्ष समिति हिमाचल प्रदेश।

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