Viral India

Viral India Keep Penning Keep Writing

04/04/2026
हमारे गाँव मे एक मुसलमान हैं। पिताजी से उनकी मित्रता थी। उनकी लड़की निकाह के लायक हो गयी थी। गरीबी थी तो परेशान भी थे। उ...
18/03/2026

हमारे गाँव मे एक मुसलमान हैं। पिताजी से उनकी मित्रता थी।

उनकी लड़की निकाह के लायक हो गयी थी। गरीबी थी तो परेशान भी थे।

उन्होंने अपनी व्यथा पिताजी से कही तो पिताजी ने किसी दूसरे गाँव के परिचित एक संपन्न मुसलमान परिवार में उसकी बात चलाई।

वे लोग पिताजी की बात टाल न सके और उसका निकाह हो गया।

लड़की के पिता जब भी मेरे घर की ओर आते, इसका जिक्र करके हमेशा शुक्रिया अदा करते।

निकाह के दो साल बाद वह लड़की गाँव (मायके) आई थी। सूखे सूखे मुँह वाली वह पीली सी लड़की संपन्नता भोगकर भरी- पूरी हो गयी थी और रंग भी लाल टेस हो गया था। सुख के सारे चिन्ह चेहरे से ही प्रतिबिंबित हो रहे थे।

पिताजी ने औपचारिकतावश उससे पूछ लिया कि कैसी है तो वह बोल पड़ी:

चाचा तुहरे असिरवाद से बहुत सुखी बाटी लेकिन बियहवा शादिया में जौन तोहरे घरवां से पत्तलवा में चूरा दहिया और सब्जिया एक्के में जात रहल है, ओकर स्वाद नाहीं कौनों चीज मे मिलल।

पिताजी हतप्रभ रह गए। उनको लगा कि जिसने दुख दरिद्रता एक बार देख लिया हो, उसका प्रभाव उसपर से जाने में बड़ा समय लगता है।

अब मूल विषय पर आते हैं। स्वतंत्रता मिले सत्तर साल हो गए। दलितों को आरक्षण मिले भी लगभग उतना ही समय हो गया। स्कॉलरशिप, आयु में छूट, आपराधिक मामलों में उनकी तीव्र और एकपक्षीय सुनवाई, सारी योजनाओं के प्राथमिक लाभार्थी, परीक्षाओं में छूट जैसे विशेषाधिकार मिलने के बाद भी इनके मन से हीनताबोध नहीं जा रहा। बल्कि और भी विष ही बढ़ रहा।

सब कुछ के बाद भी अन्याय और अत्याचार की झूठी गाथा, अस्पृश्यता की आड़ लेकर तरह-तरह के प्रपंच रोज हो रहे हैं।

यह चित्र देखिये। यह किसी ब्राह्मण या राजपूत ने करने को बाध्य तो किया नहीं है। इसने खुद ही ऐसा रूप धारण किया हुआ है।

बाद में ऐसे चित्र और वीडियो जब इतिहास का हिस्सा बनेंगे तो यही कहा जायेगा कि इक्कीसवीं शताब्दी में भी दलितों के गले में घड़ा और गाँड़ में झाड़ू पहनाया जाता था।

राकेश मिश्र 'सरयूपारीण'

 #अश्वत्थामा की नसों में दौड़ता  #मैंगनीज (Manganese) या नियति का  #श्राप.....?महाभारत के युद्ध का वह अंतिम अध्याय, जिसम...
08/03/2026

#अश्वत्थामा की नसों में दौड़ता #मैंगनीज (Manganese) या नियति का #श्राप.....?
महाभारत के युद्ध का वह अंतिम अध्याय, जिसमें द्रोण पुत्र अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ पर ब्रह्मास्त्र का प्रहार किया, इतिहास की सबसे क्रूर घटनाओं में से एक माना जाता है। लेकिन आज के दौर में, जब विज्ञान और अध्यात्म का संगम हो रहा है, अश्वत्थामा की अमरता को लेकर एक अजीबोगरीब दावा सोशल मीडिया और छद्म विज्ञान (Pseudo-science) के गलियारों में तैर रहा है। दावा यह है कि अश्वत्थामा के रक्त में आयरन (Iron लोहा) के स्थान पर मैंगनीज (Manganese मैंगनीज) आधारित हीमोग्लोबिन था, जिसने उन्हें पांच हजार वर्षों तक जीवित रखा।

अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषण:।
कृप: परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविन:॥
भावार्थ: अश्वत्थामा, राजा बलि, महर्षि व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और भगवान परशुराम—ये सात महापुरुष 'चिरजीवी' माने जाते हैं, जो युगों-युगों तक जीवित रहेंगे।

अश्वत्थामा का रहस्य दरअसल विज्ञान और धर्म के बीच की कड़ी है। अश्वत्थामा की अमरता कोई वरदान नहीं, बल्कि एक अंतहीन पीड़ा है। आइए इसे बहुत सरल भाषा में समझते हैं कि मैंगनीज (Manganese मैंगनीज) की कहानी और श्री कृष्ण का श्राप असल में क्या है।

रक्त की कहानी: लोहा (Iron) बनाम मैंगनीज (Manganese)
सरल शब्दों में कहें तो हमारा शरीर एक मशीन है और रक्त उसका ईंधन।

-इंसानी हकीकत क्या है ? हमारे खून में आयरन (Iron लोहा) होता है। यह ऑक्सीजन (Oxygen प्राणवायु) को पकड़कर शरीर के हर हिस्से तक पहुंचाता है। जैसे बिना पेट्रोल के गाड़ी नहीं चलती, वैसे ही बिना आयरन के इंसान जीवित नहीं रह सकता।
यदि हम जीव विज्ञान (Biology जीव विज्ञान) की दृष्टि से देखें, तो मानव शरीर का अस्तित्व ही आयरन (Iron) पर टिका है। हमारे रक्त में मौजूद हीमोग्लोबिन (Hemoglobin हीमोग्लोबिन) के केंद्र में आयरन होता है, जो फेफड़ों से ऑक्सीजन (Oxygen ऑक्सीजन) लेकर पूरे शरीर में पहुंचाता है।

मैंगनीज का भ्रम क्या है इसे समझते हैं। कुछ लोग तर्क देते हैं कि अश्वत्थामा का खून मैंगनीज आधारित था। विज्ञान के हिसाब से मैंगनीज ऑक्सीजन को वैसे नहीं पकड़ सकता जैसे आयरन। अगर खून में मैंगनीज बढ़ जाए, तो इंसान को 'मैंगनिज्म' (Manganism मानसिक विकार) हो जाता है, जिससे उसकी याददाश्त और चलने-फिरने की शक्ति खत्म हो जाती है।
इसलिए, 5000 साल जीने के लिए खून का बदलना वैज्ञानिक रूप से संभव नहीं दिखता। यह सिर्फ एक कल्पना है जो प्राचीन कहानियों को आधुनिक रूप देने के लिए गढ़ी गई है।
मैंगनीज (Manganese) शरीर के लिए एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrient सूक्ष्म पोषक तत्व) तो है, लेकिन यह ऑक्सीजन के परिवहन का काम नहीं कर सकता। यदि रक्त में आयरन को मैंगनीज से बदल दिया जाए, तो कोशिकाएं ऑक्सीजन के अभाव में तुरंत मृत हो जाएंगी। इसके अलावा, रक्त में मैंगनीज की उच्च मात्रा 'मैंगनिज्म' (Manganism मैंगनिज्म) नामक गंभीर बीमारी पैदा करती है, जो तंत्रिका तंत्र (Nervous System तंत्रिका तंत्र) को पूरी तरह नष्ट कर देती है। इसलिए, मैंगनीज आधारित रक्त की थ्योरी (Theory सिद्धांत) वैज्ञानिक धरातल पर कोरी कल्पना ही सिद्ध होती है।

2. श्राप का 'बायोलॉजिकल' (Biological जैविक) असर
महाभारत के अनुसार, अश्वत्थामा ने जब पांडवों के वंश को नष्ट करने की कोशिश की, तब श्री कृष्ण ने उन्हें दंड दिया।

श्लोक:
यस्मात्त्वं पापकृत्तमस्तस्मात्त्वं कुरुनन्दन।
अपरिचाय्य: सर्वभूतानां व्याधिभिः परिपीडितः॥
(हे पापी! तूने जो अपराध किया है, उसके कारण तू दुनिया की नजरों से ओझल होकर व्याधियों और रोगों से तड़पता हुआ युगों-युगों तक भटकेगा।)
यह श्राप किसी धातु (Metal धातु) के बदलने जैसा नहीं था, बल्कि शरीर की 'रिपेयरिंग' (Repairing मरम्मत) शक्ति को रोकने जैसा था। आज का विज्ञान कहता है कि हमारी कोशिकाएं (Cells कोशिकाएं) मरती हैं और नई बनती हैं। श्री कृष्ण का श्राप शायद अश्वत्थामा की कोशिकाओं को ऐसी स्थिति में ले गया जहाँ वे मरती तो हैं पर शरीर खत्म नहीं होता—एक ऐसा घाव जो कभी भरता नहीं।
पुराणों के अनुसार, अश्वत्थामा की दीर्घायु का कारण कोई रासायनिक बदलाव नहीं, बल्कि भगवान श्री कृष्ण का वह भयानक श्राप है जिसने उन्हें कलयुग के अंत तक व्याधियों के साथ भटकने पर मजबूर कर दिया।

