Osho the great

Osho the great Wellness

रामकृष्ण के जीवन में बड़ी प्यारी घटना है। रामकृष्ण बचपन से ही ईश्वर की तरफ दौड़े हुए चित्त के व्यक्ति थे। मंदिर के सामने स...
01/09/2026

रामकृष्ण के जीवन में बड़ी प्यारी घटना है। रामकृष्ण बचपन से ही ईश्वर की तरफ दौड़े हुए चित्त के व्यक्ति थे। मंदिर के सामने से निकलते थे तो फिर उनका घर पहुंचना मुश्किल हो जाता; वहीं नाचने लगते; वहीं लेट जाते, सीढ़ियों पर पड़े रहते। कोई राम का नाम ले दे, तो भाव में आ जाते। तो घर के लोग जानते थे कि यह लड़का संसार में नहीं जाएगा। कोई आशा नहीं थी। लेकिन फिर भी मां-बाप का फर्ज था, तो जब उम्र हुई तो उन्होंने पूछा कि राम--उनका नाम था गजाधर--शादी करोगे? सोचा था, रामकृष्ण इनकार कर देंगे। रामकृष्ण बहुत प्रफुल्लित हो गए। उन्होंने कहा, शादी कैसी होती है? जरूर करेंगे! घर के लोगों को भी सदमा हुआ, कि सोचा था कि यह संन्यासी वृत्ति का है, शादी नहीं करेगा; यह क्या हुआ!
फिर लड़की की तलाश हुई। फिर लड़की खोजी गई। लड़की बहुत छोटी थी। कोई आठ-दस साल का अंतर था दोनों की उम्र में। रामकृष्ण लड़की को देखने गए। उनके साथ ही परिवार के और लोग गए। रामकृष्ण की मां ने एक तीन रुपये रामकृष्ण के खीसे में रख दिए कि कोई जरूरत पड़े, खर्च इत्यादि। पास ही गांव था ऐसे। रामकृष्ण सज-धज कर--जैसा सजा-धजा दिया--पहुंच गए।🎉🌹🥳👍
लड़की बहुत प्यारी थी। रामकृष्ण ने वे तीनों रुपये उसके पैर में रख कर उसके पैर छू लिए! तो सब मुश्किल में पड़ गए। और सबने कहा कि पागल, यह तेरी पत्नी होने वाली है! और तूने पैर छू लिए! और ये तीन रुपये किसलिए चढ़ा दिए? तो रामकृष्ण ने कहा, मेरी मां जैसी प्यारी लगती है। क्योंकि रामकृष्ण एक ही प्रेम जानते थे; वह मां जैसा प्रेम। बहुत प्यारी लगती है, मां जैसी! इसको मैं मां ही कहूंगा, पत्नी भी हो तो हर्ज क्या!
फिर शादी भी हो गई, लेकिन रामकृष्ण शारदा को मां ही कहते रहे; उसके पैर ही छूते रहे। और जब काली की पूजा का दिन आता, तो वे काली की पूजा न करके शारदा को बिठा लेते सिंहासन पर और उसकी पूजा कर लेते। और वे कहते, जब जिंदा मां है, तो फिर मूर्ति की क्या जरूरत?
पत्नी बंधन न रही। उसे बंधन की तरह देखा ही नहीं। हाथ बढ़ा दिया, जंजीर ले ली।🎉🌹✅😘
आपकी भाव-दशा में निर्भर करता है। दुख दुख है, क्योंकि आप दुख को नहीं चाहते और सुख को चाहते हैं--इसलिए दुख है। दुख इसलिए है कि उसके विपरीत को आप चाहते हैं। नहीं तो क्या दुख है? विपरीत की मांग में छिपा है दुख। अशांति क्या है? क्योंकि आप शांति को चाहते हैं, इसलिए अशांति है। हमारे चुनाव में हमारा संसार है।😘✅🌹🎉

Say with love osho 🌹
24/08/2026

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अगर आप भी सिर्फ जिज्ञासा से भरे हैं, तो यात्रा नहीं होगी। जिज्ञासा से भरे हुए लोग वे हैं, जो मील के पत्थर के पास बैठ जात...
08/08/2026

