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ओ बी सी का कालम 2027 की जनगणना में जोड़ने व पहले से मौजूद जातियों की ड्राप डाउन सूची उपलब्ध कराने की मांग कों लेकर कांग्र...
14/09/2026

ओ बी सी का कालम 2027 की जनगणना में जोड़ने व पहले से मौजूद जातियों की ड्राप डाउन सूची उपलब्ध कराने की मांग कों लेकर कांग्रेस कमेटी द्वारा दिया गया ज्ञापन
उपदेश टाइम्स कानपुर
कानपुर :- बी जे पी सरकार द्वारा लोकसभा चुनाव 2024 चुनाव के वक्त अन्य पिछड़ा वर्ग की जनगणना कराने के वादे से मुकर जाने के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी कानपुर द्वारा एक दिवसीय धरना देकर राष्ट्रपति महोदय कों सम्बोधित ज्ञापन दिया गया! ओ बी सी का कालम 2027 की जनगणना में जोड़ने व पहले से मौजूद जातियों की ड्राप डाउन सूची उपलब्ध कराने की मांग कों ज्ञापन में प्रमुखता से उठाया गया!आपकों बताते चले की नेता प्रतिपक्ष राहुलगान्धी के दबाव में 2024 के चुनाव में बी जे पी नें ओ बी सी वर्ग की जनगणना कराने का वादा किया था लेकिन इतना समय गुजर जाने के बावजूद वर्तमान बी जे पी सरकार आज तक अपने वादे कों पूरा नहीं किया और लगातार अपने वादे से मुकर रही है! और पहले से मौजूद जातियों की ड्राप डाउन सूची न देकर ओपन इंडेड प्रश्न का तरीका चुना! ओपन इंडेड तरीके से जाति की गणना करने से जातियों कों सैंकड़ो जातियों में बाटने का कुचक्र रचा जा रहा है! नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी का कहना है की अन्य पिछड़ा वर्ग का कालम न होने से केंद्र व राज्य में सूचीबद्द जातियों की गिनती में ही ड्राप डाउन सूची में देने वाली अन्यायपूर्ण और लक्ष्यविहीन जनगणना कों कांग्रेस कतई स्वीकार नहीं करेंगी! आज के ज्ञापन में प्रमुख रूप से विनोद पाल एडवोकेट, सियाराम पाल एडवोकेट, हरिश्चन्द्र, विष्णु सविता, राजेश भारती, गोविन्द, शैलेन्द्र वर्मा, सुधीर जायसवाल, राजकुमार प्रजापति रामदेव पाल, छविनाथ सिंह यादव सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे!

11/09/2026
‘दिल दीवाना हो गया’ का जादू, फैमिली ऑडियंस ने बनाया सरप्राइज हिटन स्टार पावर, न बड़ा शोर… कहानी के दम पर छठे हफ्ते में प...
09/09/2026

‘दिल दीवाना हो गया’ का जादू, फैमिली ऑडियंस ने बनाया सरप्राइज हिट

न स्टार पावर, न बड़ा शोर… कहानी के दम पर छठे हफ्ते में पहुंची ‘दिल दीवाना हो गया’

प्यार, परिवार और इमोशन का असर, ‘दिल दीवाना हो गया’ ने छठे हफ्ते में भी थामी रफ्तार

मुंबई (अनिल बेदाग): एक दौर में जब बड़े सितारों और एक्शन फ्रेंचाइजी फिल्मों का दबदबा है, वहीं दिल दीवाना हो गया ने अपनी सादगी, भावनाओं और पारिवारिक रिश्तों की कहानी से दर्शकों के बीच खास जगह बना ली है। 31 जुलाई 2026 को रिलीज हुई यह रोमांटिक फैमिली ड्रामा अब सफलतापूर्वक छठे सप्ताह में पहुंच गई है।

ग्रैंडवे प्रोडक्शंस के बैनर तले इशपॉल सिंह चावला द्वारा निर्मित और राजीव शमलाल सोनी निर्देशित फिल्म प्रेम, त्याग, विश्वास और रिश्तों की खूबसूरत कहानी पेश करती है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका साफ-सुथरा और पारिवारिक मनोरंजन है, जिसने अलग-अलग उम्र के दर्शकों को जोड़ा है।