अश्वत्थामा हतो हतः, नरो वा कुञ्जरो वा।

यह वह पंक्ति थी जिसने द्रोणाचार्य का अंत किया, लेकिन अश्वत्थामा का अंत कभी हुआ ही नहीं। उनके माथे से मणि निकाल ली गई, जिससे उनका घाव कभी नहीं भरता। यदि हम इसे आज के संदर्भ में देखें, तो यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ शरीर की कोशिकाएं (Cells कोशिकाएं) न तो मर रही हैं और न ही पूरी तरह स्वस्थ हो रही हैं। यह 'बायोलॉजिकल इमॉर्टिलिटी' (Biological Immortality जैविक अमरता) नहीं, बल्कि एक शाश्वत दंड है।
50 वर्षों का रहस्य और असीरगढ़ का किला
अश्वत्थामा के दिखने के सबसे अधिक दावे मध्य प्रदेश के असीरगढ़ किले और नर्मदा नदी के तटों से आते हैं। स्थानीय लोग कहते हैं कि वह आज भी शिव मंदिर में पूजा करने आते हैं। पिछले 50 वर्षों में उनके न दिखने की बात इसलिए कही जा रही है क्योंकि आधुनिक कैमरों और तकनीक के इस युग में कोई भी ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है।
अश्वत्थामा के असीरगढ़ के किले या नर्मदा किनारे दिखने की बातें केवल सुनी-सुनाई हैं।
पिछले 50 सालों में सीसीटीवी (CCTV), सैटेलाइट (Satellite उपग्रह) और मोबाइल कैमरे हर जगह पहुँच गए हैं। इस दौर में किसी भी दिव्य पुरुष का छिपना आसान है, लेकिन प्रमाण मिलना मुश्किल।

भटकती आत्मा या शरीर: कुछ लोग उन्हें शरीर के रूप में देखते हैं, तो कुछ एक ऊर्जा के रूप में। विज्ञान के पास इसका कोई जवाब नहीं है क्योंकि 'अमरता' प्रयोगशाला (Laboratory प्रयोगशाला) का विषय नहीं, बल्कि अध्यात्म का रहस्य है।

रहस्यमयी कहानियों का अपना एक आकर्षण होता है, लेकिन जब हम विज्ञान की कसौटी पर कसते हैं, तो अश्वत्थामा का अस्तित्व रक्त की रसायन शास्त्र (Chemistry रसायन शास्त्र) से नहीं, बल्कि कर्मों के फल और ईश्वरीय विधान से जुड़ा नजर आता है। मैंगनीज वाली बात संभवतः प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शब्दावली से जोड़ने का एक असफल प्रयास मात्र है। मैंगनीज वाली बात एक आधुनिक कहानी है, जबकि अश्वत्थामा का जीवित रहना एक आध्यात्मिक सत्य या लोककथा। वे आज भी हमारे बीच हैं या नहीं, यह शोध से अधिक श्रद्धा का विषय है।

इस प्रश्न अथवा दावे पर विश्लेषण समाप्त हुआ.....। अगले प्रश्न पर फिर से बातचीत होगी।

आज का प्रसारण यहीं समाप्त हुआ.....। अगली कड़ी जल्द...।

अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज

#कृष्ण #महाभारत

 #ये बेचारी लड़की होली के टाइम पर इस व्यक्ति के घर के पास से गुजर रही थी, पर ये व्यक्ति जो कि होली खेल रहा था इस नाबालिक...
07/03/2026

#ये बेचारी लड़की होली के टाइम पर इस व्यक्ति के घर के पास से गुजर रही थी, पर ये व्यक्ति जो कि होली खेल रहा था इस नाबालिका लड़की को पकड़ता है और इसके पेट के अंदर रंग और पानी डालने लगाता है, ये चिल्लाने लगती है तब भी वहाँ पर लोग हंस रहे थे और ये उस लड़की के कपड़े खोला-खोल के रंग लगा रहा था, ये करना बिल्कुल गलत था और वहाँ पर लोगों को भी बोलना चाहिए पर वो नहीं बोले,

