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04/09/2026

 मैंने डॉ. उषा मिश्र के कविता संग्रह ‘ मन के गलियारे से’ को पढा। ये कवितायें इतनी परिपक्व हैं कि लगता ही नहीं यह इनका प्...
26/05/2026


मैंने डॉ. उषा मिश्र के कविता संग्रह ‘ मन के गलियारे से’ को पढा। ये कवितायें इतनी परिपक्व हैं कि लगता ही नहीं यह इनका प्रथम कविता संग्रह है। वे मनुष्य के जीवन को सुखद और भरपूर जीने के लिए प्रेरित करती हैं। एक सम्मानजनक और आनंदमय जीवन की कला सिखाती हैं। वे एक सफल मेडिकल डॉक्टर भी हैं। हिंदी साहित्य के सृजन में वर्षों से तल्लीन हैं।
उषा जी की कवितायें मनुष्य की मनोरचना की भूमिका पर उतरती दिखाई देती हैं। साधारण में असाधारण का अन्वेषण करती हुई। पूर्वज कवियों ने कविता की रचना प्रक्रिया पर बहुत ध्यान दिया है। अंततोगत्वा यह प्रक्रिया हमें इस निष्कर्ष के दरवाजे पर ला खड़ा करती है कि कवि व्यक्तिगत आत्मसंघर्ष से लिखना आरम्भ करते हैं, सामाजिकता में उस को विस्तार देते हैं और अंत में दार्शनिकता में समापन करते हैं। ऐसे में कवि की भूमिका ऋषि और देवता सम धरातल की हो जाती है। कहा गया है कि “पश्य देवस्य काव्यम”, बाद में आकर देवत्व जाग्रत हो जाता है। वही काव्य है।

प्रो. हरिमोहन
पूर्व कुलपति, जे.एस. विश्वविद्यालय,, शिकोहाबाद
पूर्व निदेशक, के.एम. विद्यापीठ, आगरा (उ.प्र.)

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  डा. सुरेश अवस्थी हिन्दी व्यंग्य-साहित्य एवं कवि सम्मेलन के मंचों पर एक चिर-परिचित नाम है। उन्होंने न केवल देश में बल्क...
24/05/2026


डा. सुरेश अवस्थी हिन्दी व्यंग्य-साहित्य एवं कवि सम्मेलन के मंचों पर एक चिर-परिचित नाम है। उन्होंने न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अपने अलग अंदाज में व्यंग्य -कवितायें सुनाकर हिन्दी में व्यंग्य -काव्य को प्रतिष्ठा तो दिलाई ही साथ ही देश और विदेश में भी कानपुर का डंका बजाया है।वह एक सुप्रसिद्ध कवि के साथ ही देश के नंबर एक हिन्दी समाचार पत्र दैनिक जागरण से जुड़कर वर्षों तक शिक्षा संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ ही उसमें प्रति सप्ताह नागरिक समस्याओं पर तीखे गद्य -व्यंग्य भी लिखते रहे हैं जोकि बहुत ही लोकप्रिय हुए। उन्होंने लोक-नाट्य रामलीला में भी विभिन्न पात्रों की भूमिकायें निभाई हैं। हिन्दी प्रवक्ता के रूप में अध्यापन के लिए राष्ट्रपति का श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार भी उन्हें मिला है।इस प्रकार कहा जा सकता कि डा.अवस्थी बहुमुखी प्रतिभा के विलक्षण व्यक्ति हैं।
उनकी गद्य-पद्य व्यंग्य एवं अन्य विधाओं की उन्नीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।अनेक पुरस्कार व सम्मान मिले हैं। पिछले वर्ष जब उनके बाल साहित्य पर उन्हें सम्मानित किया गया तो बात की बात में उनके प्रकाशित/अप्रकाशित बाल साहित्य को सहेजकर दो पुस्तकों के रूप में प्रकाशित करना सुनिश्चित किया गया।यह दोनों पुस्तकें आपके अवलोकनार्थ उपलब्ध हैं।
-कैलाश बाजपेयी
संपादक

 भोगे यथार्थ का साक्ष्य है 'गवाही'‘गवाही’ केवल एक कथा नहीं है, बल्कि स्त्री अनुभव का वह निर्विवाद साक्ष्य है, जिसे साहित...
12/05/2026


भोगे यथार्थ का साक्ष्य है 'गवाही'

‘गवाही’ केवल एक कथा नहीं है, बल्कि स्त्री अनुभव का वह निर्विवाद साक्ष्य है, जिसे साहित्य में प्रायः सहनशीलता, त्याग और ‘आदर्श पत्नी’ जैसे नैरेटिवों के नीचे दबा दिया जाता है। यह रचना घरेलू हिंसा को किसी अपवाद, दुर्घटना या क्षणिक विकृति के रूप में नहीं, बल्कि एक सतत सामाजिक संरचना के रूप में उद्घाटित करती है—ऐसी संरचना, जिसमें प्रेम, परिवार, गरीबी, संस्कार और अपराधबोध मिलकर स्त्री को चुप रहने के लिए प्रशिक्षित करते हैं।
कथाकार चांदनी पांडेय के प्रथम कथा-संग्रह ‘गवाही’ में शीर्षक कहानी समकालीन हिंदी कथा साहित्य में घरेलू हिंसा पर लिखी गई उन विरल रचनाओं में से एक है, जो समाधान नहीं, बल्कि सच प्रस्तुत करती है। यह कहानी पाठक से सहानुभूति नहीं, बल्कि संवेदनशील जिम्मेदारी की माँग करती है कि हम यह प्रश्न करें, 'जो स्त्री बच गई, उसके भीतर क्या बचा?' यही प्रश्न इस कहानी की स्थायी साहित्यिक उपलब्धि है। कथाकार चांदनी पांडेय को मेरी असीम शुभकामनाएं और हार्दिक बधाई।

— महेन्द्र भीष्म (वरिष्ठ लेखक)
लखनऊ

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31/01/2026

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26/01/2026

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