भानुज सूद, काजल चौहान और शुभकरण भोपाल जैसे नए चेहरों ने अपनी सहज अदाकारी से प्रभावित किया, वहीं मुश्ताक खान, अरुण बख्शी, राजू खेर और बृज गोपाल जैसे अनुभवी कलाकारों ने कहानी को मजबूती दी। विष्णु नारायण का संगीत भी फिल्म की भावनात्मक अपील बढ़ाता है।

सकारात्मक वर्ड ऑफ माउथ ने फिल्म की सिनेमाघरों में मौजूदगी कायम रखी है। निर्माता और निर्देशक दोनों का मानना है कि दर्शकों का प्यार साबित करता है कि दिल छू लेने वाली कहानियों की अहमियत आज भी बरकरार है।

विनोबा भावे के भुदान एवं सर्वोदय में सबका विकास संभव-ः ललित गर्ग:-जब कोई राष्ट्र आर्थिक समृद्धि, तकनीकी प्रगति और वैश्वि...
09/09/2026

विनोबा भावे के भुदान एवं सर्वोदय में सबका विकास संभव
-ः ललित गर्ग:-

जब कोई राष्ट्र आर्थिक समृद्धि, तकनीकी प्रगति और वैश्विक प्रतिष्ठा की ओर बढ़ता है, तब उसके सामने एक बड़ा प्रश्न खड़ा होता है-क्या विकास केवल भौतिक उपलब्धियों का नाम है अथवा मनुष्य के भीतर नैतिकता, करुणा, सह-अस्तित्व और जिम्मेदारी का विकास भी उसका अनिवार्य हिस्सा है? आज भारत ‘नया भारत’, ‘विकसित भारत’ और ‘समृद्ध भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में आचार्य विनोबा भावे का जीवन और चिंतन हमें याद दिलाता है कि राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत नींव मनुष्य का चरित्र है। 11 सितंबर को विनोबा भावे की जयंती है। उनका मूल नाम विनायक नरहरि भावे था। वे महात्मा गांधी के निकट सहयोगी, स्वतंत्रता सेनानी, चिंतक, अध्यात्मद्रष्टा और सर्वोदय आंदोलन के प्रणेता थे। लेकिन उन्हें केवल गांधीजी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी के रूप में देखना उनके विराट व्यक्तित्व को सीमित करना होगा। विनोबा की अपनी स्वतंत्र वैचारिक भूमि थी। वे संत ज्ञानेश्वर और संत तुकाराम से प्रेरित थे, भगवद्गीता उनके जीवन का आध्यात्मिक आधार थी और समाज-परिवर्तन उनके चिंतन का व्यावहारिक पक्ष।
विनोबा का सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने आध्यात्मिकता को समाज की वास्तविक समस्याओं से जोड़ा। भूदान आंदोलन इसका अद्भुत उदाहरण है। वे गाँव-गाँव पैदल गए और भूमिधरों से अपनी भूमि का एक हिस्सा भूमिहीनों के लिए दान करने का आग्रह किया। यह केवल भूमि का हस्तांतरण नहीं था, बल्कि स्वामित्व की मानसिकता से साझेदारी की चेतना की ओर बढ़ने का प्रयास था। आगे चलकर भूदान से ग्रामदान की अवधारणा विकसित हुई-‘सारी भूमि गोपाल की।’ इसमें आर्थिक न्याय के साथ सामाजिक समरसता और नैतिक उत्तरदायित्व का संदेश छिपा था। विनोबा का विश्वास था कि समाज को केवल कानूनों से नहीं, अंतरात्मा के जागरण से बदला जा सकता है। यही दृष्टि उन्हें सर्वोदय तक ले गई-ऐसा समाज जिसमें विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और किसी के उत्थान की कीमत दूसरे के शोषण से न चुकानी पड़े। चंबल के डाकुओं को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करना उनके नैतिक नेतृत्व की शक्ति का प्रमाण था। उनके भीतर ऐसा विश्वास था कि मनुष्य मूलतः परिवर्तनशील है, आवश्यकता उसके भीतर की अच्छाई को जगाने की है।