इस गरीब लड़की को ये लड़का कुछ समझ ही नहीं रहा है जैसे कोई चीज हो और ये ऐसा कर रहा है, ये तो कानून के तौर पर गलत है, इस पर कार्यवाही करनी चाहिए👮 पुलिस को, ये वीडियो वायरल हो रहा है इस लड़की का, पर पुलिस वाले अभी तक इस पर कुछ नहीं किए हैं, ये होली के टाइम पर इन लोग फायदा उठाते हैं और लड़कियों se छेड़खानी करते हैं

आज होली का दिन है मगर आज खाने को इच्छा हो ही नही रहा था... हाँ सच मे एक जरा सा भी नही...? बहुत रोने का मन कर रहा था... ई...
04/03/2026

आज होली का दिन है मगर आज खाने को इच्छा हो ही नही रहा था... हाँ सच मे एक जरा सा भी नही...?

बहुत रोने का मन कर रहा था... ईरान का दुख देख कर....!!

🤔😐🍴😒🤷‍♂️🍔🥤😳🤤🍕😋👅🤤🍔🌮

सुबह से ही टीवी पर एक न्यूज आया की ईरान का आतंकवादी एक खरमोई मरा इस दुख मे हमारे राजस्थान के टॉपिक भाई जान ईद नही मनाएंगे...!!

सोचा सही है वो ईद नही मनाएंगे तो मैं भी नही खाऊंगा... आखिर राजस्थान के लोग भी तो अपने भाई-भाई हैं....?

दुख की घड़ी मे इतना सब कैसे खाया जायेगा भला...?

नही खाया मैंने एक भी दाना नही खाया गया...!

चिंता से मैं सो गया... नींद मे क्या देखता हूँ.. की

अल्लाह मेरे सपने मे आये हैं.....और कह रहे हैं उठिये पंडित जी आप खा लीजिये आप क्यों दुखी हो रहे हैं....?

मैंने कहा की है परवर दिगार ये आपने क्या किया...?

आपके बन्दे रमजान के इस पाक महीने मे जहन्नुम जा रहे हैं....?

आपको तनिक मात्र भी... या यूँ कहें की छन मात्र भी दया नही आया अपने नापाक बन्दों पर..या मेरे मोला...?

सच कहूं तो मैं अल्लाह से बहुत दुखी था.... इस कारण मैंने अल्लाह को अपने ईरानी भाईयों के दुख को सुनाता रहा....!

कैसे काफिर अमेरिका और इजराइल... ईरानी भाईयों को मार रहा है... वो भी चुन-चुन कर...!

इधर अफगानिस्तान मार रहा पाकिस्तान को....!!

तब मेरे अल्लाह पाक ने कहा पंडित जी रुकिए थोड़ा मुझे भी सांस लेने दीजिये इतना दुखी आप क्यों हो रहे हैं....?

एक बात बताइये ईरान को मारने का सुपाड़ी किसने दिया...?

खरमोई के गुप्त ठिकाने का सुचना अमेरिका इजराइल को किसने दिया.. किसने बताया की वो कहाँ पर है....?

मैंने कहा यही उनके भाई-बंधु... जैसे सऊदी अरब...जॉर्डन, युऐइ... आदि बहुत सारे मुसलमान देश ने ही दिया......!

फिर मेरे मालिक अल खुदुश के कहा... अच्छा एक बात बताइये पंडित जी जो मरे वो कौन थे...?

मैंने कहा मुसलमान थे....!

फिर मेरे मालिक अल रहमान ने कहा बहुत अच्छा पंडित जी.....!

फिर मेरे मालिक अल हकीम, अल गफ्फार मेरे मालिक अल्लाह ने मुझे समझाया की पंडित जी मेरे बात को गौर से सुनिए और विचार करिये....!

मैंने कहा फ़रमायीये मेरे मालिक....🖐️🖐️

उन्होंने फरमाया....ज़ब मरने वाला मुसलमान, मारने वाला मुसलमान... जहन्नुम जाने वाला मुसलमान और तो और उसके लिए रोने वाला मुसलमान... तो एक बात बताइये... आप क्यों नही खाएंगे...?

आज होली का दिन है... और मै नही चाहूंगा की मेरे रहते एक पंडित जी भूखा रहे...!

