Manoj Kumar Bhatt

Manoj Kumar Bhatt इंसान के रूप में जन्म लिया है...
मरते दम तक इंसानियत साथ रखना है...🌹🌹

"Six decades of disciplined living, guided by respect for elders, love for the young, and admiration for all of nature’s creation. I have always upheld these values, and I wish the same from everyone, so that kindness and dignity remain the path we all walk together."

आधुनिक वैश्विक अर्थशास्त्र ने जीवन जीने की न्यूनतम लागत को इतना बढ़ा दिया है कि एक मध्यमवर्गीय या उच्च-मध्यमवर्गीय परिवा...
02/06/2026

आधुनिक वैश्विक अर्थशास्त्र ने जीवन जीने की न्यूनतम लागत को इतना बढ़ा दिया है कि एक मध्यमवर्गीय या उच्च-मध्यमवर्गीय परिवार के लिए दोनों साथियों का कमाना अब महज एक शौक या व्यक्तिगत स्वतंत्रता नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आर्थिक मजबूरी बन चुका है।

दफ्तर के किसी महत्वपूर्ण मीटिंग में बैठी हुई माँ का ध्यान बार-बार इस चिंता पर जाता है कि उसके बच्चे ने समय पर दूध पिया या नहीं, या वह आया की देखरेख में सुरक्षित है या नहीं। दूसरी ओर, पिता को किसी बिजनेस डील के दौरान अचानक याद आता है कि आज उसके बेटे का स्कूल में एनुअल फंक्शन या खेल प्रतियोगिता थी, जहाँ वह अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा सका। यह अपराधबोध उनके भीतर एक स्थायी तनाव पैदा करता है।

इस आत्मग्लानि और अपराधबोध को मिटाने के लिए आधुनिक माता-पिता अक्सर एक आत्मघाती और मनोवैज्ञानिक रूप से त्रुटिपूर्ण रास्ता चुनते हैं।

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01/06/2026
बदलती दुनिया, बदलती प्राथमिकताएँ:-- संपत्ति अब गारंटी नहीं...द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ‘बेबी बूमर’ पीढ़ी ने पूरी दुनिया ...
29/05/2026

बदलती दुनिया, बदलती प्राथमिकताएँ:--

संपत्ति अब गारंटी नहीं...

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ‘बेबी बूमर’ पीढ़ी ने पूरी दुनिया में समृद्धि देखी। अमेरिका में सबर्बन घर, यूरोप में वेलफेयर स्टेट, और एशिया में हरित क्रांति ने यह विश्वास दृढ़ किया कि मेहनत से जोड़ा गया धन ही बुढ़ापे का बीमा है। 1960 से 1990 तक का दौर ऐसा था जब बच्चे माता-पिता के शहर में, कई बार उसी मोहल्ले में बसते थे। संपत्ति का बँटवारा पारिवारिक एकता का सूत्र था।

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संपत्ति विरासत में मिलती है। संस्कार विरासत में दिए जाते हैं। संपत्ति बाँटने से घटती है। प्रेम, आदर और संस्कार बाँटने से...
28/05/2026

संपत्ति विरासत में मिलती है। संस्कार विरासत में दिए जाते हैं। संपत्ति बाँटने से घटती है। प्रेम, आदर और संस्कार बाँटने से बढ़ते हैं। इसलिए दुनिया को अब चुनना होगा: क्या हम अपने बच्चों को केवल ‘विल’ देकर जाना चाहते हैं, या ‘विल टू केयर’ देकर?

क्योंकि जीवन के अंतिम पड़ाव पर जब साँसें धीमी होंगी, तो व्यक्ति ऑक्सीजन मास्क नहीं, अपनों का स्पर्श माँगेगा। और वह स्पर्श उसी को मिलेगा जिसने जीवनभर संपत्ति नहीं, संबंध कमाए होंगे।

चूंकि बुढ़ापा वैश्विक है। तो निश्चय ही समाधान भी वैश्विक होगा। पर ध्यान रहे कि शुरुआत हमेशा व्यक्तिगत होती है और वो भी आज, अभी और अपने घर से...

बुढ़ापे की वैश्विक यात्रा: संपत्ति के मोह से संस्कार की ओर.…
लेखक - मनोज कुमार भट्ट, कानपुर

एक लेख जो आपको को विचारों की दुनिया में ले जाकर सोचने के लिए बाध्य कर देगा। पढ़ने के लिए मेरे हिंदी ब्लॉग सामाजिक ताना-बाना की वेबसाइट में जाएं 👇
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