अगर आप भी सिर्फ जिज्ञासा से भरे हैं, तो यात्रा नहीं होगी। जिज्ञासा से भरे हुए लोग वे हैं, जो मील के पत्थर के पास बैठ जाते हैं और पूछते हैं, मंजिल क्या है? कितनी दूर है? और सदा यही पूछते हैं, लेकिन कभी उठ कर चलते नहीं।💥✨✨🌹
जानते तो आप भी कितना हैं! क्या कमी है जानने में! करीब-करीब सभी कुछ जानते हैं। जो बुद्ध ने जाना हो, महावीर ने, कृष्ण ने जाना हो, वह सभी आप भी तो जानते हैं! गीता में पढ़ कर आपको ऐसा नहीं लगता कि ये बातें तो हमें भी मालूम हैं?💕💥✨✨
मालूम आपको भी हैं, पर सिर्फ बुद्धि तक हैं। आपके हृदय तक उनका बीज नहीं पहुंचा है। और बुद्धि पर रखे हुए विचार वैसे ही होते हैं, जैसे पत्थर पर कोई बीज को रख दे। बीज तो होता है, लेकिन पत्थर पर रखा रहता है। अंकुर नहीं फूट सकता। अंकुर फूटना हो तो बीज को पत्थर से गिरना पड़े, जमीन खोजनी पड़े। और जमीन की भी ऊपर की सतह ठीक नहीं है, क्योंकि और गीली जगह चाहिए। तो थोड़ा जमीन के भीतर पहुंचना पड़े; जहां थोड़ी पानी की सुविधा हो, थोड़ा रस बहता हो।
बुद्धि पर पत्थर की तरह बीज रख जाते हैं। हृदय तक जब तक न गिर जाएं, तब तक गीली जगह नहीं मिलती। हृदय में थोड़ा रस बहता है; थोड़ा प्रेम। वहां थोड़ा पानी है। वहां कोई बीज गिरे तो अंकुरित होता है, नहीं तो कभी अंकुरित नहीं होता।✨💥💥🌹

आनंद रो रहा था, जिस दिन बुद्ध के प्राण छूटने को थे, और छाती पीट रहा था। और बुद्ध ने उससे कहा कि तू रोता क्यों है? जरूरत ...
03/08/2026

आनंद रो रहा था, जिस दिन बुद्ध के प्राण छूटने को थे, और छाती पीट रहा था। और बुद्ध ने उससे कहा कि तू रोता क्यों है? जरूरत से ज्यादा मैं तेरे पास था, चालीस वर्ष! और अगर चालीस वर्ष में भी नहीं हो पाई वह घटना, तो अब रोने से क्या होगा! मेरे मिटने से इतना परेशान क्यों हो रहा है?
तो आनंद ने कहा है, इसलिए परेशान हो रहा हूं कि आप मौजूद थे और मैं न मिट पाया। अगर मैं मिट जाता तो आपको मेरे भीतर प्रवेश मिल जाता। चालीस साल नदी मेरे पास बहती थी और मैं प्यासा रह गया हूं। और अब मैं रोता हूं, क्योंकि जरूरी नहीं है कि यह नदी कब, किस जन्म में दुबारा मुझे मिलेगी।✨✨💥
आप कुछ नये नहीं हैं। आपने बुद्धों को दफनाया, महावीरों को दफनाया, जीसस, कृष्ण, क्राइस्ट, सबको आप दफना कर जी रहे हैं। वे हार गए आपसे, आप काफी पुराने हैं। जब से जीवन है, तब से आप हैं। अनंत-अनंत यात्रा है।✨✨💥💕

नानक मक्का गए। रात सोए, तो पैर उन्होंने पवित्र पत्थर की तरफ कर दिए थे। पुजारियों को खबर लगी, वे बहुत नाराज हुए। पुजारियो...
27/07/2026

नानक मक्का गए। रात सोए, तो पैर उन्होंने पवित्र पत्थर की तरफ कर दिए थे। पुजारियों को खबर लगी, वे बहुत नाराज हुए। पुजारियों से ज्यादा अंधे लोग खोजना कठिन है। नानक आया था, इसको तो नहीं पहचान पाए वे। यह वही था, जो मोहम्मद थे। जरा भी फर्क न था। लेकिन उन्होंने देखे इसके पैर और कहा: अपने पैर दूसरी दिशा में करो! पवित्र मंदिर की🌹💕💕💥 तरफ--परमात्मा की तरफ पैर! शर्म नहीं आती! और ज्ञानी होने का दावा करते हो? तो नानक ने कहा: तुम्हीं मेरे पैर उस तरफ कर दो, जहां परमात्मा न हो!💥💕✨
पुजारी मुश्किल में पड़ गए होंगे। अब पैर कहां करें--जहां परमात्मा न हो! कहानी तो यह कहती है कि उन्होंने पैर सब दिशाओं में करके देखे, लेकिन जिस तरफ पैर किए, उसी तरफ मक्का का मंदिर घूम गया। मगर यह तो प्रतीक है, मंदिरों का घूमना इतना आसान नहीं है; पुजारी नहीं घूमते, मंदिर क्या घूमेंगे? पुजारी पत्थर हैं, तो पत्थरों के मंदिर क्या घूमेंगे? लेकिन बात सच है।💥💕🌹
पुजारियों को समझ में आ गई होगी इतनी बात कि पैर कहीं भी करना व्यर्थ है, क्योंकि मंदिर तो उसका सभी तरफ है। वह किस दिशा में नहीं है? और जिस तरफ हम इसके पैर करेंगे, यह कहेगा: क्या यहां परमात्मा नहीं है? और यह भी तो कहना उचित नहीं है कि इस दिशा में थोड़ा ज्यादा है, उस दिशा में थोड़ा कम है। क्योंकि परमात्मा क्या कम-ज्यादा हो सकता है? या तो है या नहीं है।💕💥💥✨