कोइ खरमोई मरा है तो मरने दीजिये... अभी बंगलादेश मे जो इतने गरीब दलितों को मारा जा रहा था तब तो आपने किसी मुसलमान को दुखी होते नही देखा....?

नही-नही अगर किसी मुसलमान को रोते देखा हो तो बताईये....?

नही देखा होगा...!!

तो आपको किस बात की चिंता है....?

आप खाइये आराम से.... और ज़ब तक आप खाएंगे नही.. मैं यहां से नही जाऊंगा....?

मेरे अल्लाह... अल मुमीन का मेरे प्रति प्यार मोहब्बत देख कर मुझे रोना आने ही वाला था की...परवर दिगार ने मुझे रोने नही दिया...!!

फिर मैंने पूछा या मेरे मोला... आपने उन 160 बच्चे को क्यों नही बचाया... उन्हें क्यों जहन्नुम भेज दिया...?

अब मेरे मालिक ने जो कहा वो सुनकर मेरा सारा गम छू मनतर हो गया....!

मेरे मालिक ने कहा... गीता पढ़िए पंडित जी सब समझ आ जायेगा....!

मैंने कहा या रब.... मैं तो गीता पढ़ा हूँ...!

फिर अल रहीम ने मेरे ऊपर अपना जमजम का पानी छिड़का और दिखाया की गीता मे क्या लिखा है...!!

जो आता है वो अल्लाह के मर्जी से और जो जाता है वो भी अल्लाह के मर्जी से....!

एक पत्ता भी बिना अल्लाह के मर्जी से नही हिलता...!!

अब ज़ब से सोकर उठा हूँ... बिस्मिल्लाह ओ रहीम करके खाये जा रहा हूँ... बस खाये जा रहा हूँ...!

सच ही कहा है किसी ने की अल्लाह मेहरबान तो गधा पहलवान.....!!

या अल्लाह... मेरे मालिक इसी तरह खाना पीना खिलाते रहना... बाकि सब तो आप करवा रहे है... ठीक ही कर रहे है....!!

भला आपसे कोइ गलती थोड़े न हो सकता है...!!

🖐️🖐️ आमीन...

゚viralfollowersシ゚

शादी में बिन बुलाए मेहमान और गजब हास्टल के लड़के...! लड़का ने कहा कि "Excuse mam" तब लड़की कहतीं हैं कि "हूं" इसके बाद ल...
04/03/2026

शादी में बिन बुलाए मेहमान और गजब हास्टल के लड़के...! लड़का ने कहा कि "Excuse mam" तब लड़की कहतीं हैं कि "हूं" इसके बाद लड़का ने कहा कि "किसके तरफ से आप" फिर लड़की ने कहा कि "लडके की तरफ से क्या हुआ" तब लड़का कहता है कि "लड़के की तरफ से क्या नाम है लड़के का" इसके बाद लड़की कहती कि "अजय नाम है उसका क्या हुआ" तभी लड़का कहता है कि "पिता जी का क्या नाम है उसके" फिर लड़की कहती हैं कि "पिता जी राम लाल" इसके बाद लड़का ने कहा कि "अच्छा अच्छा, बारात कहां से आ रही है" इस पर लड़की कहती हैं कि "बारात बहराइच से, क्या हुआ, तुम्हें क्या हुआ, तुम क्यों पूछ रहे हो इतना" तब लड़का ने कहा कि "नहीं वो हास्टल के दूसरे लड़के खाने आ जाते हैं" इतना में लड़का अलग जाकर अपने दोस्त को call करके बोलता है आ जा जाओ सब पता कर लिया है..!! हास्टल की जिंदगी सचमुच मजेदार होती है !!!

बुद्ध अपनी मेहरिया को छोड़कर जंगल भाग गए सत्य की खोज में।और ये ससुरे बुद्ध की फ़ोटो लगाकर विवाह कर रहे हैं,  मेहरिया से। म...
04/03/2026

बुद्ध अपनी मेहरिया को छोड़कर जंगल भाग गए सत्य की खोज में।

और ये ससुरे बुद्ध की फ़ोटो लगाकर विवाह कर रहे हैं, मेहरिया से।

मुझे संशय है कि कहीं बुद्ध ने यदि हृदय से आशीर्वाद दे दिया तो?
और आशीर्वाद लग गया तो?

