02/06/2026
आधुनिक वैश्विक अर्थशास्त्र ने जीवन जीने की न्यूनतम लागत को इतना बढ़ा दिया है कि एक मध्यमवर्गीय या उच्च-मध्यमवर्गीय परिवार के लिए दोनों साथियों का कमाना अब महज एक शौक या व्यक्तिगत स्वतंत्रता नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आर्थिक मजबूरी बन चुका है।
दफ्तर के किसी महत्वपूर्ण मीटिंग में बैठी हुई माँ का ध्यान बार-बार इस चिंता पर जाता है कि उसके बच्चे ने समय पर दूध पिया या नहीं, या वह आया की देखरेख में सुरक्षित है या नहीं। दूसरी ओर, पिता को किसी बिजनेस डील के दौरान अचानक याद आता है कि आज उसके बेटे का स्कूल में एनुअल फंक्शन या खेल प्रतियोगिता थी, जहाँ वह अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा सका। यह अपराधबोध उनके भीतर एक स्थायी तनाव पैदा करता है।
इस आत्मग्लानि और अपराधबोध को मिटाने के लिए आधुनिक माता-पिता अक्सर एक आत्मघाती और मनोवैज्ञानिक रूप से त्रुटिपूर्ण रास्ता चुनते हैं।
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