26/05/2025
"एक अधूरी सी मोहब्बत – जो पूरी होकर भी अधूरी रह गई..."
कभी-कभी ज़िंदगी किसी अनजानी सी राह पर ले जाती है, जहाँ हमें वो मिल जाता है, जो कभी सोचा भी नहीं था… और फिर एक दिन वही सबसे अपना इंसान, सबसे पराया बन जाता है।
हमारा रिश्ता भी कुछ ऐसा ही था…
एक छोटे से मैसेज से शुरू हुई बातों ने धीरे-धीरे मेरी पूरी दुनिया बदल दी।
वो रोज़ की "गुड मॉर्निंग", "कैसी हो", "अपना ध्यान रखना"—शायद दुनिया को आम लगें, लेकिन मेरे लिए वो तुम्हारा प्यार था, तुम्हारी परवाह थी, तुम्हारा होना था।
और फिर वो दिन आया… जब हमें साथ रहने के 24 घंटे मिले।
वो 24 घंटे… जैसे पूरी ज़िंदगी सिमट गई हो उस एक दिन में।
हमने साथ में हँसा, साथ चला, साथ खाया, साथ जिया।
जब मुझे सिरदर्द हुआ, तुमने बिना बोले मेडिकल से बाम लिया… और पूरी रात मेरे सिर पर प्यार से मलती रहीं।
तुम्हारी वो हथेलियाँ सिर पर नहीं, दिल पर लग रही थीं… जैसे कह रही हों, "जब तक मैं हूं, कोई तकलीफ़ तुझ तक नहीं आएगी।"
हमने एक-दूसरे को वो दिया, जो शायद कोई रिश्ता सालों में भी नहीं दे पाता।
पर अगले दिन शाम आई... और साथ में आया विदा का वो पल।
रेलवे स्टेशन पर तुम्हारी आँखों में वो आँसू… वो कांपते होंठ… और वो थमी हुई सांसें—सबने चुपचाप कह दिया कि ये मिलना, आखिरी मिलना था।
तुम चुप थीं, पर तुम्हारी आँखें चीख रही थीं।
और मैं… मैं मजबूर था उस आखिरी अलविदा को गले लगाने के लिए।
आज तुम अपनी नई दुनिया में जा रही हो—एक नई शुरुआत, नई जिम्मेदारियाँ, नई मुस्कुराहटें।
मैं दुआ करता हूँ कि तुम्हारी हर सुबह सुकून से भरी हो, हर रात चैन से कटे…
क्योंकि तुमने मुझे वो दिया है, जो शायद किसी जन्म में भी दोबारा न मिले—एक सच्चा, बेपनाह प्यार।
मैं अब सिर्फ एक याद बनकर रह जाऊँगा तुम्हारी कहानी में…
लेकिन तुम?
तुम तो मेरी रूह में बस गई हो।
हर धड़कन में, हर सांस में, हर ख़ामोशी में सिर्फ तुम ही हो।
भगवान तुम्हें हर वो खुशी दे,
जो कभी मैंने सोची थी हमारे लिए।
क्योंकि तुम आज भी मेरी सबसे प्यारी दुआ हो।
एक अधूरी मोहब्बत…
जो आज भी पूरी लगती है… सिर्फ़ तुमसे।