भंते पत्नी को छोड़कर झोला उठाकर जंगल की शरण में न भाग जाय।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बुद्ध मेहरिया खोजने की व्यवस्था भी किये थे, मुझे आज पता चला है।

😀

लखनऊ डिवीजन में लोको पायलट के रूप में कार्यरत राजेश मीना जी। पाइल्स के मरीज है। ऑपरेशन के लिए 22-28 फरवरी तक की छुट्टी इ...
04/03/2026

लखनऊ डिवीजन में लोको पायलट के रूप में कार्यरत राजेश मीना जी। पाइल्स के मरीज है। ऑपरेशन के लिए 22-28 फरवरी तक की छुट्टी इनकी सैंक्शन हुई थी। लेकिन ऑपरेशन के बाद घाव नहीं भरे थे तो इन्होंने सिक लीव बढ़ाने के लिए आवेदन दिया। जिसे संबंधित अधिकारी ने रिजेक्ट कर दिया। बोले कि इससे ज्यादा अब छुट्टी नहीं मिलेगा। डॉक्टरों ने जांच रिपोर्ट भी दी कि इनका घाव अभी भरा नहीं तो इनकी छुट्टी एक्सटेंड की जाय। लेकिन इस रिपोर्ट को भी कंसीडर नहीं किया गया।
जो चैनल है छुट्टी लेने का वो सब ट्राई कर लिए राजेश मीना जी लेकिन संबंधित अधिकारी का दिल नहीं पसीजा।
अंत में राजेश मीना जी ने अपना पैंट उतार कर अधिकारी के सामने झुक गए और घाव दिखाने लगे.. कहने लगे कि सर आपको सब कुछ झूठ लग रहा है, मैं झूठ बोल रहा हूँ, रिपोर्ट झूठ बोल रहा है तो आप साक्षात मेरे गांव के घाव देख लीजिए, मेरी गांव तो झूठ न बोलेगी सर.....!

गांव के घाव दिखाने के बाद भी अधिकारी ने लीव अप्रूव नहीं किया।
लेकिन ये गांव दिखाने की घटना कैमरे में कैद हो गई और वीडियो लोको पायलट के वाट्सएप ग्रुप में वायरल हो गया।

बाद में एक यूनियन नेता के हस्तक्षेप के बाद इन्हें छुट्टी मिली है।

भिया... लोको पायलट लोग्स का दुःख पेली बार अपुन को पता चल रिया है।

#सरकारीनौकरी

होलिका बुआ की असली कथा😂😂😂😂😂😂😂😂😂राजस्थान की लोककथाओं और कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार होलिका का विवाह इलोजी नामक राजा क...
04/03/2026

होलिका बुआ की असली कथा
😂😂😂😂😂😂😂😂😂

राजस्थान की लोककथाओं और कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार होलिका का विवाह इलोजी नामक राजा के साथ निर्धारित हुआ था । वह हिरण्यकश्यप और हिरणाक्ष नामक दो प्रतापी असुरों की बहन थी और वह विवाह से पूर्व ही वह प्रह्लाद को जलाने के चक्कर में खुद जल मरी।

लेकिन हमारे सूत्रों ने कहानी की सच्चाई जानने के लिए जब टाइम ट्रैवल किया और अतीत में गए तो कहानी कुछ और ही निकली।

यह सत्य है कि हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद श्री विष्णु हरि के अनन्य भक्त थे और उनका अधम पिता उन्हें मारना चाहता था।

लेकिन यह सत्य नहीं कि होलिका मात्र अपने भाई की आज्ञा मानने के लिए ही प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गयी।

वास्तविक कहानी यह है कि इलोजी बहुत अधिक दहेज मांग रहा था। वह चाहता था कि हिरण्यकश्यप आधा राज्य दहेज के रूप में उसे दे दे।

उसने इसका प्रस्ताव जब हिरण्यकश्यप के समक्ष रखा तो उसने मना कर दिया।

यह बात जब होलिका को पता चली तो उसने इलोजी को एक पत्र लिखा कि वह दहेज न मांगे क्योंकि हिरण्यकश्यप देर-सवेर प्रह्लाद को मार ही डालेगा, फिर उसका कोई उत्तराधिकारी नहीं बचेगा।

फिर आधा क्या पूरा राज्य ही उनका हो जायेगा। पूरी प्रोपर्टी पर कब्जा होगा। यह पत्र उसने एक मनुवादी ब्राह्मण के हाथ से भेजा। मनुवादी ब्राह्मण ने इनाम की लालच में वह पत्र हिरण्यकश्यप को दिखा दिया।

