14/08/2026
बंदर और बिच्छू की कहानी
कल्पना कीजिए कि आपके भीतर एक बंदर बैठा है। बंदर का स्वभाव क्या होता है? चंचल होना, बिना वजह यहाँ-वहाँ छलांग लगाना और कभी एक जगह टिक कर न बैठना।
अब सोचिए, उस बंदर को शराब पिला दी जाए! वह और भी ज्यादा अनियंत्रित और बौखला जाएगा।
फिर मान लीजिए कि उस शराबी बंदर को किसी बिच्छू ने डंक मार दिया! अब उसकी छटपटाहट और बेचैनी की कोई सीमा नहीं रहेगी।
और अंत में, मान लीजिए कि उस बंदर के ऊपर कोई भूत सवार हो जाए! अब आप सोच सकते हैं कि उस बंदर की क्या हालत होगी?
इस कहानी का गहरा अर्थ
यह बंदर कोई और नहीं, बल्कि हमारा अपना मन (Mind) है:
1. बंदर: आपका मन स्वभाव से ही चंचल है।
2. शराब: उस पर अहंकार (Ego) का नशा चढ़ा हुआ है।
3. बिच्छू का डंक: जीवन में जब कोई इच्छा (Desire) जागती है, तो वह बिच्छू के डंक की तरह मन को डसती है और बेचैन कर देती है।
4. भूत: और इस सब के ऊपर अज्ञानता (Ignorance) या अतीत की यादों का भूत सवार है।
मुख्य संदेश:-
मन कोई दुश्मन नहीं है: मन अपने आप में बुरा नहीं है। दिक्कत तब होती है जब हम यह भूल जाते हैं कि मन हमारा एक हिस्सा है, हम खुद मन नहीं हैं |