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“मां चामुंडा की पावन आरती… हर दिन बने मंगलमय!”

80वें स्वतंत्रता दिवस पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं
14/08/2026

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14/08/2026

सिल्लो बिल्लो सक्किया भैणां हो
बिल्लो लेई जाणी सौरेयां हो तेरी सौं
CMO Himachal Jairam Thakur

भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सरदार पटेल विश्वविद्यालय में विशेष कार्यक्रमहिमाचल बिज़नेस \ मंडीसरदार पटेल विश्वविद्...
14/08/2026

भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सरदार पटेल विश्वविद्यालय में विशेष कार्यक्रम
हिमाचल बिज़नेस \ मंडी
सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के इतिहास विभाग की ओर से भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के माण्डव परिसर में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिष्ठाता अकादमिक मामले डॉ. पवन कुमार चंद ने की, जबकि डॉ. जय इन्द्रपाल विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। मुख्य वक्ता के रूप में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली के बृहत्तर भारत एवं क्षेत्रीय अध्ययन विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. धर्म चंद चौबे ने आभासी माध्यम से अपने विचार रखे।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि सहित अन्य अतिथियों द्वारा इतिहास विभाग की ओर से लगाई गई भारत विभाजन विभीषिका से संबंधित विशेष प्रदर्शनी के अवलोकन के साथ हुई। प्रदर्शनी में वर्ष 1947 के दौरान हुए विस्थापन, मानवीय पीड़ा, सामाजिक विघटन, शरणार्थियों के पुनर्वास तथा विभाजन से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों और चित्रों को प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम संयोजक विकेश कुमार ने अतिथियों एवं उपस्थितजनों का स्वागत करते हुए आयोजन के उद्देश्य और रूपरेखा की जानकारी दी। इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास की सबसे पीड़ादायक घटनाओं में से एक रहा है।

मुख्य अतिथि आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने कहा कि भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस उन असंख्य लोगों की पीड़ा, संघर्ष और बलिदान को याद करने का अवसर है, जिन्होंने विभाजन के दौरान अपार कष्ट सहे। उन्होंने कहा कि इतिहास को याद करने का उद्देश्य किसी के प्रति वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि अतीत से सीख लेकर एक अधिक सशक्त, समरस और एकजुट भारत का निर्माण करना होना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से इतिहास के प्रति वैज्ञानिक और संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने का आह्वान किया। साथ ही इतिहास विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी और कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को इतिहास के मानवीय पक्ष से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्य वक्ता प्रो. धर्म चंद चौबे ने आभासी माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि यह दिवस केवल एक त्रासद ऐतिहासिक घटना को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उन असंख्य लोगों के संघर्ष, पीड़ा, विस्थापन, साहस और मानवीय संवेदनाओं को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने विभाजन की विभीषिका झेली। उन्होंने विभाजन में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उन लोगों के साहस और धैर्य को भी नमन किया, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में अपने जीवन को दोबारा खड़ा किया और राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. पवन कुमार चंद ने कहा कि विभाजन की स्मृतियां आज भी अनेक परिवारों और समुदायों की सामूहिक चेतना में विद्यमान हैं। वहीं डॉ. जय इन्द्रपाल ने विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसके दूरगामी प्रभावों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में डॉ. कर्ण गुप्ता, डॉ. लखवीर सिंह, डॉ. राकेश कुमार शर्मा, सहायक आचार्य राजेश शर्मा, कृष्ण चंद, शोधार्थी वेद प्रकाश, राहुल कुमार, सुरेखा, डोल्मा सहित मंडी के प्रबुद्धजन प्रो. हर्ष ओवराय, डॉ. राकेश कपूर, नरेश मल्होत्रा, अनिल शर्मा, मुरारी लाल, रवि वैद्य, कन्हैया लाल सैनी, जगदीश कपूर, कमल कान्त और हेमंत कुमार सहित इतिहास विभाग के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

14/08/2026

सैले सिंबणे नी माये, जी तोते बोलदे नी, मेरा राम जाणे ।
Jairam Thakur CMO Himachal Sukhvinder Singh Sukhu

32 वर्षों का अनुभव और परिवार का साथ: ‘हिमाचल प्रदेश आबकारी कानून’ की नई पुस्तक का अनूठा सफरविनोद भावुक। धर्मशाला स्वतन्त...
14/08/2026

32 वर्षों का अनुभव और परिवार का साथ: ‘हिमाचल प्रदेश आबकारी कानून’ की नई पुस्तक का अनूठा सफर

विनोद भावुक। धर्मशाला

स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर हिमाचल प्रदेश के आबकारी एवं कराधान विभाग (अब राज्य कर एवं आबकारी) के वरिष्ठ अधिकारियों, वकीलों, कारोबारियों और आम पाठकों के लिए एक अत्यंत उपयोगी पुस्तक ‘हैंडबुक ऑन हिमाचल प्रदेश एक्साइज लॉ’ प्रकाशित हुई है। इस पुस्तक की प्रस्तावना ही अपने आप में एक प्रेरणादायक कहानी है, जिसमें लेखक प्रेम कैथ ने अपने 32 वर्षों के गहन अनुभव, विभागीय संघर्ष, पारिवारिक सहयोग और कानून की बारीकियों को सहज शब्दों में पिरोया है।