फिर हिरण्यकश्यप ने बड़ी चतुराई से होलिका को रास्ते से हटाने की सोची। उसको पता था कि वह जैसे ही होलिका के सामने प्रह्लाद को जलाने का प्रस्ताव रखेगा, प्रोपर्टी की लालची होलिका तुरन्त मान जायेगी।

फिर हिरण्यकश्यप ने बहुत चतुराई से उसकी अग्निरोधी चादर को बदल कर सेम प्रिंट की नकली चादर रखवा दिया।

उसने सोचा था कि एक साथ ही उसकी लालची बहन और शत्रु समान पुत्र दोनों निबट जायेंगे।

फिर होलिका नकली चादर ओढकर प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ गयी।

आग की नीली लपटें उठीं और प्रह्लाद तो हरि कृपा से बच गए लेकिन होलिका जल मरी।

चूँकि होलिका राजा की बहन थी इसलिए राज्य के सभी राक्षसों के बच्चे उसे बुआ ही कहते थे। वह राजबुआ थी।

वे सारे बच्चे इस प्रतीक्षा में थे कि राजबुआ का विवाह होगा, भेड़ा- बकरा दबाकर कटेगा और वे जमकर हूरेंगे। साथ ही उन्हें एक राजफूफा भी मिल जायेगा।

लेकिन ऐसा न होने से वे कुपित हो गए और इसका दोष उन्होंने उस मनुवादी ब्राह्मण पर मढ़ दिया जिसने उनके बुआ की चिट्ठी लीक की थी।

उन्होंने तत्क्षण ही उन नीली लपटों को साक्षी मानकर शपथ ली कि वे इस नीले रंग को अपना प्रतीक बनाएंगे और वे अपने बुआ की हत्या और फूफा के रनुआ रह जाने का बदला ब्राह्मणों से अवश्य लेंगे, चाहे कलयुग ही क्यों न आ जाए।

राकेश मिश्र 'सरयूपारीण'

 #खुशखबरी यूट्यूब ने अब माता-पिता को एक ऐसी शक्ति दी है जिससे वे अपने बच्चों के लिए शॉर्ट्स वीडियो को पूरी तरह नियंत्रित...
02/03/2026

#खुशखबरी
यूट्यूब ने अब माता-पिता को एक ऐसी शक्ति दी है जिससे वे अपने बच्चों के लिए शॉर्ट्स वीडियो को पूरी तरह नियंत्रित या ब्लॉक कर सकते हैं।
​अक्सर बच्चे घंटों तक endless स्क्रॉलिंग में समय व्यतीत कर देते हैं, लेकिन अब आप इसे पूरी तरह सीमित कर सकते हैं।

यह फीचर कैसे कार्य करता है?
​आप Google Family Link ऐप और अपडेटेड YouTube Family Center के माध्यम से इसे प्रबंधित कर सकते हैं।
​अभिभावक अब शॉर्ट्स के लिए daily time limit निर्धारित कर सकते हैं।
​यदि आप चाहें, तो इसे 0 मिनट पर सेट करके पूरी तरह बंद भी कर सकते हैं। 🚫

इस अपडेट की मुख्य विशेषताएँ-

​1. आप अपनी आवश्यकतानुसार समय तय कर सकते हैं, उसे बदल सकते हैं या पूरी तरह ब्लॉक कर सकते हैं।
​2. Supervised Account Control - यह फीचर बच्चों और किशोरों के अकाउंट्स पर लागू होता है, जिससे आपको यह स्पष्ट जानकारी रहेगी कि वे क्या और कितना देख रहे हैं।
3. आप सोने का समय और take a break जैसे रिमाइंडर भी लगा सकते हैं ताकि बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।

 #प्रेरणा_प्रवाह                एक सैल्यूट तो बनता है.....                 संगम नगरी प्रयागराज के शैलेंद्र सिंह गौर एक स...
01/03/2026

#प्रेरणा_प्रवाह

एक सैल्यूट तो बनता है.....

संगम नगरी प्रयागराज के शैलेंद्र सिंह गौर एक सामान्य इंसान हैं। वह बस एक सांइस ग्रेजुएट हैं। वह न तो कोई बड़े वैज्ञानिक हैं और ना उनके पास कोई बड़ी लैब ही थी। उनका सपना तो बहुत बड़ा था पर रीसर्च के द्वारा अपने उस सपने को पूरा करने के लिए उन्हें कहीं से कोई फंडिंग भी नहीं मिली......

