14/08/2026
32 वर्षों का अनुभव और परिवार का साथ: ‘हिमाचल प्रदेश आबकारी कानून’ की नई पुस्तक का अनूठा सफर
विनोद भावुक। धर्मशाला
स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर हिमाचल प्रदेश के आबकारी एवं कराधान विभाग (अब राज्य कर एवं आबकारी) के वरिष्ठ अधिकारियों, वकीलों, कारोबारियों और आम पाठकों के लिए एक अत्यंत उपयोगी पुस्तक ‘हैंडबुक ऑन हिमाचल प्रदेश एक्साइज लॉ’ प्रकाशित हुई है। इस पुस्तक की प्रस्तावना ही अपने आप में एक प्रेरणादायक कहानी है, जिसमें लेखक प्रेम कैथ ने अपने 32 वर्षों के गहन अनुभव, विभागीय संघर्ष, पारिवारिक सहयोग और कानून की बारीकियों को सहज शब्दों में पिरोया है।
आबकारी कानून की ‘एबीसी’ एक मुट्ठी में
इस पुस्तक के मुख्य लेखक हिमाचल प्रदेश आबकारी विभाग के एक अनुभवी अधिकारी हैं, जिन्होंने अपनी 32 वर्षों की लंबी सेवा के दौरान आबकारी नीति, अधिनियम, नियमावली एवं व्यावहारिक चुनौतियों को बारीकी से समझा। वे बताते हैं कि उनका उद्देश्य आबकारी कानून की जटिल शब्दावली और कई एक्ट-नियमों को एक ही स्थान पर सरल भाषा में प्रस्तुत करना था, ताकि नया अधिकारी हो या पुराना लाइसेंसधारी, हर कोई अपने अधिकारों एवं दायित्वों को आसानी से समझ सके।
‘प्रायोगिक गाइड’
पुस्तक में आबकारी से जुड़े सभी बुनियादी पहलुओं – लाइसेंस प्रक्रिया, उत्पादन, आयात-निर्यात, कर निर्धारण, निरीक्षण, अपील, दंड प्रावधान – को सरल उदाहरणों और सारणियों के माध्यम से समझाया गया है। इसे ‘प्रायोगिक गाइड’ कहा गया है, क्योंकि इसमें सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ ऑफिस में आने वाली वास्तविक समस्याओं का समाधान भी दिया गया है।
परिवार का अहम योगदान – पत्नी, बेटी और बेटा बने ‘सह-लेखक’
इस किताब की सबसे दिलचस्प बात इसकी प्रस्तावना में छिपे पारिवारिक प्यार और समर्पण की कहानी है। लेखक ने स्वीकार किया है कि यदि उनकी श्रीमती सोमा कैथ (एक गृहिणी) ने उन्हें लगातार प्रोत्साहित न किया होता, तो वे इस पुस्तक को लिखने का साहस कभी नहीं जुटा पाते। उन्होंने हर सुख-दुःख में उनका साथ दिया और किताब लिखने की प्रेरणा बनीं।
इसके अलावा, उनकी पुत्री शैना कैथ, जो एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं, ने अपने व्यस्ततम रूटीन के बावजूद रोजाना पुस्तक की प्रगति रिपोर्ट माँगी – मानो वे विभागाध्यक्ष हों और अपने अधीनस्थों से काम की स्टेटस रिपोर्ट ले रही हों। इस अनोखे अंदाज ने लेखक को निरंतरता और अनुशासन में रखा।
सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही उनके पुत्र श्री आशीर कैथ की, जो हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में अधिवक्ता हैं और इस पुस्तक के सह-लेखक भी हैं। उन्होंने हर कानूनी बिंदु पर अपनी गहरी पैठ और समर्पण से पुस्तक को न्यायिक दृष्टि से मजबूत बनाया। पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने अनुभव और नवीन विधि ज्ञान का अद्भुत सम्मिलन किया है।
विभागीय स्वीकृति – आयुक्त का आशीर्वाद