विनोबा भावे और अणुव्रत आंदोलन के प्रणेता आचार्य तुलसी के बीच भी इसी नैतिक चेतना की गहरी साम्यता थी। जब आचार्य तुलसी ने अणुव्रत आंदोलन के माध्यम से व्यक्ति-निर्माण और नैतिक जागरण का अभियान प्रारंभ किया, तब अनेक राष्ट्रीय व्यक्तित्वों ने उनके प्रयासों को सहयोग और समर्थन दिया। विनोबा भावे उनमें प्रमुख थे। दोनों महापुरुष समय-समय पर मिलते रहे और देश के निर्माण में नैतिक मूल्यों की अनिवार्यता पर गंभीर विचार-विमर्श करते रहे। उनकी दृष्टि में राजनीति, समाज और अर्थव्यवस्था तभी स्वस्थ हो सकती है, जब उनका संचालन नैतिक मनुष्य के हाथों में हो। दोनों की पदयात्राओं में भी एक आत्मीय जुड़ाव दिखाई देता है। पदयात्रा उनके लिए केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने का माध्यम नहीं थी, वह जन-संपर्क, जन-जागरण और आत्म-संपर्क की साधना थी। विनोबा कहा करते थे कि पैदल चलने से धरती का स्पर्श होता है और प्रकृति के साथ संबंध गहरा होता है। उनके विचारों की यह अनुभूति मुझे स्वयं भी हुई। अणुव्रत आंदोलन के प्रणेता आचार्य तुलसी के साथ अनेक वर्षों तक पैदल चलने का अवसर मिला। मैंने अनुभव किया कि पैदल यात्रा केवल शरीर को गतिशील नहीं करती, वह मन और मस्तिष्क के बंद द्वार भी खोलती है। रास्ते में मिलने वाला सामान्य व्यक्ति भी शिक्षक बन जाता है और जीवन स्वयं एक खुली पाठशाला बन जाता है।
मेरे परिवार का विनोबा भावे से जुड़ा एक प्रसंग आज भी मेरे लिए अत्यंत भावपूर्ण है। मेरे पिता स्व. श्री रामस्वरूप गर्ग और माता स्व. श्रीमती सत्यभामा गर्ग सर्वोदय कार्य से जुड़े हुए थे। वर्ष 1959 में विनोबा भावे पदयात्रा करते हुए अजमेर आए। उन्हें जानकारी मिली कि उनकी कार्यकर्त्री सत्यभामा गर्ग कैंसर से पीड़ित हैं और जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही हैं। वे उनसे मिलने इमली मोहल्ले की संकरी गलियों से होते हुए तीसरी मंजिल तक गए और उन्हें अपना आशीर्वाद दिया। यह घटना बताती है कि विनोबा का नेतृत्व केवल बड़े मंचों और आंदोलनों तक सीमित नहीं था। वे व्यक्ति के दुख को अपना दुख मानने वाले करुणाशील संत थे। इसी क्रम में अजमेर के निकट हटूंडी में आयोजित सर्वोदय सम्मेलन का प्रसंग भी उल्लेखनीय है। मेरे पिता सर्वोदय के सक्रिय कार्यकर्ता थे। उस सम्मेलन में वे आचार्य तुलसी के शिष्य मुनि राकेश कुमार जी को भी लेकर गए। वहां विनोबा भावे के साथ उनकी लंबी और सार्थक चर्चाएँ हुईं। यह केवल दो विचारधाराओं का संवाद नहीं था, बल्कि उस समय के दो नैतिक प्रवाहों का मिलन था-सर्वोदय की सामाजिक चेतना और अणुव्रत की व्यक्तिगत नैतिक साधना। दोनों का लक्ष्य अंततः एक ही था-मनुष्य बदले, समाज बदले और राष्ट्र नैतिक शक्ति के आधार पर आगे बढ़े।
विनोबा का जीवन हमें यह भी सिखाता है कि महान व्यक्तित्वों का मूल्यांकन उनकी उपलब्धियों के साथ उनकी मानवीय सीमाओं और ऐतिहासिक संदर्भों में भी होना चाहिए। आपातकाल के दौरान उनके ‘अनुशासन पर्व’ संबंधी कथन ने उनके सार्वजनिक जीवन पर प्रश्न भी खड़े किए। किंतु किसी एक राजनीतिक प्रसंग से उनके पूरे जीवन के सामाजिक, आध्यात्मिक और रचनात्मक योगदान को नकारना उचित नहीं होगा। महापुरुषों को मूर्ति बनाकर पूजना जितना आसान है, उनके विचारों को आलोचनात्मक समझ के साथ जीवन में उतारना उतना ही कठिन। विनोबा ने अपने जीवन के अंतिम चरण में जैन धर्म की संलेखना-संथारा की भावना से प्रेरित होकर भोजन और दवा का त्याग किया और 15 नवंबर 1982 को देह का परित्याग किया। उनका जीवन कर्म, चिंतन, त्याग और लोकमंगल की निरंतर यात्रा था।