उनका बस एक ही सपना था- अपने देश के लिए, भारत के लिए एक ऐसा इंजन बनाना जो सस्ता व टिकाऊ तो हो ही , वह इंजन प्रदूषण भी कम से कम करे।

उन्होंने 18 सालों तक दिन-रात कड़ी मेहनत की…... कई बार असफल भी हुए पर वह इस बात पर विश्वास करते थे कि What your mind conciceves , you can achieve. उन्हें विश्वास था कि अगर उनके दिमाग में यह बात आयी है तो वह ऐसा करके रहेंगे इसलिए असफलताओं से निराश होकर उन्होंने प्रयास करना कभी भी नहीं छोड़ा। दिन रात बिना रुके, बिना थके अपने काम में जुटे रहे।

दुनिया का एक दस्तूर है। वह सफलता को झुककर सलाम करती है पर असफलता पर उत्साहवर्धन के बदले ताने मारती है। ऐसे लोगों ने तो दुनिया के महानतम वैज्ञानिकों में से एक थॉमस अल्वा एडीसन( जिनके अकेले के नाम अमेरिका में 1093 पैटेंट दर्ज हैं और संयुक्त रूप में तो 2332 से अधिक पैटेंट है ) को भी उस समय ताना देना नहीं छोड़ा जब उन्हें बिजली का बल्ब बनाने के शुरुआती प्रयासों में सफलता नहीं मिल पा रही थी।

लोगों ने एडीसन से भी कहा था कि तुम ये फालतू के प्रयोग करना क्यों नहीं छोड़ देते पर एडीसन को खुद पर भरोसा था और इस भरोसे के नतीजे को पूरी दुनिया ने देखा। अपने सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने अपना पैतृक मकान तक बेच दिया पर पत्नी व बच्चों को भी उनकी काबिलियत पर पूरा भरोसा था इसलिए उन्होंने उनका भरपूर साथ दिया।

असफल होने पर शैलेंद्र जी से भी लोगों ने कहा, तुम पागल हो गये हो क्या? ऐसा इंजन बनाना मुमकिन ही नहीं। तुम फालतू में अपना समय , उर्जा व पैसे खर्च कर रहे हो लेकिन किसी ने सच ही कहा है कि अगर सफल होना है तो बहरे बन जाओ। शैलेंद्र जी भी बहरे बन गये। लोगों की आलोचनाओं की परवाह किए बिना चुपचाप अपने मिशन पर लगे रहे।

18 वर्षों की कड़ी साधना के बाद उन्होंने आखिरकार वह इंजन बना ही लिया। उनका बनाया हुआ सिक्स-स्ट्रोक इंजन 1 लीटर में 176 से 200 किलोमीटर तक चल सकता है। यह इंजन कई तरह के ईंधन पर काम करता है और सबसे बड़ी बात है कि लगभग ना के बराबर प्रदूषण करता है।

अभी इस इंजन के व्यावसायिक उत्पादन और बाजार में आने में समय लगेगा। खबरों के अनुसार उन्होंने इसे पैटेंट तो क्या लियि है पर अभी इसे सरकार के द्वारा शर्टिफिकेशन नहीं मिला है। देर सवेर यह भी उन्हें मिल ही जाएगा और फिर यह दुनिया में एक अलग क्रांति का सूत्रपात करेगी।

शैलेंद्र जी का कहना है कि मुझे सिर्फ पहचान व प्रसिद्ध ही नहीं चाहिए…मैं चाहता हूं कि मेरा देश आगे बढ़े..... पूरी दुनिया में मेरे देश का नाम हो। भारत जहां आज हर क्षेत्र में सफलता के नये कीर्तिमान गढ़ रहा है, इस इंजन के रूप में भी हमारे देश का एक कीर्तिमान बने।

--40 मार्क्स लाकर डाक्टर बनने वालों, ब्राह्मणों को युरेशिया भेजने वालों, आंखें खोलकर देख लो ब्राह्मण की क्षमताओं को। तुम उनकी सीटें व नौकरी हड़प सकते हो, काबिलियत नहीं। सवर्ण अपनी काबिलियत के दम पर दुनिया भर में हर क्षेत्र में शीर्ष पदों पर हैं किसी के रहमो-करम व अनुकंपा पर नहीं। आपका क्या विचार है??

अगर आप भी मानते हैं कि ऐसे लोगों को समर्थन मिलना चाहिए तो इस कहानी को आगे बढ़ाइए… 🇮🇳🔥

#प्रेरणादायककहानी #भारत_का_गर्व

Address

Kanpur
208001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Viral India posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share