पुस्तक के प्रकाशन के लिए सबसे बड़ी बाधा विभागीय अनुमति थी, क्योंकि सरकारी अधिकारी द्वारा लिखी गई पुस्तक को आधिकारिक मान्यता आवश्यक होती है। इसके लिए लेखक ने तत्कालीन राज्य कर एवं आबकारी आयुक्त एवं वर्तमान सचिव (आबकारी) डॉ. यूनुस से अनुमति प्राप्त की, जिसे 28 फरवरी 2026 को जारी पत्र क्रमांक EXN-B(4)-9/2014 के माध्यम से औपचारिक रूप से प्रदान किया गया।
प्रकाशन में सहयोग –विनोद भावुक की भूमिका
पुस्तक को पांडुलिपि से मुद्रित रूप देने में ‘हिमाचल बिजनेस मीडिया’ के संपादक विनोद भावुक एवं उनके सहायक कपिल ने अथक परिश्रम किया। लेखक ने उनकी टाइपिंग, डिजाइनिंग एवं सम्पादन कला की सराहना करते हुए कहा कि उनके बिना यह पुस्तक अधूरी रह जाती।
इनके लिए उपयोगी पुस्तक
यह पुस्तक मुख्यत नियमों की सही व्याख्या एवं प्रक्रियागत जानकारी के लिए आबकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों, मुकदमों में त्वरित संदर्भ के लिए न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं, अनुपालन में आने वाली जटिलताओं को दूर करने के लिए शराब उत्पादकों, विक्रेताओं एवं ठेकेदारों तथा आबकारी नीति की मूल अवधारणा समझने के लिए विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए उपयोगी है। लेखक ने पूरे विधान को ‘ए-बी-सी’ शैली में प्रस्तुत किया है, जहाँ हर प्रावधान को क्रमबद्ध, उदाहरण सहित एवं भाषा में सरल बनाया गया है।
संदेश – अनुभव ही सबसे बड़ा गुरु
इस पुस्तक की प्रस्तावना का अंतिम संदेश अत्यंत प्रेरक है। किसी भी क्षेत्र में दक्षता अर्जित करने के लिए नियमों को याद रखना पर्याप्त नहीं, उनके व्यावहारिक अनुप्रयोग को समझना आवश्यक है। लेखक ने अपनी जमीनी सच्चाई, विभागीय संघर्ष, न्यायालयी टिप्पणियों और जनता की व्यावहारिक समस्याओं को समेटकर यह रचना तैयार की है।
आबकारी कानून को प्रायः जटिल और सूखा माना जाता है, लेकिन इस पुस्तक ने उसे रोचक, बोधगम्य और जीवंत बना दिया है। खास बात यह है कि पूरी किताब में कानूनी भाषा के बजाय सरल, सहज एवं संवादात्मक शैली का प्रयोग किया गया है, जो हर पाठक को अपने आप से जोड़ लेती है।
यहां उपलब्ध होगी?
विमोचन के साथ ही यह पुस्तक आगामी सप्ताह में हिमाचल प्रदेश के सभी प्रमुख किताबी विक्रेताओं, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और विभागीय कार्यालयों में उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, राज्य कर एवं आबकारी विभाग के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में इसे पाठ्य पुस्तक के रूप में शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है।
लेखक का मूल मंत्र
किताब तभी सफल होती है, जब वह पाठक को उसके मुश्किल रास्तों में रोशनी दे। लेखक की यह कोशिश है कि हिमाचल प्रदेश का हर आबकारी अधिकारी, हर वकील और हर कारोबारी इस किताब को पढ़कर अपने काम को आसान, पारदर्शी और नियमानुकूल बना सके। इसी भावना के साथ, यह पुस्तक न सिर्फ कानून की किताब है, बल्कि अनुभव, त्याग और परिवार के सहयोग की जीवंत मिसाल भी है।