आज भारत विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह मजबूत कर रहा है। डिजिटल क्रांति, आधारभूत संरचना, स्टार्टअप, विज्ञान और तकनीक हमें नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं। लेकिन विकसित भारत का वास्तविक अर्थ तब पूरा होगा, जब विकास के साथ विवेक भी बढ़े, संपन्नता के साथ संवेदना बढ़े और अधिकारों के साथ कर्तव्यबोध भी मजबूत हो। यही वह स्थान है जहां विनोबा आज भी हमारे समकालीन बन जाते हैं। भूदान आज भूमि से आगे बढ़कर संसाधनों के न्यायपूर्ण उपयोग का संदेश बन सकता है। ग्रामदान आज सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय विकास की प्रेरणा बन सकता है। सर्वोदय आज ‘सबका विकास’ को केवल नारे से आगे ले जाकर सामाजिक समरसता का आधार बन सकता है और अणुव्रत की चेतना आज सार्वजनिक जीवन में चरित्र, संयम और नैतिक अनुशासन की आवश्यकता को रेखांकित कर सकती है। विनोबा जयंती पर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके जीवन को इतिहास की पुस्तक में बंद न करें, बल्कि नए भारत के चरित्र-निर्माण की परियोजना से जोड़ें। भारत को विकसित बनाने के लिए हमें केवल तेज गति से चलने वाली अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि सही दिशा में चलने वाला मनुष्य चाहिए। विनोबा की पदयात्रा का यही सबसे बड़ा संदेश है-राष्ट्र की यात्रा बाहर से नहीं, भीतर से शुरू होती है।
भारत तभी सशक्त होगा जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक सम्मान और अवसर पहुंचे। यह विचार महात्मा गांधी के ‘अंत्योदय’, विनोबा भावे के ‘सर्वोदय’ और दीनदयाल उपाध्याय के ‘एकात्म मानववाद’ की पुनर्स्मृति कराता है। आधुनिक भारत की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि विकास के लाभ समाज के सभी तबकों तक समान रूप से नहीं पहुंचते। अमीर-गरीब की खाई बढ़ती जा रही है। यदि इस खाई को नहीं भरा गया, तो राष्ट्र की प्रगति अधूरी रह जाएगी। इस तरह विनोबा जाति की संकीर्ण दीवारों को तोडऋना चाहते थे, वे कहा करते थे “जाति का भेद मिटेगा तो समाज में भाईचारा और सहयोग की भावना पनपेगी।” वास्तव में जातिवाद केवल सामाजिक समस्या नहीं बल्कि मानसिकता का रोग है। जब तक समाज इसे स्वीकार करता रहेगा, तब तक सच्चा विकास संभव नहीं। विनोबा चरित्र क्रांति के साथ-साथ विचार-क्रांति के पुरोधा रहे। उनके द्वारा स्थापित सर्वोदय साहित्य भंडार तथा आचार्य तुलसी द्वारा स्थापित आदर्श साहित्य संघ जैसे संस्थानों ने नैतिक और प्रेरणादायक साहित्य को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन प्रयासों का उद्देश्य केवल ज्ञान का प्रसार नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और मानवीय मूल्यों का संवर्धन भी रहा है। वर्तमान समय में जब तकनीकी साधनों का विस्तार हुआ है, तब भी इन्हीं महापुरुषों के योगदान के कारण पुस्तकों की उपयोगिता और महत्ता में कोई कमी नहीं आई है।

मुलुंड में मलाइका अरोरा का ग्लैमरस अंदाजमलाइका अरोरा ने मुलुंड में कल्याण ज्वेलर्स की चमक बढ़ाईमलाइका अरोरा की मौजूदगी स...
09/09/2026

मुलुंड में मलाइका अरोरा का ग्लैमरस अंदाज

मलाइका अरोरा ने मुलुंड में कल्याण ज्वेलर्स की चमक बढ़ाई

मलाइका अरोरा की मौजूदगी से जगमगाया कल्याण ज्वेलर्स का मुलुंड शोरूम

मुंबई (अनिल बेदाग): अभिनेत्री मलाइका अरोरा की ग्लैमरस मौजूदगी ने मुलुंड में कल्याण ज्वेलर्स के नए शोरूम के उद्घाटन समारोह को खास बना दिया। श्री प्रभु गणेशन के साथ मलाइका अरोरा ने नए शोरूम का भव्य उद्घाटन किया। इस मौके पर अभिनेत्री ने कहा, “मुझे पूरा यकीन है कि इस शहर के लोग कल्याण ज्वेलर्स के शानदार और यूनीक डिजाइन्स को बहुत पसंद करेंगे। यहां की बेहतरीन सर्विस और खूबसूरत कलेक्शन को लोग अपना ढेर सारा प्यार और सपोर्ट देंगे।”
मुलुंड में शुरू किया गया यह शोरूम ग्राहकों के लिए पारंपरिक खूबसूरती और आधुनिक स्टाइल का शानदार मेल लेकर आया है। यहां कल्याण ज्वेलर्स के लोकप्रिय इन-हाउस ब्रांड ‘मुहूर्त’, ‘मुद्रा’ और ‘निमाह’ सहित कई आकर्षक कलेक्शंस उपलब्ध हैं।

श्री प्रभु गणेशन (इलाया थिलगम) अभिनेता ने कहा,"कल्याण ज्वेलर्स के नए शोरूम के उद्घाटन का हिस्सा बनकर मुझे बेहद खुशी हो रही है। मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे ब्रांड के साथ जुड़ा हूँ, जिसने हमेशा ग्राहकों के भरोसे, ईमानदारी और उनकी खुशियों को सबसे ऊपर रखा है। इस अवसर पर कल्याण ज्वेलर्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रमेश कल्याणरमन ने कहा कि मुलुंड में पहला शोरूम शुरू करना महाराष्ट्र में ब्रांड की मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

एमएसएमई विकास पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजितनिर्यात, GeM, ई-कॉमर्स, गुणवत्ता, पैकेजिंग एवं वित्तीय सुविधाओं पर ...
09/09/2026

एमएसएमई विकास पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

निर्यात, GeM, ई-कॉमर्स, गुणवत्ता, पैकेजिंग एवं वित्तीय सुविधाओं पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी

उपदेश टाइम्स कानपुर नगर

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर द्वारा उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान तथा विभिन्न औद्योगिक संगठनों के सहयोग से बुधवार को क्षेत्रीय उद्योग कार्यालय सभागार, एचबीटीयू कैम्पस, नवाबगंज, कानपुर में एमएसएमई विकास पर आधारित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को व्यवसाय एवं उद्योग से संबंधित नवीन अवसरों, सरकारी योजनाओं एवं नीतियों, बाजार उपलब्धता, निर्यात, गुणवत्ता, प्रौद्योगिकी तथा वित्तीय सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराते हुए उन्हें अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आलोक द्विवेदी, संयुक्त विदेश व्यापार महानिदेशक, कानपुर तथा विशिष्ट अतिथियों के रूप में , सुनील कुमार, संयुक्त आयुक्त उद्योग, कानपुर मंडल, कृष्ण मुरारी, उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी, GeM इंडिया सहित विभिन्न औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ विष्णु कुमार वर्मा, आईईडीएस, निदेशक, एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। भारत सरकार एवं एमएसएमई-विकास कार्यालय का निरंतर प्रयास है कि स्थानीय उद्यमियों को हर संभव नीतिगत, वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि कार्यशाला के माध्यम से उद्यमियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने तथा सरकारी योजनाओं और आधुनिक बाजार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र के उद्यमियों एवं युवा नवाचारकर्ताओं से भारत सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा एमएसएमई के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि आलोक द्विवेदी, संयुक्त विदेश व्यापार महानिदेशक, कानपुर ने कहा कि उत्तर प्रदेश से होने वाले वैश्विक निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है। प्रदेश के पारंपरिक हस्तशिल्प, टेक्सटाइल, लेदर, एग्रो उत्पाद एवं एमएसएमई उत्पादों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश ने पहली बार 2.01 लाख करोड़ रुपये के निर्यात का आंकड़ा पार किया है। देश के कुल मर्चेंडाइज निर्यात में प्रदेश की हिस्सेदारी 5.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे उत्तर प्रदेश देश का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है।

