05/08/2026
*जय माता दी 🙏*
ये 9 देवियां "नौ शक्तिपीठ और सिद्धपीठ" कहलाती हैं।
# # # *नौ देवियों की कथा
1. वैष्णो देवी - जम्मू*
*कथा*: त्रेता युग में माता वैष्णवी ने भक्तों की रक्षा के लिए पर्वत में गुफा बनाकर तपस्या की। राक्षस भैरवनाथ ने माता को परेशान किया। माता ने उसे मारा और कहा "कलियुग में जो भक्त पहले मेरे दर्शन फिर तेरे दर्शन करेगा उसी की मनोकामना पूरी होगी"।
*विशेषता*: यहां माता की 3 पिंडियां - महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती
2. चामुण्डा देवी - हिमाचल, कांगड़ा*
*कथा*: जब राक्षस चंड-मुंड ने माता का अपमान किया तो माता ने काली रूप धारण करके दोनों को मार दिया। इसलिए माता "चामुण्डा" कहलाईं।
*विशेषता*: यहां बाणगंगा नदी के किनारे मंदिर है। शिव और शक्ति साथ विराजमान हैं।
3. वज्रेश्वरी देवी - कांगड़ा, हिमाचल*
*कथा*: सती के शरीर का "बायां पैर का अंगूठा" यहां गिरा था। पांडवों ने अज्ञातवास में इस मंदिर की स्थापना की।
4. ज्वाला देवी - कांगड़ा, हिमाचल*
*कथा*: सती की "जीभ" यहां गिरी थी। बिना तेल-बाती के धरती से 9 ज्योतियां निकलती हैं। अकबर ने भी ज्योत बुझाने की कोशिश की पर नहीं बुझी।
*विशेषता*: यहां कोई मूर्ति नहीं, सिर्फ ज्योति की पूजा होती है।
5. माता शाकम्भरी देवी - सहारनपुर, UP*
*कथा*: एक बार धरती पर 100 साल का अकाल पड़ा। तब माता ने शाक, फल, सब्जी के रूप में यहां प्रकट होकर सबको भोजन दिया। इसलिए "शाकम्भरी" नाम पड़ा।
*विशेषता*: शिवालिक की घाटी में 108 सिद्धपीठों में से एक। यहां माता 4 रूपों में हैं।
6. नैना देवी - बिलासपुर, हिमाचल*
*कथा*: सती की "आंखें" यहां गिरी थीं। इसलिए "नैना" देवी। एक बार एक ग्वाले को दूध की धार अपने आप गिरती दिखी, खोदने पर पिंडी मिली।
*विशेषता*: पहाड़ की चोटी पर मंदिर। श्रावण अष्टमी का मेला बहुत प्रसिद्ध।
7. मनसा देवी - पंचकुला, हरियाणा*
*कथा*: माता मनसा ऋषि कश्यप की मानस पुत्री हैं। जो भी सच्चे मन से मन्नत मांगता है माता पूरी करती हैं। इसलिए "मनसा" यानी मन की इच्छा पूरी करने वाली।
8. कालिका देवी - कालका, हरियाणा*
*कथा*: महाभारत काल में पांडवों ने इस मंदिर की स्थापना की। माता काली ने राक्षसों का संहार करके यहां विश्राम किया।
*विशेषता*: नवरात्रि में लाखों भक्त आते हैं। माता को हलवे का भोग प्रिय है।
9. चिंतपूर्णी देवी - उना, हिमाचल*
*कथा*: