25/06/2025
#इमरजेंसी_और_भ्रांतियां
संबित पात्रा और अनेकों भाजपाई मित्र आज इमरजेंसी को ब्लैकडे के रूप में सम्बोधित करके कांग्रेस को आइना दिखाना चाह रहे है उन्हें पहले मैं आईना दिखा दूं कि इमरजेंसी की घोषणा पूर्णतया लीगल थी और गवर्नमेंट आफ द डे संवैधानिक अधिकार है और ये अधिकार बाबा साहेब और आपके पूर्वज या संस्थापक माने जो भी, श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बनाये संविधान में अनुच्छेद 352 के रूप में लिखकर दिया गया था। ये तो बात हो गयी लीगल अनलीगल की अब आते है उन हालातो पर जब इमरजेंसी लगी
71 के युद्ध के बाद पस्त इकॉनमी के दुष्प्रभावों से जनता त्रस्त थी, आकाल, इन्फ्लेशन, बांग्लादेशी शरणार्थी और तमाम संभावनाए युद्ध का बाई प्रोडक्ट होती थी उसपर इंदिरा जी की रिचर्ड निकशन से दुश्मनी मतलब की सीधे सीआईए से दुश्मनी थी, मिजो,नगा, कुकी, सिक्किम द्रविण के लोग अपने अपने क्षेत्र को स्वतंत्र कराने के चक्कर मे लगे थे, चुनाव जीतकर भी भारत के संविधान के तहत शपथ न लेने का दम्भ भर रहे थे। भारत का रेल मंत्री ललित नारायण को बम से उड़ा दिया गया था, जगह जगह पर रेल रोकी जा रही थी पटरियां उखड़ी जा रही थी, डायनामाइट बरामद हो रहे थे। सांसद घेरे जा रहे थे, देश की संसद के ऊपर गौ रक्षको को हथियार बनाकर हमला किया गया था, यह अशांति का वह दौर था जिसे भारत ने कभी नही देखा था और इन घटनाओं को मीडिया का पूरा कवरेज और समर्थन मिल रहा था।
उधर जयप्रकाश पूर्ण क्रांति कर रहे थे इंदिरा के कैबिनेट तक मे सीआईए की घुसपैठ हो चुकी थी इन आंदोलनों को सीआईए पूरी तरह से बैकअप दे रही थी इंदिरा की कैबिनेट में कौन सीआईए एजेंट था उसकी तमाम डिटेल अमेरिकन डिक्लाइसफाइड डाकुमेंट में उपलब्ध है वैसे गूगल भी डिटेल दे देगा , जब गूगल पर जाय तो एक बार निशान-ए-पाकिस्तान की लिस्ट में कौन भारतीय का नाम है ये भी खंगाल ले, उधर कांग्रेस के भीतर भी मौके का फायदा उठाने के लिए धूर्तो की जीभ लपलपा रही थी, जनसंघ अलग खिचड़ी पका रहा था।
जयप्रकाश ने इंदिरा जी को कोर्ट में उलझा दिया था कोर्ट ने उनका निर्वाचन खारिज कर दिया था, आप यदि पढ़े लिखे हो तो जरा अंदाजा लगाओ की क्या कोई ज्यूडिशिरी किसी दल को ये आदेश दे सकती है कि आप अपना नया नेता चुने 15 दिन के अंदर, क्या ये उनके ज्यूडिशियल पावर में आता है ,नही,,, लेकिन ऐसा हुआ , कोर्ट ने आदेश दिया कि कांग्रेस पार्टी 15 दिन के अंदर इंदिरा की जगह अपना नया नेता चुने, आप अंदाजा लगा सकते है कि किस स्तर की साजिशें चल रही थी देश में। हलाकि इस निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई और इंदिरा की कुर्शी सुरक्षित थी कमसे कम 6 महीने के लिए इन 6 महीनों में अपना कार्यकाल पूरा करने के दौरान इंदिरा चुनाव में जा सकती थी क्योंकि इन 6 महिनो के बाद 4 महीनों में ही चुनाव होने थे और इंदिरा 6 महीने पहले भी चुनाव में जा सकती थी।
किन्तु उन्होंने इमरजेंसी लगाई , सीआईए के इशारों पर आंदोलन चला कर देश को अस्थिर करने वालो को उन्होंने जेलों में ठूसा, एकाएक देश मे स्थिरता एवं शांति का माहौल बन गया , लोगो ने भर भर कर माफीनामा लिखा और आगे से ऐसा न करने और स्वच्छ आचरण की कसमें खाई ,इसमे भाऊ राव देवरस भी थे, 19 महीनों बाद इंदिरा ने इमरजेंसी हटाई , आम चुनाव कराए चुनाव में हारने के बाद सत्ता सौप कर निकल पड़ी जनता के बीच इमरजेंसी के सच्चाई बताने और उसी जनता ने सच्चाई जानने के उपरांत 3 साल बाद ही इंदिरा को प्रचंड बहुमत के साथ उसी सत्ता पर आसीन किया ।
अब जिन भक्तगणों को ये पोस्ट हजम न हो वह एक एक लाइन को चेक कर गूगल करे और यहां बहस करने की बजाय आत्ममंथन करे कि इमरजेंसी देश की जरूरत थी या काला दिन थी
Cpd पोस्ट