आबकारी कानून की ‘एबीसी’ एक मुट्ठी में

इस पुस्तक के मुख्य लेखक हिमाचल प्रदेश आबकारी विभाग के एक अनुभवी अधिकारी हैं, जिन्होंने अपनी 32 वर्षों की लंबी सेवा के दौरान आबकारी नीति, अधिनियम, नियमावली एवं व्यावहारिक चुनौतियों को बारीकी से समझा। वे बताते हैं कि उनका उद्देश्य आबकारी कानून की जटिल शब्दावली और कई एक्ट-नियमों को एक ही स्थान पर सरल भाषा में प्रस्तुत करना था, ताकि नया अधिकारी हो या पुराना लाइसेंसधारी, हर कोई अपने अधिकारों एवं दायित्वों को आसानी से समझ सके।

‘प्रायोगिक गाइड’

पुस्तक में आबकारी से जुड़े सभी बुनियादी पहलुओं – लाइसेंस प्रक्रिया, उत्पादन, आयात-निर्यात, कर निर्धारण, निरीक्षण, अपील, दंड प्रावधान – को सरल उदाहरणों और सारणियों के माध्यम से समझाया गया है। इसे ‘प्रायोगिक गाइड’ कहा गया है, क्योंकि इसमें सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ ऑफिस में आने वाली वास्तविक समस्याओं का समाधान भी दिया गया है।

परिवार का अहम योगदान – पत्नी, बेटी और बेटा बने ‘सह-लेखक’

इस किताब की सबसे दिलचस्प बात इसकी प्रस्तावना में छिपे पारिवारिक प्यार और समर्पण की कहानी है। लेखक ने स्वीकार किया है कि यदि उनकी श्रीमती सोमा कैथ (एक गृहिणी) ने उन्हें लगातार प्रोत्साहित न किया होता, तो वे इस पुस्तक को लिखने का साहस कभी नहीं जुटा पाते। उन्होंने हर सुख-दुःख में उनका साथ दिया और किताब लिखने की प्रेरणा बनीं।

इसके अलावा, उनकी पुत्री शैना कैथ, जो एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं, ने अपने व्यस्ततम रूटीन के बावजूद रोजाना पुस्तक की प्रगति रिपोर्ट माँगी – मानो वे विभागाध्यक्ष हों और अपने अधीनस्थों से काम की स्टेटस रिपोर्ट ले रही हों। इस अनोखे अंदाज ने लेखक को निरंतरता और अनुशासन में रखा।

सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही उनके पुत्र श्री आशीर कैथ की, जो हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में अधिवक्ता हैं और इस पुस्तक के सह-लेखक भी हैं। उन्होंने हर कानूनी बिंदु पर अपनी गहरी पैठ और समर्पण से पुस्तक को न्यायिक दृष्टि से मजबूत बनाया। पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने अनुभव और नवीन विधि ज्ञान का अद्भुत सम्मिलन किया है।

विभागीय स्वीकृति – आयुक्त का आशीर्वाद

पुस्तक के प्रकाशन के लिए सबसे बड़ी बाधा विभागीय अनुमति थी, क्योंकि सरकारी अधिकारी द्वारा लिखी गई पुस्तक को आधिकारिक मान्यता आवश्यक होती है। इसके लिए लेखक ने तत्कालीन राज्य कर एवं आबकारी आयुक्त एवं वर्तमान सचिव (आबकारी) डॉ. यूनुस से अनुमति प्राप्त की, जिसे 28 फरवरी 2026 को जारी पत्र क्रमांक EXN-B(4)-9/2014 के माध्यम से औपचारिक रूप से प्रदान किया गया।

प्रकाशन में सहयोग –विनोद भावुक की भूमिका

पुस्तक को पांडुलिपि से मुद्रित रूप देने में ‘हिमाचल बिजनेस मीडिया’ के संपादक विनोद भावुक एवं उनके सहायक कपिल ने अथक परिश्रम किया। लेखक ने उनकी टाइपिंग, डिजाइनिंग एवं सम्पादन कला की सराहना करते हुए कहा कि उनके बिना यह पुस्तक अधूरी रह जाती।

इनके लिए उपयोगी पुस्तक

यह पुस्तक मुख्यत नियमों की सही व्याख्या एवं प्रक्रियागत जानकारी के लिए आबकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों, मुकदमों में त्वरित संदर्भ के लिए न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं, अनुपालन में आने वाली जटिलताओं को दूर करने के लिए शराब उत्पादकों, विक्रेताओं एवं ठेकेदारों तथा आबकारी नीति की मूल अवधारणा समझने के लिए विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए उपयोगी है। लेखक ने पूरे विधान को ‘ए-बी-सी’ शैली में प्रस्तुत किया है, जहाँ हर प्रावधान को क्रमबद्ध, उदाहरण सहित एवं भाषा में सरल बनाया गया है।