सुनील कुमार, संयुक्त आयुक्त उद्योग, कानपुर मंडल ने कहा कि कानपुर मंडल ऐतिहासिक रूप से प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र रहा है। लेदर, टेक्सटाइल, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग उत्पाद तथा रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में यहां विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और सुविधाओं के परिणामस्वरूप प्रदेश का निर्यात निरंतर बढ़ रहा है।

प्रियंवदा अग्रवाल ,जेम कंसल्टेंट, GeM इंडिया ने सरकारी खरीद में उत्तर प्रदेश की बढ़ती भागीदारी तथा एमएसएमई विक्रेताओं के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश GeM पोर्टल के माध्यम से सरकारी खरीद करने वाले राज्यों में देशभर में अग्रणी बना हुआ है। प्रदेश के विभागों एवं निकायों द्वारा GeM के माध्यम से 55,000 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद की जा चुकी है। GeM के माध्यम से होने वाली कुल खरीद में 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी एमएसएमई क्षेत्र की है।

कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में एमएसएमई इकाइयों के लिए आयात-निर्यात तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। एस.के. निराला, एफटीडीओ, डीजीएफटी, कानपुर ने आयात-निर्यात नीति के महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी देते हुए उद्यमियों को वैश्विक बाजार में अपने उत्पाद एवं सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया। आलोक श्रीवास्तव, यूपी हेड, FIEO, कानपुर ने व्यापार संवर्धन संगठनों की भूमिका पर प्रकाश डाला। ए.के. सोनी, क्षेत्रीय प्रमुख, एक्जिम बैंक, लखनऊ ने निर्यात के लिए उपलब्ध वित्तीय सुविधाओं की जानकारी दी। शाहिद अहमद, शाखा प्रबंधक, ECGC, कानपुर ने निर्यात बीमा कवरेज के महत्व की जानकारी देते हुए उद्यमियों को विदेशी खरीदारों से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए ECGC की सुविधाओं का लाभ उठाने की सलाह दी। गौरव कुमार मौर्य, सहायक आयुक्त, उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो, लखनऊ ने उत्तर प्रदेश निर्यात नीति के संबंध में जानकारी प्रदान की।

दूसरे तकनीकी सत्र में सरकारी खरीद प्रक्रिया के अंतर्गत GeM के माध्यम से एमएसएमई के लिए उपलब्ध बाजार अवसरों पर चर्चा की गई। प्रियंवदा अग्रवाल, GeM कंसल्टेंट, GeM सेल, उत्तर प्रदेश ने GeM पंजीकरण एवं सरकारी खरीद प्रक्रिया की जानकारी देते हुए उन महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में बताया, जिनका ध्यान रखकर उद्यमी अधिक से अधिक सरकारी ऑर्डर प्राप्त कर सकते हैं।

वॉलमार्ट वृद्धि, यूपी जोन की जोनल मोबिलाइजेशन मैनेजर अंशुल गुप्ता ने डिजिटल मार्केटिंग एवं ई-कॉमर्स के माध्यम से एमएसएमई उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ाने के संबंध में जानकारी दी।