मैंने सुना है, एक शराबी एक रास्ते से गुजर रहा है; गहरे नशे में है, पैर डगमगाते हैं। कुछ पता नहीं कि कहां जा रहा है और एक...
22/07/2026

मैंने सुना है, एक शराबी एक रास्ते से गुजर रहा है; गहरे नशे में है, पैर डगमगाते हैं। कुछ पता नहीं कि कहां जा रहा है और एक स्त्री--एक नीतिवादी स्त्री, शरीर से अति कुरूप और भयंकर दिखती है, उसने उस शराबी को रोका और कहा कि क्या कर रहे हो यह? यह आंतरिक कुरूपता छोड़ो; यह बेहोशी हटाओ। निंदा के योग्य हो, पापी हो। शराबी ने आवाज सुन कर आंख खोली। देखा इस कुरूप स्त्री को, सामने खड़े। उसने कहा: मैं तो सुबह होश में आ जाऊंगा, लेकिन तेरी कुरूपता का क्या होगा? यह सुबह भी ऐसी ही रहेगी।
सिद्ध और साधक के बीच जो फर्क है, वह शराबी और होश में आने के बीच का फर्क है। सुबह जागकर तुम भी पाओगे कि तुम सिद्ध हो। वह फासला ऐसा नहीं है कि कुरूपता जैसा हो कि सुबह भी वैसी ही रहेगी--चाहे तुम जागो, चाहे तुम सोओ।
स्मरण का हलका सा झोंका तुम्हारे सारे संसार को बहा ले जाएगा। इस संसार की जगह तुम पाओगे--एक स्वच्छ आकाश। इसलिए पहली बात तो यह खयाल में ले लें, कि सिद्ध और साधक का कोई अंतर नहीं है। भक्त और भगवान में रत्ती भर का फासला नहीं है। और अगर फासला है, तो वह भक्त के खयाल में है, भगवान के खयाल में नहीं है। वह भक्त की ही भ्रांति है।

15/07/2026

Sonam vangchuk 's strike

किसी ने एडमंड बर्क को पूछा कि तुम न कभी चर्च जाते हो, न तुम्हें कभी प्रार्थना करते किसी ने देखा। तुम भयभीत नहीं हो? भविष...
11/07/2026

किसी ने एडमंड बर्क को पूछा कि तुम न कभी चर्च जाते हो, न तुम्हें कभी प्रार्थना करते किसी ने देखा। तुम भयभीत नहीं हो? भविष्य के लिए चिंतित नहीं हो? बर्क ने कहा: जो भी भला है, वह मैं कर रहा हूं। अगर भले का परिणाम भला होगा, तो ठीक है। अगर भले का परिणाम बुरा होगा, तो भी ठीक है। क्योंकि परिणाम की चिंता मैं नहीं कर रहा हूं। मुझे भला करने में इतना आनंद आ रहा है कि अब और किसी परिणाम की कोई जरूरत ही नहीं है। यह काफी है।💕💥💥✨
धार्मिक व्यक्ति के लिए साधन ही साध्य हो जाता है, यात्रा ही मंजिल हो जाती है। चलना ही इतना सुखद है कि पहुंचने की चिंता कौन करता है? यह रास्ता ही इतना प्यारा है कि मंजिल के सपने कौन देखता है? और तब ऐसे व्यक्ति के लिए यही जगह मंजिल हो गई। क्योंकि मंजिल का मतलब क्या है?--जहां विश्राम हो सके। मंजिल का मतलब क्या है? जहां तुम आराम कर सको। ऐसा यात्री यहीं आराम कर रहा है। इसके कदम-कदम पर मंजिल है। इसको कहीं पहुंचना नहीं है। यह पहुंचा ही हुआ है।
लेकिन अधार्मिक चित्त हमेशा लोभ, भय की भाषा में सोचता है। चर्च, मंदिर, मस्जिद, तुम्हारे भय का शोषण करते हैं, तुम्हारे लोभ का शोषण करते हैं, इसलिए उनका भी कोई संबंध धर्म से नहीं है। धर्म का एक भी मंदिर पृथ्वी पर नहीं है। कोई चर्च धर्म का नहीं है, क्योंकि तुम दुकानदार हो। सब चर्च तुम्हारे हैं, सब मंदिर तुम्हारे हैं। तुमने उन्हें बनाया है;✨💥💕



