05/04/2026
पूरन भगत (पूरनमल) पंजाब के सियालकोट के राजा सालवान के पुत्र थे, जिनकी कहानी त्याग और योग की मिसाल है। सौतेली माँ लूना के झूठे इल्जाम के बाद, राजा ने उनके हाथ-पैर कटवाकर कुएं में फेंक दिया था। गुरु गोरखनाथ ने उन्हें बचाया और बाद में वे एक महान योगी बने, जिन्हें 'बाबा सहज नाथ जी' के रूप में भी पूजा जाता है।
पूरन भगत की पौराणिक कहानी:
जन्म और बचपन: राजा सालवान और रानी इच्छरा के घर जन्मे पूरन को ज्योतिषियों की सलाह पर 12 वर्षों के लिए महल से दूर रखा गया था, ताकि वे राजा का चेहरा न देख सकें।
सौतेली माँ का प्रसंग: जब पूरन वापस आए, तब तक राजा ने लूना नाम की एक युवा महिला से विवाह कर लिया था। लूना की उम्र पूरन के बराबर थी, और उसने पूरन के प्रति आकर्षण दिखाया। पूरन ने इसे अपनी सौतेली माँ होने के नाते अस्वीकार कर दिया।
कुएं में निर्वासन: अपमानित लूना ने राजा से शिकायत की कि पूरन ने उसके साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की। क्रोधित होकर, राजा ने पूरन के हाथ-पैर काटकर उन्हें जंगल के एक कुएँ में फेंकने का आदेश दिया।
योगी बनना: गुरु गोरखनाथ अपने शिष्यों के साथ वहां से गुजरे और उन्होंने पूरन को कुएं से निकाला। अपनी दिव्य शक्ति से उन्होंने पूरन को ठीक किया और अपना शिष्य बना लिया।
बाबा सहज नाथ: तपस्या के बाद पूरन एक महान योगी बने। वे वर्तमान में भी 'बाबा सहज नाथ जी' के रूप में पूजे जाते हैं, विशेषकर जंडियाल (महाजन) बिरादरी द्वारा, जो जम्मू और पंजाब में उनके मंदिर (जैसे हीरानगर के पास जंडी) में पूजा करते हैं।