उत्पादों एवं सेवाओं की बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता तथा मानकों के महत्व पर भी विशेषज्ञों ने जानकारी दी। डॉ. अंशुमान श्रीवास्तव, प्रोफेसर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग, लखनऊ ने आधुनिक पैकेजिंग पद्धतियों की जानकारी देते हुए कहा कि उत्पाद की आकर्षक एवं प्रभावी पैकेजिंग बाजार में उसकी स्वीकार्यता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रीति गंगवार, उप निदेशक, नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल, कानपुर ने एमएसएमई में उत्पादकता के महत्व पर चर्चा करते हुए एमएसएमई लीन योजना, वाटर ऑडिट एवं एनर्जी ऑडिट के लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन उपायों को अपनाकर उद्यमी अपनी उत्पादन क्षमता एवं दक्षता में सुधार कर सकते हैं और इसके लिए सरकार द्वारा वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

आशुतोष राय, उप निदेशक, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), लखनऊ ने उत्पादों की गुणवत्ता एवं मानकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैश्विक बाजार में प्रवेश के लिए उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यशाला में उत्तर प्रदेश सरकार की उद्योग नीति, एमएसएमई पॉलिसी-2022 एवं लेदर पॉलिसी सहित विभिन्न नीतियों पर भी चर्चा हुई। सुनील कुमार, संयुक्त आयुक्त, उद्योग विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार ने इन नीतियों के अंतर्गत उद्यमियों के लिए उपलब्ध अवसरों एवं सुविधाओं की जानकारी दी।

बौद्धिक संपदा अधिकारों के अंतर्गत ट्रेडमार्क, पेटेंट एवं डिजाइन के महत्व पर नवदीप श्रीधर, ट्रेडमार्क एवं पेटेंट अटॉर्नी ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने उद्यमियों को अपने उत्पादों, ब्रांड एवं नवाचारों को बौद्धिक संपदा अधिकारों के माध्यम से सुरक्षित रखने के लिए जागरूक किया।

वित्तीय सहायता से संबंधित तकनीकी सत्र में उद्योगों के लिए बेहतर वित्तीय सुविधाओं एवं कार्यशील पूंजी की उपलब्धता पर चर्चा की गई। जे.के. गुप्ता, महाप्रबंधक, SIDBI, लखनऊ ने एमएसएमई के लिए उपलब्ध विभिन्न औद्योगिक एवं वित्तीय सहायता सुविधाओं की जानकारी दी।

ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) के माध्यम से बड़े उपक्रमों को आपूर्ति के बाद बिल डिस्काउंटिंग द्वारा शीघ्र भुगतान प्राप्त करने तथा एमएसएमई इकाइयों के लिए तरल पूंजी की व्यवस्था के संबंध में भी जानकारी दी गई। संकल्प त्रिपाठी, बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर, RXIL-TReDS, नई दिल्ली तथा अरूर्वे गैरोला, TReDS ने प्रतिभागियों को TReDS प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली एवं व्यापार वित्तपोषण में इसके महत्व से अवगत कराया।

आदित्य चन्द्र, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर, बैंक ऑफ बड़ौदा, कानपुर नगर ने बैंकिंग से संबंधित विभिन्न विषयों एवं एमएसएमई उद्यमियों के लिए उपलब्ध बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी दी।

कार्यशाला के माध्यम से एमएसएमई उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय एवं घरेलू बाजारों की संभावनाओं, सरकारी खरीद, ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता एवं मानकों, राज्य सरकार की नीतियों, बौद्धिक संपदा अधिकारों तथा वित्तीय सहायता के विभिन्न अवसरों की विस्तृत जानकारी प्राप्त हुई। कार्यक्रम के दौरान विषय विशेषज्ञों एवं संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं एवं समस्याओं का समाधान भी किया।

कार्यशाला ने उद्यमियों, औद्योगिक संगठनों, सरकारी विभागों एवं वित्तीय संस्थानों को संवाद और सहयोग के लिए साझा मंच उपलब्ध कराया। कार्यक्रम का समन्वय अमित बाजपेयी, सहायक निदेशक, एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर द्वारा किया गया। कार्यशाला में 200 से अधिक एमएसएमई इकाइयों एवं विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

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Kanpur
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