मैंने सुना है कि मुल्ला नसरुद्दीन हमेशा दांत के डॉक्टरों से बचता रहा। हमेशा डरा रहा। लेकिन एक बार मजबूरी इतनी बढ़ गई। पीड़...
07/07/2026

मैंने सुना है कि मुल्ला नसरुद्दीन हमेशा दांत के डॉक्टरों से बचता रहा। हमेशा डरा रहा। लेकिन एक बार मजबूरी इतनी बढ़ गई। पीड़ा इतनी थी दांत में, कि जाना ही पड़ा। गया तो डॉक्टर से उसने कहा कि वर्षों से टाल रहा हूं, अब उस जगह पहुंच गई है बात कि अब और सहा नहीं जा सकता। न सो सकता, न बैठ सकता। दर्द बहुत है; आना ही पड़ा। लेकिन भयभीत हूं। हाथ-पैर मेरे कंप रहे हैं। स्नायु मेरे तने हैं। हृदय मेरा धड़क रहा है। मैं तुमसे बहुत डरता हूं। डॉक्टर दयालु था; उसने कहा, तुम घबड़ाओ मत। भरा हुआ गिलास शराब का नसरुद्दीन को दिया और कहा, ‘यह पी जाओ। एक ही घूंट में नसरुद्दीन उसे पी गया। गर्मी आई। आंखों में सुर्खी आ गई। दर्द भी भूल गया। डॉक्टर ने थोड़ी देर बाद पूछा कि कैसा लग रहा है? भय गया? थोड़ी निर्भयता आई? नसरुद्दीन खड़ा हो गया। छाती फुला कर, उसने कहा, ‘निर्भयता! अब मेरे दांत को हाथ लगाओ तो जानूं। देखें, कौन माई का लाल मेरे दांत को हाथ लगाता है।’🎉✨💥
अहंकार बड़ी से बड़ी शराब है और जितना ज्यादा अहंकार बढ़ता जाता है, उतना ही ऐसा मालूम पड़ता है कि तुम्हारी विजय का कोई अंत नहीं है। परमात्मा को भी तुम विजित करके रहोगे। उसे भी जीतोगे।
इस अहंकारी ने बहुत से उपाय खोजे हैं--कैसे परमात्मा को पाना। लेकिन ध्यान रहे, किसी उपाय से कभी किसी ने परमात्मा को पाया नहीं है। जिसने उपाय किया, वह भटका और भूला।🎉✨💥

एक बूढ़ा आया, लकड़ी टेकता हुआ, मुश्किल से चलता हुआ। उसने कहा कि मेरी अस्सी साल की उम्र हो गई है। मैं तैयार हूं, लेकिन मैं ...
04/07/2026

एक बूढ़ा आया, लकड़ी टेकता हुआ, मुश्किल से चलता हुआ। उसने कहा कि मेरी अस्सी साल की उम्र हो गई है। मैं तैयार हूं, लेकिन मैं समझा नहीं। लोग बच्चों को गोद लेते हैं...।✨💥👌
नसरुद्दीन ने कहा कि बच्चों को लेने से क्या फायदा। हम तो ऐसे आदमी को लेंगे जिसके नाती-पोते भी हों, ताकि तीन-चार पीढ़ियों में हमारे परिवार में किसी को फिर गोद न लेना पड़े।🎉✨💥🌹
तो जो बहुत होशियार हैं वे लंबा इंतजाम कर लेते हैं। लेकिन गोद लिया हुआ बच्चा, और तुमने जिसे जन्म दिया, उसमें जमीन-आसमान का भेद है। मां ने जिसे गर्भ में रखा, नौ महीने जिसका बोझ झेला, जिसकी प्रतीक्षा की, जिसके आस-पास सपने संजोए, हजार-हजार आशाएं बांधी, अपने खून से जिसे सींचा, अपने हृदय की धड़कन दी, अपने प्राणों को बांटा जिससे--उस बच्चे में, और फिर तुमने किसी को गोद ले लिया, कानूनी बच्चे में, बड़ा फर्क है।🎉✨💥👌
तो इस संसार में तो तुम उधार भी ले लेते हो तो भी चल जाता है। यहां तो तुम अपने को धोखा दे लेते हो। बांझ भी उधार लेकर बच्चों को, जन्मदाता बन जाते हैं। लेकिन यह धोखा परमात्मा के जगत में न चलेगा। वहां तो तुम्हें मां बनना पड़ेगा। 💥✨🎉

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