संदेश – अनुभव ही सबसे बड़ा गुरु

इस पुस्तक की प्रस्तावना का अंतिम संदेश अत्यंत प्रेरक है। किसी भी क्षेत्र में दक्षता अर्जित करने के लिए नियमों को याद रखना पर्याप्त नहीं, उनके व्यावहारिक अनुप्रयोग को समझना आवश्यक है। लेखक ने अपनी जमीनी सच्चाई, विभागीय संघर्ष, न्यायालयी टिप्पणियों और जनता की व्यावहारिक समस्याओं को समेटकर यह रचना तैयार की है।

आबकारी कानून को प्रायः जटिल और सूखा माना जाता है, लेकिन इस पुस्तक ने उसे रोचक, बोधगम्य और जीवंत बना दिया है। खास बात यह है कि पूरी किताब में कानूनी भाषा के बजाय सरल, सहज एवं संवादात्मक शैली का प्रयोग किया गया है, जो हर पाठक को अपने आप से जोड़ लेती है।

यहां उपलब्ध होगी?

विमोचन के साथ ही यह पुस्तक आगामी सप्ताह में हिमाचल प्रदेश के सभी प्रमुख किताबी विक्रेताओं, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और विभागीय कार्यालयों में उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, राज्य कर एवं आबकारी विभाग के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में इसे पाठ्य पुस्तक के रूप में शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है।

लेखक का मूल मंत्र

किताब तभी सफल होती है, जब वह पाठक को उसके मुश्किल रास्तों में रोशनी दे। लेखक की यह कोशिश है कि हिमाचल प्रदेश का हर आबकारी अधिकारी, हर वकील और हर कारोबारी इस किताब को पढ़कर अपने काम को आसान, पारदर्शी और नियमानुकूल बना सके। इसी भावना के साथ, यह पुस्तक न सिर्फ कानून की किताब है, बल्कि अनुभव, त्याग और परिवार के सहयोग की जीवंत मिसाल भी है।

इस स्वतंत्रता दिवस रक्तदान करें, किसी की जिंदगी बचाएं | Helping Hands Blood Donation Campहिमाचल बिज़नेस \ सुजानपुर हर साल...
14/08/2026

इस स्वतंत्रता दिवस रक्तदान करें, किसी की जिंदगी बचाएं | Helping Hands Blood Donation Camp
हिमाचल बिज़नेस \ सुजानपुर
हर साल की तरह इस वर्ष भी हेल्पिंग हैंड्स समिति द्वारा 15 अगस्त, शनिवार को स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर सुजानपुर टीहरा के ऐतिहासिक मैदान स्थित कला मंच में आयोजित होगा। संस्था की ओर से सभी लोगों से इस पुण्य कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की गई है।
अस्पतालों में लगातार सामने आ रही रक्त की कमी को दूर करने के लिए स्वैच्छिक और आपातकालीन रक्तदान बेहद जरूरी है। आपका दिया हुआ रक्त किसी अनजान व्यक्ति के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

हेल्पिंग हैंड्स परिवार अब तक 1,700 से अधिक यूनिट रक्त अस्पतालों तक पहुंचा चुका है। संस्था के संस्थापक गोल्डी राजपूत ने कहा कि संस्था का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ जरूरतमंद मरीजों की जान बचाना है।
उन्होंने बताया कि हेल्पिंग हैंड्स समिति पिछले करीब 5 वर्षों से जनसेवा के कार्यों में सक्रिय है और हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ चंडीगढ़, पंजाब और दिल्ली सहित विभिन्न क्षेत्रों में जरूरतमंद लोगों की मदद कर रही है।
18 से 65 वर्ष तक का स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। जिन रक्तवीरों को रक्तदान किए हुए 3 महीने और रक्तवीरांगनाओं को 4 महीने पूरे हो चुके हैं, वे भी इस रक्तदान शिविर में पहुंचकर रक्तदान कर सकते हैं।

आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति के साथ मानवता की सेवा का संकल्प लें। रक्तदान करें और किसी अनजान व्यक्ति को जिंदगी देने की कोशिश करें।
🩸 रक्तदान महादान
इससे बड़ा नहीं है कोई दान।
📞 संपर्क: 8350969504
आपका एक यूनिट रक्त, किसी की पूरी जिंदगी बन सकता है।

13/08/2026

“माँ ज्वाला जी की LIVE आरती दर्शन 🔥🙏”

13/08/2026

जरा याद करो कुर्बानी -344
#जयकिशन #आजादहिंदफौज #स्वतंत्रतासेनानी #बिलासपुर #हिमाचलकेवीर #हिमाचलइतिहास #देशभक्ति #वीरसपूत 🇮🇳

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